खाद, उर्वरक एवं मृदा उर्वरता प्रबंधन (Manures, Fertilizers and Soil Fertility Management, SSAC-311) B.Sc. (Hons.) Agriculture के पाँचवें सेमेस्टर का 3 क्रेडिट (2+1) का कोर्स है। फसल की उपज और लागत का सबसे बड़ा हिस्सा पोषक तत्व प्रबंधन से तय होता है, इसलिए यह विषय कृषि परीक्षाओं और खेती दोनों के लिए बहुत अहम है। सिलेबस में 24 टॉपिक (32 थ्योरी लेक्चर) और 16 प्रैक्टिकल लेक्चर हैं। इस लेख में सभी टॉपिक क्रमवार, तालिकाओं, सूत्रों, MCQ और FAQ के साथ समझाए गए हैं।
1. जैविक खादों का परिचय और महत्व
जैविक खादें (Organic manures) पौधों व पशुओं के अवशेषों से बनी वे खादें हैं जिनमें पोषक तत्व कम मात्रा में, पर कार्बनिक पदार्थ अधिक मात्रा में होता है।
- मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाकर संरचना, जल धारण क्षमता और वायु संचार सुधारती हैं।
- मुख्य व सूक्ष्म दोनों तरह के पोषक तत्व धीरे-धीरे उपलब्ध कराती हैं।
- सूक्ष्मजीवों की क्रिया बढ़ाती हैं, CEC व बफर क्षमता सुधारती हैं।
- रासायनिक उर्वरकों की उपयोग क्षमता बढ़ाती हैं और पर्यावरण को सुरक्षित रखती हैं।
2. जैविक खादों का वर्गीकरण
| वर्ग | उदाहरण |
|---|---|
| स्थूल (Bulky) खादें | गोबर की खाद (FYM), कम्पोस्ट (खेत/ग्रामीण/शहरी), वर्मीकम्पोस्ट, हरी खाद, बायोगैस स्लरी, मुर्गी की खाद, भेड़-बकरी की खाद, प्रेसमड, सीवेज-स्लज, फसल अवशेष |
| सांद्र (Concentrated) खादें | खलियाँ (खाने योग्य: मूँगफली, तिल, नारियल; न खाने योग्य: अरंडी, नीम, करंज, महुआ), हड्डी का चूरा, रक्त चूर्ण, मछली चूर्ण, सींग-खुर चूर्ण, गुआनो |
3. स्थूल खादों के गुण और बनाने की विधियाँ
| खाद | औसत पोषक तत्व (% N : P₂O₅ : K₂O) |
|---|---|
| गोबर की खाद (FYM) | लगभग 0.5 : 0.2 : 0.5 |
| कम्पोस्ट | लगभग 0.5 : 0.15 : 0.5 |
| वर्मीकम्पोस्ट | लगभग 1.5 : 1.0 : 1.5 (स्रोत के अनुसार भिन्न) |
| मुर्गी की खाद | लगभग 3.0 : 2.5 : 1.5 |
| भेड़-बकरी की खाद | लगभग 0.7–0.9 : 0.4–0.6 : 0.8–1.0 |
(क) गोबर की खाद (FYM)
- विधि: गड्ढा (ट्रेंच) विधि (लगभग 6–7.5 मी लंबा × 1.5–2 मी चौड़ा × 1 मी गहरा) या ढेर विधि; गोबर के साथ पशुओं का मूत्र सोखा बिछावन (भूसा/पत्ती) डालना।
- सुपरफॉस्फेट या जिप्सम मिलाने से अमोनिया का नुकसान घटता है; ऊपर से मिट्टी/घास से ढकना। 3–4 माह में पक जाती है।
- मात्रा: सामान्यतः 10–20 टन/हेक्टेयर।
(ख) कम्पोस्ट बनाना
कच्चे पदार्थ का C:N अनुपात (फसल अवशेष में लगभग 80:1) सूक्ष्मजीवों द्वारा घटकर लगभग 15–20:1 या कम हो जाता है। आदर्श नमी 50–60%; थर्मोफिलिक अवस्था में तापमान 55–65 °C।
| विधि | विशेषता |
|---|---|
