शोभाकारी फसलों, औषधीय-सुगंधित पौधों एवं भू-दृश्य निर्माण की उत्पादन तकनीक (Production Technology for Ornamental Crops, MAPs and Landscaping) में फूलों की खेती, औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती और बगीचा सजाने के सिद्धांत पढ़ाए जाते हैं। सिलेबस में 14 टॉपिक हैं और थ्योरी के कुल 16 लेक्चर निर्धारित हैं। यह लेख सिलेबस के क्रम में नहीं, बल्कि सीखने के क्रम में बँटा है: पहले परिचय और भू-दृश्य निर्माण, फिर कटे और खुले फूल, फिर औषधीय पौधे, फिर सुगंधित पौधे और अंत में प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन। हर भाग में सिलेबस के टॉपिक नंबर लिखे हैं, ताकि आप मिलान कर सकें।
पूरी तस्वीर एक नज़र में
हर फसल के उत्तर में एक ही ढाँचा रखें: जलवायु और मृदा, किस्में, प्रवर्धन, रोपण, खाद-सिंचाई, देखभाल, कटाई, उपज और कटाई-उपरांत प्रबंधन। यह ढाँचा परीक्षा में अंक दिलाता है।
भाग 1: परिचय और भू-दृश्य निर्माण (सिलेबस टॉपिक 1, 2, 3)
शोभाकारी फसलों और औषधीय-सुगंधित पौधों का महत्व और क्षेत्र (टॉपिक 1)
| वर्ग | उदाहरण |
|---|---|
| कटे फूल (Cut flowers) | गुलाब, कार्नेशन, जरबेरा, ग्लैडियोलस, रजनीगंधा, गुलदाउदी, ऑर्किड, लिलियम |
| खुले फूल (Loose flowers) | गेंदा, चमेली, मोगरा, गुलाब, रजनीगंधा, क्रॉसेन्ड्रा (मालाओं और पूजा के लिए) |
| गमले के पौधे और बाग के पौधे | पॉइन्सेटिया, कैक्टस, ऐंथूरियम, फर्न, पाम |
| सूखे फूल और हरियाली | सूखे फूलों के गुलदस्ते, पॉटपौरी, कटी हुई पत्तियाँ (Cut greens) |
| बल्ब और बीज | ग्लैडियोलस, ट्यूलिप, फूलों के बीज |
| सुगंधित और औषधीय | गुलाब से इत्र, चमेली से कंक्रीट, अश्वगंधा, इसबगोल |
- महत्व: प्रति इकाई क्षेत्र अधिक आमदनी, रोज़गार, निर्यात (कटे फूल और सुगंधित तेल), धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में माँग, पर्यावरण और सौंदर्य, तथा उद्योगों (दवा, प्रसाधन, इत्र, खाद्य) को कच्चा माल।
- क्षेत्र: फूलों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में नीदरलैंड अग्रणी है, जबकि कोलंबिया, केन्या और इक्वाडोर बड़े निर्यातक हैं। भारत में संरक्षित खेती, कोल्ड चेन और निर्यात के कारण कटे फूलों का क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है। औषधीय-सुगंधित पौधों की खेती शुष्क क्षेत्रों के लिए भी लाभकारी है।
भू-दृश्य निर्माण: महत्व, क्षेत्र और सिद्धांत (टॉपिक 2)
भू-दृश्य निर्माण (Landscaping) का अर्थ है खुली जगह को पौधों, लॉन, जलाशय, पत्थर और रास्तों से सुंदर, उपयोगी और पर्यावरण-अनुकूल बनाना। इसके लाभ: सौंदर्य, छाया और ठंडक, धूल और शोर में कमी, वायु शुद्धि, मनोरंजन और मानसिक शांति, संपत्ति का मूल्य बढ़ना और रोज़गार।
| उद्यान शैली | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| औपचारिक (Formal) | सीधी रेखाएँ, ज्यामितीय आकार, समरूपता, क्यारियाँ और जल नहरें | मुग़ल उद्यान (चारबाग शैली), जैसे शालीमार बाग |
| अनौपचारिक (Informal / Natural) | प्राकृतिक रूप में टेढ़े-मेढ़े रास्ते, असममित रचना | अंग्रेज़ी शैली के बाग |
| जापानी उद्यान | पत्थर, जल, बौने पौधे (बोन्साई), प्रतीकात्मक रचना और शांति | जापानी शैली के उद्यान |
| स्वच्छंद (Free style) | दोनों शैलियों का मिश्रण, आज के शहरी बगीचों में प्रचलित | गृह वाटिकाएँ, पार्क |
भू-दृश्य निर्माण के सिद्धांत
- अक्ष (Axis) और केंद्र बिंदु (Focal point): मुख्य रेखा और आकर्षण का केंद्र, जैसे फव्वारा या विशेष वृक्ष।
