नवीकरणीय ऊर्जा एवं हरित तकनीक (Renewable Energy and Green Technology, AENGG-311) B.Sc. (Hons.) Agriculture का 2 क्रेडिट (1+1) का कोर्स है, जिसमें 10 थ्योरी टॉपिक और कुल 16 लेक्चर हैं। डीज़ल, बिजली और LPG महँगे होते जा रहे हैं और राजस्थान जैसे राज्य में धूप, हवा और बायोमास भरपूर हैं। इसलिए यह विषय सीधे किसान की जेब और खेत से जुड़ा है। यह लेख "तकनीक कार्ड" के रूप में लिखा गया है: हर तकनीक का एक छोटा कार्ड (क्या है, क्या डालें, क्या मिले, राजस्थान में कितनी उपयोगी, सीमा) और उसके साथ हल सहित गणना। सभी संख्यात्मक उदाहरण और कीमतें अभ्यास के लिए काल्पनिक हैं।
एक नज़र में: 10 टॉपिक, 10 तकनीकें
टॉपिक 1: ऊर्जा स्रोतों का वर्गीकरण और कृषि में योगदान
| आधार | वर्ग | उदाहरण |
|---|---|---|
| नवीकरणीय या नहीं | अनवीकरणीय (समाप्य) बनाम नवीकरणीय (असमाप्य) | कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम बनाम सौर, पवन, बायोमास, जल, भू-तापीय, ज्वारीय |
| व्यावसायिक या नहीं | वाणिज्यिक बनाम गैर-वाणिज्यिक | कोयला, बिजली, पेट्रोल बनाम जलाऊ लकड़ी, उपले, फसल अवशेष |
| प्राथमिक या द्वितीयक | प्रकृति से सीधे मिले बनाम रूपांतरित | सूर्य का प्रकाश, कोयला (प्राथमिक); बिजली, बायोगैस, बायोडीज़ल (द्वितीयक) |
| पारंपरिक या नहीं | पारंपरिक बनाम गैर-पारंपरिक | कोयला, बड़ी जल-बिजली बनाम सौर, पवन, बायोगैस |
क्या: भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता का लक्ष्य रखा है (नवीनतम स्थिति MNRE से देखें)।
कृषि में उपयोग: सौर पंप (PM-KUSUM योजना), गोबर-गैस और जैव-ऊर्जा (गोबर-धन, बायो-CNG), इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम, सौर ड्रायर, सौर बाड़ और छत पर सौर (PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना)।
राजस्थान में: देश में सबसे अधिक सौर विकिरण वाले क्षेत्रों में (लगभग 6 से 7 kWh/m²/दिन)। भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर) विश्व के सबसे बड़े सौर पार्कों में गिना जाता है; जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर में पवन ऊर्जा भी विकसित है।
टॉपिक 2: बायोमास का जैव-ईंधन में उपयोग (2 लेक्चर)
बायोमास पौधों और जंतुओं से मिला कार्बनिक पदार्थ है: फसल अवशेष (गेहूँ का भूसा, सरसों के डंठल, कपास की लकड़ी, बाजरे की कड़बी, धान की भूसी), गोबर, वन अवशेष, ऊर्जा फसलें (गन्ना, जेट्रोफा) और नगरपालिका कचरा। रूपांतरण के रास्ते:
| रास्ता | प्रक्रिया और उत्पाद |
|---|---|
| ऊष्मा-रासायनिक | दहन, गैसीफिकेशन, पायरोलिसिस (बायो-ऑयल, चारकोल), ब्रिकेटिंग |
