फल एवं सब्जियों का कटाई-उपरांत प्रबंधन और मूल्य संवर्धन (Post-harvest Management and Value Addition of Fruits and Vegetables) – Notes | B.Sc. Ag. Hindi & English (PDF,BOOK,PPT)

B.Sc. Agriculture ke Post-harvest Management aur Value Addition of Fruits & Vegetables ke pure syllabus ke notes: ripening, respiration, ZECC, CA stor
एक सवाल से शुरुआत: श्रीगंगानगर का एक किसान किन्नू की भरपूर फसल लेकर मंडी पहुँचता है। भाव गिरा हुआ है और ट्रक में रखे कुछ फल तीन दिन में ही सड़ने लगे हैं। वह पूछता है, "फल कब तोड़ना चाहिए था? उन्हें कितने दिन रखा जा सकता है? और भाव कम हो तो रस, स्क्वैश या कैंडी बनाकर बेचूँ तो कैसे?" इस सवाल में पूरा विषय है: सही अवस्था पर तुड़ाई, सही हैंडलिंग और भंडारण, फिर प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन।

फल एवं सब्जियों का कटाई-उपरांत प्रबंधन और मूल्य संवर्धन (Post-harvest Management and Value Addition of Fruits and Vegetables) में सिखाया जाता है कि फल-सब्जियों को कटाई के बाद नुकसान से कैसे बचाएँ और उनसे जैम, जूस, कैन और सूखे उत्पाद जैसे मूल्यवान उत्पाद कैसे बनाएँ। सिलेबस में कुल 13 टॉपिक हैं और थ्योरी के कुल 16 लेक्चर निर्धारित हैं। यह लेख सिलेबस के क्रम में नहीं, बल्कि सीखने के क्रम में बँटा है: पहले नुकसान और पकने की समझ, फिर श्वसन, तुड़ाई और भंडारण, फिर परिरक्षण के सिद्धांत और जैम-जेली-कैंडी, फिर पेय और टमाटर के उत्पाद, और अंत में सुखाना और कैनिंग। हर भाग में सिलेबस के टॉपिक नंबर लिखे हैं, ताकि आप मिलान कर सकें।

पूरी तस्वीर एक नज़र में

खेत में सही तुड़ाई→पूर्व-शीतलन, ग्रेडिंग, पैकिंग→भंडारण और परिवहन→प्रसंस्करण व परिरक्षण→पैकेजिंग व विपणन

इस श्रृंखला की किसी भी कड़ी में कमी होने पर नुकसान बढ़ता है। इसलिए हर कड़ी को तापमान, नमी और स्वच्छता की नज़र से देखें।

भाग 1: कटाई-उपरांत नुकसान और पकने की समझ (सिलेबस टॉपिक 1, 2, 3)

कटाई-उपरांत प्रसंस्करण का महत्व (टॉपिक 1)

फल और सब्जियों में 80 से 95% पानी होता है, इसलिए वे जल्दी खराब होने वाले (Perishable) हैं। कटाई के बाद भी इनमें श्वसन, वाष्पोत्सर्जन और रासायनिक बदलाव चलते रहते हैं।

  • नुकसान घटाना: उत्पादन का बड़ा हिस्सा बाज़ार तक पहुँचने से पहले खराब हो जाता है। अनुमान के अनुसार भारत में फल-सब्जियों का नुकसान लगभग 20 से 40% तक आँका जाता है।
  • उपलब्धता बढ़ाना: मौसम के बाद भी फल-सब्जी उपलब्ध रहती है।
  • मूल्य संवर्धन और आय: कच्चे माल के बजाय प्रसंस्कृत उत्पाद से बेहतर दाम, कुटीर और लघु उद्योग, रोज़गार (विशेषकर महिलाओं के लिए)।
  • मूल्यों में स्थिरता: अधिक पैदावार वाले मौसम में भाव गिरने से बचाव।
  • निर्यात और पोषण: प्रसंस्कृत उत्पादों का निर्यात, कुपोषण में कमी। सरकारी योजनाएँ जैसे प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) और PMFME इसमें सहायता करती हैं।

कटाई-उपरांत नुकसान की सीमा और संभावित कारण (टॉपिक 2)

कारण का प्रकारविवरण
शारीरिक (Physiological)श्वसन और वाष्पोत्सर्जन से वज़न और गुणवत्ता में गिरावट, अधिक पकना, अंकुरण (आलू, प्याज़), शीतलता क्षति
रोगजनित (Pathological)कवक (Penicillium, Rhizopus, Botrytis, Colletotrichum यानी एन्थ्रेक्नोज़) और जीवाणु (Erwinia, मुलायम सड़न) से सड़न
यांत्रिक (Mechanical)कटना, चोट, दबना और कंपन से फल क्षतिग्रस्त होना, जिससे सड़न का रास्ता खुलता है
कीट और जानवरफल मक्खी, कीटों और चूहों का प्रकोप
तापमान और नमीऊँचा तापमान श्वसन बढ़ाता है, कम आर्द्रता से मुरझाना, अधिक आर्द्रता से सड़न
प्रबंधन और ढाँचागलत समय पर तुड़ाई, खराब पैकिंग, प्रीकूलिंग और कोल्ड चेन की कमी, लंबी दूरी का असुविधाजनक परिवहन, बाज़ार में देरी, प्रसंस्करण इकाइयों की कमी

नुकसान घटाने के उपाय: उचित अवस्था पर तुड़ाई, कोमल हैंडलिंग, पूर्व-शीतलन, उचित पैकिंग और परिवहन, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण इकाइयाँ और किसानों का प्रशिक्षण।

कटाई-पूर्व कारक, परिपक्वता, पकना और उस दौरान के बदलाव (टॉपिक 3)