- संतुलन (Balance): समरूप या असमरूप रूप से बाग में सजावट का भार बराबर रखना।
- अनुपात (Proportion / Scale): पौधों और संरचनाओं का परस्पर और स्थान के अनुसार आकार।
- लय (Rhythm) और एकरूपता (Unity): तत्वों की पुनरावृत्ति और पूरे बाग में एक सूत्र।
- सामंजस्य, सरलता और विविधता (Harmony, Simplicity, Variety): बहुत अधिक तत्व न भरें और रंग, बनावट (Texture) व रूप में विपरीतता (Contrast) रखें।
उद्यान के तत्व: लॉन, क्यारियाँ और बॉर्डर, वृक्ष-झाड़ी-लता, हेज, टोपियरी (पौधों को आकार देना), रॉकरी, जल उद्यान, रास्ते, पर्गोला, गमले, बोन्साई, छत का बगीचा और ऊर्ध्वाधर बगीचा (Vertical garden)।
वृक्ष, झाड़ी और लताओं के भू-दृश्य उपयोग (टॉपिक 3)
| वर्ग | भू-दृश्य उपयोग | उदाहरण |
|---|---|---|
| वृक्ष (Trees) | सड़क के किनारे (Avenue), छाया, वायुरोधक, विशेष आकर्षण (Specimen), फूलदार वृक्ष | अशोक (Polyalthia longifolia), गुलमोहर (Delonix regia), अमलतास (Cassia fistula), जकरांडा, नीम, पीपल, खेजड़ी (Prosopis cineraria, राजस्थान का राज्य वृक्ष), रोहिड़ा (Tecomella undulata, राजस्थान का राज्य पुष्प) |
| झाड़ियाँ (Shrubs) | हेज और बाड़, पर्दा (Screen), बॉर्डर, फूलों की रंगीन परत | गुड़हल, इक्सोरा, कनेर, डुरंटा, बोगनवेलिया, चमेली, नागचम्पा |
| लताएँ (Climbers) | पर्गोला, मेहराब, दीवार और जाली को ढकना | बोगनवेलिया, रंगून क्रीपर (Quisqualis indica), एंटीगोनॉन, थनबर्जिया, क्लाइटोरिया (अपराजिता) |
| पाम और घास | रास्तों और केंद्र का सौंदर्य, लॉन | रॉयल पाम, वॉशिंगटोनिया, खजूर; दूब घास (Cynodon dactylon) |
भाग 2: कटे फूल और खुले फूलों की उत्पादन तकनीक (सिलेबस टॉपिक 4, 5, 6, 7)
गुलाब: कटे फूल के लिए (टॉपिक 4)
गुलाब (Rosa spp., Rosaceae) को फूलों का राजा कहा जाता है। मुख्य वर्ग: हाइब्रिड टी (कटे फूल के लिए), फ्लोरीबंडा, पॉलिएंथा, ग्रैंडीफ्लोरा, मिनिएचर और बेल वाले गुलाब।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| जलवायु | दिन में लगभग 25 से 30°C और रात में लगभग 15°C का तापमान, रोज़ 6 से 8 घंटे धूप। छाया में फूल कम और पतले होते हैं |
| मृदा | अच्छे जल निकास वाली, उपजाऊ दोमट, pH लगभग 6 से 7 |
| प्रवर्धन | सामान्यतः मूलवृंत पर T-बडिंग; भारत में Rosa indica var. odorata और एडवर्ड रोज़ (R. bourboniana) मूलवृंत के रूप में प्रयोग होते हैं। कर्तन से भी प्रवर्धन |
| रोपण | उत्तर भारत के मैदानों में अक्टूबर-नवंबर; हाइब्रिड टी में लगभग 60 × 45 से 75 × 60 सेमी की दूरी |
| छँटाई | सर्दी से पहले (अक्टूबर के आसपास) सुप्तावस्था में कटाई-छँटाई; सूखी, रोगी और कमज़ोर शाखाएँ हटाना। इसके बाद नई शाखाएँ निकलती हैं और फूल लगते हैं |
| कटाई-छँटाई के अन्य काम | कली विरलन (Disbudding) और पौधे के नीचे से निकलने वाले चूषक (अंडर-स्टॉक कल्ले) हटाना |
| प्रमुख कीट-रोग | माहू, थ्रिप्स, माइट; चूर्णिल आसिता, काला धब्बा (Diplocarpon rosae), शीर्षमरण (Dieback) |
| कटाई | कली की अवस्था में, जब बाह्यदल (Sepals) नीचे की ओर मुड़ने लगें और पहली पंखुड़ी खुलने लगे। सुबह या शाम को तेज़ चाकू से तिरछा काटकर तुरंत पानी में रखें |
जरबेरा और कार्नेशन: संरक्षित खेती में (टॉपिक 5)
| पहलू | जरबेरा (Gerbera jamesonii, Asteraceae) | कार्नेशन (Dianthus caryophyllus, Caryophyllaceae) |
|---|---|---|