| जैव-रासायनिक | अवायवीय पाचन (बायोगैस) और किण्वन (इथेनॉल) |
| रासायनिक | ट्रांसएस्टरीफिकेशन (बायोडीज़ल) |
जैव-ईंधन की पीढ़ियाँ
- पहली पीढ़ी: खाद्य फसलों से, जैसे गन्ने के रस या शीरे और अनाज से इथेनॉल, वनस्पति तेल से बायोडीज़ल।
- दूसरी पीढ़ी: गैर-खाद्य लिग्नोसेल्युलोसिक पदार्थ (पुआल, भूसा) से इथेनॉल।
- तीसरी पीढ़ी: शैवाल (Algae) से।
क्या डालें: शीरा, गन्ने का रस, अनाज (मक्का, टूटा चावल), या सेल्युलोसिक अवशेष।
प्रक्रिया: खमीर (Saccharomyces cerevisiae) द्वारा किण्वन: C6H12O6 → 2C2H5OH + 2CO2। सैद्धांतिक रूप से 1 किग्रा ग्लूकोज़ से लगभग 0.51 किग्रा इथेनॉल बनता है।
सुधार: आसवन से लगभग 95% तक सांद्र और निर्जलीकरण से 99% से अधिक शुद्ध (निर्जल) इथेनॉल, जिसे पेट्रोल में मिलाते हैं (E10, E20)।
सीमा: खाद्य बनाम ईंधन की बहस और पानी की अधिक खपत।
क्या डालें: वनस्पति तेल या पशु वसा (रतनजोत या जेट्रोफा, करंज, महुआ, नीम, सोयाबीन, पाम और इस्तेमाल किया हुआ खाना पकाने का तेल)।
प्रक्रिया: ट्राइग्लिसराइड + मेथेनॉल (उत्प्रेरक NaOH या KOH की उपस्थिति में) → मिथाइल एस्टर (बायोडीज़ल) + ग्लिसरॉल। लगभग 100 किग्रा तेल में 10 से 15 किग्रा मेथेनॉल लगता है और लगभग 100 किग्रा बायोडीज़ल और 10 किग्रा ग्लिसरॉल मिलता है। अधिक मुक्त वसा अम्ल (FFA) हो तो पहले अम्ल से पूर्व-उपचार करते हैं।
उपयोग: डीज़ल के साथ B5 या B20 जैसे मिश्रण में ट्रैक्टर और पंपसेट में। लाभ: जैव-अपघटनीय, सल्फर रहित और कम धुआँ।
टॉपिक 3 और 4: बायोगैस संयंत्र, उत्पादन और उपयोग (2 + 2 लेक्चर)
क्या डालें: गोबर (गाय-भैंस) और पानी का घोल, साथ ही कृषि अपशिष्ट, मुर्गी की बीट और सब्जी का कचरा।
क्या मिले: बायोगैस (मीथेन लगभग 55 से 65%, CO2 35 से 45%, थोड़ा H2S) और पाचित घोल (Slurry) जो उत्तम जैविक खाद है।
ऊष्मीय मान: लगभग 20 से 25 MJ/m³ (करीब 5000 kcal/m³)।
राजस्थान में: पशुधन की अधिकता से अवसर बड़ा, पर सर्दी में तापमान कम होने से उत्पादन घटता है और पानी की कमी चुनौती है।
उत्पादन की क्रिया (अवायवीय पाचन)
ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जीवाणु जैविक पदार्थ को चार चरणों में तोड़ते हैं: जल-अपघटन (Hydrolysis) → अम्ल-निर्माण (Acidogenesis) → एसिटिक अम्ल निर्माण (Acetogenesis) → मीथेन निर्माण (Methanogenesis)। अंतिम चरण मीथेन बनाने वाले जीवाणु (Methanogens) करते हैं, जो संवेदनशील होते हैं।
उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारक
| कारक | अनुकूल सीमा |
|---|---|
| तापमान | मीसोफिलिक 30 से 40°C (लगभग 35°C इष्टतम); 20°C से कम पर उत्पादन बहुत घटता है |
