फल एवं बागान फसल उत्पादन तकनीक (Production Technology for Fruit and Plantation Crops) में भारत की प्रमुख फल और बागान फसलों की खेती सिखाई जाती है। सिलेबस में 15 टॉपिक और कुल 16 थ्योरी लेक्चर हैं (टॉपिक 11 के लिए 2 लेक्चर)। पहला टॉपिक फल उद्योग का महत्व और मूलवृंत की भूमिका है, फिर आम से लेकर स्ट्रॉबेरी तक फल, और अंत में नारियल, काजू, सुपारी, रबर, चाय और कॉफी जैसी बागान फसलें। इस लेख में हर फसल का एक कार्ड है जिसमें उत्पत्ति, जलवायु, किस्में, प्रवर्धन, रोपण, खाद, विशेष क्रियाएँ, कटाई और विकार हैं।
पूरी तस्वीर एक नज़र में
बाग एक बार लगता है और दशकों चलता है, इसलिए शुरू की गलती (गलत किस्म, गलत दूरी, गलत मूलवृंत) पूरे जीवन भर भारी पड़ती है।
भाग 1: फल उद्योग और मूलवृंत (टॉपिक 1)
फल और बागान उद्योग का महत्व
- पोषण: फल विटामिन, खनिज, शर्करा और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं।
- आर्थिक महत्व: प्रति हेक्टेयर अनाज से अधिक आय, रोज़गार (तुड़ाई, पैकिंग, प्रसंस्करण), निर्यात और प्रसंस्करण उद्योग (जूस, पल्प, जैम, चिप्स)।
- भारत की स्थिति: भारत फल उत्पादन में चीन के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर माना जाता है और आम, केला, पपीता, नींबू जैसे फलों में अग्रणी है। बागान फसलों (चाय, कॉफी, रबर, नारियल, काजू, सुपारी) से निर्यात आय और ग्रामीण रोज़गार मिलता है। (प्रकाशित करने से पहले ताज़ा आँकड़े सरकारी रिपोर्ट से जाँच लें)
- भूमि उपयोग: बंजर, ढलान और कम उपजाऊ भूमि पर भी बागवानी संभव है, जिससे भूमि का बेहतर उपयोग और मृदा संरक्षण होता है।
जलवायु के आधार पर फलों का वर्गीकरण
| वर्ग | फल |
|---|---|
| उष्णकटिबंधीय (Tropical) | आम, केला, पपीता, चीकू, अनानास, नारियल, काजू |
| उपोष्णकटिबंधीय (Subtropical) | नींबू वर्ग, अमरूद, लीची, अंगूर, अनार, बेर, आँवला, आड़ू और नाशपाती की कम शीत वाली किस्में |
| शीतोष्ण (Temperate) | सेब, नाशपाती, आड़ू, अखरोट, बादाम |
| शुष्क क्षेत्र के फल (Arid) | बेर, अनार, आँवला, खजूर, बेल, सीताफल, गोंदा |
| फल पकने का प्रकार | फल |
|---|---|
| क्लाइमेक्टेरिक (पकने पर श्वसन और एथिलीन में उछाल) | आम, केला, पपीता, अमरूद, चीकू, सेब, नाशपाती, आड़ू, सीताफल |
| नॉन-क्लाइमेक्टेरिक (पेड़ पर ही पकते हैं) | नींबू वर्ग, अंगूर, लीची, अनानास, स्ट्रॉबेरी, अनार, बेर |
मूलवृंत का महत्व
मूलवृंत (Rootstock) कलम का वह जड़ वाला भाग है जिस पर वांछित किस्म की कलम (Scion) जोड़ी जाती है। सही मूलवृंत से:
- वृक्ष का आकार और ज़ोर नियंत्रित होता है (बौना, अर्ध-बौना, ओजस्वी)। बौने मूलवृंत से सघन बाग बनता है।
- मिट्टी की समस्याएँ सहने की क्षमता मिलती है (लवणता, चूना, जल भराव, सूखा)।
- रोग-कीट प्रतिरोध मिलता है (गमोसिस, सूत्रकृमि, उकठा, फाइलोक्सेरा)।
- शीघ्र फलन, उपज और फल गुणवत्ता बेहतर होती है।
- कलम से संगतता (Compatibility) ज़रूरी है, नहीं तो जोड़ टूट जाता है।
| फसल | प्रमुख मूलवृंत और विशेषता |
|---|---|
| नींबू वर्ग | रफ लेमन: ओजस्वी, सूखा सहनशील। रंगपुर लाइम: सूखा सहनशील। क्लियोपेट्रा मैंडरिन: लवणता सहनशील। ट्राइफोलिएट ऑरेंज: शीत और गमोसिस के प्रति सहनशील। ट्रॉयर और कैरिज़ो सिट्रेंज: अच्छी गुणवत्ता |
| अंगूर | डॉगरिज, सॉल्ट क्रीक: लवणता और सूत्रकृमि सहनशील। 1613, SO4, 110R, 99R: अन्य मूलवृंत |
| सेब | क्रैब एप्पल (बीजू), M-9 (अति बौना), M-26 (बौना), MM-106 (अर्ध-ओजस्वी), MM-111 |
| नाशपाती | क्विंस (Cydonia): बौना (संगतता पर ध्यान), कैंथ (Pyrus pashia) उत्तर भारत में प्रचलित |
| आम | बहुभ्रूणी स्थानीय गुठलियाँ (जैसे वेल्लैकोलम्बन, ओलूर, बप्पाकाई) |
| बेर | जंगली बेर (Ziziphus rotundifolia), देसी Z. mauritiana |
| चीकू | खिरनी (Manilkara hexandra) |
| आड़ू, बादाम | आड़ू के बीजू; बादाम के लिए कड़वा बादाम (Bitter almond) और आड़ू |
बाग रोपण की पद्धतियाँ और गणना
| पद्धति | विशेषता |
|---|---|
| वर्गाकार (Square) | पौधे वर्ग के कोनों पर; सरल, हर दिशा में जुताई संभव |
| आयताकार (Rectangular) | पंक्ति दूरी अधिक, पौधा दूरी कम; मशीन के लिए सुविधाजनक |
| षट्कोणीय (Hexagonal) | समबाहु त्रिभुज के कोनों पर; वर्गाकार से लगभग 15% अधिक पौधे |
| क्विनकन्स (Quincunx) | वर्ग के कोनों पर और मध्य में एक भराव पौधा (अंतरवर्ती पौधा) |
| कंटूर (Contour) | ढलान की भूमि पर समोच्च रेखा के साथ, मृदा क्षरण रोकता है |
| सघन रोपण (High-density planting) | बौने मूलवृंत या बौनी किस्मों से अधिक पौधे/हे. |
वर्गाकार पद्धति: पौधे/हे. = 10,000 ÷ (पंक्ति दूरी × पौधा दूरी)।
आम 10 × 10 मीटर पर = 10,000 ÷ 100 = 100 पौधे/हे.; केला 1.8 × 1.8 मीटर पर = 10,000 ÷ 3.24 = लगभग 3,086 पौधे/हे.
