Diseases of Field and Horticultural Crops and their Management-I (फसलों के रोग एवं प्रबंधन-I) – AGRON Notes | B.Sc. Ag. Hindi & English (PDF,BOOK,PPT)

Diseases of Field and Horticultural Crops and their Management-I (फसलों के रोग एवं प्रबंधन-I) – AGRON Notes | B.Sc. Ag. Hindi & English (PDF,BOOK,PPT)

एक सवाल से शुरुआत: अगस्त के आख़िर में किसान बाजरे के खेत में खड़ा है। कुछ पौधों की बालियाँ हरी पत्तियों जैसी निकल आई हैं और कुछ बालियों से शहद जैसा चिपचिपा रस टपक रहा है। वह पूछता है, "ये एक ही बीमारी है या दो अलग-अलग? और दवा कब और कौन सी डालूँ?" सही जवाब तभी मिलता है जब हमें लक्षण (Symptoms), रोगकारक (Etiology), रोग चक्र (Disease cycle) और प्रबंधन (Management) चारों की समझ हो। पहली बीमारी हरी बाली (Downy mildew) है और दूसरी अरगट (Ergot)। यही चार बातें इस विषय का आधार हैं।

फसलों के रोग एवं प्रबंधन-I (Diseases of Field and Horticultural Crops and their Management-I) में खेत और बागवानी की प्रमुख फसलों के रोगों का अध्ययन होता है। सिलेबस में कुल 22 टॉपिक हैं और थ्योरी के कुल 32 लेक्चर निर्धारित हैं। हर टॉपिक में चार चीज़ें पूछी जाती हैं: रोग के लक्षण, रोगकारक, रोग चक्र और प्रबंधन। यह लेख सिलेबस के क्रम में नहीं, बल्कि सीखने के क्रम में बँटा है: पहले रोग विज्ञान की भाषा, फिर अनाज, फिर दलहन-तिलहन, फिर कपास और फल फसलें, और अंत में सब्जी, मसाला और बागान फसलें। हर भाग में सिलेबस के टॉपिक नंबर लिखे हैं, ताकि आप मिलान कर सकें।

पूरी तस्वीर एक नज़र में

रोगकारक का जीवित रहना→प्रसार (हवा, पानी, बीज, कीट)→प्रवेश व संक्रमण→लक्षण प्रकट होना→गुणन व नया इनोकुलम→प्रबंधन से चक्र तोड़ना

रोग प्रबंधन का मूल सिद्धांत यही है कि इस चक्र की सबसे कमज़ोर कड़ी पर वार किया जाए। जैसे बाजरे की हरी बाली में बीज और मृदा में बचे बीजाणुओं की कड़ी को बीजोपचार से तोड़ा जाता है।

भाग 1: रोग विज्ञान की भाषा (आधार)

रोग त्रिकोण और रोग चक्र

रोग तभी होता है जब तीन चीज़ें एक साथ मिलें: रोगग्राही पौधा (Susceptible host), रोगकारक (Pathogen) और अनुकूल वातावरण (Favourable environment)। इसे रोग त्रिकोण (Disease triangle) कहते हैं। इनमें से किसी एक को हटा दें तो रोग नहीं होता। इसमें समय को जोड़ने पर रोग चक्र बनता है।

  • प्राथमिक इनोकुलम (Primary inoculum): मौसम की शुरुआत में पहला संक्रमण करने वाला स्रोत, जैसे बीज, मृदा, फसल अवशेष।
  • द्वितीयक इनोकुलम (Secondary inoculum): रोगग्रस्त पौधों से बने बीजाणु, जो उसी मौसम में रोग को फैलाते हैं।
  • ऊष्मायन अवधि (Incubation period): संक्रमण से लक्षण दिखने तक का समय।
  • रोगवाहक (Vector): रोग फैलाने वाला जीव, जैसे सफेद मक्खी, माहू और फुदका।

रोगकारक के प्रकार और उनके लक्षण

रोगकारकप्रमुख उदाहरणसामान्य लक्षण
कवक (Fungi)झुलसा, कंड, रतुआ, मृदुरोमिल आसिता, चूर्णिल आसिताधब्बे, सड़न, चूर्ण या बीजाणु की परत
जीवाणु (Bacteria)Xanthomonas, Ralstoniaजलसिक्त धब्बे, पर्ण अंगमारी, मुरझान
विषाणु (Virus)मोज़ेक, पर्ण कुंचन, टंगरोपीलापन, मोज़ेक, बौनापन; वाहक से फैलाव
फाइटोप्लाज़्मातिल की फिलोडी, बैंगन की छोटी पत्तीफूल का पत्ती बन जाना, पत्तियाँ छोटी होना
सूत्रकृमि (Nematode)जड़ गाँठ (Meloidogyne)जड़ों पर गाँठें, पौधा पीला व बौना
वाइरॉइडनारियल का कैडंग कैडंगपत्तियों पर चितकबरापन, उत्पादन में गिरावट