| pH | लगभग 6.8 से 7.5 |
| C:N अनुपात | लगभग 25 से 30 : 1 |
| कुल ठोस | लगभग 7 से 9% (गोबर : पानी = 1 : 1) |
| धारण काल (HRT) | लगभग 30 से 55 दिन (ठंडी जगह में अधिक) |
| अन्य | ऑक्सीजन और विषैले पदार्थ (साबुन, एंटीबायोटिक, कीटनाशी) का अभाव; नियमित भराव |
बायोगैस संयंत्र के प्रकार
| प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| तैरते ढोल वाला (Floating drum, KVIC) | इस्पात का गैस होल्डर घोल पर तैरता है और गैस जमा होने पर ऊपर उठता है; गैस का दाब स्थिर, पर ढोल में जंग और अधिक लागत |
| स्थिर गुंबद वाला (Fixed dome: चीनी मॉडल, जनता मॉडल) | ईंट-सीमेंट का बंद गुंबद; कोई चलता हुआ भाग नहीं, लंबी आयु; गैस के साथ घोल विस्थापित होता है, इसलिए दाब बदलता है |
| दीनबंधु मॉडल | कम लागत वाला अर्धगोलाकार स्थिर गुंबद मॉडल (1980 के दशक में विकसित), ग्रामीण परिवारों में प्रचलित |
| बैग या गुब्बारा प्रकार | PVC या रबर का थैला; पोर्टेबल और सस्ता, पर कम आयु |
अन्य: सामुदायिक और संस्थागत संयंत्र, बैच या सतत भराव वाले, और व्यावसायिक बायो-CNG संयंत्र।
संयंत्र का आकार = 2 m³ प्रति दिन (1.5 m³ से ऊपर का निकटतम मानक आकार)
गोबर = 2 × 25 = 50 किग्रा/दिन (औसतन 10 किग्रा प्रति पशु के हिसाब से लगभग 5 पशु)
पानी = 50 लीटर (1 : 1), यानी कुल घोल = 100 लीटर = 0.1 m³/दिन
डाइजेस्टर आयतन = 0.1 × 40 दिन (HRT) = 4 m³
बायोगैस के उपयोग
- खाना पकाना (मुख्य उपयोग) और रोशनी (मेंटल लैंप, लगभग 0.07 से 0.14 m³ प्रति घंटा)।
- इंजन: द्वि-ईंधन (Dual fuel) डीज़ल इंजन में डीज़ल की लगभग 70 से 80% तक की बचत; गैस से बिजली उत्पादन (लगभग 1 m³ से 1.2 से 1.5 kWh)।
- पानी गरम करना, इन्क्यूबेटर और रेफ्रिजरेशन।
- शोधन: CO2 और H2S हटाकर संपीड़ित बायोगैस (CBG या बायो-CNG)।
- तुल्यांक: 1 m³ बायोगैस लगभग 0.43 किग्रा LPG, 0.62 लीटर केरोसिन, 0.52 लीटर डीज़ल, 3.5 किग्रा जलाऊ लकड़ी या 12.3 किग्रा उपलों के बराबर।
- घोल (Slurry): गंधहीन, खरपतवार के बीज रहित और N-P-K से भरपूर खाद; सीधे खेत में या सुखाकर।
टॉपिक 5: बायोमास गैसीफिकेशन और गैसीफायर (2 लेक्चर)
क्या डालें: सूखा बायोमास (लकड़ी के टुकड़े, नारियल का खोल, सरसों-कपास के डंठल, विलायती बबूल, ब्रिकेट) जिसमें नमी लगभग 20% से कम हो।
प्रक्रिया: सीमित हवा में लगभग 800 से 1100°C पर आंशिक दहन।
क्या मिले: उत्पादक गैस (Producer gas): CO लगभग 18 से 22%, H2 15 से 20%, CH4 1 से 3%, CO2 8 से 12% और शेष नाइट्रोजन। ऊष्मीय मान कम (लगभग 4 से 6 MJ/Nm³)।