षट्कोणीय पद्धति में पौधे/हे. = 11,547 ÷ d² (d = पौधों के बीच की दूरी, मीटर में)।
आम 10 मीटर की दूरी पर: 11,547 ÷ 100 = लगभग 115 पौधे/हे., यानी वर्गाकार से 15% अधिक।
सूत्र: लाभ-लागत अनुपात (B:C) = सकल आय ÷ कुल लागत।
मान लें अनार के बाग में प्रति हे. वार्षिक कुल लागत = ₹1,50,000 और उपज 10 टन, भाव ₹60 प्रति किग्रा।
सकल आय = 10,000 किग्रा × 60 = ₹6,00,000; शुद्ध आय = 6,00,000 − 1,50,000 = ₹4,50,000।
B:C = 6,00,000 ÷ 1,50,000 = 4 : 1। (ये आँकड़े केवल गणना समझने के लिए हैं, असली भाव और लागत अलग होते हैं)
भाग 2: आम (टॉपिक 2)
| बिंदु | आम (Mangifera indica) |
|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | भारत-बर्मा क्षेत्र; भारत का राष्ट्रीय फल। उष्ण और उपोष्ण, लगभग 24 से 27°C उत्तम। फूल आने के समय बारिश, कोहरा, बादल हानिकारक (फल कम बैठते हैं और भुनगा/चूर्णिल आसिता बढ़ते हैं) |
| मिट्टी | गहरी, अच्छे जल निकास वाली दोमट; pH लगभग 5.5 से 7.5 |
| किस्में | दशहरी, लंगड़ा, चौसा, बॉम्बे ग्रीन (मालदा), तोतापुरी, अल्फांसो (हापुस), केसर, बंगनपल्ली, नीलम, हिमसागर, फज़ली। संकर: आम्रपाली (दशहरी × नीलम, बौनी और नियमित फलन वाली), मल्लिका (नीलम × दशहरी), रत्ना। नियमित फलन: नीलम, बंगलोरा, तोतापुरी। एकांतर फलन: दशहरी, लंगड़ा, चौसा |
| प्रवर्धन | कलम से: भेंट कलम (Inarching), विनियर ग्राफ्टिंग, स्टोन ग्राफ्टिंग, सॉफ्टवुड ग्राफ्टिंग |
| रोपण | गड्ढा लगभग 1 × 1 × 1 मीटर, गोबर खाद + मिट्टी भरकर। जुलाई-अगस्त (वर्षा) या फरवरी-मार्च। दूरी लगभग 10 × 10 मीटर (100 पौधे/हे.); आम्रपाली जैसी बौनी किस्मों में सघन रोपण (लगभग 2.5 × 2.5 या 5 × 5 मीटर) |
| खाद और सिंचाई | वयस्क पेड़ को प्रति वर्ष लगभग 1 किग्रा N, 0.5 किग्रा P2O5 और 1 किग्रा K2O + गोबर खाद (आयु के साथ बढ़ाते हुए)। फूल आने से लगभग 2 से 3 महीने पहले सिंचाई बंद रखें, फूल खिलने के समय सिंचाई न करें, फल बनने के बाद नियमित करें |
| विशेष क्रियाएँ | शुरू के वर्षों में ढाँचा देना, सूखी और रोगी टहनियाँ काटना; एकांतर फलन कम करने के लिए फल तोड़ाई के बाद छँटाई और संतुलित पोषण। बाग में अंतरवर्ती फसलें पहले 5 से 7 वर्ष |
| कटाई और उपज | उत्तर भारत में दशहरी जून, लंगड़ा जुलाई, चौसा जुलाई के अंत में। परिपक्वता: कंधे भरना, रंग में बदलाव, आपेक्षिक घनत्व लगभग 1.01 से 1.02। उपज लगभग 10 से 15 टन/हे. |
| विकार | एकांतर फलन (Alternate bearing), विकृति (Malformation), ब्लैक टिप (ईंट-भट्टे की गैस), झुमका/गुच्छा (बिना बीज के छोटे फलों का गुच्छा), आंतरिक ऊतक सड़न (बोरॉन की कमी), स्पंजी ऊतक (अल्फांसो), फल झड़ना |
भाग 3: केला (टॉपिक 3)
| बिंदु | केला (Musa spp.) |
|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | दक्षिण-पूर्व एशिया (इंडो-मलेशिया)। आर्द्र उष्णकटिबंधीय, लगभग 20 से 35°C; 12°C से नीचे ठंड और तेज़ हवा से हानि |
| मिट्टी | गहरी, उपजाऊ दोमट, अच्छा जल निकास; pH लगभग 6 से 7.5; जल भराव हानिकारक |
| किस्में | ड्वार्फ कैवेंडिश (बसराई), रोबस्टा, ग्रैंड नैन (G-9), पूवन (चंपा), रस्थाली, करपूरवल्ली, नेन्द्रन (पकाकर खाया जाने वाला, कच्चा केरल में लोकप्रिय), मोंथन (कच्चा केला) |
| प्रवर्धन | तलवार चूषक (Sword sucker) (नुकीली पत्तियों वाले, ताकतवर) और ऊतक संवर्धन (Tissue culture) पौध (रोगमुक्त, एकसमान, जल्दी फसल)। जल चूषक (Water sucker) अनुपयुक्त |
| रोपण | जून-जुलाई या फरवरी-मार्च। दूरी लगभग 1.8 × 1.8 मीटर (लगभग 3,086 पौधे/हे.) ग्रैंड नैन में; किस्म अनुसार भिन्न |
| खाद और सिंचाई | प्रति पौधा लगभग 200 से 250 ग्राम N, 40 से 90 ग्राम P2O5 और 200 से 300 ग्राम K2O, कई किस्तों में; टपक सिंचाई और फर्टिगेशन उत्तम। केला अधिक पानी और पोटाश चाहता है |
| विशेष क्रियाएँ | डीसकरिंग (अनावश्यक चूषक हटाना, एक अनुयायी रखना), मिट्टी चढ़ाना, सहारा (Propping), डेनेवलिंग (आख़िरी हाथ के बाद नर पुष्प गुच्छ काटना), घौद पर थैली चढ़ाना |
| कटाई और उपज | रोपण के लगभग 11 से 14 महीने में, जब फलियाँ गोल हो जाएँ और कोण समाप्त हो। उपज लगभग 40 से 60 टन/हे.। तुड़ाई के बाद मातृ पौधा काट दें और अनुयायी से अगली फसल (पेड़ी) ली जा सकती है |
| विकार और प्रमुख रोग | चोक थ्रोट (ठंड से घौद बाहर निकलने में बाधा), पनामा उकठा (Fusarium oxysporum f.sp. cubense), सिगाटोका पत्ती धब्बा, बंची टॉप विषाणु (माहू से) |
भाग 4: नींबू वर्ग और अंगूर (टॉपिक 4 और 5)