| मूल स्थान और संरचना | दक्षिण अफ्रीका। पॉलीहाउस, अच्छी रोशनी और नियंत्रित तापमान | भूमध्य सागर क्षेत्र। ठंडी जलवायु वाला पॉलीहाउस, बढ़िया वायु संचार |
| तापमान | दिन में लगभग 20 से 25°C, रात में लगभग 12 से 15°C | दिन में लगभग 20 से 22°C, रात में लगभग 10 से 12°C |
| मृदा और माध्यम | हल्का, अच्छी तरह निकासी वाला माध्यम (मृदा + कोकोपीट + जैविक खाद), उठी क्यारी, pH लगभग 5.5 से 6.5 | उठी क्यारी, अच्छी निकासी और pH लगभग 6 से 7 |
| प्रवर्धन | टिशू कल्चर से तैयार पौध (मुख्य), कंद-विभाजन | शीर्ष कर्तन (जड़ वाले कर्तन), रोगमुक्त टिशू कल्चर पौध |
| रोपण | उठी क्यारी में लगभग 30 × 30 सेमी की दूरी। पौधे का क्राउन (मुकुट) भूमि के ऊपर रखें, मिट्टी में न दबाएँ | लगभग 20 × 20 सेमी की दूरी; पौधों को जाल (Netting) का सहारा |
| विशेष क्रियाएँ | पुरानी पत्तियाँ और अतिरिक्त कल्ले हटाना | पिंचिंग: एक पिंच, एक-डेढ़ पिंच या दो पिंच से शाखाएँ बढ़ाना; मानक (Standard) प्रकार में कली विरलन |
| रोग-कीट | सफेद मक्खी, पत्ती सुरंगक, माइट, थ्रिप्स; क्राउन सड़न (Phytophthora), चूर्णिल आसिता, Botrytis | लाल मकड़ी (माइट), थ्रिप्स; उकठा (Fusarium oxysporum f. sp. dianthi), रतुआ, Alternaria धब्बा |
| कटाई | जब बाहरी 2 से 3 पंक्तियों के डिस्क पुष्पक (Disc florets) खुल जाएँ। डंठल को काटने के बजाय खींचकर तोड़ा जाता है | स्टैंडर्ड कार्नेशन में पेंटब्रश अवस्था (कली में पंखुड़ियों का रंग दिखने लगे), लंबी दूरी के लिए कली की कसी अवस्था |
ग्लैडियोलस, रजनीगंधा और गुलदाउदी: खुली खेती में (टॉपिक 6)
| फसल | जलवायु और प्रवर्धन | रोपण और देखभाल | कटाई और अन्य |
|---|---|---|---|
| ग्लैडियोलस (Gladiolus grandiflorus, Iridaceae) | सर्दी का मौसम, धूप वाली खुली जगह। प्रवर्धन घनकंद (Corms) और कॉर्मेल से। रोपण से पहले घनकंद का फफूँदनाशी उपचार | उत्तर भारत में अक्टूबर-नवंबर में रोपण; घनकंद लगभग 5 से 8 सेमी गहरे, पंक्ति में लगभग 30 सेमी और घनकंद के बीच लगभग 20 सेमी दूरी। फूल की डंडी पर मिट्टी चढ़ाना और सहारा देना | स्पाइक की सबसे निचली 1 से 2 कलियों में रंग दिखने पर काटें, पत्तियाँ (4 से 5) पौधे पर छोड़ें ताकि घनकंद बन सके। फूल के बाद पत्ते सूखने पर घनकंद खोदकर सुखाएँ और भंडारित करें। रोग: Fusarium घनकंद सड़न; कीट: थ्रिप्स |
| रजनीगंधा (Polianthes tuberosa, Asparagaceae/Agavaceae) | मेक्सिको मूल का; गर्म और आर्द्र जलवायु। प्रवर्धन बल्ब और बल्बलेट से। प्रकार: एकल (Single), दोहरे (Double) और रंगीन-पत्ती वाले | मार्च-अप्रैल में रोपण (वर्षा में भी); बल्ब का आकार लगभग 2 से 3 सेमी; दूरी लगभग 30 × 30 सेमी; नियमित सिंचाई | स्पाइक की निचली कलियाँ खुलने पर कटाई। खुले फूल, कटे फूल और इत्र (कंक्रीट, एकल प्रकार से) के लिए प्रयोग। रोग: तना सड़न (Sclerotium rolfsii), पत्ती झुलसा; कीट: थ्रिप्स |
| गुलदाउदी (Dendranthema grandiflora, पुराना नाम Chrysanthemum morifolium, Asteraceae) | अल्प-दिवस पौधा (लंबी रात में फूल)। प्रवर्धन चूषक (Suckers) और शीर्ष कर्तन से | मैदानी क्षेत्रों में सामान्यतः जून-जुलाई में चूषक लगाकर नवंबर-दिसंबर में फूल; दूरी लगभग 30 × 30 सेमी। शाखाओं के लिए पिंचिंग और बड़े फूलों के लिए कली विरलन। समय से इतर फूल के लिए प्रकाश अवधि का नियंत्रण (काले कपड़े से ढकना) | फूल पूर्ण खिलने से पहले की अवस्था में कटाई। प्रकार: स्टैंडर्ड, स्प्रे, पोम्पन, बटन, डेकोरेटिव आदि। रोग: पत्ती धब्बा, रतुआ, उकठा; कीट: माहू, पत्ती सुरंगक, थ्रिप्स |
