सब्ज़ी एवं मसाला उत्पादन तकनीक (Production Technology for Vegetables and Spices) बागवानी (Horticulture) का वह कोर्स है जिसमें सब्ज़ियों और मसालों का महत्व, वर्गीकरण, बागवानी के प्रकार और प्रमुख फसलों की पूरी खेती सिखाई जाती है। सिलेबस में 16 टॉपिक हैं और हर टॉपिक पर 1 लेक्चर, यानी कुल 16 थ्योरी लेक्चर। टॉपिक 1 से 3 बुनियादी बातें हैं और टॉपिक 4 से 16 में फसलों की खेती आती है। हर फसल में सिलेबस के अनुसार ये बिंदु पढ़ने होते हैं: उत्पत्ति, क्षेत्र, जलवायु, मिट्टी, उन्नत किस्में, बुवाई/रोपाई का समय और विधि, दूरी, खाद, सिंचाई, खरपतवार, कटाई और उपज, कार्यिकी विकार।
पूरी तस्वीर एक नज़र में
सब्ज़ी की खेती का हर निर्णय इसी शृंखला से निकलता है। आगे हर फसल पर यही क्रम दोहराया गया है।
भाग 1: बुनियाद (टॉपिक 1, 2, 3)
सब्ज़ियों और मसालों का महत्व (टॉपिक 1)
- पोषण: सब्ज़ियाँ विटामिन (A, C, फोलिक अम्ल), खनिज (कैल्शियम, लोहा, पोटैशियम), रेशे और एंटीऑक्सीडेंट देती हैं, इसलिए इन्हें "सुरक्षात्मक भोजन (Protective food)" कहते हैं। ICMR के संतुलित आहार में वयस्क के लिए प्रतिदिन लगभग 300 ग्राम सब्ज़ियाँ (पत्तेदार, जड़ वाली और अन्य) सुझाई जाती हैं।
- अर्थव्यवस्था: प्रति इकाई क्षेत्र और समय में अनाज से अधिक आय, छोटे किसानों के लिए रोज़गार, निर्यात और प्रसंस्करण (सॉस, पाउडर, अचार, सूखे मसाले) में अवसर। भारत सब्ज़ी उत्पादन में चीन के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर है, और मसालों के उत्पादन, उपभोग और निर्यात में अग्रणी देश है। (प्रकाशित करने से पहले ताज़ा आँकड़े सरकारी रिपोर्ट से जाँच लें)
- मसाले: स्वाद, रंग, सुगंध, परिरक्षण (Preservation) और औषधीय गुण देते हैं। भारत को "मसालों की भूमि" कहा जाता है।
| सब्ज़ी | खास पोषक तत्व |
|---|---|
| गाजर, पालक, चौलाई, सहजन के पत्ते | बीटा-कैरोटीन (विटामिन A) |
| मिर्च, शिमला मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी | विटामिन C |
| पालक, चौलाई, बीटरूट | लोहा (साथ में ऑक्सैलेट भी) |
| टमाटर (लाल) | लाइकोपीन (एंटीऑक्सीडेंट) और विटामिन C |
| मटर, फ्रेंच बीन | प्रोटीन |
| शकरकंद (नारंगी गूदे वाली) | बीटा-कैरोटीन और ऊर्जा |
सब्ज़ियों का वर्गीकरण (टॉपिक 2)
| आधार | प्रकार और उदाहरण |
|---|---|
| वानस्पतिक (कुल / Family) | सोलेनेसी: टमाटर, बैंगन, मिर्च, शिमला मिर्च, आलू। कुकुरबिटेसी: खीरा, खरबूजा, तरबूज, लौकी, करेला, तोरई, कद्दू। क्रुसीफेरी (ब्रैसिकेसी): पत्तागोभी, फूलगोभी, गाँठगोभी, मूली। लेग्यूमिनेसी: मटर, फ्रेंच बीन, मेथी। मालवेसी: भिंडी। एलियेसी: प्याज, लहसुन। एपिएसी (अम्बेलीफेरी): गाजर, धनिया, जीरा, सौंफ। अमरेंथेसी: चौलाई, पालक, बीटरूट। कॉन्वॉल्वुलेसी: शकरकंद। ज़िंजिबेरेसी: अदरक, हल्दी, इलायची। पाइपरेसी: काली मिर्च |
| काम में आने वाला भाग | जड़ (गाजर, मूली, बीटरूट), कंद (आलू, शकरकंद), प्रकंद (अदरक, हल्दी), कंद-बल्ब (प्याज, लहसुन), तना (गाँठगोभी), पत्ती (पालक, चौलाई, पत्तागोभी), फूल (फूलगोभी), फल (टमाटर, बैंगन, लौकी), फली और बीज (मटर, भिंडी) |
| मौसम / तापमान | गर्म मौसम की सब्ज़ियाँ (Warm season): टमाटर, बैंगन, मिर्च, भिंडी, कद्दूवर्गीय। ठंडे मौसम की (Cool season): गोभी वर्ग, मटर, गाजर, मूली, पालक, प्याज, आलू |
| जीवन-चक्र | एकवर्षीय: टमाटर, भिंडी। द्विवर्षीय: गाजर, पत्तागोभी, प्याज (बीज दूसरे वर्ष में)। बहुवर्षीय: सहजन, परवल, अदरक, हल्दी |
| बुवाई का मौसम (भारत) | खरीफ (जून-जुलाई), रबी (अक्टूबर-नवंबर), जायद (फरवरी-मार्च) |
सब्ज़ी बागवानी के प्रकार और रसोई बगीचा (टॉपिक 3)
| प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| रसोई बगीचा (Kitchen garden / पोषण बाड़ी) | घर के पास, परिवार की ज़रूरत के लिए ताज़ी सब्ज़ी; रसोई का इस्तेमाल हुआ पानी और घरेलू जैविक कचरे का उपयोग |
| बाज़ार बगीचा (Market gardening) | शहर के पास, स्थानीय बाज़ार के लिए व्यावसायिक खेती |
| ट्रक गार्डनिंग (Truck gardening) | दूर के बाज़ार में ट्रक से भेजने के लिए बड़े स्तर पर |
| सब्ज़ी जबरन उत्पादन (Forcing) | बेमौसम में सब्ज़ी लेना (संरक्षित संरचना में) |