| बिंदु | नींबू वर्ग (Citrus) | अंगूर (Vitis vinifera) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | दक्षिण-पूर्व एशिया और उत्तर-पूर्व भारत। उष्ण से उपोष्ण; पाले और लवणता के प्रति संवेदनशील। सूखी जलवायु में गुणवत्ता बेहतर। किन्नू को रंग और मिठास के लिए ठंडी सर्दी चाहिए | कैस्पियन सागर और पश्चिम एशिया। गर्म, शुष्क जलवायु; फल पकने पर बारिश हानिकारक। महाराष्ट्र (नासिक, सांगली), कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और उत्तर भारत में |
| मिट्टी | गहरी, अच्छे जल निकास वाली दोमट; pH लगभग 5.5 से 7.5 | जल निकास वाली रेतीली दोमट, pH लगभग 6.5 से 7.5 |
| किस्में | संतरा: नागपुर संतरा, कूर्ग, किन्नू (King × Willow leaf, पंजाब-राजस्थान-हरियाणा)। मौसंबी: मौसंबी, वैलेंसिया, जाफा, ब्लड रेड माल्टा। कागज़ी नींबू: कागज़ी। नींबू: यूरेका, लिस्बन, पंत लेमन-1। ग्रेपफ्रूट: मार्श सीडलेस, डंकन, स्टार रूबी | थॉम्पसन सीडलेस (तास-ए-गणेश, सोनाका, शरद सीडलेस), अनाब-ए-शाही, पर्लेट (अगेती), ब्यूटी सीडलेस, पूसा सीडलेस, पूसा नवरंग (रंगीन), फ्लेम सीडलेस, बैंगलोर ब्लू, गुलाबी |
| प्रवर्धन | बीजू मूलवृंत पर टी-बडिंग (Shield budding); कागज़ी नींबू बीज और गूटी से भी | कठोर कलम (Hardwood cuttings) या मूलवृंत (डॉगरिज, सॉल्ट क्रीक) पर ग्राफ्टिंग |
| रोपण और दूरी | मौसंबी, संतरा और किन्नू लगभग 6 × 6 मीटर; कागज़ी नींबू लगभग 4.5 से 5 मीटर | लगभग 3 × 3 मीटर या उससे अधिक, ट्रेनिंग प्रणाली के अनुसार |
| खाद और सिंचाई | वयस्क पेड़ को लगभग 600 से 1000 ग्राम N (आयु अनुसार) और P, K, जिंक/आयरन/मैंगनीज़ का सूक्ष्म पोषक छिड़काव; पाले से पहले सिंचाई | दो छँटाई वाले क्षेत्रों में खाद छँटाई के बाद; टपक सिंचाई; फूल और फल बनने के समय पर्याप्त नमी |
| विशेष क्रियाएँ | बहार नियमन: अम्बे बहार (फूल जनवरी-फरवरी, फल नवंबर-दिसंबर), मृग बहार (फूल जून-जुलाई, फल दिसंबर-फरवरी), हस्त बहार (फूल सितंबर-अक्टूबर, फल फरवरी-मार्च)। पानी रोककर या जड़ें खोलकर बहार तय की जाती है | ट्रेनिंग: बोवर (पंडाल), टेलीफोन, Y-ट्रेलिस, हेड। छँटाई: उष्ण क्षेत्रों में वर्ष में दो बार (पीछे की छँटाई और फल की छँटाई)। GA3 से गुच्छे लंबे करना और दानों का आकार बढ़ाना (थॉम्पसन सीडलेस), गर्डलिंग |
| कटाई और उपज | किस्म अनुसार लगभग 15 से 30 टन/हे.। पेड़ पर पूर्ण रंग आने पर तुड़ाई | TSS लगभग 20 से 22°ब्रिक्स पर तुड़ाई; थॉम्पसन सीडलेस में लगभग 25 से 30 टन/हे. |
| विकार | फल झड़ना, दानेदार होना (Granulation), फल फटना, क्रीज़िंग, जिंक की कमी से छोटी पत्ती, डाईबैक, गमोसिस | बेरी का झड़ना (Shatter), शॉट बेरी (Millerandage), फल फटना, गुच्छा सड़न |
भाग 5: अमरूद, लीची, पपीता और चीकू (टॉपिक 6 और 7)
| बिंदु | अमरूद (Psidium guajava) | लीची (Litchi chinensis) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | उष्णकटिबंधीय अमेरिका। बहुत मज़बूत फल, उष्ण और उपोष्ण में कम पानी में भी | दक्षिण चीन। उपोष्ण; फूल के लिए शुष्क-ठंडी सर्दी, फल बनने के समय आर्द्रता। बिहार (मुज़फ्फरपुर), प. बंगाल, उत्तराखंड, पंजाब |
| मिट्टी | लगभग हर मिट्टी (pH 4.5 से 8.2), दोमट सर्वोत्तम | गहरी, ह्यूमस-युक्त दोमट; pH लगभग 5.5 से 7.5; जड़ों के साथ माइकोराइज़ा का सहजीवन आवश्यक |
| किस्में | इलाहाबाद सफेदा, लखनऊ-49 (सरदार), अर्का मृदुला, अर्का अमूल्य, ललित (लाल गूदा), श्वेता, हिसार सफेदा, हिसार सुरखा | शाही, चाइना, रोज़ सेंटेड, पूर्बी, लेट लार्ज रेड, कलकतिया, बेदाना |
| प्रवर्धन | गूटी (Air layering), भेंट कलम, पैच बडिंग, सॉफ्टवुड ग्राफ्टिंग | गूटी (Air layering) |
| रोपण | लगभग 6 × 6 मीटर; सघन रोपण 3 × 3 मीटर तक | लगभग 10 × 10 मीटर |
| विशेष क्रियाएँ | बहार नियमन: अम्बे (फरवरी-मार्च, फल बरसात में, गुणवत्ता कम), मृग (जून-जुलाई, फल सर्दी में, उत्तम गुणवत्ता), हस्त (अक्टूबर)। उत्तर भारत में बरसाती फसल रोककर सर्दी की फसल ली जाती है (पानी रोकना, जड़ें उघाड़ना) | बाग में माइकोराइज़ा बनाए रखने के लिए पुराने लीची बाग की मिट्टी पौध के साथ गड्ढे में डालना; फल बनने के समय नियमित और एकसमान नमी |
| कटाई और उपज | अमरूद के फलों में रंग हरे से हल्के पीले होने पर तुड़ाई। उपज लगभग 20 से 25 टन/हे. | मई-जून में, चमकदार लाल छिलके और चिकने उभार पर तुड़ाई, गुच्छे के साथ। उपज किस्म अनुसार लगभग 8 से 15 टन/हे. |
| विकार | उकठा रोग, फल मक्खी, फल फटना | फल फटना (अनियमित सिंचाई और अचानक नमी), फल झड़ना, सनबर्न |
| बिंदु | पपीता (Carica papaya) | चीकू (Manilkara zapota) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | उष्णकटिबंधीय अमेरिका (मेक्सिको क्षेत्र)। गर्म, 22 से 26°C उत्तम; पाला और जल भराव घातक | मध्य अमेरिका (मेक्सिको-युकाटन)। गर्म आर्द्र उष्णकटिबंधीय, कठोर पेड़; गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु में |