उपयोग: सीधे ऊष्मा (बॉयलर, ड्रायर) और इंजन से बिजली या पंप चलाना।
गैसीफायर के क्षेत्र (डाउनड्राफ्ट में)
| क्षेत्र | अनुमानित तापमान | क्या होता है |
|---|---|---|
| सुखाने का क्षेत्र | 100 से 200°C | नमी निकलती है |
| पायरोलिसिस | 200 से 500°C | वाष्पशील पदार्थ और टार निकलते हैं, चारकोल बनता है |
| ऑक्सीकरण (दहन) | 1000 से 1200°C | C + O2 → CO2 (ऊष्मा उत्पन्न) |
| अपचयन (Reduction) | 700 से 900°C | C + CO2 → 2CO और C + H2O → CO + H2 |
गैसीफायर के प्रकार
| प्रकार | हवा और गैस की दिशा | विशेषता |
|---|---|---|
| अपड्राफ्ट (Updraft) | हवा नीचे से, गैस ऊपर से | अधिक नमी सह लेता है, पर टार अधिक; सीधे ऊष्मा के काम के लिए |
| डाउनड्राफ्ट (Downdraft) | हवा और ईंधन एक ही दिशा में (नीचे) | टार कम, इसलिए इंजन के लिए उपयुक्त; सूखा और एकसमान ईंधन चाहिए |
| क्रॉसड्राफ्ट | हवा एक तरफ से, गैस दूसरी तरफ से | कोयले के लिए, जल्दी चालू होता है |
| द्रवीकृत शय्या (Fluidized bed) | हवा से कण तैरते हैं | बड़े स्तर और विभिन्न ईंधन; जटिल |
इंजन में प्रयोग से पहले गैस को साफ और ठंडा करना जरूरी है: साइक्लोन, स्क्रबर और फिल्टर। लगभग 1 किग्रा बायोमास से 2 से 2.5 Nm³ उत्पादक गैस मिलती है।
बायोमास = 10 × 1.4 = 14 किग्रा/घंटा
गैस की मात्रा = 14 × 2.2 ≈ 31 Nm³/घंटा
8 घंटे चलाने पर लगभग 112 किग्रा सूखा बायोमास।
टॉपिक 6: ब्रिकेटिंग और ब्रिकेटिंग मशीनें (1 लेक्चर)
क्या: ढीले, कम घनत्व वाले बायोमास अवशेषों को दबाव से ठोस ब्लॉक या छड़ों में बदलना।
क्या डालें: सरसों के डंठल, भूसा, मूँगफली के छिलके, बाजरा की कड़बी, लकड़ी का बुरादा, विलायती बबूल और कपास की लकड़ी (पहले छोटे टुकड़े करके 8 से 12% नमी तक सुखाना)।
क्या मिले: ब्रिकेट, जिनका घनत्व लगभग 50 से 150 किग्रा/m³ से बढ़कर लगभग 800 से 1200 किग्रा/m³ हो जाता है; ऊष्मीय मान लगभग 14 से 19 MJ/किग्रा।
फायदे: ढोने और रखने में आसान, एकसमान जलना, कम धुआँ और राख, और पराली या अवशेष जलाने से प्रदूषण में कमी।
उपयोग: घरेलू चूल्हे, भट्ठे, बॉयलर और उद्योग; थर्मल बिजली संयंत्रों में कोयले के साथ पेलेट मिलाने की नीति भी है (वर्तमान शर्तें जाँचें)।
| मशीन | कार्यप्रणाली |
|---|---|
| स्क्रू प्रेस (Extruder) | घूमते स्क्रू से बायोमास गर्म डाई में धकेला जाता है; छेद वाला (खोखला) और बाहर से कार्बनीकृत ब्रिकेट बनता है; सतत प्रक्रिया |
| पिस्टन प्रेस (Ram / Punch) | यांत्रिक या हाइड्रोलिक पिस्टन से झटके में दबाव; ठोस ब्रिकेट, कम ऊर्जा लेकिन रुक-रुककर काम |
| रोलर प्रेस और पेलेट मिल | रोलर और छिद्रित डाई से छोटे पेलेट (लगभग 6 से 12 मिमी); बड़े स्तर पर |