| इंदौर विधि (हावर्ड) | ढेर में 15 सेमी की परतों में अवशेष, गोबर व मूत्र-युक्त मिट्टी; तीन बार पलटना; लगभग 3 माह; वायवीय (Aerobic) |
| बैंगलोर विधि (आचार्य) | गड्ढे में परतें; अपेक्षाकृत अवायवीय; 4–6 माह |
| नाडेप विधि (नारायण देवराव पंढरीपांडे) | छिद्रयुक्त ईंट की टंकी; परतों में अवशेष, गोबर व मिट्टी; लगभग 90–120 दिन |
| शहरी/ग्रामीण कम्पोस्ट | कूड़े-कचरे व गोबर का मिश्रण |
(ग) वर्मीकम्पोस्ट
केंचुओं (Eisenia fetida, Eudrilus eugeniae, Perionyx excavatus) से जैविक अवशेषों का अपघटन। बेड में आधार परत, गोबर व अवशेष; नमी 60–70%, तापमान 20–30 °C; लगभग 45–60 दिन में तैयार। वर्मीवाश भी उप-उत्पाद है।
4. सांद्र खादों के गुण और बनाने की विधियाँ
| खाद | पोषक तत्व (% N : P₂O₅ : K₂O), लगभग |
|---|---|
| मूँगफली की खली | 7.3 : 1.5 : 1.3 |
| नीम की खली | 5.2 : 1.0 : 1.4 (कीट व निमेटोड से बचाव भी) |
| अरंडी की खली | 4.3 : 1.8 : 1.3 (विषैली, केवल खाद के लिए) |
| सरसों की खली | 5.1 : 1.8 : 1.1 |
| हड्डी का चूरा | कच्चा: N 3–4%, P₂O₅ 20–25%; भाप में पकाया: N 1–2%, P₂O₅ 25–30% |
| रक्त चूर्ण | N लगभग 10–12% |
| मछली चूर्ण | N लगभग 4–10%, P₂O₅ 3–9% |
खलियों को पीसकर बुवाई से 1–2 सप्ताह पहले मृदा में मिलाया जाता है ताकि अपघटन से अंकुरण पर बुरा असर न पड़े। हड्डी का चूरा अम्लीय मृदाओं में उपयोगी है।
5. हरी खाद और पत्ती खाद
- हरी खाद (In-situ): दलहनी फसलें (ढैंचा Sesbania aculeata, सनई Crotalaria juncea, ग्वार, लोबिया, मूँग) उसी खेत में उगाकर फूल आने से पहले (लगभग 45–50 दिन) जुताई कर दबाना।
- पत्ती खाद (Green leaf manuring): दूसरी जगह उगे पेड़-पौधों की पत्तियाँ व कोमल टहनियाँ (ग्लिरिसिडिया, करंज, आक, नीम, सुबबूल) खेत में दबाना।
- लाभ: नाइट्रोजन (ढैंचा से लगभग 60–100 किग्रा N/हे.), कार्बनिक पदार्थ, संरचना सुधार, खरपतवार दमन, क्षारीय/लवणीय मृदा सुधार और पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण।
- सावधानी: दबाने के बाद अपघटन (10–15 दिन) के बाद अगली फसल की बुवाई; पर्याप्त नमी आवश्यक। धान से पहले ढैंचा का उपयोग प्रचलित।
6. मृदा कार्बनिक पदार्थ: संघटन, गुण और उर्वरता पर प्रभाव
- संघटन: कार्बोहाइड्रेट (सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज, स्टार्च), लिग्निन, प्रोटीन, वसा, मोम, रेजिन और ह्यूमस।
- मृदा कार्बनिक पदार्थ (OM) = कार्बनिक कार्बन (OC) × 1.724 (कार्बनिक पदार्थ में लगभग 58% कार्बन)। C:N लगभग 10:1।
- अपघटन को प्रभावित करने वाले कारक: तापमान, नमी, वायु संचार, pH, C:N अनुपात, लिग्निन की मात्रा।