खुले फूल: गेंदा और चमेली की उत्पादन तकनीक (टॉपिक 7)
| पहलू | गेंदा (Tagetes spp., Asteraceae) | चमेली (Jasminum spp., Oleaceae) |
|---|---|---|
| प्रमुख प्रजातियाँ | अफ्रीकन गेंदा (T. erecta, बड़ा फूल) और फ्रेंच गेंदा (T. patula, छोटा फूल) | J. sambac (मोगरा), J. auriculatum (जूही), J. grandiflorum (चमेली) |
| उपयोग | माला, पूजा, सजावट, बॉर्डर, कैरोटिनॉइड (ल्यूटिन, ज़ैन्थोफिल) जो मुर्गी दाने और रंग में काम आता है, तथा सूत्रकृमि घटाने वाली फसल | माला, गजरा, पूजा और इत्र उद्योग (कंक्रीट और एब्सोल्यूट, विशेषकर J. grandiflorum और J. sambac) |
| जलवायु | धूप वाली जगह, मध्यम तापमान; पाला हानिकारक | गर्म और आर्द्र जलवायु; पाले से बचाव ज़रूरी |
| प्रवर्धन | बीज से पौध तैयार कर रोपाई (लगभग 4 सप्ताह की पौध)। साल में तीन फसलें: वर्षा, सर्दी और गर्मी | कर्तन और दाब (Layering) से; बहुवर्षीय झाड़ी |
| रोपण | अफ्रीकन गेंदा लगभग 45 × 45 सेमी; फ्रेंच लगभग 30 × 30 सेमी की दूरी। रोपाई के लगभग 30 से 40 दिन बाद शीर्ष कटाई (पिंचिंग) से शाखाएँ और फूल बढ़ते हैं | लगभग 1.5 से 2 मीटर की दूरी, गड्ढों में जैविक खाद के साथ रोपण; सर्दी में कठोर छँटाई कर फूल आने के लिए नई वृद्धि प्रेरित की जाती है |
| रोग-कीट | पौध का आर्द्र गलन (नर्सरी में), Alternaria पत्ती धब्बा, माइट, पत्ती भक्षक | रतुआ, कली कीट (Bud worm), मकड़ी/माइट |
| कटाई | जब फूल पूरी तरह खिल जाए। बार-बार तुड़ाई | सुबह जल्दी, कली की अवस्था में, जो शाम तक खिल जाती हैं |
अफ्रीकन गेंदा 45 × 45 सेमी की दूरी पर: क्षेत्र प्रति पौधा = 0.45 × 0.45 = 0.2025 मी²; पौधे प्रति हेक्टेयर = 10000 ÷ 0.2025 ≈ 49,383 पौधे।
ग्लैडियोलस 30 × 20 सेमी पर: क्षेत्र = 0.30 × 0.20 = 0.06 मी²; घनकंद = 10000 ÷ 0.06 ≈ 1,66,667 घनकंद प्रति हेक्टेयर।
भाग 3: औषधीय पौधों की उत्पादन तकनीक (सिलेबस टॉपिक 8, 9)
| पौधा | वैज्ञानिक नाम / कुल | उपयोगी भाग और तत्व | खेती के मुख्य बिंदु |
|---|---|---|---|
| अश्वगंधा | Withania somnifera, Solanaceae | जड़; विथानोलाइड और एल्कलॉइड। तनाव और कमज़ोरी में टॉनिक | खरीफ की असिंचित फसल, वर्षा के साथ जुलाई-सितंबर में सीधी बुवाई (बीज दर लगभग 5 से 10 किग्रा/हे), रेतीली दोमट मृदा, जल जमाव से नुकसान। लगभग 150 से 180 दिन में पौधे उखाड़कर जड़ें सुखाई जाती हैं। किस्में: जवाहर असगंध-20 और जवाहर असगंध-134। राजस्थान और मध्य प्रदेश में प्रमुख |
| शतावरी (Asparagus) | Asparagus racemosus, Asparagaceae | कंदिल जड़ें; सैपोनिन (शतावरिन)। स्तन्य वृद्धि और रसायन के लिए | बीज या जड़ों के मुकुट (Crowns) से प्रवर्धन; आरोही लता होने से सहारा; बहुवर्षीय फसल, लगभग 18 से 24 महीने में जड़ें खोदकर छीलकर सुखाई जाती हैं |
| सफेद मूसली | Chlorophytum borivilianum, Asparagaceae | गूदेदार कंदिल जड़ें (उँगलियाँ); सैपोनिन। बलवर्धक टॉनिक | कंद के मुकुट (उँगलियों) से जून-जुलाई में रोपण, वर्षा आधारित, उठी क्यारी और अच्छा जल निकास। पत्तियाँ सूखने पर कंद खोदकर छीलना और सुखाना |
| एलोवेरा (घृतकुमारी) | Aloe vera (A. barbadensis), Asphodelaceae | पत्ती का गूदा (जेल) और पीला रस (एलोइन) | सूखा सहनशील CAM पौधा; चूषकों (Suckers) से प्रवर्धन, वर्षा के समय रोपण, हल्की रेतीली दोमट मृदा, जल जमाव हानिकारक। परिपक्व निचली पत्तियाँ कुछ महीनों के अंतराल पर काटी जाती हैं। प्रयोग: प्रसाधन, जूस और दवाएँ |