कटाई-पूर्व कारकगुणवत्ता पर असर
किस्म (Genetic)स्वाद, भंडारण क्षमता और आकार किस्म पर निर्भर
जलवायुतापमान, प्रकाश और वर्षा रंग, मिठास और बनावट को प्रभावित करते हैं
मृदा और पोषणअधिक नाइट्रोजन से भंडारण क्षमता घटती है। कैल्शियम की कमी से सेब में बिटर पिट और टमाटर में ब्लॉसम एंड रॉट। पोटाश गुणवत्ता सुधारता है
सिंचाईअधिक पानी से फल फटना और TSS में कमी, कम पानी से फल छोटे
कृषि क्रियाएँछँटाई, फल विरलन, कीट-रोग प्रबंधन और वृद्धि नियामकों का उपयोग
पौधे पर फल की स्थिति और पौधे की आयुछाया और धूप वाली शाखाओं के फलों की गुणवत्ता में फर्क
  • शारीरिक परिपक्वता (Physiological maturity): फल का पूर्ण विकास, बीज के परिपक्व होने की अवस्था।
  • बागवानी परिपक्वता (Horticultural maturity): बाज़ार और उपभोक्ता के उपयोग के लिए अनुकूल अवस्था।
  • पकना (Ripening): परिपक्वता के बाद खाने योग्य बनने की प्रक्रिया।
प्रकारविशेषताउदाहरण
क्लाइमैक्टेरिक (Climacteric)पकते समय श्वसन और एथिलीन में तेज़ वृद्धि; तोड़ने के बाद भी पक सकते हैंआम, केला, सेब, पपीता, अमरूद, सपोटा, टमाटर, नाशपाती, आड़ू, कटहल
नॉन-क्लाइमैक्टेरिक (Non-climacteric)श्वसन में अचानक वृद्धि नहीं; पौधे पर ही पकने पर गुणवत्तानींबू वर्गीय (किन्नू, संतरा), अंगूर, अनार, अनानास, लीची, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, खीरा

पकने के दौरान होने वाले बदलाव

  • रंग: क्लोरोफिल का टूटना और कैरोटिनॉइड-एंथोसायनिन बनना।
  • मिठास: स्टार्च का शर्करा में बदलना, TSS बढ़ना।
  • अम्लता: कार्बनिक अम्लों में कमी।
  • नरमी: पेक्टिन के टूटने (प्रोटोपेक्टिन से पेक्टिन) और कोशिका भित्ति के एंजाइमों (जैसे पॉलीगैलेक्टुरोनेज़) से फल नरम होना।
  • सुगंध: वाष्पशील यौगिकों का बनना।
  • कसैलापन (Astringency): टैनिन घटना।
  • एथिलीन: पकने का हार्मोन; एथेफोन (2-क्लोरोएथाइल फॉस्फोनिक अम्ल) से एथिलीन निकलता है।
सावधानी: कैल्शियम कार्बाइड से फल पकाना FSSAI द्वारा प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे बनने वाली एसिटिलीन गैस और अशुद्धियाँ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। अनुमत विकल्प नियंत्रित एथिलीन गैस (कमरे में, सीमित सांद्रता पर) और एथेफोन का तय मात्रा में उपयोग हैं।

भाग 2: श्वसन, तुड़ाई और भंडारण (सिलेबस टॉपिक 4, 5, 6)

श्वसन और उसकी दर को प्रभावित करने वाले कारक (टॉपिक 4)

श्वसन (Respiration) में शर्करा का ऑक्सीजन की उपस्थिति में टूटकर कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और ऊर्जा बनती है: C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा। इससे उत्पाद के भीतर संचित भोजन घटता है, गर्मी निकलती है (श्वसन ऊष्मा) और उत्पाद जल्दी खराब होता है।

श्वसन गुणांक (Respiratory Quotient, RQ) = निकली CO2 ÷ खपत O2।
शर्करा के लिए RQ लगभग 1; वसा और प्रोटीन के लिए 1 से कम; कार्बनिक अम्लों के लिए 1 से अधिक; अवायवीय श्वसन (O2 की कमी) में RQ बहुत अधिक हो जाता है।
कारकश्वसन दर पर असर
तापमानसबसे महत्वपूर्ण कारक। तापमान बढ़ने पर श्वसन बढ़ता है; प्रति 10°C वृद्धि पर श्वसन लगभग 2 से 3 गुना (Q10)
O2 और CO2 की मात्राO2 घटाने और CO2 बढ़ाने से श्वसन घटता है (CA/MA भंडारण का आधार)। बहुत कम O2 से अवायवीय श्वसन और दुर्गंध
एथिलीनक्लाइमैक्टेरिक फलों में श्वसन और पकना तेज़
उत्पाद का प्रकार और अवस्थाछोटे और कोमल अंगों (मटर, ब्रोकली, मशरूम) में श्वसन ऊँचा, कंद-जड़ों और सेब में कम; अपरिपक्व में अधिक
चोट और तनावकटे-फटे या रोगी उत्पाद में श्वसन बढ़ता है
सापेक्ष आर्द्रता और रसायनबहुत कम आर्द्रता से मुरझाना; कुछ रसायन (वृद्धि नियामक, मोम) श्वसन को घटा सकते हैं
हल सहित उदाहरण 1: तापमान गुणांक (Q10)
सूत्र: Q10 = (R2 ÷ R1)10 ÷ (T2 − T1), जहाँ R श्वसन दर है।
यदि 10°C पर श्वसन दर 10 मिग्रा CO2 प्रति किग्रा प्रति घंटा और 20°C पर 25 हो, तो Q10 = (25 ÷ 10)10 ÷ 10 = 2.5 × 1 = 2.5।
यानी हर 10°C तापमान बढ़ने पर श्वसन ढाई गुना हो जाता है। इसीलिए ठंडे भंडारण से फलों का जीवन बढ़ता है।

वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): उत्पाद से जल का वाष्प के रूप में निकलना, जिससे वज़न घटता है और मुरझाव आता है। यह तापमान, कम आर्द्रता और हवा से बढ़ता है।

परिपक्वता सूचकांक, तुड़ाई और खेत में हैंडलिंग (टॉपिक 5)

प्रकारउदाहरण
दृश्य (Visual)रंग का बदलना (टमाटर में ग्रीन, ब्रेकर, पिंक, रेड अवस्थाएँ), आकार और आकृति, सतह की चमक
भौतिक (Physical)कठोरता (पेनेट्रोमीटर से), आपेक्षिक घनत्व (आम में परिपक्व फल पानी या नमक के घोल में डूबता है), डंठल से अलग होने में आसानी, पौधे पर फूल के बाद दिनों की संख्या (केले में लगभग 90 से 110 दिन), केले की उँगलियों में गोलाई (Angularity)
रासायनिक (Chemical)घुलनशील ठोस (TSS) का हैंड रिफ्रैक्टोमीटर से मापन, अम्लता, TSS:अम्ल अनुपात (नींबू वर्गीय में), स्टार्च-आयोडीन परीक्षण (सेब में), रस की मात्रा
शारीरिकश्वसन दर और एथिलीन उत्पादन
गणनात्मकताप इकाइयाँ (Heat units) और पूर्ण पुष्पन के बाद के दिन