- खनिजीकरण व स्थिरीकरण: C:N < 20 पर नाइट्रोजन मुक्त (खनिजीकरण); C:N > 30 पर सूक्ष्मजीव मृदा का N ले लेते हैं (स्थिरीकरण/Immobilization), जिससे फसल को अस्थायी कमी।
| गुण | उर्वरता पर प्रभाव |
|---|---|
| पोषक तत्व भंडार | N, P, S का स्रोत; खनिजीकरण से धीरे-धीरे उपलब्ध |
| उच्च CEC (लगभग 200–400 cmol(p⁺)/kg) | पोषक धनायनों को रोकता है |
| संरचना | समूह निर्माण, घनत्व में कमी, अंतःस्यंदन में वृद्धि |
| जल धारण | अपने भार का कई गुना जल |
| कीलेशन व बफरिंग | Fe, Zn, Cu, Mn की उपलब्धता; pH स्थिरता |
| सूक्ष्मजीवी ऊर्जा | जैविक क्रिया में वृद्धि |
7. ह्यूमिक पदार्थ (Humic Substances): प्रकृति और गुण
| अंश | घुलनशीलता | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| फुल्विक अम्ल | अम्ल और क्षार दोनों में घुलनशील | हल्का रंग, छोटा अणुभार, कार्बोक्सिल समूह अधिक, सर्वाधिक सक्रिय |
| ह्यूमिक अम्ल | क्षार में घुलनशील; अम्ल (pH लगभग 1–2) में अवक्षेपित | गहरा भूरा, मध्यम से बड़ा अणुभार, उच्च CEC |
| ह्यूमिन | दोनों में अघुलनशील | सबसे स्थायी, मृदा खनिजों से मजबूती से बंधा |
संघटन: कार्बन लगभग 50–60%, ऑक्सीजन 30–35%, हाइड्रोजन 4–6%, नाइट्रोजन 2–6%। कार्यात्मक समूह: कार्बोक्सिल (–COOH), फिनॉलिक (–OH), कार्बोनिल और एमीनो। भूमिका: कीलेशन, बफरिंग, जड़ वृद्धि को प्रोत्साहन, संरचना व जल धारण।
8. रासायनिक उर्वरक: वर्गीकरण
| वर्ग | अर्थ / उदाहरण |
|---|---|
| सीधे (Straight) | एक ही मुख्य पोषक तत्व: यूरिया, SSP, MOP |
| जटिल (Complex) | एक ही रासायनिक यौगिक/दाने में दो या अधिक तत्व: DAP, 10-26-26, 12-32-16, 20-20-0-13 |
| मिश्रित (Mixed) | सीधे उर्वरकों का भौतिक मिश्रण |
| द्वितीयक व सूक्ष्म पोषक उर्वरक | जिप्सम, ZnSO₄, बोरेक्स आदि |
- ग्रेड (उदा. 46-0-0): क्रमशः N, P₂O₅, K₂O का प्रतिशत।
- समतुल्य अम्लता: 100 किग्रा उर्वरक को उदासीन करने के लिए CaCO₃ की आवश्यक मात्रा। अमोनियम सल्फेट 110, यूरिया 84, DAP लगभग 74, CAN शून्य के आसपास।
9. प्रमुख नाइट्रोजन उर्वरक: निर्माण रसायन और मृदा में व्यवहार
| उर्वरक | N % | निर्माण / विशेषता |
|---|---|---|
| यूरिया CO(NH₂)₂ | 46 | 2NH₃ + CO₂ → NH₂COONH₄ (अमोनियम कार्बामेट) → CO(NH₂)₂ + H₂O (उच्च दाब व ताप पर)। सर्वाधिक N; उदासीन; बाइयूरेट (< 1.5%) हानिकारक। |
| अमोनियम सल्फेट (NH₄)₂SO₄ | 20.6–21 (S 24%) | NH₃ + H₂SO₄ या जिप्सम विधि। अम्ल-उत्पन्नकारी (समतुल्य अम्लता 110); धान, क्षारीय व सल्फर-कमी वाली मृदा में उपयुक्त; अम्लीय मृदा में नहीं। |