प्रबंधन के सिद्धांत

  • बहिष्करण (Exclusion): रोगमुक्त बीज और पौध सामग्री, संगरोध।
  • निराकरण (Eradication): रोगग्रस्त पौधे उखाड़ना, फसल अवशेष जलाना या दबाना, गर्मी की गहरी जुताई।
  • सुरक्षा (Protection): बीजोपचार और फफूँदनाशी, जीवाणुनाशी का छिड़काव।
  • प्रतिरोधकता (Resistance): रोगरोधी किस्में, जो सबसे सस्ता और टिकाऊ उपाय है।
  • चिकित्सा (Therapy): प्रणालीगत दवाएँ, जिन्हें पौधा सोखकर रोग रोकता है।
  • समन्वित रोग प्रबंधन (IDM): सस्य, जैविक (जैसे Trichoderma), रासायनिक और प्रतिरोधी किस्मों को मिलाकर उपयोग।
हल सहित उदाहरण 1: रोग का प्रतिशत (PDI)
सूत्र: रोग सूचकांक (PDI) = [Σ (श्रेणी × उस श्रेणी के पत्तों की संख्या) ÷ (अधिकतम श्रेणी × कुल पत्ते)] × 100
मान लीजिए 50 पत्ते 0 से 5 की श्रेणी में आँके गए: श्रेणी 0 = 10, श्रेणी 1 = 15, श्रेणी 2 = 12, श्रेणी 3 = 8, श्रेणी 4 = 5, श्रेणी 5 = 0।
Σ = 0 + 15 + 24 + 24 + 20 + 0 = 83
PDI = 83 ÷ (5 × 50) × 100 = 83 ÷ 250 × 100 = 33.2%
रोग की घटना (Incidence) = (रोगी पौधे ÷ कुल पौधे) × 100। जैसे 250 में से 40 पौधे रोगी हों तो 16%।
हल सहित उदाहरण 2: बोर्डो मिश्रण (1%)
1% बोर्डो मिश्रण में प्रति 100 लीटर पानी के लिए 1 किग्रा नीला थोथा (कॉपर सल्फेट), 1 किग्रा बिना बुझा चूना और 100 लीटर पानी लगता है (मिलार्डे, 1885)।
500 लीटर घोल बनाने के लिए = 5 किग्रा कॉपर सल्फेट + 5 किग्रा चूना।
परीक्षण: घोल में चाकू या लोहे की चमकदार कील डुबोएँ; अगर उस पर लाल जमाव दिखे तो घोल अम्लीय है और उसमें और चूना मिलाना चाहिए।
हल सहित उदाहरण 3: बीजोपचार और छिड़काव की मात्रा
25 किग्रा बीज पर 2.5 ग्राम प्रति किग्रा की दर से दवा लगानी हो तो दवा = 25 × 2.5 = 62.5 ग्राम।
2 ग्राम प्रति लीटर की दर से 600 लीटर घोल प्रति हेक्टेयर चाहिए तो दवा = 2 × 600 = 1200 ग्राम = 1.2 किग्रा।

भाग 2: खरीफ अनाज (सिलेबस टॉपिक 1, 2, 3, 4)

धान के रोग (टॉपिक 1)

रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
झुलसा (Blast)कवक Magnaporthe oryzae (Pyricularia oryzae)पत्तियों पर तर्कु (आँख) के आकार के धब्बे, जिनका बीच का भाग राखी और किनारा भूरा होता है। गाँठ और बाली की गर्दन पर काला पड़कर टूट जाना (Neck blast)रोगरोधी किस्में, बीजोपचार, नाइट्रोजन की अधिकता से बचाव, ट्राइसायक्लाज़ोल या कार्बेन्डाज़िम का छिड़काव
भूरा धब्बा (Brown spot)कवक Bipolaris oryzae (Helminthosporium oryzae)पत्तियों पर अंडाकार भूरे धब्बे जिनके बीच में राखी रंग, दाने पर भी धब्बे। यह कमज़ोर, पोषक तत्वों की कमी वाली भूमि में अधिक होता है। 1943 के बंगाल अकाल से जुड़ा हैथाइरम या कार्बेन्डाज़िम से बीजोपचार, संतुलित खाद, मैन्कोज़ेब का छिड़काव
जीवाणुज पर्ण अंगमारी (Bacterial blight)जीवाणु Xanthomonas oryzae pv. oryzaeपत्ती की नोक से किनारों पर लहरदार पीली धारियाँ, फिर पत्ती सूखना। रोपाई के बाद पौध की पत्तियाँ मुरझाना (Kresek)प्रतिरोधी किस्में, नाइट्रोजन का सीमित प्रयोग, स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के साथ कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव
आवरण झुलसा (Sheath blight)कवक Rhizoctonia solani (Thanatephorus cucumeris)पानी की सतह के पास आवरण पर हरे-राखी धब्बे जो साँप की खाल जैसे दिखते हैं। कवक के स्क्लेरोशिया पानी में तैरकर फैलते हैंखेत की मेड़ों के खरपतवार हटाना, पौधों में उचित दूरी, वैलिडामाइसिन या हेक्साकोनाज़ोल का छिड़काव
खैरा (Khaira)रोगकारक नहीं, जिंक की कमी (शरीर क्रियात्मक विकार)नई पत्तियों के बीच में धूल जैसे भूरे-जंग रंग के धब्बे, पौधा बौनाजिंक सल्फेट लगभग 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर मृदा में या 0.5% का पर्णीय छिड़काव
टंगरो (Tungro)विषाणु (Rice tungro bacilliform virus और Rice tungro spherical virus साथ मिलकर)पत्तियाँ पीली-नारंगी, पौधा बौना, कल्ले कम। वाहक: हरा फुदका (Nephotettix virescens)वाहक का नियंत्रण, प्रतिरोधी किस्में, रोगी पौधे हटाना, समय पर रोपाई
आम गलती: खैरा कोई बीमारी (रोगकारक से होने वाला रोग) नहीं है। यह जिंक की कमी का विकार है, इसलिए इसका इलाज फफूँदनाशी से नहीं, जिंक सल्फेट से होता है।