| तैरता बगीचा (Floating garden) | झील या जल पर बने बेड (कश्मीर की डल झील) |
| छत, गमला और ऊर्ध्वाधर बगीचा, हाइड्रोपोनिक्स | कम जगह वाले शहरी क्षेत्रों में |
रसोई बगीचे की योजना
- स्थान: घर के पास, खुला और धूपदार (प्रतिदिन कम से कम 6 से 8 घंटे धूप), पानी की सुविधा और पशुओं से बचाव के लिए बाड़।
- 5 सदस्यों के परिवार के लिए सामान्यतः लगभग 200 से 250 वर्ग मीटर क्षेत्र पर्याप्त माना जाता है।
- बहुवर्षीय पौधे (सहजन, पपीता, करी पत्ता) किनारे पर, जिससे जुताई में बाधा न हो और छाया दूसरे पौधों पर न पड़े; छोटे बेड में पत्तेदार और जड़ वाली सब्ज़ियाँ; बेल वाली सब्ज़ियाँ बाड़ या मचान पर।
- बगीचे को खंडों में बाँटकर साल भर फसल चक्र अपनाना, ताकि मिट्टी की उर्वरता और कीट-रोग संतुलित रहें।
5 सदस्यों का परिवार, प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 300 ग्राम सब्ज़ी: सालाना ज़रूरत = 5 × 0.3 किग्रा × 365 = 547.5 किग्रा।
यदि बगीचे से औसतन 2.5 किग्रा/वर्ग मीटर/वर्ष सब्ज़ी मिलती है: क्षेत्र = 547.5 ÷ 2.5 = लगभग 219 वर्ग मीटर।
यानी 200 से 250 वर्ग मीटर का आँकड़ा इसी गणना से मेल खाता है।
भाग 2: सोलेनेसी की सब्ज़ियाँ (टॉपिक 4 और 5)
| फसल | उत्पत्ति, जलवायु, मिट्टी | किस्में | बुवाई और दूरी | खाद (N : P : K, किग्रा/हे.) | उपज और कार्यिकी विकार |
|---|---|---|---|---|---|
| टमाटर (Solanum lycopersicum) | पेरू-इक्वाडोर (दक्षिण अमेरिका)। गर्म मौसम, 21 से 24°C उत्तम; 15°C से कम या 32°C से अधिक तापमान पर फल कम बैठते हैं। दोमट मिट्टी, pH 6 से 7 | पूसा रूबी, पूसा अर्ली ड्वार्फ, पूसा शीतल, अर्का विकास, अर्का सौरभ; संकर: अर्का रक्षक, पूसा हाइब्रिड-2 | नर्सरी से 4 से 5 सप्ताह की पौध रोपना। बीज: सामान्य किस्म 400 से 500 ग्राम/हे., संकर 150 से 200 ग्राम/हे.। दूरी लगभग 60 × 45 सेमी (बेल वाली किस्मों में अधिक)। सहारा देना लाभदायक | लगभग 100 से 120 : 60 : 60 + गोबर खाद 20 से 25 टन/हे. | सामान्य किस्में लगभग 250 से 300 क्विंटल/हे., संकर इससे अधिक। विकार: ब्लॉसम एंड रॉट (कैल्शियम की कमी और अनियमित सिंचाई), फल फटना, सनस्काल्ड, पुष्प-फल झड़ना, कैट-फेसिंग, धब्बेदार पकना |
| बैंगन (Solanum melongena) | भारत। गर्म मौसम, 21 से 27°C; पाले के प्रति संवेदनशील। दोमट, अच्छे जल निकास वाली | पूसा पर्पल लॉन्ग, पूसा पर्पल क्लस्टर, पूसा क्रांति, पूसा हाइब्रिड-6, अर्का शिरीष | बुवाई: जून-जुलाई, अक्टूबर-नवंबर, फरवरी-मार्च। बीज 400 से 500 ग्राम/हे.। दूरी लगभग 60 × 60 सेमी (गोल फलों में 75 × 60) | लगभग 100 : 50 : 50 + गोबर खाद | लगभग 300 से 400 क्विंटल/हे.। फल एवं तना छेदक मुख्य कीट; छोटी पत्ती रोग (फाइटोप्लाज्मा) मुख्य रोग |
| मिर्च (Capsicum annuum) | मध्य और दक्षिण अमेरिका। 20 से 25°C; अधिक वर्षा और अधिक ताप दोनों से फूल झड़ना। दोमट | पूसा ज्वाला, पूसा सदाबहार, पंत सी-1, एन.पी.-46 ए, अर्का लोहित | नर्सरी से पौध। बीज लगभग 1 से 1.25 किग्रा/हे.। दूरी 60 × 45 सेमी या 45 × 45 सेमी | लगभग 120 : 60 : 60 | हरी मिर्च लगभग 100 से 150 क्विंटल/हे., सूखी लगभग 20 से 25 क्विंटल/हे.। विकार: पुष्प-फल झड़ना (अधिक ताप, जल तनाव), ब्लॉसम एंड रॉट |
| शिमला मिर्च (C. annuum var. grossum) | अमेरिका। ठंडी और मध्यम जलवायु, 20 से 25°C, पहाड़ी इलाकों और संरक्षित खेती में सफल। दोमट | कैलिफोर्निया वंडर, योलो वंडर, अर्का मोहिनी, अर्का गौरव, इंद्रा | नर्सरी से पौध। बीज लगभग 750 ग्राम से 1 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 60 × 45 सेमी | लगभग 120 : 60 : 60 | खुले खेत में लगभग 100 से 150 क्विंटल/हे., पॉलीहाउस में कई गुना अधिक। विकार: सनस्काल्ड, ब्लॉसम एंड रॉट, पुष्प झड़ना |
- सिंचाई: रोपाई के तुरंत बाद, फिर गर्मी में 5 से 7 दिन, सर्दी में 10 से 15 दिन पर; टपक सिंचाई और मल्चिंग से जल बचत और अधिक उपज।
- खरपतवार: रोपाई के 20 से 30 दिन में निराई-गुड़ाई, मिट्टी चढ़ाना, मल्च और सिफारिशी शाकनाशी।
- कटाई: टमाटर में दूर के बाज़ार के लिए ब्रेकर (गुलाबी) अवस्था पर, पास के लिए पूरा लाल; मिर्च हरी या पकी अवस्था में आवश्यकता अनुसार।