| दालचीनी (Cinnamon) | Cinnamomum verum, Lauraceae | छाल (सिनामैल्डिहाइड) और पत्ती का तेल (यूजीनॉल) | बागान फसल, गर्म और अधिक वर्षा वाला क्षेत्र (केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु)। बीज या कर्तन से प्रवर्धन, नियमित कटाई-छँटाई (Coppicing)। वर्षा ऋतु में छाल आसानी से उतरती है, जिसे सुखाकर नलिकाएँ (Quills) बनाई जाती हैं |
| सदाबहार (Periwinkle) | Catharanthus roseus, Apocynaceae | पत्तियों से विनब्लास्टिन और विनक्रिस्टिन (कैंसर रोधी); जड़ों से अजमैलिसिन और सर्पेंटिन (उच्च रक्तचाप) | बीज से नर्सरी में पौध और रोपाई; शोभा पौधे के रूप में भी लोकप्रिय। एल्कलॉइड बहुत कम मात्रा में मिलते हैं, इसलिए उद्योग के लिए अनुबंध खेती होती है |
| इसबगोल | Plantago ovata, Plantaginaceae | बीज की भूसी (Husk), जो बीज वज़न का लगभग 30% होती है। कब्ज़ और पेट की समस्याओं में | रबी की फसल, नवंबर में बुवाई (बीज दर लगभग 4 से 5 किग्रा/हे), हल्की रेतीली दोमट मृदा, ठंडा और शुष्क मौसम। बालियाँ भूरी पड़ने और पत्तियाँ पीली होने पर मार्च-अप्रैल में कटाई, बिखराव से बचने के लिए सुबह के समय। पकते समय बारिश या ओस से नुकसान। मुख्य रोग: मृदुरोमिल आसिता (Peronospora plantaginis)। किस्म: गुजरात इसबगोल-2 (GI-2)। राजस्थान और गुजरात प्रमुख क्षेत्र |
भाग 4: सुगंधित पौधों की उत्पादन तकनीक (सिलेबस टॉपिक 10, 11, 12, 13)
| पौधा | वैज्ञानिक नाम / कुल | तेल का मुख्य घटक और उपयोग | खेती के मुख्य बिंदु |
|---|---|---|---|
| पुदीना (जापानी / मेन्थॉल मिंट) | Mentha arvensis, Lamiaceae | मेन्थॉल (तेल में लगभग 70 से 80%)। दवा, टूथपेस्ट, पान मसाला, मिठाई | प्रवर्धन भूस्तारी (Suckers / Stolons) से; जनवरी-फरवरी में रोपण (बीज लगभग 400 से 500 किग्रा/हे), हल्की दोमट मृदा, पानी की अधिक ज़रूरत। फूल आने के प्रारंभ पर कटाई, साल में 2 से 3 कटाई। अन्य प्रजातियाँ: पिपरमिंट (M. piperita), स्पीयरमिंट (M. spicata, कार्वोन)। किस्में: कोसी, हिमालय, शिवालिक |
| नींबू घास (Lemongrass) | Cymbopogon flexuosus (पूर्वी भारतीय), C. citratus (पश्चिमी भारतीय), Poaceae | सिट्राल (लगभग 75 से 85%)। इत्र, साबुन, विटामिन A के संश्लेषण (आयोनोन) | बहुवर्षीय घास, स्लिप्स (कल्ले) से रोपण वर्षा के समय, कम उपजाऊ और अम्लीय से सामान्य मृदा में भी। साल में कई कटाई (कुछ महीनों के अंतराल पर)। किस्में: प्रगति, प्रमाण, कृष्णा, कावेरी |
| सिट्रोनेला (Citronella) | Cymbopogon winterianus (जावा), C. nardus (सीलोन), Poaceae | सिट्रोनेलल, जिरेनियॉल और सिट्रोनेलोल। मच्छर भगाने वाले उत्पाद, साबुन, इत्र | बहुवर्षीय घास, स्लिप्स से प्रवर्धन, गर्म और आर्द्र जलवायु और अच्छी वर्षा। कई कटाई। जावा प्रकार की गुणवत्ता बेहतर है। किस्में: जोरलैब C-5, बायो-13 |
| पामारोज़ा | Cymbopogon martinii var. motia, Poaceae | जिरेनियॉल (लगभग 75 से 90%)। गुलाब जैसी महक वाला तेल, इत्र, साबुन | बहुवर्षीय घास, बीज से नर्सरी में पौध तैयार कर रोपाई। सूखा सहनशील, अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त। फूल आने की अवस्था पर कटाई सबसे अच्छी। किस्म: तृष्णा (PRC-1) |
| तुलसी (Ocimum) | Ocimum sanctum/O. tenuiflorum (पवित्र), O. basilicum (स्वीट बेसिल), O. gratissimum, Lamiaceae | यूजीनॉल (पवित्र तुलसी, राम तुलसी); मिथाइल चैविकोल / लिनालूल (स्वीट बेसिल)। औषधि, इत्र, खाद्य स्वाद | बीज से नर्सरी और रोपाई; खरीफ और जायद में अच्छी वृद्धि; पूरे फूल आने पर कटाई, हरी शाक आसवित की जाती है |