| मिट्टी | हल्की, उपजाऊ, अच्छा जल निकास | गहरी, अच्छे जल निकास वाली; कुछ लवणता सहनशील |
| किस्में | पूसा डेलीशियस, पूसा मजेस्टी (गाइनोडायोशियस), पूसा ड्वार्फ, पूसा जायंट, पूसा नन्हा (अति बौनी), CO-2 (पपेन के लिए), कूर्ग हनी ड्यू, रेड लेडी (उभयलिंगी), वाशिंगटन | कालीपत्ती (सर्वश्रेष्ठ), क्रिकेट बॉल, पाला, DHS-1, DHS-2, CO-1, CO-2, CO-3, PKM-1 |
| प्रवर्धन | बीज। बीज दर लगभग 250 से 300 ग्राम/हे.; क्यारी या पॉलीबैग में पौध | भेंट कलम या सॉफ्टवुड ग्राफ्टिंग खिरनी (Manilkara hexandra) मूलवृंत पर |
| रोपण | लगभग 1.8 × 1.8 मीटर (लगभग 3,086 पौधे) या 2 × 2 मीटर (2,500 पौधे)। हर गड्ढे में 2 से 3 पौधे रखकर फूल आने पर मादा/उभयलिंगी रखना, 10% नर पौधे परागण के लिए (द्विलिंगी किस्मों में) | लगभग 8 × 8 से 10 × 10 मीटर; सघन रोपण 5 से 6 मीटर |
| खाद | प्रति पौधा प्रति वर्ष लगभग 200 से 250 ग्राम N, 200 से 250 ग्राम P2O5 और 250 से 500 ग्राम K2O, 6 किस्तों में | गोबर खाद और संतुलित NPK, आयु के साथ बढ़ाते हुए |
| विशेष क्रियाएँ | लैंगिक रूप: द्विलिंगी (Dioecious), गाइनोडायोशियस और उभयलिंगी। पपेन के लिए कच्चे फल पर सुबह बाँस की चाकू से खुरचकर दूध (लेटेक्स) निकालना | धीमी वृद्धि, पुष्पन और फल विकास में लंबा समय; पकने की पहचान: खरोंचने पर हरा रंग न दिखे, छिलका भूरा, दूध कम |
| कटाई और उपज | रोपण के लगभग 9 से 10 महीने बाद फल; पीली धारी दिखने पर तुड़ाई। उपज लगभग 50 से 100 टन/हे. (अच्छे प्रबंधन में) | उपज लगभग 10 से 20 टन/हे. (ग्राफ्टेड बाग) |
| विकार | पपीता रिंगस्पॉट विषाणु (PRSV) और पर्ण कुंचन विषाणु; गर्मी में नर पुष्प/बंध्यता और कार्पेलॉइडी, फल झड़ना; जड़ सड़न | फल झड़ना, पत्ती धब्बे |
भाग 6: शीतोष्ण फल (टॉपिक 8, 9, 10)
सेब (टॉपिक 8)
| बिंदु | सेब (Malus domestica) |
|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | दक्षिण-पूर्व यूरोप और मध्य एशिया। शीतोष्ण; शीत की माँग (Chilling requirement): प्रसुप्ति तोड़ने के लिए 7°C से नीचे लगभग 1000 से 1500 घंटे (किस्म अनुसार); हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, लगभग 1500 से 2700 मीटर ऊँचाई |
| मिट्टी | गहरी, अच्छे जल निकास वाली दोमट; pH लगभग 5.5 से 6.5 |
| किस्में | रेड डेलिशियस (और स्पर किस्में: स्टार्किंग डेलिशियस, ऑरेगन स्पर, रेड चीफ, सुपर चीफ), गोल्डन डेलिशियस, रॉयल डेलिशियस, अम्ब्री, अगेती: टाइडमैन अर्ली वॉर्सेस्टर, बेनोनी। परागणकर्ता किस्में: गोल्डन डेलिशियस आदि |
| मूलवृंत और प्रवर्धन | बीजू मूलवृंत (क्रैब एप्पल) और क्लोनल: M-9 (अति बौना), M-26 (बौना), MM-106 (अर्ध-ओजस्वी), MM-111। कलम से (टंग/ग्राफ्ट, T-बडिंग) |
| रोपण | दिसंबर से फरवरी में प्रसुप्ति में। बीजू मूलवृंत पर लगभग 6 से 8 मीटर, अर्ध-बौने पर लगभग 4 से 5 मीटर, सघन रोपण में लगभग 3 × 1 से 3 × 1.5 मीटर |
| ट्रेनिंग और छँटाई | संशोधित केंद्रीय अक्ष (Modified central leader) प्रणाली; स्पर बनने की व्यवस्था, हल्की छँटाई |
| विशेष क्रियाएँ | परागण: परपरागण आवश्यक, इसलिए परागणकर्ता किस्में और मधुमक्खी के छत्ते लगाना; फल विरलन (Thinning) |
| कटाई और उपज | जुलाई से अक्टूबर। उपज लगभग 10 से 20 टन/हे., सघन बाग में अधिक |
| विकार | बिटर पिट (कैल्शियम की कमी), वाटर कोर, रसेटिंग, द्विवार्षिक फलन, सनबर्न; रोग: स्कैब |
| बिंदु | नाशपाती (Pyrus spp.) | आड़ू (Prunus persica) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | चीन (एशियाई नाशपाती P. pyrifolia) और यूरोप (यूरोपीय P. communis)। शीतोष्ण से उपोष्ण, कम शीत वाली किस्में मैदानों में | चीन। शीतोष्ण से उपोष्ण; कम शीत वाली किस्में (लगभग 100 से 400 घंटे) मैदानों में उगती हैं; फूल पाले में नष्ट हो सकते हैं |
| किस्में | पत्थरनख (मैदानी), बगूगोशा, पंजाब ब्यूटी, पंजाब नेक्टर, लेकॉन्ट, स्मिथ, कीफर (पाककला के लिए), बार्टलेट, विलियम्स | शान-ए-पंजाब, प्रताप, शरबती, फ्लोर्डा प्रिंस, फ्लोर्डासन, अर्ली ग्रांडे, जुलाई एल्बर्टा, अलेक्ज़ेंडर |
| मूलवृंत और प्रवर्धन | कैंथ (Pyrus pashia) उत्तर भारत में; क्विंस (बौना, संगतता पर ध्यान)। T-बडिंग या ग्राफ्टिंग | आड़ू के बीजू मूलवृंत पर T-बडिंग |
| रोपण और ट्रेनिंग | लगभग 6 × 6 या 5 × 5 मीटर; केंद्रीय अक्ष (Central leader) प्रणाली | लगभग 5 × 5 से 6 × 6 मीटर; खुले केंद्र/वास (Open centre) प्रणाली; प्रति वर्ष कड़ी छँटाई आवश्यक, क्योंकि फल पिछले वर्ष की नई शाखाओं पर बनते हैं |
| विशेष क्रियाएँ | परपरागण वाली किस्में लगाना | फल विरलन (Thinning) से आकार बढ़ाना |
| कटाई और उपज | जुलाई-अगस्त (किस्म अनुसार)। उपज लगभग 15 से 25 टन/हे. | मैदानों में अप्रैल से जून। उपज लगभग 15 से 20 टन/हे. |