तुड़ाई (Harvesting)

  • समय: ठंडे समय पर, यानी सुबह या शाम। दोपहर की गर्मी में फल में गर्मी (Field heat) अधिक होती है।
  • तरीका: हाथ से, सिकेटियर या पिकर से। फलों को पटकें या गिराएँ नहीं। आम में लगभग 2 से 3 सेमी डंठल छोड़ें ताकि चेप (लेटेक्स) से फल पर धब्बे न पड़ें।
  • साधन: साफ बैग, प्लास्टिक के क्रेट और छायादार स्थान।

खेत में हैंडलिंग के चरण

छाया में रखना→सफाई व छँटाई→पूर्व-शीतलन→ग्रेडिंग→उपचार (वैक्सिंग, क्योरिंग)→पैकिंग व परिवहन
  • पूर्व-शीतलन (Pre-cooling): तुड़ाई के तुरंत बाद खेत की गर्मी निकालना। विधियाँ: कमरे में ठंडा करना, जबरन हवा से ठंडा करना (Forced air), पानी से ठंडा करना (Hydro-cooling), निर्वात शीतलन (पत्तेदार सब्जियों के लिए) और पैकेज में बर्फ।
  • ग्रेडिंग: आकार, रंग और गुणवत्ता के आधार पर श्रेणी में बाँटना।
  • क्योरिंग (Curing): आलू, प्याज़, लहसुन और शकरकंद में घाव सुखाकर और ऊपरी परत सुखाकर भंडारण क्षमता बढ़ाना।
  • वैक्सिंग (Waxing): नींबू वर्गीय, सेब और आम पर खाने योग्य मोम की परत, जिससे नमी कम खोती है और चमक बढ़ती है।
  • अन्य उपचार: आम में गर्म पानी उपचार (लगभग 52°C पर 5 मिनट, एन्थ्रेक्नोज़ और फल मक्खी के लिए), फफूँदनाशी में डुबोना और क्लोरीन-युक्त पानी से सफाई।
  • पैकिंग: कोरुगेटेड फाइबर बोर्ड (CFB) के डिब्बे, प्लास्टिक क्रेट, बाँस की टोकरियाँ (पारंपरिक), कुशन के लिए कागज़ या जाली।

भंडारण: ZECC, शीत भंडार, CA, MA और हाइपोबेरिक (टॉपिक 6)

विधिसिद्धांत और विवरण
ZECC (Zero Energy Cool Chamber)बिना बिजली का वाष्पीकरण शीतलन। दोहरी ईंट की दीवार वाला कक्ष, बीच का खाली स्थान रेत से भरा होता है। रेत और ऊपर की जाली-छप्पर को रोज़ पानी से भिगोया जाता है। इससे तापमान बाहर से कुछ डिग्री कम और आर्द्रता अधिक रहती है। छोटे किसानों के लिए सस्ता भंडार
शीत भंडार (Cold storage)रेफ्रिजरेशन से कम तापमान और उच्च आर्द्रता। श्वसन और रोग घटते हैं। हर उत्पाद का अपना अनुकूल तापमान
नियंत्रित वायुमंडल (CA, Controlled atmosphere)शीत भंडार में O2 घटाकर (लगभग 2 से 5%) और CO2 बढ़ाकर (लगभग 3 से 5%) लगातार निगरानी और नियंत्रण। सेब जैसे फलों को कई महीने सुरक्षित रखा जाता है
रूपांतरित वायुमंडल (MA, Modified atmosphere)पॉलीमर फिल्म की पैकिंग में उत्पाद के श्वसन से ही गैस का अनुपात बदलना (निष्क्रिय), या गैस भरना (सक्रिय)। CA जैसा पर नियंत्रण कम और लागत कम
हाइपोबेरिक (Hypobaric / निम्न दाब) भंडारणकक्ष में आंशिक निर्वात, जिससे O2 और एथिलीन दोनों घटते हैं और पकना धीमा होता है। महँगा
उत्पादअनुकूल तापमान (लगभग)
सेब0 से 4°C
आम12 से 13°C (इससे नीचे शीतलता क्षति)
केला13 से 14°C (इससे नीचे छिलका काला)
आलू (खाने के लिए)2 से 4°C
प्याज़0 से 2°C और कम आर्द्रता
याद रखें: शीतलता क्षति (Chilling injury) उष्णकटिबंधीय फलों में सुरक्षित तापमान से नीचे रखने पर होती है, यानी गड्ढे, काला पड़ना और पकने में विफलता। यह हिमांक से नीचे की जमाव क्षति (Freezing injury) से अलग है।

भाग 3: परिरक्षण के सिद्धांत, जैम-जेली और कैंडी (सिलेबस टॉपिक 7, 8, 9)

मूल्य संवर्धन की अवधारणा और परिरक्षण के सिद्धांत व विधियाँ (टॉपिक 7)

मूल्य संवर्धन (Value addition) का अर्थ है कच्चे उत्पाद को प्रसंस्करण से अधिक कीमत वाले उत्पाद में बदलना (जैसे आँवले से मुरब्बा, किन्नू से स्क्वैश)। परिरक्षण (Preservation) उत्पाद को खराब होने से रोकना है।