| गुलाब (सुगंधित) | Rosa damascena (दमिश्क), R. bourboniana (एडवर्ड), R. centifolia, Rosaceae | गुलाब तेल (Otto), एब्सोल्यूट, गुलाब जल, गुलकंद। मुख्य घटक सिट्रोनेलोल, जिरेनियॉल और नेरोल | बसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में फूल खिलते हैं। कटाई सुबह सूर्योदय से पहले और लगभग 10 बजे तक, तुरंत आसवन। लगभग 3000 से 4000 किग्रा फूलों से 1 किग्रा तेल मिलता है। कन्नौज में परंपरागत देग-भपका विधि से इत्र। पुष्कर और हल्दीघाटी के गुलाब प्रसिद्ध |
| जिरेनियम | Pelargonium graveolens, Geraniaceae | गुलाब जैसी महक वाला तेल; सिट्रोनेलोल और जिरेनियॉल। इत्र और प्रसाधन | दक्षिण अफ्रीका मूल; ठंडी, पाला रहित जलवायु (पहाड़ी क्षेत्र), जल जमाव और पाला हानिकारक। कर्तन से प्रवर्धन, बहुवर्षीय झाड़ी, साल में कई कटाई; तेल की प्राप्ति कम होती है |
| खस (Vetiver) | Chrysopogon zizanioides (Vetiveria zizanioides), Poaceae | जड़ों से खस का तेल (वेटिवेरोल, वेटिवोन, खुसिमोल)। इत्र का फिक्सेटिव, खस की टट्टी, शरबत | कल्लों (Slips) से रोपण, बाढ़, सूखा और लवणता सहनशील; मृदा कटाव रोकने में सहायक (वेटिवर हेज)। जड़ें लगभग 15 से 18 महीने में खोदी जाती हैं और भाप आसवन में बहुत लंबा समय लगता है। किस्में: केएस-1, सुगंधा, केसरी |
पुदीना → मेन्थॉल | नींबू घास → सिट्राल | सिट्रोनेला → सिट्रोनेलल | पामारोज़ा → जिरेनियॉल | पवित्र तुलसी → यूजीनॉल | जिरेनियम → सिट्रोनेलोल और जिरेनियॉल | खस → वेटिवेरोल और वेटिवोन | पेपरमिंट → मेन्थॉल | स्पीयरमिंट → कार्वोन
सूत्र: तेल प्राप्ति (%) = (तेल का वज़न ÷ आसवित शाक का वज़न) × 100
यदि 4000 किग्रा ताज़ी शाक के आसवन से 20 किग्रा तेल मिला, तो प्राप्ति = 20 ÷ 4000 × 100 = 0.5%।
यदि प्रति हेक्टेयर शाक उपज 20 टन (20,000 किग्रा) और प्राप्ति 0.5% हो, तो तेल = 20,000 × 0.5 ÷ 100 = 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर।
यदि लगभग 4000 किग्रा फूलों से 1 किग्रा गुलाब तेल मिलता हो, तो 6000 किग्रा (6 टन) फूलों से तेल = 6000 ÷ 4000 = 1.5 किग्रा।
इसीलिए गुलाब का तेल बहुत महँगा बिकता है, और किसान गुलाब जल और गुलकंद जैसे सहउत्पाद भी बनाते हैं।
भाग 5: प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (सिलेबस टॉपिक 14)
शोभाकारी फसलों में कटाई-उपरांत प्रबंधन और मूल्य संवर्धन
- सही अवस्था पर कटाई: सुबह या शाम को, तेज़ चाकू से, तुरंत पानी या परिरक्षक घोल में रखना।
- पल्सिंग (Pulsing): कटे फूलों को कुछ घंटे चीनी (सुक्रोज़) वाले घोल में रखना ताकि वे लंबे समय तक ताज़ा रहें। होल्डिंग घोल में सुक्रोज़, साइट्रिक अम्ल और 8-HQS जैसे जीवाणुरोधी तत्व होते हैं।
- ग्रेडिंग, गुच्छे बाँधना और पैकिंग: डंठल की लंबाई और फूल के आकार के आधार पर श्रेणी, गुच्छों में बाँधना और कोरुगेटेड फाइबर बोर्ड के डिब्बों में पैकिंग।
- प्रीकूलिंग और शीत श्रृंखला (Cold chain): कटाई के तुरंत बाद ठंडा करना और भंडारण तथा परिवहन में लगभग 2 से 4°C का तापमान।
- एथिलीन से बचाव: कार्नेशन जैसे एथिलीन संवेदनशील फूलों में STS (सिल्वर थायोसल्फेट) का उपयोग।
- सूखे फूल (Dry flowers): हवा में सुखाना, गर्म हवा के ओवन या सिलिका जेल में सुखाना, ग्लिसरीन से परिरक्षित करना, दबाकर सुखाना (Pressing)। उत्पाद: पॉटपौरी, शुभकामना कार्ड, सजावटी गुलदस्ते।