यदि ऊष्मीय मान 16 MJ/किग्रा हो, तो 1 टन ब्रिकेट से 16,000 MJ ऊष्मा मिलती है (LPG का मान लगभग 46 MJ/किग्रा लें तो करीब 350 किग्रा LPG के बराबर)।
टॉपिक 7: सौर ऊर्जा और सौर संग्राहक (2 लेक्चर)
क्या: सूर्य से आने वाली ऊर्जा; पृथ्वी के बाहर सौर स्थिरांक लगभग 1367 W/m²। भारत में औसत लगभग 4 से 7 kWh/m²/दिन और साल में लगभग 300 दिन साफ धूप।
घटक: प्रत्यक्ष (Beam), विसरित (Diffuse) और कुल (Global)।
मापन: पाइरेनोमीटर (कुल विकिरण), पाइरहेलियोमीटर (प्रत्यक्ष विकिरण) और सनशाइन रिकॉर्डर (धूप के घंटे)।
सौर संग्राहक (Solar collectors)
| प्रकार | विवरण और तापमान |
|---|---|
| समतल प्लेट संग्राहक (FPC) | भाग: काली अवशोषक प्लेट (चयनात्मक कोटिंग), नलियाँ, काँच का आवरण, ऊष्मारोधी परत और बक्सा। सीधी और विसरित दोनों धूप लेता है; लगभग 60 से 90°C तक। ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण काँच ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देता |
| निर्वात नली संग्राहक (ETC) | बोरोसिलिकेट काँच की निर्वात नलियाँ; ठंडे और बादल वाले मौसम में भी बेहतर, ऊष्मा हानि कम |
| सांद्रक संग्राहक (Concentrating) | परवलयिक ट्रफ, डिश (जैसे शेफलर डिश), फ्रेनेल, केंद्रीय टावर; सूर्य की ओर घूमने (Tracking) की जरूरत; 100 से 400°C या अधिक। भाप बनाने, बड़ी रसोई और बिजली में प्रयोग |
माउंट आबू के पास आबू रोड (राजस्थान) में एक बड़ी सौर रसोई सांद्रक डिश से हजारों लोगों का भोजन पकाने के लिए प्रसिद्ध है।
उदाहरण 4: FR(τα) = 0.75, FRUL = 5 W/m²K, Ti − Ta = 30 K और I = 800 W/m² हो, तो
η = 0.75 − 5 × 30 ÷ 800 = 0.75 − 0.1875 = 0.5625 (56.25%)
2 m² संग्राहक से उपयोगी ऊष्मा = 0.5625 × 800 × 2 = 900 W
टॉपिक 8: सौर तापीय यंत्र (2 लेक्चर)
बक्सा प्रकार: ऊष्मारोधी बक्सा, काली अवशोषक ट्रे, दोहरा काँच का ढक्कन और समतल परावर्तक दर्पण। भीतर तापमान लगभग 100 से 140°C; भोजन पकने में लगभग 2 से 4 घंटे। BIS परीक्षण में मेरिट फिगर्स F1 और F2 से गुणवत्ता जाँची जाती है।
अन्य: डिश कुकर (उच्च तापमान, तेज), सामुदायिक सौर रसोई।
फायदे: ईंधन की बचत, कोई धुआँ नहीं। सीमा: केवल धूप में, बाहर पकाना और धीमी गति।
भाग: संग्राहक (FPC या ETC), ऊष्मारोधी गर्म पानी की टंकी, ठंडे पानी की टंकी और पाइप। प्रकार: थर्मोसाइफन (प्राकृतिक परिसंचरण, पंप नहीं) और बलपूर्वक परिसंचरण।
उपयोग: दुग्धशाला की सफाई, छात्रावास, घर। सामान्य नियम: 100 लीटर प्रतिदिन (LPD) के लिए लगभग 2 m² संग्राहक।