| विकार | बोरॉन की कमी से स्टोनी पिट और कठोर फल; कॉर्क स्पॉट; रोग: फायर ब्लाइट | गुठली फटना (Split pit), फल फटना, गमोसिस; रोग: पत्ती कुंचन (Taphrina deformans) |
| बिंदु | अखरोट (Juglans regia) | बादाम (Prunus dulcis) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | फारस और दक्षिण-पूर्व यूरोप-एशिया क्षेत्र। शीतोष्ण, सर्दी में शीत आवश्यक; जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड | मध्य और पश्चिम एशिया। हल्की सर्दी, गर्म शुष्क गर्मी; जल्दी फूलने के कारण पाला हानिकारक; कश्मीर |
| मिट्टी | गहरी, उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली; जल भराव हानिकारक | हल्की, अच्छे जल निकास वाली, जल भराव असहनीय |
| किस्में | गोविंद, यूरेका, ओपेक्स कॉल्चरी, लेक इंग्लिश, हार्टले | नॉन पैरेल, नी प्लस अल्ट्रा, ड्रेक, मर्सिड, वारिस, मखदूम |
| प्रवर्धन | अधिकतर बीजू; उन्नत पौधे पैच बडिंग या विप ग्राफ्टिंग से | कड़वा बादाम या आड़ू के मूलवृंत पर बडिंग |
| रोपण | लगभग 10 × 10 से 12 × 12 मीटर | लगभग 6 × 6 से 8 × 8 मीटर |
| विशेष क्रियाएँ | हेटेरोडाइकोगैमी: नर और मादा फूल अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं (प्रोटैंड्री/प्रोटोगाइनी), इसलिए भिन्न किस्में साथ लगाना ज़रूरी | स्वबंध्यता: एक किस्म खुद परागित नहीं होती, इसलिए परपरागण वाली किस्में साथ में; परागण के लिए मधुमक्खियाँ |
| कटाई और उपज | बाहरी हरे छिलके के फटने पर कटाई, फिर छीलकर सुखाना; फलन बहुत देर से शुरू | बाहरी छिलके (Hull) के फटने पर कटाई, फिर सुखाना। पूरी उपज पौधा लगने के कई साल बाद |
भाग 7: लघु फल (टॉपिक 11, 2 लेक्चर)
| बिंदु | खजूर (Phoenix dactylifera) | बेर (Ziziphus mauritiana) | आँवला (Phyllanthus emblica) |
|---|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | फारस की खाड़ी और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र। गर्म, शुष्क गर्मी और हल्की सर्दी; फल पकते समय बारिश हानिकारक। राजस्थान और कच्छ में सफल | भारत और इंडो-मलेशिया क्षेत्र। अत्यंत सूखा सहनशील, राजस्थान और शुष्क क्षेत्रों में | भारत। सूखा और लवणता सहनशील, कठोर वृक्ष |
| किस्में | मेडजूल, बरही, खलास, खदरावी, शमरान, हलावी, ज़ाहिदी | गोला, सेब, उमरान (अधिक उपज), काइथली, मुंडिया, बनारसी कड़ाका, थार भूभराज | बनारसी, चकैया, फ्रांसिस (हाथी झूल), NA-6, NA-7, NA-10, कृष्णा, कंचन |
| प्रवर्धन | चूषक (Offshoots) और ऊतक संवर्धन पौध | जंगली बेर के बीजू पर पैच/कली बडिंग (जून-जुलाई) | पैच बडिंग, स्टोन ग्राफ्टिंग |
| रोपण और दूरी | लगभग 8 × 8 से 9 × 9 मीटर | लगभग 6 × 6 से 8 × 8 मीटर | लगभग 8 × 8 से 10 × 10 मीटर |
| विशेष क्रियाएँ | द्विलिंगी (Dioecious), इसलिए हाथ से परागण (लगभग 1 नर पेड़ से 30 से 40 मादा); घौद विरलन, बरसात से पहले घौद ढकना | कड़ी छँटाई: फल नई शाखाओं पर लगते हैं, इसलिए सुषुप्तावस्था (मई-जून) में छँटाई | एक ही शाखा पर नर और मादा फूल; फल गिरने वाली नई टहनियों के कक्ष में |
| कटाई | अवस्थाएँ: किमरी (कच्चा हरा), खलाल (पूर्ण रंग, कुरकुरा), रुतब (मुलायम पका), तमर (सूखा) | फरवरी-मार्च; उपज लगभग 15 से 25 टन/हे. तक | उपज लगभग 10 से 20 टन/हे.। देर से तुड़ाई पर फल गिरना |
| विकार | बरसात में फल सड़ना और फटना | चूर्णिल आसिता, फल मक्खी | फल का आंतरिक परिगलन (बोरॉन की कमी), रस्ट |
| बिंदु | सीताफल / कस्टर्ड एप्पल (Annona squamosa) | बेल (Aegle marmelos) | स्ट्रॉबेरी (Fragaria × ananassa) |
|---|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | उष्णकटिबंधीय अमेरिका। शुष्क, उष्ण; पर्णपाती और सूखा सहनशील | भारत। अत्यंत कठोर, शुष्क पर्णपाती, कंकरीली मिट्टी में भी | यूरोप-अमेरिका (उद्यान संकर)। ठंडी जलवायु, मैदानों में सर्दी की फसल |
| किस्में | बालानगर, मैमथ, रेड सीताफल, अर्का सहान, फुले पुरंदर, NMK-1 (गोल्डन) | नरेंद्र बेल-5, पंत अपर्णा, CISH बेल-1, गोंडा | चांडलर, स्वीट चार्ली, कैमारोसा, टायोगा, ऑफ्रा, विंटर डॉन, पूसा गौरव |
| प्रवर्धन | बीज, कली बडिंग और सॉफ्टवुड ग्राफ्टिंग | बीज, जड़ चूषक, कली बडिंग | रनर (Runners) |
| रोपण | लगभग 5 × 5 से 6 × 6 मीटर | लगभग 8 × 8 से 10 × 10 मीटर | सितंबर-अक्टूबर में, ऊँची क्यारियों पर काले प्लास्टिक मल्च के साथ। दूरी लगभग 30 × 30 से 60 × 30 सेमी |
| खास बातें | पुष्प प्रोटोगाइनस (मादा पहले परिपक्व), इसलिए हाथ से परागण से फल बैठना बढ़ता है; कटाई जब खाँचे (सीवन) अलग होने लगें | कठोर आवरण वाला फल; शरबत और मुरब्बे के लिए, औषधीय महत्व | उपज लगभग 15 से 25 टन/हे.; खराब परागण से विकृत फल; फल जल्दी खराब, इसलिए सावधानी से तुड़ाई |