- खुले फूलों के उत्पाद: माला, गजरा, पूजा सामग्री, कंक्रीट और एब्सोल्यूट (चमेली और रजनीगंधा से विलायक निष्कर्षण द्वारा), गुलाब जल, गुलकंद, गुलाब तेल और इत्र।
- गेंदा: पंखुड़ियों से ल्यूटिन (मुर्गी आहार में रंजक) और प्राकृतिक रंग।
औषधीय और सुगंधित पौधों में प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन
- औषधीय: सही अवस्था पर कटाई, छाया या नियंत्रित तापमान पर सुखाना, सफाई, श्रेणी, चूर्ण (पाउडर), अर्क (Extract), कैप्सूल और आयुर्वेदिक उत्पाद। एलोवेरा से जेल और जूस; इसबगोल की भूसी की सफाई और पैकिंग; अश्वगंधा की जड़ों की छँटाई और चूर्ण।
- सुगंधित पौधे: तेल निष्कर्षण और शुद्धिकरण (Rectification)। पुदीने के तेल को ठंडा कर मेन्थॉल क्रिस्टल अलग किए जाते हैं और बचा तेल डीमेन्थोलाइज़्ड कहलाता है।
- गुणवत्ता और विपणन: मानक (BIS/AGMARK), ब्रांडिंग, जैविक प्रमाणन, अनुबंध खेती और निर्यात।
| तेल निष्कर्षण की विधि | विवरण और उदाहरण |
|---|---|
| जल आसवन (Hydro-distillation / Water distillation) | पौधे को पानी में उबालकर वाष्प से तेल अलग करना; गुलाब, सिट्रोनेला की देशी भट्टियों में |
| जल एवं भाप आसवन (Water and steam) | पौधा जाली पर, नीचे पानी; पानी की भाप ऊपर से गुज़रती है |
| सीधा भाप आसवन (Direct steam distillation) | बाहरी बॉयलर से भाप; बड़े पैमाने पर नींबू घास, पुदीना, खस |
| विलायक निष्कर्षण (Solvent extraction) | नाज़ुक फूलों (चमेली, रजनीगंधा) से हेक्सेन आदि द्वारा कंक्रीट, जिससे अल्कोहल द्वारा एब्सोल्यूट बनता है |
| एन्फ्ल्यूरेज (Enfleurage) | फूलों को ठंडी वसा में रखकर सुगंध सोखाना; परंपरागत विधि |
| अतिक्रांतिक CO2 निष्कर्षण | आधुनिक विधि; उच्च गुणवत्ता का तेल और अर्क |
प्रैक्टिकल की झलक
सामान्यतः इस विषय के प्रैक्टिकल में निम्नलिखित काम होते हैं (अपने विश्वविद्यालय के प्रैक्टिकल मैनुअल से मिला लें):
- शोभाकारी पौधों, वृक्ष, झाड़ी और लताओं की पहचान और उनके भू-दृश्य उपयोग।
- बगीचे की रूपरेखा और डिज़ाइन तैयार करना, लॉन बनाना और रखरखाव।
- गुलाब की कटाई-छँटाई और T-बडिंग, गुलदाउदी की पिंचिंग, ग्लैडियोलस के घनकंद की जाँच।
- कटे फूलों की कटाई-उपरांत देखभाल: पल्सिंग, ग्रेडिंग और पैकिंग; सूखे फूल बनाना।
- औषधीय और सुगंधित पौधों की पहचान, तेल आसवन और तेल की प्राप्ति की गणना।
सोचिए और हल कीजिए
प्रश्न 1: फ्रेंच गेंदा 30 × 30 सेमी की दूरी पर प्रति हेक्टेयर कितने पौधे लगेंगे? उत्तर: 10000 ÷ 0.09 ≈ 1,11,111 पौधे
प्रश्न 2: 5000 किग्रा नींबू घास से 30 किग्रा तेल मिला। तेल प्राप्ति कितने प्रतिशत है? उत्तर: 30 ÷ 5000 × 100 = 0.6%
प्रश्न 3: यदि 4000 किग्रा गुलाब के फूलों से 1 किग्रा तेल मिलता है, तो 10 टन फूलों से कितना तेल मिलेगा? उत्तर: 10000 ÷ 4000 = 2.5 किग्रा
परीक्षा के लिए कैसे लिखें और याद रखें
- हर फसल के उत्तर में जलवायु-मृदा, किस्में, प्रवर्धन, रोपण, देखभाल, कटाई और उपज का क्रम रखें।
- पौधे का वैज्ञानिक नाम और कुल हमेशा लिखें। उपयोगी भाग और मुख्य रसायन का मिलान याद रखें।
- भू-दृश्य सिद्धांत लिखते समय बाग का एक सरल चित्र बनाएँ। औपचारिक और अनौपचारिक शैलियों का अंतर उदाहरण सहित दें।
- जरबेरा का क्राउन भूमि से ऊपर, गुलदाउदी अल्प-दिवस पौधा, कार्नेशन में पिंचिंग, ग्लैडियोलस में घनकंद, ये बिंदु ज़रूर लिखें।