मक्का के रोग (टॉपिक 2)

रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
तना सड़न (Stalk rots)चारकोल सड़न: Macrophomina phaseolina; फ्यूज़ेरियम सड़न: Fusarium verticillioides; जीवाणुज तना सड़न: Dickeya (Erwinia chrysanthemi); पिथियम सड़न: Pythium aphanidermatumदाना भरने के समय तना भीतर से सड़कर कमज़ोर, पौधे गिरना। चारकोल सड़न में भीतर काले कण। जीवाणुज सड़न में दुर्गंधजल निकास, संतुलित पोटाश, पौधों की उचित संख्या, रोगरोधी संकर, सूखे के तनाव से बचाव, फसल चक्र
पर्ण अंगमारी (Leaf blights)टर्सिकम: Exserohilum turcicum; मेडिस: Bipolaris maydisटर्सिकम में लंबे, सिगार के आकार के राखी-हरे धब्बे। मेडिस में छोटे, पीले-भूरे धब्बे। मेडिस ने 1970 में अमेरिका में T-साइटोप्लाज्म वाले मक्का की फसल को भारी नुकसान पहुँचायारोगरोधी किस्में, फसल अवशेष हटाना, मैन्कोज़ेब या ज़ाइनेब का छिड़काव
मृदुरोमिल आसिता (Downy mildews)कई रोगकारक: Peronosclerospora sorghi (सोरघम DM), Peronosclerospora heteropogoni (राजस्थान DM), Sclerophthora rayssiae var. zeae (भूरी धारी), Sclerophthora macrospora (क्रेज़ी टॉप)पत्तियों पर पीली-सफेद समानांतर धारियाँ, निचली सतह पर सफेद रुई जैसी परत। क्रेज़ी टॉप में नर मंजरी पत्ती जैसी हो जाती हैमेटालैक्सिल से बीजोपचार, रोगी पौधे हटाना, जल जमाव से बचाव, मैन्कोज़ेब का छिड़काव

ज्वार के रोग (टॉपिक 3)

रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
दाना कंड (Grain smut)कवक Sporisorium sorghi (Sphacelotheca sorghi)दानों की जगह शंकु जैसे सफेद-राखी कोश (sori), जिनमें काले बीजाणु भरे होते हैं। बीजाणु बीज की सतह पर चिपककर अगले साल रोग फैलाते हैंगंधक चूर्ण (सल्फर) 3 ग्राम प्रति किग्रा बीज या कार्बोक्सिन से बीजोपचार
श्यामवर्ण (Anthracnose)कवक Colletotrichum sublineola (C. graminicola)पत्तियों पर लाल या बैंगनी धब्बे, मध्य शिरा पर लाल धारियाँ, तने और बाली पर भी। धब्बों में काले काँटेदार कण (acervuli)रोगरोधी किस्में, बीजोपचार, फसल चक्र, मैन्कोज़ेब का छिड़काव

बाजरा के रोग (टॉपिक 4)

रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
हरित बाली रोग / मृदुरोमिल आसिता (Downy mildew)कवक Sclerospora graminicolaपत्तियों पर पीली धारियाँ और निचली सतह पर सफेद परत। बाली की जगह हरी, पत्ती जैसी संरचनाएँ (Green ear)। मृदा और बीज में ऊस्पोर (oospore) रहते हैंमेटालैक्सिल (Apron 35 SD) लगभग 6 ग्राम प्रति किग्रा बीज, रोगी पौधे उखाड़ना, रोगरोधी संकर, फसल चक्र
अरगट (Ergot)कवक Claviceps fusiformisफूल आने पर बालियों से शहद जैसा चिपचिपा रस (honeydew)। बाद में दानों की जगह काले-भूरे स्क्लेरोशिया। इनमें विषैले एल्कलॉइड होते हैं10% नमक के घोल में स्क्लेरोशिया अलग करना (वे तैरते हैं), समय पर बुवाई, फूल आते समय फफूँदनाशी (ज़ाइरम या मैन्कोज़ेब) छिड़काव
आम गलती: हरी बाली और अरगट को एक न मानें। हरी बाली में पूरी बाली पत्ती जैसी हो जाती है (मृदुरोमिल आसिता)। अरगट में बाली बनती है पर उसमें शहद जैसा रस और बाद में काले स्क्लेरोशिया आते हैं।

भाग 3: दलहन और तिलहन (सिलेबस टॉपिक 5 से 11)

मूँगफली के रोग (टॉपिक 5)

रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
टिक्का (Tikka)अगेती: Cercospora arachidicola; पछेती: Nothopassalora personata (Phaeoisariopsis personata)पत्तियों पर गोल धब्बे। अगेती में ऊपर पीले घेरे वाले भूरे धब्बे, पछेती में निचली सतह पर गहरे काले धब्बे। पत्तियाँ झड़नामैन्कोज़ेब या क्लोरोथैलोनिल का छिड़काव (45 से 60 दिन पर), फसल अवशेष का निस्तारण, रोगरोधी किस्में
कॉलर सड़न (Collar rot)कवक Aspergillus nigerअंकुरण के बाद पौधों के कॉलर भाग पर काली फफूँद की वृद्धि और पौधे का सूखनाथाइरम और Trichoderma से बीजोपचार, स्वस्थ बीज
मूँगफली गुच्छा विषाणु (Peanut clump virus)विषाणु (Peanut clump virus), मृदा में Polymyxa graminis द्वारा फैलता हैखेत में पौधे गुच्छों में बौने और गहरे हरे। यह मृदाजन्य रोग हैस्वस्थ बीज, रोग वाले क्षेत्र में फसल चक्र और प्रतिरोधी या सहनशील किस्में

सोयाबीन के रोग (टॉपिक 6)

रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
राइज़ोक्टोनिया अंगमारीकवक Rhizoctonia solaniपत्तियों पर जल-सिक्त धब्बे और पौधे की झुलसन। पत्तियाँ जाला जैसे मकड़जाल से चिपकी, पौधे की जड़ व तना सड़नबीजोपचार (कार्बेन्डाज़िम, थाइरम, Trichoderma), जल निकास, फसल चक्र
जीवाणुज फुंसी (Bacterial pustule)जीवाणु Xanthomonas axonopodis pv. glycinesपत्ती की निचली सतह पर उभरी हुई छोटी फुंसियाँ, जिनके चारों ओर पीला घेरास्वस्थ बीज, रोगरोधी किस्में, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड और स्ट्रेप्टोसाइक्लिन का छिड़काव

अरहर और मूँग, उड़द, मोठ के रोग (टॉपिक 7, 8)

रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
अरहर: बाँझपन मोज़ेक (Sterility mosaic)विषाणु (Pigeonpea sterility mosaic virus); वाहक: माइट Aceria cajaniपौधा झाड़ीनुमा, पत्तियाँ छोटी, हल्की हरी और मोज़ेक। फूल-फली नहीं बनते (बाँझपन)रोगी पौधे उखाड़ना, रोगरोधी किस्में, माइट नियंत्रण, अरहर के पुराने खेतों से दूरी
मूँग, उड़द, मोठ: वेब ब्लाइटकवक Rhizoctonia solaniपत्तियों पर जल-सिक्त धब्बे, जो मकड़जाल जैसे कवकजाल से चिपकने के कारण पत्तियों का झुलसनाबीजोपचार, उचित पौध दूरी, मैन्कोज़ेब या हेक्साकोनाज़ोल का छिड़काव
पीला मोज़ेक (Yellow mosaic)विषाणु (Mungbean yellow mosaic virus, Begomovirus); वाहक: सफेद मक्खी Bemisia tabaciपत्तियों पर पीले और हरे चितकबरे धब्बे, फिर पूरी पत्ती पीली। फलियाँ कम और छोटीप्रतिरोधी किस्में, समय पर बुवाई, रोगी पौधे हटाना, वाहक के लिए इमिडाक्लोप्रिड या थायोमेथॉक्साम, पीले चिपचिपे जाल
आम गलती: पीला मोज़ेक बीज से नहीं, सफेद मक्खी से फैलता है। इसलिए रोग से बचाव के लिए वाहक नियंत्रण सबसे ज़रूरी है। साथ ही यह रस के सीधे संपर्क से भी नहीं फैलता।

अरंडी, ग्वार और तिल के रोग (टॉपिक 9, 10, 11)

फसल और रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
अरंडी: फाइटोफ्थोरा अंगमारीकवक Phytophthora parasiticaपत्तियों और बीज फलों पर जल-सिक्त धब्बे, जो बढ़कर पूरी पत्ती और फल सड़ाते हैं। नमी वाले मौसम में अधिकजल निकास, मेटालैक्सिल + मैन्कोज़ेब का छिड़काव, रोगरोधी किस्में
अरंडी: जीवाणुज अंगमारीजीवाणु Xanthomonas axonopodis pv. riciniपत्तियों पर कोणीय, जलसिक्त धब्बे जो बाद में भूरे हो जाते हैंस्वस्थ बीज, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड + स्ट्रेप्टोसाइक्लिन
ग्वार: जीवाणुज अंगमारीजीवाणु Xanthomonas axonopodis pv. cyamopsidisपत्तियों पर कोणीय जलसिक्त धब्बे, जो भूरे होकर बड़े और अनियमित हो जाते हैं। ग्वार की राजस्थान की प्रमुख बीमारीबीजोपचार (स्ट्रेप्टोसाइक्लिन), रोगरोधी किस्में, स्ट्रेप्टोसाइक्लिन + कॉपर का छिड़काव
ग्वार: अल्टरनेरिया अंगमारीकवक Alternaria cyamopsidisपत्तियों पर गोल भूरे धब्बे जिनमें छल्लेनुमा धारियाँ, बाद में पत्ती झड़नाबीजोपचार, मैन्कोज़ेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव, फसल अवशेष हटाना
तिल: तना व जड़ सड़नकवक Macrophomina phaseolinaजड़ और तना काला पड़कर सड़ना, पौधा अचानक सूखना। तने में काले कणबीजोपचार (Trichoderma, थाइरम), फसल चक्र, खेत में नमी का संरक्षण
तिल: फिलोडी (Phyllody)फाइटोप्लाज़्मा; वाहक: फुदका Orosius albicinctusफूल पत्ती जैसे बन जाते हैं, पौधे में फलियाँ नहीं बनतीं, गुच्छेदार पत्तियाँरोगी पौधे उखाड़ना, समय पर बुवाई, वाहक का नियंत्रण, रोगरोधी किस्में