भाग 8: अनानास और अनार (टॉपिक 12)
| बिंदु | अनानास (Ananas comosus) | अनार (Punica granatum) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | ब्राज़ील-पैराग्वे क्षेत्र। आर्द्र उष्णकटिबंधीय, लगभग 22 से 32°C; वर्षा लगभग 1000 से 1500 मिमी। उत्तर-पूर्व भारत, केरल, पश्चिम बंगाल | ईरान-अफगानिस्तान क्षेत्र। शुष्क और अर्ध-शुष्क, गर्म शुष्क गर्मी, हल्की सर्दी; सूखा और लवणता सहनशील। राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक |
| मिट्टी | अम्लीय (pH लगभग 5 से 6), जल निकास वाली रेतीली दोमट; उथली जड़ें | जल निकास वाली हल्की से मध्यम मिट्टी; pH लगभग 6.5 से 7.5 |
| किस्में | क्यू (Kew), क्वीन, मॉरीशस | गणेश, मृदुला, भगवा (केसर), अरक्ता, रूबी, जोधपुर रेड, जालोर सीडलेस |
| प्रवर्धन | चूषक (Suckers), स्लिप्स, क्राउन | कठोर कलम (Hardwood cuttings), गूटी |
| रोपण | दोहरी पंक्ति में, पौधे लगभग 25 से 30 सेमी, पंक्ति 60 से 90 सेमी (उच्च घनत्व) | लगभग 4.5 × 3 से 5 × 3 मीटर या 6 × 6 मीटर |
| विशेष क्रियाएँ | पुष्पन प्रेरण: एथ्रेल (लगभग 50 ppm) + यूरिया के घोल का छिड़काव से एक साथ फूल बैठाना | बहार नियमन: अम्बे (जनवरी-फरवरी), मृग (जून-जुलाई), हस्त (सितंबर-अक्टूबर) में से एक बहार चुनना, जैसे सिंचाई और जलवायु अनुसार; पानी और खाद का नियंत्रण |
| कटाई और उपज | रोपण के लगभग 12 से 18 महीने में; फल पर आँखें चपटी और रंग पीला होने पर; उपज लगभग 40 से 60 टन/हे. | फूल से लगभग 5 से 6 महीने में फल तैयार; उपज लगभग 8 से 12 टन/हे. |
| विकार | बहुमुकुट फल (Multiple crowns), सनबर्न, भंडारण में आंतरिक भूरापन | फल फटना (अनियमित सिंचाई, बोरॉन की कमी), फल छेदक, जीवाणु अंगमारी |
भाग 9: बागान फसलें (टॉपिक 13, 14, 15)
नारियल और काजू (टॉपिक 13)
| बिंदु | नारियल (Cocos nucifera) | काजू (Anacardium occidentale) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | प्रशांत-हिंद महासागर क्षेत्र। आर्द्र उष्णकटिबंधीय तटीय क्षेत्र, लगभग 27°C; पर्याप्त और वर्ष भर वितरित वर्षा; केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश | उत्तर-पूर्व ब्राज़ील। भारत में पुर्तगालियों द्वारा 16वीं सदी में लाया गया। उष्ण और आर्द्र तटीय पट्टी; पाला असहनीय; सूखा सहनशील; केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा, आंध्र, ओडिशा |
| मिट्टी | गहरी, अच्छे जल निकास वाली; रेतीली तटीय से दोमट; pH लगभग 5.2 से 8 | लैटेराइट, रेतीली, कम उपजाऊ मिट्टी भी; जल भराव असहनीय |
| किस्में | लंबी (Tall): वेस्ट कोस्ट टॉल, ईस्ट कोस्ट टॉल, तिपटूर टॉल। बौनी: चौघाट ऑरेंज ड्वार्फ, गंगाबोंडम, मलायन येलो ड्वार्फ। संकर (T × D): चंद्रसंकरा, लक्षगंगा, केरासंकरा | वेंगुर्ला-1 से 7, भास्कर, उल्लाल-1 और 3, मडक्कथरा-1 और 2, धना, कनका, प्रियंका |
| प्रवर्धन और रोपण | बीज नारियल (Seed nuts) उच्च उपज वाले मातृ वृक्षों से चुने जाते हैं। 9 से 12 महीने की पौध (6 से 8 पत्तियाँ)। गड्ढा लगभग 1 × 1 × 1 मीटर, दूरी लगभग 7.5 × 7.5 मीटर त्रिकोणीय (लगभग 177 पौधे/हे.)। रोपण मानसून में | सॉफ्टवुड/एपिकोटिल ग्राफ्टिंग और गूटी। दूरी लगभग 7.5 × 7.5 से 8 × 8 मीटर; सघन रोपण लगभग 4 × 4 मीटर |
| खाद और सिंचाई | वयस्क पौधे को प्रति वर्ष लगभग 500 ग्राम N, 320 ग्राम P2O5 और 1200 ग्राम K2O, दो किस्तों में; थाला/टपक सिंचाई; अंतरवर्ती फसलें: केला, कंद फसलें, मसाले, फलदार पेड़ | पौध लगाने के बाद शुरू के वर्षों में पोषण और सिंचाई; पुराने पेड़ों की छँटाई; सूखे में भी चल जाता है |
| कटाई और उपज | लंबी किस्में 5 से 6 साल, बौनी और संकर 3 से 4 साल बाद फल। लगभग हर 45 दिन में कटाई। उत्पाद: कोपरा (सूखी गिरी), तेल, नारियल पानी | गिरे हुए पके मेवों (नट) को चुनकर सुखाना। काजू सेब (Cashew apple) असली फल नहीं, मांसल पुष्पवृंत (छद्म फल) है; असली फल गुर्दे जैसा नट है। उपज उन्नत किस्मों में लगभग 1 से 2 टन/हे. |
| विकार और समस्याएँ | बटन झड़ना, अपरिपक्व नट झड़ना; रोग: कली सड़न, पत्ती सड़न, जड़ मुरझान; कीट: गैंडा भृंग, लाल ताड़ घुन | चाय मच्छर बग (Tea mosquito bug) प्रमुख कीट, तना और जड़ भेदक |
सुपारी और रबर (टॉपिक 14)
| बिंदु | सुपारी (Areca catechu) | रबर (Hevea brasiliensis) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | मलेशिया-दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र। आर्द्र उष्णकटिबंधीय, अधिक वर्षा; छोटे पौधों को छाँव; कर्नाटक, केरल, असम | अमेज़न बेसिन (ब्राज़ील)। आर्द्र उष्णकटिबंधीय, लगभग 25 से 34°C, वर्षा लगभग 2000 से 2500 मिमी; केरल सबसे बड़ा उत्पादक, साथ में तमिलनाडु, कर्नाटक, त्रिपुरा, असम |