सिद्धांतउपाय
सूक्ष्मजीवों को दूर रखना या हटानास्वच्छता, पैकेजिंग, छानना और अपकेंद्रण (Centrifugation)
सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकनाकम तापमान, सुखाना, चीनी या नमक का घोल, अम्लता, रासायनिक परिरक्षक, हवा की कमी
सूक्ष्मजीवों को मारनाताप (पाश्चुरीकरण, निर्जर्मीकरण), विकिरण, उच्च दाब
स्वयं के एंजाइमी और रासायनिक बदलाव रोकनाब्लांचिंग (एंजाइम निष्क्रिय करना), एंटीऑक्सीडेंट
कीट और यांत्रिक क्षति से बचावउचित पैकिंग और भंडारण
विधिउदाहरण
निम्न तापमानरेफ्रिजरेशन, फ्रीज़िंग (डीप फ्रीज़)
उच्च तापमानपाश्चुरीकरण (लगभग 63°C पर 30 मिनट या लगभग 72°C पर 15 सेकंड), निर्जर्मीकरण और कैनिंग
सुखाना और निर्जलीकरणकिशमिश, प्याज़ के फ्लेक्स, आमचूर
चीनी से परिरक्षण (उच्च सांद्रता)जैम, जेली, मुरब्बा, कैंडी, स्क्वैश (लगभग 65% से अधिक चीनी पर सूक्ष्मजीव नहीं पनपते)
नमक और अम्लअचार, चटनी, ब्राइन में परिरक्षण
रासायनिक परिरक्षकपोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट (KMS, SO2 देता है), सोडियम बेंज़ोएट
किण्वन (Fermentation)अचार, सिरका, शराब
विकिरणगामा किरणों से (कोबाल्ट-60), अंकुरण रोकना (आलू-प्याज़)
हर्डल तकनीक (Hurdle technology)कई मध्यम बाधाओं (ताप, अम्ल, चीनी, परिरक्षक) का मिलाजुला उपयोग
  • जल सक्रियता (Water activity, aw): जीवाणु लगभग 0.90 से ऊपर, यीस्ट लगभग 0.88 से ऊपर और फफूँद लगभग 0.80 से ऊपर की aw पर पनपते हैं। सुखाने और चीनी का काम aw घटाना है।
  • FSSAI के परिरक्षक वर्ग: वर्ग I (सामान्य नमक, चीनी, शहद, सिरका, मसाले, खाद्य तेल आदि) और वर्ग II (अन्य रासायनिक परिरक्षक जैसे बेंज़ोइक अम्ल और SO2)। वर्ग II की मात्रा कानूनी रूप से सीमित है।
  • नियम: SO2 (KMS) का उपयोग हल्के रंग के उत्पादों में, क्योंकि यह लाल रंग को उड़ाता है और डिब्बाबंदी में टिन को काला करता है। रंगीन उत्पादों में सोडियम बेंज़ोएट इस्तेमाल होता है।
हल सहित उदाहरण 2: KMS की मात्रा
KMS में लगभग 57% SO2 होती है। 10 किग्रा स्क्वैश में 350 ppm SO2 (जो स्क्वैश के लिए FPO में निर्धारित सीमा है) रखनी हो:
SO2 = 350 मिग्रा/किग्रा × 10 किग्रा = 3500 मिग्रा = 3.5 ग्राम
KMS = 3.5 ÷ 0.57 ≈ 6.1 ग्राम।
(RTS पेय में सीमा बहुत कम, लगभग 70 ppm SO2 या 120 ppm बेंज़ोइक अम्ल है।)

मध्यवर्ती नमी वाले खाद्य: जैम, जेली और मार्मलेड (टॉपिक 8)

मध्यवर्ती नमी वाले खाद्य (Intermediate Moisture Foods, IMF) में नमी लगभग 15 से 50% और जल सक्रियता लगभग 0.6 से 0.9 होती है। चीनी, अम्ल और ताप से ये टिकते हैं। जैम, जेली और मार्मलेड इसका उदाहरण हैं।

जेल बनने की शर्तें (पेक्टिन-चीनी-अम्ल)
पेक्टिन लगभग 1% (जेली के लिए लगभग 0.5 से 1%), चीनी लगभग 65%, अम्ल pH लगभग 3.1 से 3.5। इनमें से किसी का संतुलन बिगड़ने पर जेल नहीं बनता।
पेक्टिन-समृद्ध फल: कच्चा सेब, अमरूद, नींबू वर्गीय छिलका, आलूबुखारा, आँवला। कम पेक्टिन: स्ट्रॉबेरी, आड़ू, अनानास (इनमें बाहर से पेक्टिन मिलाते हैं)।
उत्पादपरिभाषा और FSSAI के मानक (लगभग)
जैम (Jam)फल के गूदे और चीनी को पकाकर बना अर्ध-ठोस उत्पाद। फल का अंश कम से कम 45% और TSS कम से कम 65%
जेली (Jelly)फल का साफ रस छानकर चीनी के साथ पकाकर बना पारदर्शी, जमा हुआ उत्पाद। TSS कम से कम 65% (सामान्यतः लगभग 45 भाग रस और 55 भाग चीनी)
मार्मलेड (Marmalade)नींबू वर्गीय फलों का जेली जैसा उत्पाद जिसमें छिलके के पतले टुकड़े लटके रहते हैं। फल का अंश लगभग 45% और TSS कम से कम 65%

बनाने की विधि और कसौटियाँ

  • जैम: फल का चयन और धुलाई, गूदा निकालना, चीनी (प्रायः फल की बराबर मात्रा के आसपास) और साइट्रिक अम्ल मिलाकर पकाना, अंतिम बिंदु पर रोकना और गरम-गरम साफ जार में भरकर सील करना।
  • जैम का अंतिम बिंदु: तापमान लगभग 105°C (उबलने का बिंदु), या रिफ्रैक्टोमीटर पर लगभग 68 से 69° ब्रिक्स, या चम्मच या शीट परीक्षण (चम्मच से गिराने पर बूँदें जुड़कर चादर जैसी बनें)।
  • जेली: पेक्टिन परीक्षण (रस में बराबर मात्रा में अल्कोहल मिलाकर थक्का देखना), जेलमीटर परीक्षण।
  • चीनी का परिवर्तन (Inversion): क्रिस्टल बनने से रोकने के लिए लगभग आधी चीनी का अम्ल से इन्वर्ट होना ज़रूरी है।
  • दोष: क्रिस्टलीकरण (अधिक चीनी या कम इन्वर्ट शर्करा), जेली का पानी छोड़ना (Weeping, अधिक अम्ल या कम चीनी), फफूँद, रंग काला पड़ना और जला हुआ स्वाद।
हल सहित उदाहरण 3: जैम की अंतिम मात्रा
5 किग्रा गूदा (TSS 12%) और 5 किग्रा चीनी (100%) को पकाकर 68% TSS तक पहुँचाना है।
कुल ठोस = 5 × 0.12 + 5 = 0.6 + 5 = 5.6 किग्रा
अंतिम जैम = 5.6 ÷ 0.68 ≈ 8.24 किग्रा; वाष्पित जल = 10 − 8.24 = 1.76 किग्रा।
फल का अंश = 5 ÷ 8.24 × 100 ≈ 60.7% (45% की शर्त पूरी)।

प्रिज़र्व और कैंडी: अवधारणा और मानक (टॉपिक 9)