भाग 4: कपास और फल फसलें (सिलेबस टॉपिक 12, 13, 14, 15, 16, 17)

कपास के रोग (टॉपिक 12)

रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
उकठा (Wilt)कवक Fusarium oxysporum f. sp. vasinfectumपत्तियाँ पीली होकर मुरझाना, पौधे के संवहन ऊतक में भूरा-काला रंगरोगरोधी किस्में, फसल चक्र, बीजोपचार, Trichoderma मिलाना
जड़ सड़न (Root rot)Rhizoctonia solani और Macrophomina phaseolinaपौधे का अचानक सूखना, जड़ों का सड़ना, छाल उतर जानाबीजोपचार, गर्मी में गहरी जुताई, जैविक खाद व Trichoderma
जीवाणुज अंगमारी (Bacterial blight)Xanthomonas citri pv. malvacearumपत्तियों पर कोणीय धब्बे, शिराओं पर काली धारियाँ, तने पर काली भुजा (black arm) और टिंडे पर धब्बेबीज का अम्ल उपचार (एसिड डिलिंटिंग), स्ट्रेप्टोसाइक्लिन + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, प्रतिरोधी किस्में
पर्ण कुंचन (Leaf curl)विषाणु (Cotton leaf curl virus, Begomovirus); वाहक: सफेद मक्खीशिराओं का मोटा होना, पत्तियाँ ऊपर या नीचे मुड़ना, पत्ती के नीचे उभार (enation), पौधा बौना। राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कपास क्षेत्रों की मुख्य समस्यासफेद मक्खी नियंत्रण, रोगरोधी या सहनशील किस्में, समय पर बुवाई, मेज़बान खरपतवार हटाना

अमरूद और केला के रोग (टॉपिक 13, 14)

रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
अमरूद: उकठा (Wilt)कवक Fusarium oxysporum f. sp. psidii (साथ में अन्य कवक)शाखाओं की पत्तियाँ पीली होकर मुरझाना, फल छोटे कड़े रहना, पूरा पेड़ सूख जाना। बरसात के बाद अधिकजड़ों को चोट से बचाना, Trichoderma और कार्बेन्डाज़िम से मृदा उपचार, रोगी पेड़ हटाकर जलाना, प्रतिरोधी मूलवृंत
अमरूद: जिंक की कमीशरीर क्रियात्मक विकार (जिंक की कमी)पत्तियाँ छोटी, संकरी और गुच्छेदार, शिराओं के बीच पीलापनजिंक सल्फेट (0.5%) और चूने का पर्णीय छिड़काव
केला: पनामा उकठाकवक Fusarium oxysporum f. sp. cubenseनिचली पत्तियाँ पीली होकर तने के पास लटकना, तने के भीतर कंद में भूरी-लाल धारियाँ। पहले ग्रॉस मिशेल प्रभावित हुई, फिर कैवेंडिश की नई रेस भीस्वस्थ ऊतक संवर्धन पौधे, जल निकास, रोगी पौधे हटाना, कंद उपचार, फसल चक्र
केला: सिगाटोका (Sigatoka)कवक Pseudocercospora musae (Mycosphaerella musicola), पीला सिगाटोकापत्तियों पर पीली धारियाँ, फिर भूरे धब्बे जिनके बीच में राखी रंग, पत्ती झुलसना, फल का असमय पकनारोगी पत्तियाँ काटना, प्रोपिकोनाज़ोल या मैन्कोज़ेब का छिड़काव, खनिज तेल के साथ छिड़काव, जल निकास
केला: गुच्छा शीर्ष (Bunchy top)विषाणु (Banana bunchy top virus); वाहक: माहू Pentalonia nigronervosaपत्तियाँ बहुत छोटी, सँकरी और ऊपर की ओर खड़ी, गुलाब के फूल जैसा गुच्छा। गहरी हरी धारियाँ। पौधा फल नहीं देतारोगमुक्त ऊतक संवर्धन पौधे, रोगी पौधों को पूरी तरह उखाड़ना, माहू नियंत्रण
आम गलती: सिगाटोका उकठा नहीं, बल्कि पत्ती का धब्बा रोग (Leaf spot) है। उकठा केवल पनामा रोग है।

पपीता, अनार और खजूर, नारियल के रोग (टॉपिक 15, 16, 17)