| CAN (कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट) | 25–27 | अमोनियम नाइट्रेट + चूना पत्थर/डोलोमाइट; आधा NH₄⁺ व आधा NO₃⁻; उदासीन; अम्लीय मृदा हेतु उपयुक्त; धान में कम उपयुक्त। |
| अन्य | — | निर्जल अमोनिया 82%, अमोनियम नाइट्रेट 33–34%, अमोनियम क्लोराइड 25% (धान), सोडियम नाइट्रेट 16%, कैल्शियम नाइट्रेट 15.5% |
अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन हैबर-बॉश विधि से: N₂ + 3H₂ → 2NH₃ (लगभग 450–500 °C, 200–300 वायुमंडलीय दाब, लोहे का उत्प्रेरक)।
मृदा में नाइट्रोजन का भाग्य
- यूरिया: यूरिएज़ एंजाइम से अमोनियम कार्बोनेट → NH₄⁺; क्षारीय स्थिति और सतह प्रयोग में NH₃ वाष्पीकरण से हानि। इसलिए मृदा में मिलाकर प्रयोग।
- नाइट्रीकरण: Nitrosomonas (NH₄⁺ → NO₂⁻) और Nitrobacter (NO₂⁻ → NO₃⁻)।
- हानि के मार्ग: नाइट्रेट निक्षालन, विनाइट्रीकरण (NO₃⁻ → N₂O/N₂; जलभराव में), NH₃ वाष्पीकरण, सतही बहाव, स्थिरीकरण और 2:1 मृत्तिका में NH₄⁺ का स्थिरीकरण।
- नियंत्रण: नीम-लेपित यूरिया (NCU), सल्फर-लेपित यूरिया (SCU), यूरिएज़ अवरोधक (NBPT), नाइट्रीकरण अवरोधक (नाइट्रापाइरिन, DCD), विभाजित मात्रा, गहरा स्थान-निर्धारण (यूरिया ब्रिकेट)।
10. प्रमुख फॉस्फेटिक उर्वरक: निर्माण रसायन और मृदा में व्यवहार
| उर्वरक | P₂O₅ % | निर्माण / विशेषता |
|---|---|---|
| सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) | 16 (S लगभग 12%, Ca लगभग 19–21%) | रॉक फॉस्फेट + H₂SO₄ → Ca(H₂PO₄)₂ + CaSO₄ (जिप्सम); जल में घुलनशील; सल्फर व कैल्शियम भी देता है। |
| ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP) | 46 | रॉक फॉस्फेट + फॉस्फोरिक अम्ल → Ca(H₂PO₄)₂; सल्फर रहित। |
| डाइअमोनियम फॉस्फेट (DAP) | 46 (N 18%) | 2NH₃ + H₃PO₄ → (NH₄)₂HPO₄; दाने के आसपास प्रारंभ में क्षारीय pH, जिससे बीज के पास अमोनिया की हानि संभव। |
| अन्य | — | रॉक फॉस्फेट (अम्लीय मृदा में सीधा प्रयोग), बेसिक स्लैग, हड्डी का चूरा, NPK संकुल (10-26-26, 12-32-16, 20-20-0-13) |
मृदा में फॉस्फोरस का भाग्य
- pH 6.0–7.0 पर फॉस्फोरस की उपलब्धता सर्वाधिक।
- अम्लीय मृदा में: Fe व Al से अघुलनशील फॉस्फेट (वैरिसाइट, स्ट्रेंजाइट) बनकर स्थिरीकरण। क्षारीय/चूनेदार मृदा में: Ca से डाइकैल्शियम, ऑक्टाकैल्शियम और हाइड्रॉक्सीएपेटाइट।
- फॉस्फोरस की गतिशीलता कम (विसरण केवल कुछ मिमी), इसलिए बीज के पास कूँड़/पट्टी में प्रयोग (Placement) अधिक कुशल।
11. पोटैशिक उर्वरक
| उर्वरक | K₂O % | विशेषता |
|---|---|---|
| म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP; KCl) | 60 (Cl लगभग 47%) | सिल्वाइनाइट (KCl + NaCl) से प्रभाजी क्रिस्टलन/फ्लोटेशन; सबसे प्रचलित व सस्ता; क्लोराइड-संवेदी फसलों (तंबाकू, आलू, अंगूर) में कम उपयुक्त। |