उत्पादविवरण
प्रिज़र्व / मुरब्बा (Preserve)पूरे फल या बड़े टुकड़ों को पर्याप्त चीनी की चाशनी में पकाकर, फल को सख्त और पारदर्शी बनाना। FSSAI के अनुसार फल का अंश कम से कम 55% और TSS कम से कम 68%। उदाहरण: आँवले, सेब, आम, गाजर, बेल का मुरब्बा
कैंडी (Candied fruit)फल के टुकड़ों में चाशनी की सांद्रता धीरे-धीरे बढ़ाकर चीनी भरना और फिर सुखाना। TSS लगभग 75% या अधिक। उदाहरण: आँवला कैंडी, अदरक कैंडी, पपीते की टूटी-फ्रूटी, नींबू वर्गीय छिलके की कैंडी
क्रिस्टलीकृत और ग्लेस फलकैंडी के बाद ऊपर चीनी के क्रिस्टल की परत (क्रिस्टलीकृत) या गाढ़ी चाशनी की चमकदार परत (ग्लेस)
  • कैंडी बनाने के चरण: फल का चयन और छिलका, काँटे से छेदना या ब्लांचिंग, चाशनी में भिगोना (लगभग 40° ब्रिक्स से शुरू कर हर दिन लगभग 10° बढ़ाकर लगभग 70° ब्रिक्स तक), निथारना, धोना और सुखाना (लगभग 50 से 60°C पर)।
  • सिद्धांत: परासरण (Osmosis) से फल की कोशिकाओं में चीनी भरती है और पानी बाहर आता है। चीनी की धीमी बढ़ोतरी से फल सिकुड़ता नहीं।
  • भंडारण: हवाबंद डिब्बे में, ठंडी और सूखी जगह पर।

भाग 4: पेय और टमाटर के उत्पाद (सिलेबस टॉपिक 10, 11)

किण्वित और अकिण्वित पेय (टॉपिक 10)

अकिण्वित (Non-fermented) पेय

पेयFPO/FSSAI के मानक (लगभग)
फल रस (Fruit juice)शुद्ध रस, बिना पानी; छानकर, पाश्चुरीकृत या परिरक्षित
स्क्वैश (Squash)फल रस कम से कम 25%, TSS कम से कम 40%, अम्लता अधिकतम लगभग 3.5% (साइट्रिक अम्ल)। परोसने से पहले पानी से पतला किया जाता है
क्रश (Crush)फल रस कम से कम 25%, TSS कम से कम 55%, अम्लता लगभग 3.5% तक
रेडी-टू-सर्व (RTS)फल रस कम से कम 10%, TSS कम से कम 10%, अम्लता लगभग 0.3% तक। सीधे पीने योग्य
नेक्टर (Nectar)फल रस या गूदा कम से कम लगभग 20%, TSS लगभग 15% और अम्लता लगभग 0.3% तक
सिरप, कॉर्डियलगाढ़े मीठे पेय जो पानी मिलाकर लिए जाते हैं
  • रस निकालने के चरण: फल का चयन और धुलाई, गूदा बनाना या दबाना, पेक्टिनेज़ एंजाइम से रस को साफ करना (Clarification), छानना और अपकेंद्रण, चीनी और अम्ल मिलाना, पाश्चुरीकरण (लगभग 85 से 90°C पर), बोतल में गरम भरना, क्राउन कॉर्क या ढक्कन से सील करना और ठंडा करना।
  • परिरक्षण: पाश्चुरीकरण या KMS और सोडियम बेंज़ोएट।

किण्वित (Fermented) पेय

पेयकच्चा माल और सूक्ष्मजीव
वाइन (Wine)अंगूर या अन्य फल; Saccharomyces cerevisiae var. ellipsoideus (यीस्ट) द्वारा किण्वन; अल्कोहल लगभग 9 से 14%
साइडर (Cider)सेब का रस, किण्वन के बाद हल्का अल्कोहल
बीयरअनाज (माल्ट वाला जौ), हॉप और यीस्ट
सिरका (Vinegar)पहले शर्करा से अल्कोहल (यीस्ट) और फिर अल्कोहल से एसिटिक अम्ल (Acetobacter)
अन्यताड़ी (Toddy), काजू का फेनी (गोवा), मीड (शहद से)
रासायनिक अभिक्रिया: C6H12O6 → 2C2H5OH + 2CO2। सैद्धांतिक रूप से 1 ग्राम शर्करा से लगभग 0.51 ग्राम अल्कोहल बनता है।

वाइन बनाने के चरण

अंगूर का चयन व धुलाई→कुचलना (Crushing)→SO2 (KMS) मिलाना→यीस्ट डालकर किण्वन→रैकिंग (तलछट अलग)→स्पष्टीकरण व परिपक्वन→बोतल भरना
  • लाल वाइन: छिलके सहित किण्वन (रंग छिलके से)। सफेद वाइन: केवल रस का किण्वन।
  • स्पार्कलिंग वाइन: बोतल में दूसरा किण्वन। फोर्टिफाइड वाइन: ब्रांडी या स्पिरिट मिलाई जाती है।
हल सहित उदाहरण 4: संभावित अल्कोहल
मोटे हिसाब से लगभग 17 ग्राम प्रति लीटर शर्करा से 1% (आयतन) अल्कोहल बनता है।
यदि रस (Must) में लगभग 200 ग्राम प्रति लीटर शर्करा हो, तो अल्कोहल ≈ 200 ÷ 17 ≈ 11.8%।

टमाटर के उत्पाद: अवधारणा और मानक (टॉपिक 11)

टमाटर के प्रमुख उत्पाद हैं: जूस, प्यूरी, पेस्ट, केचप, सॉस, सूप, पाउडर और चटनी। इनमें लाइकोपीन (कैरोटिनॉइड, लाल रंग का पिगमेंट और एंटीऑक्सीडेंट) बना रहता है और पकाने से उसकी उपलब्धता बढ़ती है।