फसल और रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
पपीता: पाद विगलन (Foot rot)कवक Pythium aphanidermatumभूमि के पास तने पर जलसिक्त धब्बे, जिससे तना सड़कर पौधा गिर जाता हैजल निकास, ऊँची क्यारियाँ, बीजोपचार, मेटालैक्सिल + मैन्कोज़ेब से मृदा उपचार
पपीता: पर्ण कुंचनविषाणु (Papaya leaf curl virus, Begomovirus); वाहक: सफेद मक्खीपत्तियाँ मुड़ी, शिराएँ मोटी, पत्तियाँ भंगुर और पौधा बौनारोगी पौधे हटाना, वाहक नियंत्रण, नर्सरी में जाली का उपयोग
पपीता: रिंग स्पॉटविषाणु (Papaya ring spot virus, Potyvirus); वाहक: माहूपत्तियों में मोज़ेक और पीलापन, फलों पर गोल छल्लेदार धब्बे और तने पर तैलीय धारियाँरोगी पौधे हटाना, माहू नियंत्रण, नई पौध को रोगमुक्त क्षेत्र में लगाना
पपीता: जड़ गाँठसूत्रकृमि Meloidogyne incognitaजड़ों पर गाँठें, पौधा पीला और बौनानीम या सरसों की खली, गर्मी में गहरी जुताई, गेंदा के साथ फसल चक्र
अनार: पर्ण धब्बाकवक Cercospora punicae, Colletotrichum gloeosporioides आदिपत्तियों और फलों पर गोल भूरे धब्बे, फल पर काले धब्बेबाग की सफाई, मैन्कोज़ेब या कार्बेन्डाज़िम का छिड़काव
अनार: जीवाणुज अंगमारी (तेल्या)जीवाणु Xanthomonas axonopodis pv. punicaeपत्तियों पर कोणीय जलसिक्त धब्बे, फल पर तैलीय काले धब्बे, फिर फल फटनारोगमुक्त पौध, छँटाई, स्ट्रेप्टोसाइक्लिन + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, बाग की स्वच्छता
खजूर: ग्रैफियोला पर्ण धब्बा (False smut)कवक Graphiola phoenicisपत्तियों पर काले, उभरे हुए छोटे पुटिका जैसे धब्बे जिनसे पीला चूर्ण निकलता हैरोगी पत्तियाँ काटकर जलाना, कॉपर या मैन्कोज़ेब का छिड़काव
नारियल: जड़ उकठा (Root wilt)फाइटोप्लाज़्मा; वाहक: Proutista moesta (फुदका)पत्तियों का पीला पड़कर मुड़ना और पंखे की तरह फैलना, उत्पादन में भारी गिरावट। मुख्यतः केरल की समस्यारोगी पेड़ हटाना, वाहक नियंत्रण, पोषण प्रबंधन
नारियल: कैडंग कैडंगवाइरॉइड (Coconut cadang-cadang viroid)पत्तियों पर पीले चितकबरे धब्बे, मेवे छोटे गोल और पेड़ की धीरे-धीरे मृत्यु। मुख्यतः फिलीपींस की बीमारीरोगी पेड़ हटाना, रोगमुक्त पौध सामग्री, संगरोध
नारियल: कली सड़न (Bud rot)कवक Phytophthora palmivoraनई कोमल पत्तियाँ पीली पड़कर मुरझाना, कली सड़कर दुर्गंध देनारोगी भाग हटाकर बोर्डो पेस्ट लगाना, बोर्डो मिश्रण का छिड़काव, जल निकास

भाग 5: चाय, कॉफी, सब्जी और मसाला फसलें (सिलेबस टॉपिक 18, 19, 20, 21, 22)