| पोटैशियम सल्फेट (SOP; K₂SO₄) | 48–52 (S लगभग 17%) | KCl + H₂SO₄ (मैनहाइम विधि) आदि; क्लोराइड-संवेदी व सल्फर-कमी वाली मृदा के लिए। |
| अन्य | — | पोटैशियम नाइट्रेट (13-0-45), पोटैशियम मैग्नीशियम सल्फेट |
मृदा में व्यवहार: K⁺ मृत्तिका पर विनिमेय रूप में रुकता है; इलाइट व वर्मीक्यूलाइट जैसी 2:1 मृत्तिकाओं में बार-बार गीला-सूखा होने से स्थिरीकृत (Non-exchangeable) हो सकता है। मृदा में कुल K का 98% से अधिक खनिजों में, विनिमेय लगभग 1–2% और विलयन में बहुत कम होता है।
12. द्वितीयक व सूक्ष्म पोषक तत्व उर्वरक: स्रोत और प्रयोग
| तत्व | स्रोत (तत्व %) | प्रयोग |
|---|---|---|
| Ca | जिप्सम (Ca 23%, S 18%), चूना | मृदा प्रयोग |
| Mg | मैग्नीशियम सल्फेट (Mg लगभग 9.6%), डोलोमाइट | मृदा/पर्णीय |
| S | गंधक (90–100%), जिप्सम, SSP, अमोनियम सल्फेट, पाइराइट | मृदा; तिलहन व दलहन में विशेष |
| Zn | ZnSO₄·7H₂O (Zn 21%), ZnSO₄·H₂O (33%), Zn-EDTA (12%) | धान-गेहूँ में लगभग 25 किग्रा ZnSO₄/हे.; पर्णीय 0.5%; धान पौध-डुबोना |
| Fe | FeSO₄·7H₂O (19–20%), Fe-चिलेट | पर्णीय 0.5–1% (साथ में साइट्रिक अम्ल) |
| Mn | MnSO₄ (24–32%) | मृदा/पर्णीय |
| Cu | CuSO₄·5H₂O (24%) | मृदा/पर्णीय |
| B | बोरेक्स (11%), बोरिक अम्ल (17%) | मृदा/पर्णीय |
| Mo | अमोनियम मॉलिब्डेट (54%), सोडियम मॉलिब्डेट (39%) | बीज उपचार/पर्णीय (दलहन) |
रूप: ज़िंकयुक्त यूरिया (Zn लगभग 2%), बोरेटेड SSP और बहु-सूक्ष्म पोषक मिश्रण (FCO के अंतर्गत ग्रेड)।
13. जटिल और नैनो उर्वरक
- जटिल उर्वरक: एकसमान दानों में कई पोषक तत्व; भंडारण, परिवहन व प्रयोग सरल; उदाहरण: DAP (18-46-0), 10-26-26, 12-32-16, 15-15-15, 20-20-0-13।
- नैनो उर्वरक: 1–100 nm आकार के कण/संरूपण; अधिक सतह क्षेत्र। उदाहरण: नैनो यूरिया (तरल, लगभग 4% N; 500 मिली बोतल, पर्णीय छिड़काव, सामान्यतः कल्ले फूटने व पूर्व-पुष्पन अवस्था पर 2 बार), नैनो DAP, नैनो जिंक व कॉपर।
- लाभ (दावे के अनुसार): अधिक उपयोग क्षमता, कम मात्रा, कम पर्यावरणीय हानि, आसान परिवहन। सीमाएँ: दीर्घकालिक क्षेत्र प्रमाण सीमित, लागत और नियमन का प्रश्न; इसलिए इन्हें सामान्यतः संतुलित पोषण के पूरक के रूप में अपनाया जाता है।
14. मृदा सुधारक, उर्वरक भंडारण और उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO)
| सुधारक | उपयोग |
|---|---|
| चूना (CaCO₃, डोलोमाइट) | अम्लीय मृदा |
| जिप्सम | सोडिक मृदा; सल्फर-कैल्शियम स्रोत |
| गंधक/पाइराइट | क्षारीय मृदा में अम्ल उत्पन्न करना |