टमाटर की दूरी 60 × 45 सेमी हो तो पौधों की संख्या = 10,000 वर्ग मीटर ÷ (0.60 × 0.45) = 10,000 ÷ 0.27 = लगभग 37,037 पौधे प्रति हेक्टेयर।
यदि 120 किग्रा नाइट्रोजन देनी है तो यूरिया (46% N) = 120 ÷ 0.46 = लगभग 261 किग्रा। 60 किग्रा P2O5 के लिए SSP (16%) = 60 ÷ 0.16 = 375 किग्रा और 60 किग्रा K2O के लिए MOP (60%) = 60 ÷ 0.60 = 100 किग्रा।
सामान्यतः नाइट्रोजन 2 से 3 हिस्सों में दी जाती है, जबकि P और K आमतौर पर बेसल खुराक में।
भाग 3: कद्दूवर्गीय सब्ज़ियाँ (टॉपिक 6)
| फसल | उत्पत्ति और जलवायु | किस्में | बुवाई, बीज दर और दूरी | उपज और खास बिंदु |
|---|---|---|---|---|
| खीरा (Cucumis sativus) | भारत। गर्म मौसम, 18 से 24°C; पाले से हानि | जापानी लॉन्ग ग्रीन, पोइनसेट, पूसा संयोग | फरवरी-मार्च और जून-जुलाई। बीज लगभग 2.5 से 3.5 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 1.5 मी. × 60 सेमी | लगभग 100 से 150 क्विंटल/हे.। विकार: कड़वापन (कुकुरबिटासिन, जल तनाव और ताप से), टेढ़े फल |
| खरबूजा (Cucumis melo) | अफ्रीका। गर्म और शुष्क मौसम, 24 से 30°C; नदी तल की रेतीली मिट्टी | पूसा मधुरस, पूसा शरबती, हरा मधु, अर्का जीत, दुर्गापुरा मधु (राजस्थान) | जनवरी से मार्च (उत्तर भारत में नदी तल में दिसंबर-जनवरी)। बीज लगभग 2.5 से 3.5 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 1.5 से 2 मी. × 60 से 90 सेमी | लगभग 150 से 200 क्विंटल/हे.। कटाई "फुल स्लिप" अवस्था, यानी डंठल से फल अपने आप अलग होने लगे। विकार: फल फटना, कम मिठास |
| तरबूज (Citrullus lanatus) | अफ्रीका। गर्म और शुष्क मौसम, रेतीली मिट्टी | शुगर बेबी, असाही यामातो, अर्का मानिक, अर्का ज्योति | फरवरी-मार्च। बीज लगभग 3 से 4 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 2.5 से 3 मी. × 60 से 90 सेमी | लगभग 300 से 500 क्विंटल/हे.। पकने के संकेत: थपथपाने पर धीमी भारी आवाज़, फल के पास का प्रतान सूखना, भूमि से लगा हिस्सा पीला पड़ना |
| लौकी (Lagenaria siceraria) | अफ्रीका। गर्म-आर्द्र मौसम, सब मौसम में | पूसा समर प्रोलिफिक लॉन्ग, पूसा नवीन, पूसा संतुष्टि | फरवरी-मार्च, जून-जुलाई। बीज लगभग 4 से 6 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 2.5 मी. × 1 मी. | लगभग 200 से 300 क्विंटल/हे.। मचान पर लगाने से फल सीधे और बेहतर |
| करेला (Momordica charantia) | भारत (इंडो-बर्मा क्षेत्र)। गर्म और आर्द्र | पूसा दो मौसमी, पूसा विशेष, अर्का हरित | जून-जुलाई और फरवरी-मार्च। बीज लगभग 5 से 6 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 1.5 से 2 मी. × 50 से 60 सेमी | लगभग 100 से 150 क्विंटल/हे.। कोमल अवस्था पर कटाई |
| तोरई (Luffa spp.) | भारत। गर्म और आर्द्र | पूसा नसदार, पूसा चिकनी (चिकनी तोरई), पूसा स्नेहा | फरवरी-मार्च, जून-जुलाई। दूरी लगभग 2 से 2.5 मी. × 50 से 60 सेमी | सब्ज़ी के लिए कोमल फल; पकने पर रेशे का उपयोग (लूफा) |
| कद्दू (Cucurbita moschata) | मध्य अमेरिका। गर्म और मध्यम आर्द्र | पूसा विश्वास, पूसा विकास, अर्का सूर्यमुखी, अर्का चंदन | फरवरी-मार्च, जून-जुलाई। बीज लगभग 3 से 4 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 2.5 मी. × 60 से 90 सेमी | लगभग 200 से 300 क्विंटल/हे.। परिपक्व फल का भंडारण लंबे समय तक संभव |
- खाद (सामान्यतः): गोबर खाद 15 से 20 टन/हे.; N : P : K लगभग 60 से 80 : 40 से 60 : 40 से 60 किग्रा/हे.। नाइट्रोजन का आधा आधार में और शेष बेल बढ़ने पर।
- लिंग अभिव्यक्ति (Sex expression): अधिकांश कद्दूवर्गीय एकलिंगाश्रयी (Monoecious) होते हैं। मादा फूलों की संख्या बढ़ाने के लिए 2 और 4 पत्ती अवस्था पर एथ्रेल (लगभग 100 से 250 पीपीएम) का छिड़काव किया जाता है, जबकि जिबरेलिन नर फूल बढ़ाता है।
- सिंचाई और खरपतवार: ग्रीष्म में 4 से 6 दिन के अंतर पर सिंचाई, थाला/नाली विधि; शुरू के 30 दिनों में निराई-गुड़ाई और मल्च।
भाग 4: दलहनी सब्ज़ियाँ और भिंडी (टॉपिक 7)
| फसल | उत्पत्ति और जलवायु | किस्में | बुवाई, बीज दर और दूरी | उपज और खास बिंदु |
|---|---|---|---|---|