उत्पादअवधारणा और मानक (लगभग)
टमाटर जूसटमाटर का छना हुआ रस; नमक मिलाकर परिरक्षित
प्यूरी (Puree)छना और गाढ़ा किया हुआ गूदा; TSS कम से कम लगभग 9%
पेस्ट (Paste)और अधिक गाढ़ा; TSS कम से कम लगभग 25%
केचप (Ketchup)प्यूरी या पेस्ट में चीनी, नमक, सिरका, मसाले और प्याज़-लहसुन मिलाकर बना; TSS कम से कम लगभग 25% और अम्लता लगभग 1% (एसिटिक अम्ल के रूप में)
सॉस (Sauce)केचप से पतला, कम गाढ़ा
  • प्रसंस्करण के लिए टमाटर: गहरा लाल रंग, उच्च TSS (लगभग 4.5 से 6° ब्रिक्स), कम बीज, उच्च पेक्टिन और ठोस गूदा।
  • हॉट ब्रेक (Hot break): कुचले टमाटर को तुरंत लगभग 85 से 95°C तक गर्म करना, जिससे पेक्टिन तोड़ने वाले एंजाइम नष्ट होते हैं और गाढ़ा, अधिक श्यानता वाला उत्पाद बनता है (केचप और पेस्ट के लिए)।
  • कोल्ड ब्रेक (Cold break): लगभग 65 से 70°C तक गर्म करना; एंजाइम सक्रिय रहते हैं और उत्पाद पतला पर रंग-स्वाद अच्छा (जूस के लिए)।
  • केचप की प्रक्रिया: टमाटर धोना, कुचलना, गर्म करना (ब्रेक), छानकर गूदा निकालना, चीनी-नमक-मसाले का काढ़ा मिलाकर पकाना और गाढ़ा करना, सिरका बाद में मिलाना, बोतल में गर्म भरना और सील करना।
  • दोष: पानी का अलग होना (सीरम सेपरेशन), रंग काला पड़ना और अधिक पकने से जला स्वाद।
हल सहित उदाहरण 5: पेस्ट की मात्रा
100 किग्रा टमाटर (TSS 5%) से 25% TSS का पेस्ट बनाना हो (हानि को छोड़कर):
कुल ठोस = 100 × 0.05 = 5 किग्रा; पेस्ट = 5 ÷ 0.25 = 20 किग्रा।
इसी तरह 9% की प्यूरी = 5 ÷ 0.09 ≈ 55.6 किग्रा।

भाग 5: सुखाना और डिब्बाबंदी (सिलेबस टॉपिक 12, 13)

फल-सब्जियों का सुखाना और निर्जलीकरण: अवधारणा, विधियाँ और परासरण निर्जलीकरण (टॉपिक 12)

सुखाना (Drying) में उत्पाद से पानी को हटाकर जल सक्रियता इतनी घटाई जाती है कि सूक्ष्मजीव और एंजाइम काम न कर सकें। नियंत्रित परिस्थितियों में सुखाना निर्जलीकरण (Dehydration) कहलाता है। प्रायः अंतिम नमी सब्जियों में लगभग 5 से 8% और फलों में लगभग 15 से 20% रखी जाती है।

विधिविवरण
धूप में सुखाना (Sun drying)सबसे सस्ता, पर धूल, कीट और मौसम के कारण गुणवत्ता कमज़ोर। उदाहरण: किशमिश, आमचूर
सौर शुष्कक (Solar dryer)सौर कैबिनेट या टनल, स्वच्छ और तेज़
मैकेनिकल ड्रायरट्रे या कैबिनेट ड्रायर, टनल ड्रायर, फ्लुइडाइज़्ड बेड
स्प्रे ड्रायरतरल (रस, दूध) को पाउडर बनाना; टमाटर और फलों का पाउडर
ड्रम / रोलर ड्रायरप्यूरी और गाढ़े पदार्थों के लिए
फ्रीज़ ड्राइंग (Lyophilization)जमाकर निर्वात में बर्फ को भाप बनाना; सर्वोत्तम रंग, स्वाद और रीहाइड्रेशन, पर महँगा
निर्वात और माइक्रोवेव ड्राइंगकम तापमान पर तेज़ सुखाना

सुखाने से पहले के उपचार

  • ब्लांचिंग (Blanching): सब्जियों को भाप या गर्म पानी (लगभग 90 से 100°C) में कुछ मिनट रखकर एंजाइम निष्क्रिय करना, जिससे रंग और स्वाद बना रहे।
  • सल्फरीकरण (Sulphuring): सल्फर के धुएँ या KMS के घोल से रंग काला होना (Browning) रोकना (आड़ू, खुबानी)।
  • क्षार या एथिल ओलिएट घोल में डुबोना: अंगूर (किशमिश) की त्वचा की परत हटाकर सुखाने की गति बढ़ाना।

परासरण निर्जलीकरण (Osmotic dehydration / Osmotic drying)

  • सिद्धांत: फल के टुकड़ों को गाढ़े चीनी (या नमक) के घोल (लगभग 50 से 70° ब्रिक्स) में डुबोने पर कोशिका झिल्ली के आर-पार परासरण से फल का पानी बाहर आता है और चीनी थोड़ी मात्रा में भीतर जाती है।
  • प्रक्रिया: छिलके-बीज निकालकर टुकड़े काटना, घोल और फल का अनुपात लगभग 4:1 या 5:1, हल्का गर्म (लगभग 40 से 50°C) घोल, फिर निथारकर धोना और अंत में हवा या ड्रायर में सुखाना।
  • लाभ: कम गर्मी, रंग और स्वाद की बेहतर रक्षा, कम ऊर्जा और अगला सुखाना कम समय का। उदाहरण: आँवला, पपीता, आम, केला, अनानास, गाजर।
आम गलती: परासरण निर्जलीकरण पूर्ण सुखाना नहीं है। यह आंशिक निर्जलीकरण है (वज़न में लगभग 50% तक कमी), जिसके बाद ज़रूरत हो तो आगे सुखाना होता है।
हल सहित उदाहरण 6: सुखाने के बाद वज़न
सूत्र: नमी (गीले आधार पर) = (गीला वज़न − शुष्क वज़न) ÷ गीला वज़न × 100।
10 किग्रा ताज़ी सब्जी में 85% नमी है और उसे 15% नमी तक सुखाना है।
शुष्क पदार्थ = 10 × 0.15 = 1.5 किग्रा; अंतिम वज़न = 1.5 ÷ 0.85 ≈ 1.76 किग्रा।
हटाया गया पानी = 10 − 1.76 = 8.24 किग्रा; सुखाने का अनुपात = 10 ÷ 1.76 ≈ 5.7 : 1।

डिब्बाबंदी (Canning): अवधारणा, मानक और उत्पादों की पैकेजिंग (टॉपिक 13)

कैनिंग (Canning) में खाद्य को वायुरोधी (Hermetically sealed) डिब्बे में भरकर गर्मी से निर्जर्मित किया जाता है, ताकि वह सामान्य तापमान पर महीनों-वर्षों सुरक्षित रहे। इसकी शुरुआत निकोलस एपर (Nicolas Appert, 1810) ने की।