| जैविक सुधारक (FYM, प्रेसमड, बायोचार), बेंटोनाइट, जियोलाइट, पॉलीमर | संरचना, जल धारण व CEC में सुधार |
उर्वरक भंडारण
- सूखे, ठंडे, हवादार गोदाम में; नमी-रोधी (HDPE) थैलों में; दीवार व फर्श से अलग लकड़ी के पटरे पर।
- थैलों की ऊँचाई सीमित (प्रायः 10 थैले तक); पहले आए, पहले जाए (FIFO)।
- आर्द्रताग्राही (यूरिया, CAN, अमोनियम नाइट्रेट) उर्वरकों में नमी से गुच्छे बनना (Caking); अमोनियम नाइट्रेट व CAN को जैविक पदार्थ, ज्वलनशील वस्तुओं और कीटनाशकों से अलग रखें।
उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत; उर्वरकों के निर्माण, आयात, वितरण और बिक्री की गुणवत्ता का नियमन।
- उर्वरक विक्रेता/निर्माता का पंजीकरण/लाइसेंस, निर्धारित मानक (पोषक तत्व की न्यूनतम मात्रा, नमी की सीमा, कणों का आकार, यूरिया में बाइयूरेट की सीमा)।
- उर्वरक निरीक्षक: निरीक्षण, नमूने लेना, जब्ती; राजकीय उर्वरक विश्लेषण प्रयोगशाला में जाँच।
- बोरी पर ग्रेड, वजन, निर्माता का नाम, अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) का अंकन अनिवार्य।
- उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत कारावास और जुर्माना। बाद के संशोधनों में जैव उर्वरक, जैविक खाद और नैनो उर्वरक भी शामिल किए गए।
15. मृदा उर्वरता और पादप पोषण का इतिहास
| वैज्ञानिक / वर्ष | योगदान |
|---|---|
| वैन हेल्मोंट (1648) | विलो पौधे का प्रयोग; पौधा जल से बढ़ता है |
| जेथ्रो टुल (1731) | बारीक मृदा कण पौधे का भोजन; खूब जुताई ही खाद |
| प्रीस्टले (1771); इंगेनहाउस (1779) | ऑक्सीजन की खोज; प्रकाश संश्लेषण |
| द सॉस्यूर (1804) | CO₂ व जल पौधे का मुख्य भोजन; राख में खनिज तत्व |
| बाउसिंगॉल्ट (1834) | नाइट्रोजन संतुलन के प्रयोग; दलहन से N लाभ |
| लीबिग (1840) | खनिज सिद्धांत; "न्यूनतम का नियम" (स्प्रेंगल 1828, लीबिग द्वारा प्रचारित); कृषि रसायन के जनक |
| लॉज़ व गिल्बर्ट (1843) | रोथमस्टेड प्रयोग; सुपरफॉस्फेट का निर्माण |
| सैक्स व नॉप (1860) | जल संवर्धन (Solution culture) |
| हेलरीगेल व विल्फार्थ (1886-88) | दलहन में सहजीवी N स्थिरीकरण |
| विनोग्रैड्स्की (1890) | नाइट्रीकरण |
| मित्शरलिख (1909) | उपज वृद्धि का नियम (घटते प्रतिफल) |
| हैबर-बॉश (1909-13) | कृत्रिम अमोनिया निर्माण |
| आर्नन व स्टाउट (1939) | आवश्यक तत्वों की कसौटी |
16. आवश्यकता की कसौटी और मृदा में पोषक तत्वों के रूप
आवश्यक तत्व की कसौटी (आर्नन व स्टाउट, 1939)
- उस तत्व के अभाव में पौधा अपना जीवन-चक्र पूरा नहीं कर पाता।
- कमी के लक्षण विशिष्ट हैं और केवल उसी तत्व की आपूर्ति से ठीक होते हैं।