| फ्रेंच बीन (Phaseolus vulgaris) | मध्य और दक्षिण अमेरिका। ठंडी-हल्की जलवायु, 15 से 25°C; पाले के प्रति संवेदनशील | कंटेंडर, पूसा पार्वती, अर्का कोमल, पंत अनुपमा; बेल वाली: पूसा हिमलता | जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर। झाड़ीदार किस्म में बीज लगभग 70 से 80 किग्रा/हे., दूरी लगभग 30 से 45 × 10 सेमी | हरी फली लगभग 80 से 120 क्विंटल/हे.। दलहनी होने से नाइट्रोजन कम (लगभग 20 से 30), फॉस्फोरस अधिक |
| मटर (Pisum sativum) | भूमध्यसागरीय क्षेत्र। ठंडी जलवायु, 10 से 18°C; फली बनते समय पाले से हानि | अर्केल (अगेती), बोनविले, आज़ाद मटर-1, पूसा प्रगति | अक्टूबर-नवंबर। बीज लगभग 80 से 100 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 30 × 5 से 10 सेमी | हरी फली लगभग 80 से 120 क्विंटल/हे.। बीज को राइज़ोबियम से उपचारित करना लाभदायक। सफेद चूर्ण रोग से बचाव ज़रूरी |
| भिंडी (Abelmoschus esculentus) | अफ्रीका। गर्म, 25 से 35°C; पाले और ठंड के प्रति संवेदनशील | पूसा ए-4, पूसा सावनी, परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, अर्का अभय | फरवरी-मार्च (ग्रीष्म) और जून-जुलाई (खरीफ)। बीज: ग्रीष्म में लगभग 20 किग्रा/हे., खरीफ में लगभग 8 से 12 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 45 से 60 × 30 सेमी। बीज रात भर भिगोकर बोना | लगभग 100 से 125 क्विंटल/हे., कोमल फली फूल खिलने के 4 से 6 दिन बाद। मुख्य रोग: पीला शिरा मोज़ेक (इसलिए प्रतिरोधी किस्में चुनें)। खाद लगभग 100 : 50 : 50 |
भाग 5: गोभी वर्ग और बल्ब फसलें (टॉपिक 8 और 9)
| फसल | उत्पत्ति और जलवायु | किस्में | बुवाई, बीज और दूरी | खाद और उपज | कार्यिकी विकार |
|---|---|---|---|---|---|
| पत्तागोभी (Brassica oleracea var. capitata) | भूमध्यसागर और पश्चिमी यूरोप। ठंडी, 15 से 20°C | गोल्डन एकर, प्राइड ऑफ इंडिया, पूसा मुक्ता (अगेती); पूसा ड्रमहेड (पिछेती) | नर्सरी से 4 से 5 सप्ताह की पौध। बीज लगभग 500 से 600 ग्राम/हे.। दूरी अगेती 45 × 30 सेमी, पिछेती 60 × 45 सेमी | लगभग 100 से 120 : 60 : 60 + गोबर खाद। उपज लगभग 200 से 400 क्विंटल/हे. | टिप बर्न (कैल्शियम की कमी), गोभी फटना, बोल्टिंग |
| फूलगोभी (var. botrytis) | भूमध्यसागर। किस्म-वार तापमान की माँग भिन्न: अगेती किस्में गर्म सहनशील, पिछेती (स्नोबॉल) ठंडी जलवायु में | अगेती: पूसा दीपाली, पूसा कातिकी; मध्य/पिछेती: पूसा शुभ्रा, पूसा स्नोबॉल के-1 | नर्सरी से पौध। बीज लगभग 400 से 500 ग्राम/हे.। दूरी लगभग 45 × 45 सेमी (पिछेती 60 × 45) | लगभग 120 : 60 : 60। उपज लगभग 200 से 300 क्विंटल/हे. | बटनिंग (छोटे समय पूर्व कर्ड, नाइट्रोजन की कमी या पुरानी पौध), राइसीनेस (ढीला मखमली कर्ड, अधिक ताप), ब्लाइंडनेस (शीर्ष कलिका न बनना), भूरापन (बोरॉन की कमी), व्हिपटेल (मोलिब्डेनम की कमी) |
| गाँठगोभी (var. gongylodes) | यूरोप। ठंडी। फूला हुआ तना खाया जाता है | व्हाइट वियना, पर्पल वियना | नर्सरी से पौध। बीज लगभग 1 से 1.5 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 30 × 20 से 30 सेमी | लगभग 100 : 60 : 60। उपज लगभग 200 से 250 क्विंटल/हे.। कटाई तब जब गाँठ कोमल हो (लगभग 55 से 60 दिन) | देर से कटाई पर गाँठ रेशेदार और कठोर (Woodiness) |
| प्याज (Allium cepa) | मध्य एशिया। वानस्पतिक वृद्धि में ठंडी, कंद बनने और पकने में शुष्क और गर्म। दिन की लंबाई (Photoperiod) पर निर्भर: भारत की किस्में अधिकतर अल्प से मध्यम दिन वाली | पूसा रेड, पूसा रिद्धि, पूसा माधवी, एग्रीफाउंड डार्क रेड, एन-53 (खरीफ) | नर्सरी में 6 से 8 सप्ताह की पौध। बीज लगभग 8 से 10 किग्रा/हे. (नर्सरी)। दूरी लगभग 15 × 10 सेमी | लगभग 100 : 50 : 50 + सल्फर। उपज लगभग 250 से 300 क्विंटल/हे.। कटाई जब 50 से 75% गर्दन गिर जाए, फिर 7 से 10 दिन क्योरिंग | बोल्टिंग, दोहरे कंद (Doubles), अंकुरण और सड़न, कंद फटना |
| लहसुन (Allium sativum) | मध्य एशिया। ठंडी जलवायु; कंद बनने में शुष्क मौसम | यमुना सफेद (जी-1), यमुना सफेद-2 (जी-50), एग्रीफाउंड व्हाइट, एग्रीफाउंड पार्वती, गोदावरी | कलियों (Cloves) से बुवाई, अक्टूबर-नवंबर। कलियाँ लगभग 500 से 700 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 15 × 7.5 से 10 सेमी | लगभग 100 : 50 : 50। उपज लगभग 100 से 150 क्विंटल/हे.। कटाई लगभग 4 से 5 महीने में जब पत्तियाँ पीली पड़ें | बोल्टिंग, फूटना (Splitting), अंकुरण |