| मिट्टी | लैटेराइट और दोमट, अच्छा जल निकास | गहरी, अच्छे जल निकास वाली लैटेराइट, pH लगभग 4.5 से 6.5 |
| किस्में | मंगला, सुमंगला, श्रीमंगला, मोहितनगर | RRII 105 (सर्वाधिक लोकप्रिय), RRII 118, RRII 414, RRII 417, GT-1, PB 235, PB 260 |
| प्रवर्धन और रोपण | बीज (पके फल) से पौध। दूरी लगभग 2.7 × 2.7 मीटर (लगभग 1,370 पौधे/हे.)। केला जैसे अंतरवर्ती पौधे छाया देते हैं | कली लगे ठूँठ (Budded stumps), हरी कली (Green budding), पॉलीबैग पौध। दूरी लगभग 4.9 × 4.9 मीटर या लगभग 450 पेड़/हे. |
| कटाई और उपज | पके नारंगी-लाल फल तोड़कर सुखाना; उपज लगभग 2 से 3 टन सूखी सुपारी/हे. (किस्म अनुसार) | टैपिंग: छाल का एक पतला हिस्सा काटकर लेटेक्स निकालना। पेड़ का घेरा लगभग 50 सेमी (भूमि से 125 सेमी पर) होने पर, लगभग 6 से 7 साल बाद। आधा सर्पिल, एक दिन छोड़कर (S/2 d/2), सुबह जल्दी (टर्गर अधिक होने से अधिक लेटेक्स)। उपज लगभग 1500 से 2000 किग्रा सूखा रबर/हे./वर्ष। लेटेक्स को अम्ल (फॉर्मिक या एसिटिक अम्ल) से जमाकर शीट बनाना |
| विकार और रोग | कोलेरोगा (फल सड़न), पीली पत्ती रोग (फाइटोप्लाज्मा), बटन झड़ना | टैपिंग पैनल सूखना (Tapping panel dryness), असामान्य पत्ती गिरना (Phytophthora), चूर्णिल आसिता, पिंक रोग |
चाय और कॉफी (टॉपिक 15)
| बिंदु | चाय (Camellia sinensis) | कॉफी (Coffea spp.) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति और जलवायु | असम, उत्तरी म्यांमार और दक्षिण-पूर्व चीन क्षेत्र। गर्म और आर्द्र, लगभग 18 से 30°C; वर्षा लगभग 1250 से 3000 मिमी; असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग, डूआर्स, तराई), नीलगिरि, केरल | अरेबिका (C. arabica, इथियोपिया): लगभग 15 से 25°C, ऊँचाई लगभग 1000 से 1500 मीटर, उत्कृष्ट गुणवत्ता। रोबस्टा (C. canephora, कांगो-पश्चिम अफ्रीका): लगभग 20 से 30°C, कम ऊँचाई, अधिक सहनशील। कर्नाटक (चिकमगलूर, कूर्ग), केरल (वायनाड), तमिलनाडु |
| मिट्टी | अम्लीय (pH लगभग 4.5 से 5.5), गहरी, जल निकास वाली | गहरी ह्यूमस-युक्त दोमट, pH लगभग 6 से 6.5 (मुख्यतः थोड़ी अम्लीय) |
| किस्में और जाति | असम प्रकार (var. assamica) और चाइना प्रकार (var. sinensis); क्लोन: TV-1, TV-2 (टोकलाई वेजिटेटिव), UPASI क्लोन | अरेबिका: केंट्स, S.795, कावेरी, चंद्रगिरि, Sln.9, Sln.5B। रोबस्टा: S.274, CxR |
| प्रवर्धन | वानस्पतिक (एकल पत्ती कटिंग) (क्लोनल) और बीज | अरेबिका बीज से (स्वपरागित); रोबस्टा अक्सर क्लोन से (परपरागित) |
| रोपण और छाँव | पंक्ति दूरी लगभग 1.2 मीटर, पौधे लगभग 0.6 से 0.75 मीटर; छाँव वृक्ष (जैसे अल्बीज़िया) लगाना | अरेबिका लगभग 2 × 2 मीटर; रोबस्टा लगभग 2.7 × 2.7 मीटर; छाँव (सिल्वर ओक, एरिथ्रिना) |
| खाद और विशेष क्रियाएँ | नाइट्रोजन की बड़ी मात्रा (लगभग 100 से 200 किग्रा/हे. प्रति वर्ष, किस्तों में); छँटाई: हर कुछ वर्षों में (प्रूनिंग चक्र) | ब्लॉसम शावर: मार्च-अप्रैल में फूल निकलने के लिए छिड़काव सिंचाई |
| कटाई | "दो पत्ती और एक कली" (Fine plucking) तोड़ना, लगभग 7 से 10 दिन के अंतर पर (नई पत्तियों की नई फ्लश के अनुसार) | पके लाल चेरी चुनना (नवंबर से मार्च) |
| प्रसंस्करण | चाय बनाना: विदरिंग (मुरझाना) → रोलिंग (CTC या ऑर्थोडॉक्स) → किण्वन/ऑक्सीकरण → सुखाना → ग्रेडिंग। हरी चाय में किण्वन नहीं | गीली विधि: गूदा निकालना → किण्वन → धोना → सुखाना → पार्चमेंट कॉफी (अरेबिका); सूखी विधि: पूरी चेरी सुखाना (रोबस्टा)। फिर भूनना (Roasting) |
| उपज | लगभग 1800 से 2500 किग्रा बनी चाय/हे. (औसत) | लगभग 800 से 1000 किग्रा साफ कॉफी/हे. (औसत) |
| रोग और कीट | ब्लिस्टर ब्लाइट (Exobasidium vexans), लाल रस्ट (Cephaleuros parasiticus); चाय मच्छर बग (Helopeltis), लाल मकड़ी (माइट) | कॉफी पत्ती रस्ट (Hemileia vastatrix), बेरी बोरर, सफेद तना छेदक |
राजस्थान के लिए कौन-सा फल? (एक नज़र)
| क्षेत्र / स्थिति | उपयुक्त फल |
|---|---|
| नहरी और सिंचित क्षेत्र (जैसे श्रीगंगानगर) | किन्नू, माल्टा, संतरा, अमरूद, बेर |
| शुष्क, कम पानी वाले क्षेत्र | अनार, बेर, आँवला, बेल, सीताफल, खजूर |
| लवणीय और रेतीली ज़मीन | खजूर, अनार, बेर (किस्म अनुसार) |
| दक्षिणी राजस्थान (अधिक वर्षा क्षेत्र) | आम, पपीता, अमरूद, नींबू वर्ग |
यह सामान्य मार्गदर्शन है। स्थानीय मिट्टी-पानी की जाँच और विशेषज्ञ सलाह के बाद ही बाग लगाएँ।
प्रैक्टिकल की झलक
सिलेबस की छवि में केवल थ्योरी दिखाई गई है। फल उत्पादन के प्रैक्टिकल सामान्यतः इस प्रकार के होते हैं (अपने विश्वविद्यालय की सूची से मिलान कर लें):
- फल और बागान फसलों की किस्मों की पहचान।
- बाग का नक्शा और रोपण पद्धतियाँ (वर्गाकार, षट्कोणीय) की गणना।