क्यों: खुले में सुखाने (Open sun drying) में धूल, बारिश, पक्षी और कीटों से नुकसान और गुणवत्ता कम होती है। सौर ड्रायर में ढका हुआ, स्वच्छ और तेज़ सुखाई।
प्रकार: कैबिनेट (प्राकृतिक संवहन), बलपूर्वक संवहन (पंखा सहित), टनल और हाइब्रिड।
फसलें: मिर्च, मेथी, धनिया, अंगूर, प्याज़ के फ्लेक्स, टमाटर और मसाले।
100 किग्रा ताज़ी मिर्च 80% नमी से 10% नमी तक सुखानी हो, तो Wf = 100 × 20 ÷ 90 = 22.2 किग्रा; निकालना पड़ेगा पानी = 100 − 22.2 = 77.8 किग्रा।
क्या डालें: खारा या कठोर पानी (राजस्थान के खारे भूजल क्षेत्रों में उपयोगी)।
प्रक्रिया: काली बेसिन में पानी धूप से वाष्पित होता है और ढलान वाले काँच के आवरण पर संघनित होकर नाली में इकट्ठा होता है। लवण और अशुद्धियाँ बेसिन में रह जाती हैं।
उत्पादन: एकल-ढलान बेसिन प्रकार से सामान्यतः लगभग 3 से 5 लीटर/m²/दिन।
टॉपिक 9: सौर फोटोवोल्टिक तकनीक और उपयोग (1 लेक्चर)
सिद्धांत: p-n जंक्शन वाले अर्धचालक पर प्रकाश पड़ने से सीधे डायरेक्ट करंट (DC) बिजली बनती है (फोटोवोल्टिक प्रभाव)। एक सिलिकॉन सेल लगभग 0.5 से 0.6 V देता है।
प्रकार: मोनोक्रिस्टलाइन सिलिकॉन (लगभग 18 से 22% दक्षता), पॉलीक्रिस्टलाइन (लगभग 15 से 18%) और पतली फिल्म (CdTe, CIGS)।
क्षमता: Wp (वाट पीक) में, मानक परिस्थिति (STC) पर: 1000 W/m², 25°C और AM 1.5।
| घटक | कार्य |
|---|---|
| PV मॉड्यूल और ऐरे | बिजली उत्पादन |
| चार्ज कंट्रोलर (PWM या MPPT) | बैटरी की सुरक्षा और अधिकतम शक्ति निकालना |
| बैटरी (लेड-एसिड या लिथियम) | रात और बादल के समय के लिए संचय (ऑफ-ग्रिड) |
| इन्वर्टर | DC से AC में बदलना |
| माउंटिंग ढाँचा और तार | सही कोण पर लगाना और जोड़ना |
प्रणालियाँ: ऑफ-ग्रिड (अलग), ग्रिड-जुड़ी (Net metering सहित) और हाइब्रिड।
कृषि में उपयोग (प्रैक्टिकल से जुड़ा)
- सौर रोशनी: स्ट्रीट लाइट, घर की रोशनी, लालटेन, दुग्धशाला और भंडार में।
- सौर पंपिंग: DC या AC सबमर्सिबल या सतही पंप सीधे PV ऐरे से (अक्सर बैटरी के बिना, पानी टंकी में जमा करके)। PM-KUSUM योजना के अंतर्गत सहायता।
- सौर बाड़ (Solar fencing): सौर ऊर्जा से बैटरी चार्ज होती है और एनर्जाइज़र से बाड़ के तार में हल्के उच्च वोल्टेज के पल्स (झटके) दिए जाते हैं, जो नीलगाय और जंगली पशुओं को डराकर दूर रखते हैं, पर घातक नहीं होते।
- सौर ड्रायर के पंखे, कोल्ड स्टोरेज और छत पर सौर बिजली।
बहाव = 60 ÷ 8 = 7.5 m³/घंटा; हाइड्रोलिक शक्ति = Q × H ÷ 367 = 7.5 × 30 ÷ 367 = 0.61 kW
पंप-मोटर-नियंत्रक की कुल दक्षता 40% हो, तो विद्युत इनपुट = 0.61 ÷ 0.40 = 1.53 kW