- सिंचाई: गोभी वर्ग में हल्की और नियमित, कर्ड बनने के समय नमी की कमी न हो; प्याज-लहसुन में कंद बनने के समय नमी ज़रूरी, पकने से 10 से 15 दिन पहले सिंचाई बंद।
- खरपतवार: प्याज-लहसुन में प्रारंभिक 45 से 60 दिन में 2 से 3 निराई; गोभी में निराई के साथ मिट्टी चढ़ाना।
भाग 6: जड़ और कंद वाली फसलें (टॉपिक 10 और 11)
| फसल | उत्पत्ति और जलवायु | किस्में | बुवाई, बीज और दूरी | उपज और कार्यिकी विकार |
|---|---|---|---|---|
| गाजर (Daucus carota) | एशिया माइनर और अफगानिस्तान क्षेत्र। दो प्रकार: एशियाई / उष्णकटिबंधीय (लाल, गर्म सहनशील) और यूरोपीय / शीतोष्ण (नारंगी, ठंडी जलवायु)। गहरी, भुरभुरी, पथरीलापन-मुक्त मिट्टी | एशियाई: पूसा केसर, पूसा रुधिरा; यूरोपीय: नैन्टीस, पूसा यमदग्नि, पूसा नयनज्योति | अगस्त से अक्टूबर (एशियाई), अक्टूबर-नवंबर (यूरोपीय)। बीज लगभग 5 से 6 किग्रा/हे.। पंक्ति 30 से 45 सेमी, थिनिंग से पौधों में 5 से 7.5 सेमी | लगभग 200 से 250 क्विंटल/हे.। विकार: जड़ का शाखित होना (Forking: ताज़ा गोबर या कंकड़ से), फटना, कंधे का हरा पड़ना, बोल्टिंग |
| मूली (Raphanus sativus) | भूमध्यसागर क्षेत्र और पूर्वी एशिया। कम अवधि की (25 से 60 दिन) फसल; ठंडी, पर उष्णकटिबंधीय किस्में गर्मी सह लेती हैं | पूसा चेतकी (गर्मी), पूसा हिमानी, पूसा रेशमी, जापानी व्हाइट | लगभग साल भर, किस्म अनुसार। बीज लगभग 8 से 10 किग्रा/हे.। पंक्ति 30 सेमी, पौधे 5 से 8 सेमी | लगभग 150 से 250 क्विंटल/हे.। विकार: खोखलापन (Pithiness, देर से कटाई), तीखापन (ऊँचा ताप), फटना, शाखित जड़ें |
| चुकंदर (Beta vulgaris) | भूमध्यसागरीय क्षेत्र। ठंडी, रेतीली दोमट | डेट्रॉइट डार्क रेड, क्रिमसन ग्लोब, रूबी क्वीन | अगस्त से नवंबर। बीज (गुच्छे) लगभग 7 से 8 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 30 × 10 सेमी | लगभग 200 से 250 क्विंटल/हे.। विकार: ज़ोनिंग (गोल छल्ले जैसे पट्टे), आंतरिक काला धब्बा या हार्ट रॉट (बोरॉन की कमी) |
| आलू (Solanum tuberosum) | एंडीज़ (पेरू और बोलीविया)। ठंडी जलवायु; कंद बनने के लिए रात का तापमान लगभग 15 से 20°C उत्तम। दोमट या रेतीली दोमट, अच्छा जल निकास | कुफरी ज्योति, कुफरी बहार, कुफरी पुखराज, कुफरी बादशाह, कुफरी चिपसोना-1 और 2 (चिप्स के लिए) | उत्तर भारत के मैदानों में अक्टूबर के मध्य से नवंबर तक। बीज कंद लगभग 25 से 35 क्विंटल/हे. (मध्यम आकार, कई आँखों वाले)। दूरी लगभग 60 × 20 सेमी | लगभग 250 से 300 क्विंटल/हे.। खाद लगभग 150 : 60 : 100। बुवाई के 25 से 30 दिन बाद मिट्टी चढ़ाना। विकार: हरापन (धूप से), ब्लैक हार्ट, खोखला हृदय (Hollow heart), कंद फटना |
| शकरकंद (Ipomoea batatas) | मध्य और दक्षिण अमेरिका। गर्म, 21 से 26°C; रेतीली दोमट | पूसा सुनहरी, पूसा रेड, पूसा सफेद, श्री भद्रा | बेल की कटिंग (लगभग 30 सेमी, 3 से 4 गाँठें) मेड़ों पर जून-जुलाई। दूरी लगभग 60 × 20 से 30 सेमी | लगभग 150 से 250 क्विंटल/हे.; फसल अवधि लगभग 3.5 से 4 महीने। विकार: कंद फटना (अधिक नमी के बाद) |
भाग 7: पत्तेदार और बहुवर्षीय सब्ज़ियाँ (टॉपिक 12 और 13)
| फसल | उत्पत्ति और जलवायु | किस्में | बुवाई, प्रवर्धन और दूरी | उपज और खास बिंदु |
|---|---|---|---|---|
| चौलाई (Amaranthus tricolor) | उष्णकटिबंधीय क्षेत्र। गर्म और आर्द्र, ग्रीष्म-खरीफ की फसल | पूसा किरण, पूसा कीर्ति, पूसा लाल चौलाई | बीज लगभग 2 से 3 किग्रा/हे. (छोटे दाने)। पंक्ति 20 से 30 सेमी। कई कटाई ली जा सकती हैं | लोहा, कैल्शियम और विटामिन A से भरपूर; कोमल अवस्था में कटाई |
| पालक (Spinacia oleracea) | दक्षिण-पश्चिम एशिया (ईरान क्षेत्र)। ठंडी, पाले को कुछ हद तक सहने वाली | ऑल ग्रीन, पूसा ज्योति, पूसा भारती, जोबनेर ग्रीन | सितंबर से नवंबर। बीज लगभग 25 से 30 किग्रा/हे.। पंक्ति 20 से 25 सेमी, पौधे 5 से 10 सेमी। 20 से 25 दिन में पहली कटाई, फिर कई | लगभग 100 से 150 क्विंटल/हे.। नाइट्रोजन हर कटाई के बाद देना। पुष्पन (बोल्टिंग) लंबे दिन और गर्मी में जल्दी |