चयन, धुलाई व ग्रेडिंग→छिलका व ब्लांचिंग→डिब्बे में भरना (चाशनी या ब्राइन)→हवा निकालना (Exhausting)→सील करना (Double seaming)→ताप उपचार→ठंडा करना व लेबल
  • चाशनी और ब्राइन: फलों के लिए चाशनी (फल की मिठास और खटास के अनुसार लगभग 30 से 55° ब्रिक्स), सब्जियों के लिए नमक का घोल (लगभग 2 से 3%)।
  • हेडस्पेस: डिब्बे के ऊपर थोड़ी खाली जगह (लगभग 6 से 10 मिमी) ताकि फैलाव के लिए जगह रहे।
  • एक्सहॉस्टिंग: डिब्बे से हवा निकालना (गर्म भराई या भाप से)। इससे निर्वात बनता है, ऑक्सीकरण और जंग घटता है और डिब्बा फूलता नहीं।
  • ठंडा करना: उपचार के बाद तुरंत लगभग 40°C तक, क्लोरीन-युक्त साफ पानी में।
उत्पाद का वर्गpHताप उपचार
अम्लीय (High acid): अधिकांश फल, टमाटर, अचार4.6 से कमउबलते पानी (लगभग 100°C) में
कम अम्लीय (Low acid): अधिकांश सब्जियाँ, मटर, मक्का, मांस4.6 से अधिकदाब पात्र (Retort) में लगभग 116 से 121°C पर, क्योंकि Clostridium botulinum के बीजाणु अधिक ताप से ही मरते हैं

डिब्बे और उनके प्रकार

  • टिनप्लेट कैन: कम कार्बन वाली स्टील की शीट पर टिन की परत। भीतर वार्निश (एनामल) की परत।
  • R-एनामल: लाल और बैंगनी फलों में एंथोसायनिन का रंग उड़ने से बचाने के लिए। C-एनामल: मक्का, मटर और मांस में गंधक वाले यौगिकों से काला दाग (आयरन सल्फाइड) रोकने के लिए। सादा टिन कैन: हल्के रंग के फलों के लिए।
  • अन्य पैकेजिंग: काँच की बोतलें और जार (जैम, जूस, अचार), रिटॉर्ट पाउच, एसेप्टिक कार्टन (Tetra Pak), प्लास्टिक पाउच और बोतलें (PET, HDPE), फ्लेक्सिबल लैमिनेट।

कैन के खराब होने के प्रकार और मानक

  • फ्लैट सॉर (Flat sour): डिब्बा चपटा, पर भीतर अम्ल बनने से खटास; थर्मोफिलिक जीवाणु (Bacillus stearothermophilus)।
  • स्वेल (Swell): डिब्बे का फूलना। हाइड्रोजन स्वेल (अम्लीय खाद्य और धातु की क्रिया से) और जीवाणु जनित गैस से स्वेल (स्प्रिंगर, सॉफ्ट स्वेल, हार्ड स्वेल)।
  • लीकर (Leaker): सील खराब होने से सूक्ष्मजीव प्रवेश।
  • कट-आउट परीक्षण: डिब्बा खोलकर ब्रिक्स, निर्वात, हेडस्पेस और उत्पाद की जाँच।
  • लेबलिंग (FSSAI): उत्पाद का नाम, सामग्री, शुद्ध मात्रा, निर्माण और समाप्ति तिथि, शाकाहारी या माँसाहारी चिह्न, FSSAI लाइसेंस नंबर, पोषण जानकारी और MRP।
हल सहित उदाहरण 7: D-मान और ताप उपचार
D-मान (D-value): किसी तापमान पर सूक्ष्मजीवों की संख्या 90% (यानी एक चक्रीय लघुगणक) घटाने का समय।
यदि D-मान = 2 मिनट हो, तो संख्या 106 से 102 (4 log कमी) करने में समय = 4 × 2 = 8 मिनट।
12D अवधारणा: कम अम्लीय कैन में C. botulinum के बीजाणुओं की 12 log कमी चाहिए। 121.1°C पर इसका D-मान लगभग 0.21 मिनट है, इसलिए न्यूनतम ताप उपचार = 12 × 0.21 ≈ 2.5 मिनट (इसे F0 मान कहते हैं)।
चाशनी: 100 किग्रा 40° ब्रिक्स की चाशनी के लिए 40 किग्रा चीनी + 60 किग्रा पानी।

प्रैक्टिकल की झलक

सामान्यतः इस विषय के प्रैक्टिकल में निम्नलिखित काम होते हैं (अपने विश्वविद्यालय के प्रैक्टिकल मैनुअल से मिला लें):

  • परिपक्वता सूचकांकों का मापन (TSS, अम्लता, कठोरता), श्वसन दर और भार हानि का अध्ययन।
  • फलों और सब्जियों की ग्रेडिंग, पैकिंग और ZECC की रचना देखना।
  • जैम, जेली, मार्मलेड, मुरब्बा और कैंडी बनाना और उनके अंतिम बिंदु की जाँच।
  • स्क्वैश, RTS और जूस बनाना; परिरक्षकों की मात्रा की गणना।
  • टमाटर केचप, प्यूरी और अचार, चटनी बनाना।
  • सुखाने और कैनिंग का अभ्यास तथा प्रसंस्करण इकाइयों का भ्रमण।

सोचिए और हल कीजिए

प्रश्न 1: किसी उत्पाद की श्वसन दर 10°C पर 6 और 20°C पर 12 (मिग्रा CO2/किग्रा/घंटा) है। Q10 कितना होगा? उत्तर: 12 ÷ 6 = 2

प्रश्न 2: 20 किग्रा सब्जी (नमी 80%) को 10% नमी तक सुखाने पर अंतिम वज़न कितना होगा? उत्तर: शुष्क पदार्थ = 20 × 0.2 = 4 किग्रा; अंतिम = 4 ÷ 0.9 ≈ 4.44 किग्रा

प्रश्न 3: 200 किग्रा टमाटर (TSS 5%) से 25% TSS का पेस्ट कितना बनेगा? उत्तर: 200 × 0.05 = 10 किग्रा ठोस; 10 ÷ 0.25 = 40 किग्रा