- सुगंधित तेल के घटक (मेन्थॉल, सिट्राल, सिट्रोनेलल, जिरेनियॉल, यूजीनॉल) तालिका बनाकर याद करें।
- तेल प्राप्ति के सूत्र के साथ गणना करने पर अंक अधिक मिलते हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. फूलों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अग्रणी देश कौन सा है? (अ) भारत (ब) नीदरलैंड (स) जापान (द) ब्राज़ील। उत्तर: ब
Q2. जरबेरा का प्रवर्धन मुख्यतः किससे होता है? (अ) बीज (ब) घनकंद (स) टिशू कल्चर से तैयार पौध (द) गूटी। उत्तर: स
Q3. गुलदाउदी किस प्रकार का पौधा है? (अ) दीर्घ-दिवस (ब) अल्प-दिवस (स) दिन-निरपेक्ष (द) शीत ऋतु का कंद। उत्तर: ब
Q4. ग्लैडियोलस का प्रवर्धन किससे होता है? (अ) घनकंद (Corm) (ब) बल्ब (स) प्रकंद (द) भूस्तारी। उत्तर: अ
Q5. अश्वगंधा का उपयोगी भाग कौन सा है? (अ) पत्ती (ब) जड़ (स) छाल (द) फल। उत्तर: ब
Q6. इसबगोल की भूसी किस भाग से मिलती है? (अ) बीज के आवरण से (ब) जड़ से (स) पत्ती से (द) फूल से। उत्तर: अ
Q7. सदाबहार से कौन से कैंसर रोधी एल्कलॉइड मिलते हैं? (अ) रिसर्पिन (ब) विनब्लास्टिन और विनक्रिस्टिन (स) एलोइन (द) मेन्थॉल। उत्तर: ब
Q8. नींबू घास के तेल का मुख्य घटक कौन सा है? (अ) मेन्थॉल (ब) जिरेनियॉल (स) सिट्राल (द) यूजीनॉल। उत्तर: स
Q9. पामारोज़ा के तेल का प्रमुख घटक कौन सा है? (अ) जिरेनियॉल (ब) सिट्राल (स) कार्वोन (द) वेटिवोन। उत्तर: अ
Q10. खस का तेल पौधे के किस भाग से मिलता है? (अ) पत्ती (ब) फूल (स) जड़ (द) बीज। उत्तर: स
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: कटे फूल और खुले फूल में क्या अंतर है?
उत्तर: कटे फूल डंठल सहित बेचे जाते हैं (गुलाब, जरबेरा, कार्नेशन), जबकि खुले फूल बिना डंठल के माला, पूजा और इत्र के लिए बिकते हैं (गेंदा, चमेली)।
प्रश्न: संरक्षित खेती में कटे फूल क्यों उगाए जाते हैं?
उत्तर: पॉलीहाउस में तापमान, नमी और प्रकाश नियंत्रित रहते हैं, जिससे साल भर अधिक उपज और अच्छी गुणवत्ता मिलती है।
प्रश्न: औषधीय पौधों की खेती में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
उत्तर: बाज़ार और खरीदार की अनिश्चितता। इसलिए अनुबंध खेती, गुणवत्ता और प्रसंस्करण पर ध्यान देना चाहिए।
प्रश्न: सुगंधित फसलों का तेल कैसे निकाला जाता है?
उत्तर: ज़्यादातर भाप या जल आसवन से, और नाज़ुक फूलों में विलायक निष्कर्षण से।
प्रश्न: शुष्क क्षेत्र के लिए कौन सी सुगंधित फसलें उपयुक्त हैं?
उत्तर: पामारोज़ा, खस और नींबू घास जैसी सूखा सहनशील घासें, और औषधीय में अश्वगंधा, इसबगोल और एलोवेरा।
प्रश्न: सिलेबस में कुल कितने टॉपिक और लेक्चर हैं?
उत्तर: थ्योरी में 14 टॉपिक हैं और कुल 16 लेक्चर निर्धारित हैं।
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आगे पढ़ने के लिए
संदर्भ: टी.के. बोस एवं अन्य (संपा.), Floriculture and Landscaping; जे.एस. अरोड़ा, Introductory Ornamental Horticulture; के.एल. चड्ढा (संपा.), Handbook of Horticulture (ICAR); CSIR-CIMAP के प्रकाशन और अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालय की पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज़।
लेखक की टिप्पणी: यह लेख सिलेबस के आधार पर मौलिक रूप से तैयार किया गया है। गणनाएँ अभ्यास हेतु हैं। रोपण की दूरी, बीज दर, बुवाई-कटाई का समय, उपज और तेल की प्राप्ति क्षेत्र और किस्म के अनुसार बदलती हैं, इसलिए प्रकाशित करने से पहले अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिश और संदर्भ पुस्तकों से जाँच लें।