ऐरे की हानियाँ 25% (उपयोगी हिस्सा 0.75) मानें: ऐरे = 1.53 ÷ 0.75 = 2.04 kWp, यानी 335 Wp के लगभग 7 मॉड्यूल (≈ 2.3 kWp)।
उदाहरण 9 (ऊर्जा उत्पादन): E = A × H × η × PR। 10 m² क्षेत्र, H = 6 kWh/m²/दिन, η = 18% और प्रदर्शन अनुपात PR = 0.75 हो, तो E = 10 × 6 × 0.18 × 0.75 = 8.1 kWh/दिन।
टॉपिक 10: पवन ऊर्जा और इसका उपयोग (1 लेक्चर)
क्या: हवा की गतिज ऊर्जा से टर्बाइन घुमाकर बिजली या यांत्रिक शक्ति (पवन-चक्की से पानी पंप करना)।
राजस्थान में: जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर क्षेत्र में पवन ऊर्जा का विकास; पश्चिमी क्षेत्र में हवा की गति अधिक रहती है।
सीमा: हवा रुक-रुककर चलती है, स्थान-विशेष (सही हवा की गति और ऊँचाई चाहिए), शोर और पक्षियों पर असर।
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| क्षैतिज धुरी (HAWT) | रोटर हवा के सामने; 2 या 3 ब्लेड; अधिक दक्षता, बड़े टर्बाइन में प्रचलित |
| ऊर्ध्वाधर धुरी (VAWT) | सैवोनियस (अवरोध-बल आधारित, धीमी गति पर शुरू) और डैरियस (उत्थान-बल आधारित); हवा की दिशा की परवाह नहीं |
मुख्य भाग: रोटर ब्लेड और हब, नेसेल (गियर बॉक्स और जनरेटर), मीनार, यॉ तंत्र (हवा की ओर घुमाना) और नियंत्रक। मापन: कप एनिमोमीटर (गति) और वेन (दिशा)। टर्बाइन की कट-इन गति लगभग 3 से 4 m/s, रेटेड गति लगभग 12 से 15 m/s और कट-आउट गति लगभग 25 m/s होती है।
उदाहरण 10: रोटर का व्यास 2 मी (A = 3.14 m²), v = 6 m/s और Cp = 0.35 हो, तो
हवा में कुल शक्ति = 0.5 × 1.2 × 3.14 × 6³ = 407 W; प्राप्त शक्ति = 407 × 0.35 = 142 W।
ध्यान दें: शक्ति v³ पर निर्भर है, यानी हवा की गति दुगुनी होने पर शक्ति 8 गुना हो जाती है।
कौन सी तकनीक कब? (किसान की निर्णय तालिका)
| जरूरत | उपयुक्त तकनीक |
|---|---|
| रसोई का ईंधन (पशु उपलब्ध) | बायोगैस; धूप वाली जगह पर सौर कुकर साथ में |
| सिंचाई का पंप | सौर पंप (डीज़ल की जगह) |
| फसल अवशेष की समस्या | ब्रिकेटिंग या गैसीफायर |
| फल, मसाले और सब्जी सुखाना | सौर ड्रायर |
| खारा पीने का पानी | सौर आसवन |
| खेत की सुरक्षा (पशुओं से) | सौर बाड़ |
| डेयरी में गरम पानी | सौर जल तापक |
| तेज और स्थिर हवा वाला क्षेत्र | पवन चक्की या पवन-सौर हाइब्रिड |
प्रैक्टिकल की झलक (1 क्रेडिट)
- नवीकरणीय ऊर्जा यंत्रों से परिचय; बायोगैस संयंत्र, गैसीफायर और ब्रिकेटिंग मशीन का अध्ययन।
- विभिन्न सौर यंत्र: सौर कुकर, सौर ड्रायर और सौर आसवन प्रणाली।
- सौर फोटोवोल्टिक प्रणाली: सौर रोशनी, सौर पंपिंग और सौर बाड़।
खुद जाँचिए (उत्तर देखने के लिए क्लिक करें)
1. बायोगैस में मीथेन का सामान्य प्रतिशत?