परीक्षा के लिए कैसे लिखें और याद रखें

  • नुकसान के कारणों के उत्तर में शारीरिक, रोगजनित, यांत्रिक और ढाँचागत कारण अलग-अलग लिखें।
  • क्लाइमैक्टेरिक और नॉन-क्लाइमैक्टेरिक फलों के उदाहरण याद रखें, और RQ का मान (शर्करा के लिए लगभग 1)।
  • भंडारण के उत्तर में हर विधि (ZECC, शीत भंडार, CA, MA, हाइपोबेरिक) का एक बिंदु ज़रूर लिखें।
  • FSSAI मानक (जैम 65% TSS और 45% फल, प्रिज़र्व 68% TSS और 55% फल, कैंडी 75% TSS, स्क्वैश 25% रस और 40% TSS) तालिका बनाकर याद करें।
  • कैनिंग में pH 4.6 की सीमा, R-एनामल और C-एनामल का अंतर और फ्लैट सॉर जैसे खराबियों का वर्णन लिखें।
  • गणना वाले प्रश्नों में सूत्र के साथ हल लिखें।

महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)

Q1. निम्न में से कौन सा क्लाइमैक्टेरिक फल है? (अ) अंगूर (ब) संतरा (स) आम (द) अनार। उत्तर: स

Q2. शर्करा के श्वसन में RQ का मान लगभग कितना होता है? (अ) 0.7 (ब) 1 (स) 1.5 (द) 3। उत्तर: ब

Q3. ZECC का पूरा नाम क्या है? (अ) Zero Energy Cool Chamber (ब) Zonal Energy Cold Chamber (स) Zero Emission Cold Chain (द) Zero Evaporation Cool Chamber। उत्तर: अ

Q4. जैम में TSS कम से कम कितना होना चाहिए? (अ) 45% (ब) 55% (स) 65% (द) 75%। उत्तर: स

Q5. कम अम्लीय खाद्य का pH किससे अधिक होता है? (अ) 3.5 (ब) 4.6 (स) 5.5 (द) 7.0। उत्तर: ब

Q6. वाइन बनाने में कौन सा सूक्ष्मजीव उपयोग होता है? (अ) Acetobacter (ब) Lactobacillus (स) Saccharomyces cerevisiae (द) Clostridium। उत्तर: स

Q7. केचप और पेस्ट में गाढ़ापन पाने के लिए कौन सी विधि उपयुक्त है? (अ) कोल्ड ब्रेक (ब) हॉट ब्रेक (स) फ्रीज़ ड्राइंग (द) डिब्बे में भरना। उत्तर: ब

Q8. लाल रंग के फलों की कैनिंग में किस एनामल का कैन उपयोग होता है? (अ) R-एनामल (ब) C-एनामल (स) सादा टिन (द) काँच। उत्तर: अ

Q9. परासरण निर्जलीकरण में फल को किस घोल में डुबोया जाता है? (अ) साफ पानी (ब) गाढ़ा चीनी या नमक का घोल (स) अल्कोहल (द) सिरका। उत्तर: ब

Q10. FSSAI के अनुसार निम्न में से कौन सा वर्ग I परिरक्षक है? (अ) बेंज़ोइक अम्ल (ब) सल्फर डाइऑक्साइड (स) चीनी (द) प्रोपियोनेट। उत्तर: स

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड क्यों नहीं उपयोग करना चाहिए?
उत्तर: इससे बनने वाली गैस और अशुद्धियाँ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और FSSAI ने इसे प्रतिबंधित किया है। एथिलीन गैस या एथेफोन का नियंत्रित उपयोग सुरक्षित विकल्प है।

प्रश्न: पूर्व-शीतलन क्यों ज़रूरी है?
उत्तर: तुड़ाई के बाद फल में खेत की गर्मी रहती है। उसे तुरंत निकालने से श्वसन घटता है और भंडारण आयु बढ़ती है।

प्रश्न: जैम में फल का अंश और TSS कितना होना चाहिए?
उत्तर: FSSAI के अनुसार फल का अंश कम से कम 45% और TSS कम से कम 65%।

प्रश्न: जैम, जेली और मार्मलेड में अंतर क्या है?
उत्तर: जैम में फल का गूदा होता है, जेली में साफ फल रस (पारदर्शी) और मार्मलेड में नींबू वर्गीय फल के रस के साथ छिलके के पतले टुकड़े।

प्रश्न: कैनिंग में अम्लीय और कम अम्लीय खाद्य का उपचार अलग क्यों है?
उत्तर: कम अम्लीय खाद्य में Clostridium botulinum के बीजाणु पनप सकते हैं, जिन्हें मारने के लिए 100°C से अधिक तापमान (दाब पात्र) ज़रूरी है।

प्रश्न: सिलेबस में कुल कितने टॉपिक और लेक्चर हैं?
उत्तर: थ्योरी में 13 टॉपिक हैं और कुल 16 लेक्चर निर्धारित हैं।

Free Study Material Download करें

Post-harvest Management and Value Addition of Fruits and Vegetables के नोट्स, किताबें, PPT और Word फाइल नीचे से डाउनलोड करें।

सामग्रीDownload
हिंदी PDF नोट्स Hindi PDF 1Hindi PDF 2Hindi PDF 3
English PDF Notes English PDF 1English PDF 2English PDF 3
Books (किताबें) Book 1Book 2Book 3
PPTPPT Download
Word FileWord Download

आगे पढ़ने के लिए

संदर्भ: श्रीवास्तव और कुमार, Fruit and Vegetable Preservation: Principles and Practices; एल.आर. वर्मा और वी.के. जोशी, Postharvest Technology of Fruits and Vegetables; एस. पंत्वाने-जयराम, Handbook of Post-harvest Technology; FSSAI की नियम-पुस्तिकाएँ और ICAR e-course।

लेखक की टिप्पणी: यह लेख सिलेबस के आधार पर मौलिक रूप से तैयार किया गया है। गणनाएँ और उदाहरण अभ्यास हेतु हैं। FSSAI और FPO के मानक (TSS, फल का अंश, परिरक्षकों की सीमा), भंडारण तापमान और ताप उपचार की शर्तें समय-समय पर बदलती हैं और उत्पाद के अनुसार भिन्न होती हैं, इसलिए प्रकाशित करने से पहले अपनी पाठ्य पुस्तकों और FSSAI की ताज़ा नियमावली से जाँच लें।

NextGen Digital Welcome to WhatsApp chat
Howdy! How can we help you today?
Type here...