फसल और रोगरोगकारकमुख्य लक्षणप्रबंधन
चाय: ब्लिस्टर ब्लाइटकवक Exobasidium vexansकोमल पत्तियों पर पारदर्शी धब्बे, फिर फफोले जैसी उभरी संरचनाएँ, जिन पर सफेद परततुड़ाई का समय, छाया का प्रबंधन, कॉपर फफूँदनाशी का छिड़काव
चाय: लाल रतुआ (Red rust)शैवाल Cephaleuros parasiticusतनों और पत्तियों पर नारंगी-जंग रंग के मखमली धब्बेकॉपर फफूँदनाशी का छिड़काव, संतुलित पोषण, जल निकास
कॉफी: रतुआ (Rust)कवक Hemileia vastatrixपत्तियों की निचली सतह पर नारंगी चूर्ण जैसे धब्बे और ऊपरी सतह पर पीले धब्बे। 1869 में श्रीलंका (सीलोन) की कॉफी इस रोग से नष्ट हुईप्रतिरोधी किस्में, बोर्डो मिश्रण या कॉपर फफूँदनाशी का छिड़काव
कुकुरबिट: चूर्णिल आसिताकवक Erysiphe cichoracearum (Golovinomyces) और Sphaerotheca fuligineaपत्तियों और तनों पर सफेद चूर्ण जैसी परत जो बाद में पूरी पत्ती ढक लेती हैघुलनशील गंधक, डिनोकैप या हेक्साकोनाज़ोल का छिड़काव
कुकुरबिट: मोज़ेकविषाणु (जैसे Cucumber mosaic virus); वाहक: माहूपत्तियों पर मोज़ेक, छोटी पत्तियाँ, पौधा बौना, फल विकृतरोगी पौधे हटाना, माहू नियंत्रण, रोगमुक्त बीज
कुकुरबिट: कोएनेफोरा सड़नकवक Choanephora cucurbitarumफूलों और छोटे फलों पर पानी जैसी सड़न और उस पर रुई जैसी काली फफूँदजल निकास, मैन्कोज़ेब का छिड़काव, रोगी फल हटाना
कुकुरबिट: जड़ गाँठसूत्रकृमि Meloidogyne spp.जड़ों पर गाँठें, पौधा पीला और बौनागर्मी में गहरी जुताई, खली का प्रयोग, फसल चक्र
बैंगन: फोमोप्सिस अंगमारीकवक Phomopsis vexansपौध का झुलसना, पत्तियों पर धब्बे और फलों पर सड़नबीजोपचार, स्वस्थ पौध, मैन्कोज़ेब या कार्बेन्डाज़िम का छिड़काव
बैंगन: छोटी पत्ती (Little leaf)फाइटोप्लाज़्मा; वाहक: फुदका Hishimonas phycitisपत्तियाँ बहुत छोटी और संकरी, तना पतला, पौधा झाड़ीनुमा, फल नहीं लगतेरोगी पौधे उखाड़ना, फुदका नियंत्रण, रोगमुक्त पौध
टमाटर: आर्द्र गलन (Damping off)कवक Pythium, Rhizoctonia, Phytophthora spp.नर्सरी में बीज के अंकुरण से पहले या बाद में पौध का सड़ना, कॉलर पर पानी जैसा सड़ा हुआ भागऊँची क्यारियाँ, मृदा सौरीकरण, Trichoderma और थाइरम या कैप्टान से बीजोपचार
टमाटर: जीवाणुज उकठाजीवाणु Ralstonia solanacearumहरे पौधे का अचानक मुरझाना, तने को काटकर पानी में रखने पर जीवाणु का दूधिया बहावप्रतिरोधी किस्में, गैर-सोलेनेसी फसलों के साथ फसल चक्र, जल निकास
टमाटर: अगेती अंगमारीकवक Alternaria solaniपत्तियों पर छल्लेदार (bull's eye) धब्बे, निचली पत्तियों से शुरुआतमैन्कोज़ेब या क्लोरोथैलोनिल का छिड़काव, फसल अवशेष हटाना
टमाटर: पर्ण कुंचनविषाणु (Tomato leaf curl virus, Begomovirus); वाहक: सफेद मक्खीपत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ी और सिकुड़ी, पौधा बौना, फल कमरोगरोधी किस्में, सफेद मक्खी नियंत्रण, नर्सरी में जाली
टमाटर: जड़ गाँठसूत्रकृमि Meloidogyne incognitaजड़ों पर गाँठें, पौधा पीला व बौनानीम खली, गेंदा के साथ फसल चक्र, मृदा सौरीकरण
भिंडी: पीला शिरा मोज़ेक (Yellow vein mosaic)विषाणु (Okra yellow vein mosaic virus, Begomovirus); वाहक: सफेद मक्खीशिराओं का पीला पड़ना, पूरी पत्ती पीली, फल पीले और छोटेरोगरोधी किस्में (जैसे परभणी क्रांति, अर्का अनामिका), वाहक नियंत्रण, रोगी पौधे हटाना
अदरक: प्रकंद सड़न (Rhizome rot)कवक Pythium aphanidermatum (मुख्य रूप से) और अन्यपत्तियाँ नीचे से पीली होकर सूखना, प्रकंद नरम होकर सड़ना, दुर्गंधस्वस्थ प्रकंद, बीज प्रकंद का मैन्कोज़ेब से उपचार, जल निकास, Trichoderma, फसल चक्र

प्रैक्टिकल की झलक

सामान्यतः इस विषय के प्रैक्टिकल में निम्नलिखित काम होते हैं (अपने विश्वविद्यालय के प्रैक्टिकल मैनुअल से मिला लें):

  • रोगग्रस्त नमूनों का संग्रह, लक्षणों की पहचान और हर्बेरियम बनाना।
  • सूक्ष्मदर्शी में रोगकारक की संरचनाओं (बीजाणु, स्क्लेरोशिया) का अवलोकन।
  • बीजोपचार, बोर्डो मिश्रण और फफूँदनाशी के घोल बनाना।
  • रोग की घटना और रोग सूचकांक (PDI) निकालना।
  • खेत भ्रमण में रोग की पहचान और प्रबंधन की सलाह देना।

सोचिए और हल कीजिए

प्रश्न 1: 120 पौधों में से 18 पौधे उकठा से ग्रसित हैं। रोग की घटना कितनी है? उत्तर: 18 ÷ 120 × 100 = 15%

प्रश्न 2: 2.5 ग्राम प्रति लीटर की दर से 400 लीटर घोल बनाने के लिए कितनी दवा चाहिए? उत्तर: 2.5 × 400 = 1000 ग्राम = 1 किग्रा

प्रश्न 3: 20 पत्तों को 0 से 3 की श्रेणी में आँका गया: श्रेणी 0 = 4, श्रेणी 1 = 6, श्रेणी 2 = 6, श्रेणी 3 = 4। रोग सूचकांक (PDI) निकालिए। उत्तर: Σ = 0 + 6 + 12 + 12 = 30; PDI = 30 ÷ (3 × 20) × 100 = 50%