लगभग 55 से 65%।2. तैरते ढोल और स्थिर गुंबद संयंत्र में मुख्य अंतर?
तैरते ढोल में गैस का दाब स्थिर रहता है; स्थिर गुंबद में दाब बदलता है और कोई चलता हुआ भाग नहीं होता।3. इंजन के लिए कौन सा गैसीफायर उपयुक्त है और क्यों?
डाउनड्राफ्ट, क्योंकि उसमें टार कम बनता है।4. ब्रिकेटिंग से घनत्व में क्या परिवर्तन होता है?
लगभग 50 से 150 किग्रा/m³ से बढ़कर लगभग 800 से 1200 किग्रा/m³ तक।5. बायोडीज़ल किस प्रक्रिया से बनता है?
ट्रांसएस्टरीफिकेशन: तेल + मेथेनॉल (उत्प्रेरक सहित) से मिथाइल एस्टर और ग्लिसरॉल।6. पवन की शक्ति v पर कैसे निर्भर है?
v³ पर; गति दुगुनी होने पर शक्ति 8 गुना।अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: AENGG-311 कितने क्रेडिट का है?
उत्तर: 2 क्रेडिट (1+1), जिसमें 10 थ्योरी टॉपिक और कुल 16 लेक्चर हैं।
प्रश्न: राजस्थान के लिए सबसे उपयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा कौन सी है?
उत्तर: सौर ऊर्जा, क्योंकि यहाँ विकिरण बहुत अधिक है; साथ ही पवन और पशुधन के कारण बायोगैस और अवशेषों से ब्रिकेट व गैसीफिकेशन भी उपयोगी हैं।
प्रश्न: सौर पंप के लिए बैटरी जरूरी है?
उत्तर: नहीं, अधिकतर सौर पंप सीधे PV ऐरे से चलते हैं और पानी टंकी में जमा किया जाता है।
प्रश्न: ब्रिकेट और पेलेट में क्या अंतर है?
उत्तर: ब्रिकेट बड़े आकार (लगभग 30 से 90 मिमी व्यास) के होते हैं, जबकि पेलेट छोटे (लगभग 6 से 12 मिमी) और अधिक एकसमान होते हैं।
प्रश्न: बायोगैस की पाचित घोल का क्या उपयोग है?
उत्तर: यह N, P, K से भरपूर उत्तम जैविक खाद है और सीधे खेत में या सुखाकर दी जाती है।
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संदर्भ पुस्तकें
जी.डी. राय, Non-Conventional Energy Sources, Khanna Publishers; एस.पी. सुखात्मे, Solar Energy, McGraw-Hill; डफी एवं बेकमैन, Solar Engineering of Thermal Processes; खंडेलवाल एवं माहदी, Biogas Technology, Tata McGraw-Hill; MNRE और ICAR-CIAE भोपाल के प्रकाशन।
लेखक की टिप्पणी: इस लेख के सभी संख्यात्मक उदाहरण, कीमतें और दरें अभ्यास के लिए काल्पनिक हैं। संयंत्र के आकार, गैस की पैदावार, सौर यंत्र के गुणांक और योजनाओं की वर्तमान शर्तें (PM-KUSUM, PM सूर्य घर, इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य, स्थापित क्षमता के आँकड़े) समय के साथ बदलते हैं, इसलिए प्रकाशित करने से पहले नवीनतम MNRE या सरकारी स्रोत से जाँच लें।