| सहजन (Moringa oleifera) | भारत (हिमालय की तलहटी)। उष्णकटिबंधीय, सूखा सहनशील, बहुवर्षीय वृक्ष | पी.के.एम.-1, पी.के.एम.-2 (वार्षिक किस्में), कोंकण रुचिरा, धनराज | बीज और 1 मीटर की डालियों की कटिंग से। गड्ढा लगभग 45 × 45 × 45 सेमी। दूरी लगभग 2.5 × 2.5 मी. | फली, पत्ते और फूल तीनों खाए जाते हैं; पत्ते विटामिन और खनिज में समृद्ध। शाखा-छँटाई से अधिक उपज |
| परवल (Trichosanthes dioica) | भारत। गर्म-आर्द्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकप्रिय। दोमट मिट्टी | राजेन्द्र परवल-1, स्वर्ण अलौकिक, स्वर्ण रेखा | एकलिंगी (Dioecious) पौधा, इसलिए बेल की कटिंग या जड़ से वानस्पतिक प्रवर्धन। नर-मादा लगभग 1 : 10 अनुपात में। रोपण फरवरी-मार्च या अक्टूबर-नवंबर | बहुवर्षीय बेल; लगभग 100 से 150 क्विंटल/हे.। मचान या ज़मीन पर, 3 से 4 वर्ष चलती है |
भाग 8: मसाले (टॉपिक 14, 15, 16)
बीज वाले मसाले (टॉपिक 14)
धनिया, जीरा, मेथी और सौंफ राजस्थान और गुजरात की प्रमुख रबी मसाला फसलें हैं। सभी ठंडे और शुष्क मौसम में उगती हैं और फूल-बीज बनने के समय अधिक नमी या बादल से रोग-कीट बढ़ते हैं।
| फसल | उत्पत्ति, जलवायु | किस्में | बुवाई, बीज और दूरी | उपज और कटाई |
|---|---|---|---|---|
| धनिया (Coriandrum sativum) | भूमध्यसागरीय क्षेत्र। ठंडा, शुष्क; फूल-बीज के समय पाला हानिकारक | आर.सी.आर.-41, आर.सी.आर.-435, आर.सी.आर.-446, पंत हरितिमा, हिसार आनंद | अक्टूबर-नवंबर। बीज लगभग 10 से 15 किग्रा/हे. (वर्षा आधारित में अधिक)। पंक्ति लगभग 30 सेमी। बीज दो टुकड़ों में तोड़कर बोना | बीज लगभग 10 से 15 क्विंटल/हे.; हरी पत्ती के लिए अलग से। फल हरे-पीले से भूरे होने पर कटाई |
| जीरा (Cuminum cyminum) | पूर्वी भूमध्यसागर और मिस्र क्षेत्र। ठंडा, शुष्क, साफ आसमान; फूल के समय बादल और नमी से झुलसा। राजस्थान और गुजरात में मुख्य | आर.जेड.-19, आर.जेड.-209, आर.जेड.-223, जी.सी.-1 से 4 | नवंबर का प्रथम से दूसरा पखवाड़ा। बीज लगभग 12 से 15 किग्रा/हे.। पंक्ति लगभग 30 सेमी। क्यारियों में छिटकवाँ या पंक्ति में | लगभग 6 से 8 क्विंटल/हे.। उकठा, झुलसा और चूर्णिल आसिता प्रमुख रोग; फसल चक्र अपनाना आवश्यक |
| मेथी (Trigonella foenum-graecum) | भूमध्यसागरीय क्षेत्र। ठंडी जलवायु, दलहनी होने से नाइट्रोजन स्थिरीकरण | पूसा अर्ली बंचिंग, कसूरी मेथी, राजेन्द्र कांति, आर.एम.टी.-1, आर.एम.टी.-143, हिसार सोनाली | अक्टूबर-नवंबर। बीज लगभग 20 से 25 किग्रा/हे.। पंक्ति लगभग 20 से 30 सेमी | बीज लगभग 15 से 20 क्विंटल/हे.; पत्ती के लिए 20 से 25 दिन से कटाई, कसूरी मेथी में सूखी पत्तियाँ |
| सौंफ (Foeniculum vulgare) | भूमध्यसागरीय क्षेत्र। ठंडी और शुष्क; बीज बनने में कम आर्द्रता | गुजरात सौंफ-1 और 2, आर.एफ.-101, आर.एफ.-125, हिसार स्वरूप | अक्टूबर-नवंबर। सीधी बुवाई में बीज लगभग 8 से 10 किग्रा/हे.; नर्सरी से रोपाई में लगभग 2.5 से 3 किग्रा/हे.। दूरी लगभग 50 से 60 × 20 से 30 सेमी | लगभग 15 से 20 क्विंटल/हे.। छत्रक एक साथ नहीं पकते, इसलिए 2 से 3 बार में कटाई। चबाने वाली (लखनवी) सौंफ के लिए छत्रक हरी अवस्था में तोड़कर छाया में सुखाते हैं |
काली मिर्च और इलायची (टॉपिक 15)
| बिंदु | काली मिर्च (Piper nigrum) | इलायची (Elettaria cardamomum) |
|---|---|---|
| उपनाम | "मसालों का राजा" | "मसालों की रानी" |
| उत्पत्ति और क्षेत्र | पश्चिमी घाट (केरल, मालाबार); केरल मुख्य उत्पादक राज्य | पश्चिमी घाट; केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु |
| जलवायु | गर्म, अधिक आर्द्र; वर्षा अधिक (लगभग 2000 मिमी या उससे ऊपर); तापमान लगभग 10 से 40°C (उत्तम 23 से 28°C) | छायाप्रिय, ठंडी और आर्द्र; समुद्र तल से लगभग 600 से 1500 मी. ऊँचाई; वर्षा लगभग 1500 से 4000 मिमी |
| मिट्टी | लाल लैटेराइट, अच्छा जल निकास, pH लगभग 5 से 6.5 | जंगल की ह्यूमस-युक्त दोमट, अम्लीय (pH लगभग 5 से 6.5) |
| प्रवर्धन | बेल की कटिंग (जड़युक्त 2 से 3 गाँठ) | बीज (नर्सरी) और कंद-गुच्छ (सकर्स/राइज़ोम) |
| किस्में | पन्नियूर-1 (पहली संकर किस्म), पन्नियूर-2 से 8, करिमुंडा, सुभाकरा, श्रीकरा, पौर्णमी | मालाबार, मैसूर और वाझुक्का प्रकार |