- कलम बाँधने और प्रवर्धन की विधियाँ: भेंट कलम, टी-बडिंग, पैच बडिंग, गूटी, कठोर कलम।
- छँटाई और ट्रेनिंग के अभ्यास (आम, अंगूर, सेब, आड़ू)।
- खाद की मात्रा निकालना और बाग में खाद देने के तरीके।
- बहार नियमन, पुष्पन नियंत्रण और फल विरलन का अवलोकन।
- बागान फसलों (चाय, कॉफी, रबर, नारियल) का प्रसंस्करण देखना।
सोचिए और हल कीजिए
प्रश्न 1: किन्नू को 6 × 6 मीटर पर लगाएँ तो प्रति हेक्टेयर कितने पौधे? उत्तर: 10,000 ÷ 36 = लगभग 278
प्रश्न 2: अनार 5 × 3 मीटर पर लगाएँ तो प्रति हेक्टेयर कितने पौधे? उत्तर: 10,000 ÷ 15 = लगभग 667
प्रश्न 3: एक बाग की सकल आय ₹3,00,000 और कुल लागत ₹1,00,000 हो तो लाभ-लागत अनुपात? उत्तर: 3,00,000 ÷ 1,00,000 = 3 : 1
परीक्षा के लिए कैसे लिखें और याद रखें
- हर फल के उत्तर में क्रम रखें: उत्पत्ति और जलवायु, मिट्टी, किस्में, प्रवर्धन, रोपण और दूरी, खाद और सिंचाई, विशेष क्रियाएँ, कटाई और उपज, विकार।
- वैज्ञानिक नाम इटैलिक में लिखें और प्रवर्धन की विधि का नाम स्पष्ट लिखें (जैसे आम: भेंट कलम; नींबू वर्ग: टी-बडिंग; अमरूद और लीची: गूटी)।
- विकार जोड़ी: आम का ब्लैक टिप और एकांतर फलन; सेब का बिटर पिट (कैल्शियम); लीची और अनार का फल फटना; पपीता में पाला-जल भराव घातक।
- बहार नियमन के तीन नाम और महीने: अम्बे (जन-फर), मृग (जून-जुलाई), हस्त (सितंबर-अक्टूबर)। यह नींबू वर्ग, अमरूद और अनार में पूछा जाता है।
- शीत की माँग वाले फल (सेब, नाशपाती, आड़ू, अखरोट, बादाम) और द्विलिंगी (खजूर, पपीता की कुछ किस्में) अलग से याद करें।
- बागान फसलों में प्रसंस्करण का क्रम: चाय (विदरिंग से ग्रेडिंग), कॉफी (गीली और सूखी विधि), रबर (टैपिंग और जमाव), नारियल (कोपरा)।
महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. आम के किस संकर को दशहरी × नीलम से बनाया गया है? (अ) मल्लिका (ब) आम्रपाली (स) रत्ना (द) अर्का अरुणा। उत्तर: ब
Q2. सेब में बिटर पिट किस तत्व की कमी से होता है? (अ) बोरॉन (ब) कैल्शियम (स) जिंक (द) मैग्नीशियम। उत्तर: ब
Q3. चीकू का मूलवृंत कौन-सा है? (अ) खिरनी (ब) आँवला (स) बेर (द) जामुन। उत्तर: अ
Q4. खजूर किस प्रकार का पौधा है? (अ) उभयलिंगी (ब) द्विलिंगी (Dioecious) (स) एकलिंगाश्रयी (द) बाँझ। उत्तर: ब
Q5. रबर की सबसे लोकप्रिय क्लोन कौन-सी है? (अ) PB 235 (ब) GT-1 (स) RRII 105 (द) RRII 414। उत्तर: स
Q6. बेर की कड़ी छँटाई कब की जाती है? (अ) फल लगने के समय (ब) सुषुप्तावस्था (मई-जून) (स) सर्दियों में (द) कटाई के तुरंत बाद। उत्तर: ब
Q7. अनानास में एकसाथ फूल लाने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है? (अ) एथ्रेल (ब) 2,4-D (स) GA3 (द) साइकोसिल। उत्तर: अ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: मूलवृंत और कलम (Scion) में क्या अंतर है?
उत्तर: मूलवृंत जड़ वाला निचला भाग है जो मिट्टी की परिस्थितियाँ और वृक्ष का ज़ोर तय करता है, जबकि कलम ऊपर का भाग है जिससे फल की किस्म तय होती है।
प्रश्न: एकांतर फलन (Alternate bearing) क्या है?
उत्तर: जब वृक्ष एक वर्ष अधिक फल और दूसरे वर्ष बहुत कम फल देता है, जैसे दशहरी आम में।
प्रश्न: बहार नियमन क्यों किया जाता है?
उत्तर: ताकि फल उस मौसम में आएँ जब गुणवत्ता और दाम सबसे अच्छे हों और पौधे पर बार-बार फूल आने से बचाव हो।
प्रश्न: केले में डीसकरिंग क्यों ज़रूरी है?
उत्तर: अनावश्यक चूषक मुख्य पौधे से पोषण छीनते हैं, इसलिए उन्हें हटाकर एक ताकतवर अनुयायी रखा जाता है।
प्रश्न: चाय में "दो पत्ती और एक कली" का क्या अर्थ है?
उत्तर: उच्च गुणवत्ता की चाय के लिए शाखा के सिरे की एक कली और उसके नीचे की दो कोमल पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं।
प्रश्न: काजू सेब और काजू नट में क्या अंतर है?
उत्तर: काजू सेब मांसल पुष्पवृंत (छद्म फल) है, जबकि असली फल उसके नीचे लटकने वाला गुर्दे के आकार का नट है।
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आगे पढ़ने के लिए
संदर्भ पुस्तकें: Chadha, Handbook of Horticulture (ICAR); Bose, Mitra और अन्य, Fruits: Tropical and Subtropical; Singh, Fruits of India; Kumar, Plantation Crops; ICAR के प्रकाशन, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज़ और ICAR e-course।
लेखक की टिप्पणी: यह लेख सिलेबस के आधार पर मौलिक रूप से तैयार किया गया है। गणना के उदाहरण (विशेषकर आय-लागत) काल्पनिक हैं। किस्मों की सूची, दूरी, खाद की मात्रा और उपज के आँकड़े क्षेत्र और समय के अनुसार बदलते रहते हैं, इसलिए प्रकाशित करने या बाग लगाने से पहले अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालय और बागवानी विभाग की नवीनतम सिफारिश और सरकारी आँकड़ों से जाँच लें।