परीक्षा के लिए कैसे लिखें और याद रखें

  • हर रोग के उत्तर में चार शीर्षक बनाएँ: लक्षण, रोगकारक, रोग चक्र (संक्षेप), प्रबंधन। रोगकारक का वैज्ञानिक नाम ज़रूर लिखें और रेखांकित करें।
  • वाहक वाले रोगों की सूची बनाकर याद रखें: टंगरो (हरा फुदका), पीला मोज़ेक (सफेद मक्खी), बाँझपन मोज़ेक (माइट), फिलोडी और छोटी पत्ती (फुदका), बंची टॉप (माहू), रिंग स्पॉट (माहू)।
  • रोग का प्रकार पहचानें: खैरा और अमरूद की जिंक की कमी जैसे विकार रोगकारक नहीं हैं।
  • बाजरा में दो रोग मिलते हैं (हरी बाली और अरगट); दोनों के लक्षण और प्रबंधन अलग लिखें।
  • प्रबंधन में हमेशा समन्वित रोग प्रबंधन (IDM) का क्रम लिखें: सस्य, प्रतिरोधी किस्म, जैविक और अंत में रासायनिक।
  • दवा की मात्रा वही लिखें जो आपके विश्वविद्यालय की सिफारिश या पुस्तक में दी हो।

महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)

Q1. धान का झुलसा (Blast) रोग किस कवक से होता है? (अ) Bipolaris oryzae (ब) Magnaporthe oryzae (स) Rhizoctonia solani (द) Fusarium oxysporum। उत्तर: ब

Q2. धान का खैरा रोग किस तत्व की कमी से होता है? (अ) लोहा (ब) जिंक (स) मैंगनीज (द) बोरोन। उत्तर: ब

Q3. बाजरे में अरगट रोग किस कवक से होता है? (अ) Sclerospora graminicola (ब) Claviceps fusiformis (स) Sporisorium sorghi (द) Colletotrichum sublineola। उत्तर: ब

Q4. मूँग का पीला मोज़ेक रोग किस वाहक से फैलता है? (अ) माहू (ब) फुदका (स) सफेद मक्खी (द) माइट। उत्तर: स

Q5. अरहर के बाँझपन मोज़ेक रोग का वाहक कौन सा है? (अ) सफेद मक्खी (ब) माहू (स) हरा फुदका (द) माइट Aceria cajani। उत्तर: द

Q6. केले का पनामा उकठा किस कवक से होता है? (अ) Fusarium oxysporum f. sp. cubense (ब) Pseudocercospora musae (स) Pythium aphanidermatum (द) Phytophthora palmivora। उत्तर: अ

Q7. कॉफी के रतुआ का रोगकारक कौन सा है? (अ) Exobasidium vexans (ब) Hemileia vastatrix (स) Cephaleuros parasiticus (द) Alternaria solani। उत्तर: ब

Q8. निम्न में से कौन सी बीमारी फाइटोप्लाज़्मा से होती है? (अ) तिल की फिलोडी (ब) धान का टंगरो (स) भिंडी का पीला शिरा मोज़ेक (द) कपास का पर्ण कुंचन। उत्तर: अ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: रोग त्रिकोण (Disease triangle) क्या है?
उत्तर: रोग के लिए रोगग्राही पौधा, रोगकारक और अनुकूल वातावरण, इन तीनों का एक साथ होना ज़रूरी है। किसी एक को हटाने से रोग रुक जाता है।

प्रश्न: बीजोपचार क्यों ज़रूरी है?
उत्तर: बहुत से रोग बीज या मृदा से शुरू होते हैं (कंड, हरी बाली, कॉलर सड़न)। बीजोपचार सबसे सस्ता और असरदार उपाय है।

प्रश्न: विषाणु रोगों की दवा क्यों नहीं होती?
उत्तर: विषाणु रोगों का सीधा इलाज नहीं है। इसलिए रोगरोधी किस्म, रोगी पौधे हटाना और वाहक नियंत्रण पर जोर दिया जाता है।

प्रश्न: बोर्डो मिश्रण क्या है?
उत्तर: कॉपर सल्फेट और चूने का मिश्रण है, जो कई फफूँद और जीवाणु रोगों के लिए सुरक्षात्मक दवा के रूप में प्रयोग होता है।

प्रश्न: कौन से रोग राजस्थान की फसलों के लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: बाजरे की हरी बाली और अरगट, ग्वार की जीवाणुज अंगमारी, कपास का पर्ण कुंचन, तिल का तना सड़न और अनार की जीवाणुज अंगमारी (तेल्या) महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न: सिलेबस में कुल कितने टॉपिक और लेक्चर हैं?
उत्तर: थ्योरी में 22 टॉपिक हैं और कुल 32 लेक्चर निर्धारित हैं।

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आगे पढ़ने के लिए

संदर्भ: आर.एस. सिंह, Diseases of Fruit Crops और Plant Diseases; जी.एन. अग्रिओस, Plant Pathology; ICAR e-course और अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालय की पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज़।

लेखक की टिप्पणी: यह लेख सिलेबस के आधार पर मौलिक रूप से तैयार किया गया है। अंक और उदाहरण अभ्यास हेतु हैं। फफूँदनाशी, जीवाणुनाशी और कीटनाशकों की मात्रा, उनकी उपलब्धता और अनुमोदन समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए प्रयोग से पहले अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग की ताज़ा सिफारिश और दवा के लेबल से जाँच लें।

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