| रोपण और दूरी | मानसून की शुरुआत में (जून)। गड्ढा लगभग 50 × 50 × 50 सेमी। बेल को जीवित या मृत सहारे (स्टैंडर्ड) जैसे एरिथ्रिना, ग्रेविलिया पर चढ़ाते हैं। दूरी लगभग 3 × 3 मी. | मानसून में रोपण, छाँव वाले पेड़ों के नीचे। दूरी लगभग 2 × 2 मी. से 2.5 × 2.5 मी. |
| खाद | प्रति बेल लगभग 10 किग्रा गोबर खाद, और वयस्क बेल को लगभग 140 : 55 : 270 ग्राम N : P : K प्रतिवर्ष | लगभग 75 : 75 : 150 किग्रा/हे. N : P : K प्रतिवर्ष |
| कटाई और उपज | नवंबर से जनवरी में जब गुच्छे में एक-दो दाने लाल/पीले हों। काली मिर्च पूरे पके हरे दानों को सुखाकर; सफेद मिर्च पके दानों को पानी में गलाकर छिलका हटाकर। उपज लगभग 1 से 2 टन सूखी/हे. | रोपण से लगभग 2 से 3 वर्ष बाद फल; कैप्सूल 25 से 30 दिन के अंतर पर चुने जाते हैं; सुखाने के बाद हरा रंग बनाए रखने पर गुणवत्ता अच्छी। उपज लगभग 150 से 300 किग्रा सूखी/हे. |
हल्दी और अदरक (टॉपिक 16)
दोनों ज़िंजिबेरेसी कुल के प्रकंद (Rhizome) वाले मसाले हैं और इनकी खेती लगभग एक जैसी है।
| बिंदु | हल्दी (Curcuma longa) | अदरक (Zingiber officinale) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया (भारत)। गर्म, आर्द्र; तापमान लगभग 20 से 30°C; वर्षा लगभग 1000 से 1500 मिमी | दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत। गर्म, आर्द्र; आंशिक छाँव में अच्छी |
| मिट्टी | जल निकास वाली, उपजाऊ दोमट, pH लगभग 5 से 7.5। जल भराव हानिकारक | जल निकास वाली, ह्यूमस-युक्त दोमट |
| किस्में | अल्लेप्पी फिंगर, लकडोंग (मेघालय, अधिक करक्यूमिन), राजेन्द्र सोनिया, रोमा, सुवर्णा, सुगंधम, प्रतिभा | मारन, रियो-डी-जेनेरो, वरदा, महिमा, रजाता, हिमाचल |
| बीज और रोपण | माँ और अंगुली प्रकंद, लगभग 20 से 25 क्विंटल/हे.। रोपण लगभग अप्रैल से जुलाई। दूरी लगभग 30 से 45 × 15 से 25 सेमी, मेड़ या क्यारी पर | प्रकंद टुकड़े (20 से 25 ग्राम, 2 से 3 आँखें), लगभग 15 से 25 क्विंटल/हे.। रोपण लगभग अप्रैल-मई। दूरी लगभग 25 से 30 × 20 से 25 सेमी |
| खाद | गोबर खाद 25 से 30 टन/हे. और लगभग 120 : 60 : 60 से 100 N : P : K | गोबर खाद 25 से 30 टन/हे. और लगभग 75 से 100 : 50 : 50 से 75 N : P : K |
| सिंचाई, मल्चिंग | वर्षा न होने पर 7 से 10 दिन पर; हरी पत्तियों से मल्च और मिट्टी चढ़ाना | हरी पत्तियों का मल्च (2 से 3 बार), जल निकास आवश्यक, मिट्टी चढ़ाना |
| कटाई और उपज | लगभग 7 से 9 महीने में जब पत्तियाँ पीली होकर सूखें। ताज़ी उपज लगभग 20 से 30 टन/हे.। संसाधन: उबालना, सुखाना, पॉलिश करना | सब्ज़ी या हरी अदरक के लिए लगभग 5 से 6 महीने, सोंठ (सूखी) के लिए लगभग 8 से 9 महीने। ताज़ी उपज लगभग 15 से 25 टन/हे.; सोंठ के लिए छीलकर सुखाने पर लगभग 20 से 25% शुष्क मात्रा |
मौसम-अनुसार बुवाई कैलेंडर (एक नज़र में)
| मौसम | सब्ज़ियाँ और मसाले |
|---|---|
| खरीफ (जून-जुलाई) | भिंडी, बैंगन, मिर्च, लौकी, करेला, तोरई, कद्दू, फ्रेंच बीन, चौलाई, शकरकंद, हल्दी और अदरक (अप्रैल-जून) |
| रबी (अक्टूबर-नवंबर) | मटर, गाजर, मूली, चुकंदर, पत्तागोभी, फूलगोभी, गाँठगोभी, प्याज, लहसुन, पालक, आलू, धनिया, जीरा, मेथी, सौंफ |
| जायद (फरवरी-मार्च) | खीरा, खरबूजा, तरबूज, लौकी, भिंडी, चौलाई, टमाटर और बैंगन (कुछ क्षेत्रों में) |
प्रैक्टिकल की झलक
सिलेबस की छवि में केवल थ्योरी दिखाई गई है। सब्ज़ी उत्पादन के प्रैक्टिकल सामान्यतः इस प्रकार के होते हैं (अपने विश्वविद्यालय की सूची से मिलान कर लें):
- सब्ज़ी फसलों की पहचान (बीज, पौध और वयस्क अवस्था) और वर्गीकरण।
- नर्सरी तैयार करना: क्यारी, बीज उपचार, बुवाई और पौध की देखभाल।
- रोपाई, दूरी की गणना, खाद की मात्रा निकालना (यूरिया, SSP, MOP में परिवर्तन)।
- रसोई बगीचे का नक्शा, मल्चिंग और टपक सिंचाई का प्रदर्शन।
- कटाई की अवस्था पहचानना, ग्रेडिंग, पैकिंग और उपज का आकलन।
- प्याज की क्योरिंग, हल्दी-अदरक का प्रसंस्करण और बीज उत्पादन की प्रक्रिया देखना।
सोचिए और हल कीजिए
प्रश्न 1: पत्तागोभी में 45 × 45 सेमी दूरी पर कितने पौधे प्रति हेक्टेयर लगेंगे? उत्तर: 10,000 ÷ (0.45 × 0.45) = 10,000 ÷ 0.2025 = लगभग 49,383
प्रश्न 2: प्याज में 100 किग्रा नाइट्रोजन के लिए यूरिया कितना चाहिए? उत्तर: 100 ÷ 0.46 = लगभग 217 किग्रा
प्रश्न 3: 400 वर्ग मीटर के रसोई बगीचे से 2.5 किग्रा/वर्ग मीटर/वर्ष की दर से कितनी सब्ज़ी मिलेगी? उत्तर: 400 × 2.5 = 1000 किग्रा
परीक्षा के लिए कैसे लिखें और याद रखें
- हर फसल के उत्तर में सिलेबस के बिंदु क्रम से लिखें: उत्पत्ति, जलवायु, मिट्टी, किस्में, बुवाई समय और दूरी, खाद, सिंचाई, खरपतवार, कटाई और उपज, विकार।
- वैज्ञानिक नाम और कुल (Family) इटैलिक में लिखें। वर्गीकरण वाले प्रश्न में कुल-अनुसार तालिका बनाएँ।
- विकारों को जोड़ी में याद करें: टमाटर और मिर्च का ब्लॉसम एंड रॉट (कैल्शियम), फूलगोभी की बटनिंग, राइसीनेस, ब्लाइंडनेस, भूरापन (बोरॉन) और व्हिपटेल (मोलिब्डेनम)।
- उत्पत्ति में समूह याद रखें: दक्षिण अमेरिका (टमाटर, मिर्च, आलू, शकरकंद, फ्रेंच बीन), भारत (बैंगन, खीरा, करेला, तोरई, परवल, हल्दी), भूमध्यसागर (पत्तागोभी, फूलगोभी, मटर, गाजर-मूली क्षेत्र, मेथी, धनिया, सौंफ), मध्य एशिया (प्याज, लहसुन)।
- उपनाम पूछे जाते हैं: काली मिर्च "मसालों का राजा", इलायची "मसालों की रानी"।
महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. टमाटर में ब्लॉसम एंड रॉट किस तत्व की कमी से होता है? (अ) बोरॉन (ब) कैल्शियम (स) जिंक (द) मोलिब्डेनम। उत्तर: ब
Q2. फूलगोभी में व्हिपटेल किस तत्व की कमी से होता है? (अ) मोलिब्डेनम (ब) लोहा (स) बोरॉन (द) कैल्शियम। उत्तर: अ
Q3. कद्दूवर्गीय में मादा फूल बढ़ाने के लिए कौन-सा रसायन प्रयुक्त होता है? (अ) एथ्रेल (ब) 2,4-D (स) सायकोसिल (द) कार्बेन्डाज़िम। उत्तर: अ
Q4. परवल का प्रवर्धन सामान्यतः किससे किया जाता है? (अ) बीज (ब) बेल की कटिंग या जड़ (स) कंद (द) कलम बाँधने से। उत्तर: ब
Q5. काली मिर्च की पहली संकर किस्म कौन-सी है? (अ) करिमुंडा (ब) पन्नियूर-1 (स) श्रीकरा (द) सुभाकरा। उत्तर: ब
Q6. गाजर की जड़ का शाखित होना क्या कहलाता है? (अ) बोल्टिंग (ब) फोर्किंग (स) बटनिंग (द) पिथिनेस। उत्तर: ब
Q7. इलायची को किस नाम से जाना जाता है? (अ) मसालों का राजा (ब) मसालों की रानी (स) काला सोना (द) सुनहरा मसाला। उत्तर: ब
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: सब्ज़ियों को "सुरक्षात्मक भोजन" क्यों कहते हैं?
उत्तर: क्योंकि ये विटामिन, खनिज और रेशा देकर शरीर को कमी-जनित रोगों से बचाते हैं।
प्रश्न: टमाटर में ब्लॉसम एंड रॉट कैसे रोकें?
उत्तर: नियमित सिंचाई करें, मिट्टी में कैल्शियम की उपलब्धता बनाए रखें और अधिक नाइट्रोजन से बचें।
प्रश्न: सब्ज़ियों की पौध नर्सरी में क्यों तैयार करते हैं?
उत्तर: बीज महँगे होते हैं, छोटे पौधों की देखभाल आसान होती है और खेत में कम समय रहने से फसल जल्दी निकलती है।
प्रश्न: प्याज की क्योरिंग क्या है?
उत्तर: कटाई के बाद कंदों को 7 से 10 दिन छाया या धूप में सुखाना ताकि बाहरी छिलका और गर्दन सूखकर भंडारण में सड़न कम हो।
प्रश्न: हल्दी और अदरक में बीज कैसा होता है?
उत्तर: दोनों प्रकंद से बोए जाते हैं, बीज से नहीं।
प्रश्न: जीरे की खेती राजस्थान में क्यों लोकप्रिय है?
उत्तर: ठंडी और शुष्क रबी जलवायु, साफ आसमान और हल्की मिट्टी जीरे के अनुकूल है, पर बादल या नमी पर रोग (उकठा, झुलसा) बढ़ते हैं, इसलिए फसल चक्र ज़रूरी है।
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आगे पढ़ने के लिए
संदर्भ पुस्तकें: Thamburaj और Singh, Textbook of Vegetables, Tuber Crops and Spices; Chadha, Handbook of Horticulture (ICAR); Bose, Kabir और Maity, Vegetable Crops; Pruthi, Spices and Condiments; ICAR के प्रकाशन, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज़ और ICAR e-course।
लेखक की टिप्पणी: यह लेख सिलेबस के आधार पर मौलिक रूप से तैयार किया गया है। गणना के उदाहरण अभ्यास हेतु हैं। बीज दर, दूरी, खाद की मात्रा, किस्मों की सूची और उपज के आँकड़े क्षेत्र और समय के अनुसार बदलते रहते हैं, इसलिए प्रकाशित करने या खेत में प्रयोग से पहले अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालय की नवीनतम सिफारिश और सरकारी आँकड़ों से जाँच लें।