- तत्व पौधे के उपापचय में प्रत्यक्ष रूप से शामिल है (अप्रत्यक्ष लाभ नहीं)।
कुल 17 आवश्यक तत्व: C, H, O (वायु-जल से); मुख्य: N, P, K; द्वितीयक: Ca, Mg, S; सूक्ष्म: Fe, Mn, Zn, Cu, B, Mo, Cl, Ni। लाभदायक तत्व: Na, Si, Co, Se, V।
| तत्व | पौधे द्वारा अवशोषित रूप | मृदा में रूप |
|---|---|---|
| N | NH₄⁺, NO₃⁻ | 95% से अधिक कार्बनिक (ह्यूमस); अकार्बनिक: NH₄⁺, NO₃⁻ |
| P | H₂PO₄⁻ (pH < 7), HPO₄²⁻ (pH > 7) | कार्बनिक, Ca/Fe/Al फॉस्फेट, अधिशोषित, विलयन में |
| K | K⁺ | खनिज (सबसे अधिक), अविनिमेय, विनिमेय, विलयन |
| Ca, Mg | Ca²⁺, Mg²⁺ | विनिमेय, खनिज, विलयन |
| S | SO₄²⁻ | कार्बनिक S (अधिकांश), सल्फेट |
| Fe, Mn, Zn, Cu, Ni | Fe²⁺, Mn²⁺, Zn²⁺, Cu²⁺, Ni²⁺ | ऑक्साइड, कार्बनिक कीलेट, विनिमेय |
| B | H₃BO₃ (बोरिक अम्ल) | कार्बनिक पदार्थ, टूमलीन खनिज |
| Mo, Cl | MoO₄²⁻, Cl⁻ | ऑक्साइड, विलयन |
17. पोषक तत्वों की भूमिका, कमी और विषाक्तता के लक्षण
| तत्व | मुख्य भूमिका | कमी के लक्षण |
|---|---|---|
| N | क्लोरोफिल, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल | पुरानी पत्तियों का समान पीलापन (क्लोरोसिस), बौनापन। अधिकता: गहरा हरा रंग, गिरना, देर से पकना |
| P | ATP, न्यूक्लिक अम्ल, जड़ वृद्धि | पुरानी पत्तियों पर बैंगनी/लालिमा, बौनापन, देर से पकना |
| K | एंजाइम सक्रियण, रंध्र नियंत्रण, जल संबंध | पुरानी पत्तियों के किनारे झुलसना, कमजोर तना, गिरना |
| Ca | कोशिका भित्ति, झिल्ली; अगतिशील | नई पत्तियाँ/कलिका मरना; टमाटर का ब्लॉसम एंड रॉट, सेब का बिटर पिट, मूँगफली का पोपिंग |
| Mg | क्लोरोफिल का केंद्रीय अणु | पुरानी पत्तियों में शिराओं के बीच पीलापन (Interveinal chlorosis) |
| S | सिस्टीन, मेथियोनीन, प्रोटीन | नई पत्तियों का समान पीलापन (अगतिशील); चाय का पीलापन, सरसों में कप जैसी पत्तियाँ |
| Fe | क्लोरोफिल संश्लेषण, एंजाइम | नई पत्तियों में शिराओं के बीच पीलापन; चूनेदार मृदा में आम |
| Mn | प्रकाश संश्लेषण (जल का विघटन) | नई पत्तियों में शिरा-अंतराल पीला; जई का ग्रे स्पेक, मटर का मार्श स्पॉट, गन्ने का पहाला झुलसा |
| Zn | ऑक्सिन संश्लेषण, एंजाइम | धान का खैरा रोग (भूरे जंग जैसे धब्बे), मक्का का सफेद कली (White bud), कपास/फलों का छोटी पत्ती (Little leaf), नींबू का मोटल लीफ |
| Cu | प्लास्टोसायनिन, लिग्निन संश्लेषण | अनाजों का रिक्लेमेशन रोग, नींबू का एक्जेन्थेमा (डाई-बैक) |
| B | कोशिका भित्ति, परागण, शर्करा परिवहन; अगतिशील | चुकंदर का हार्ट रॉट, फूलगोभी का खोखला तना व भूरा गोला, बाँझ बालियाँ। विषाक्तता: पत्तियों के किनारे झुलसना |
| Mo | नाइट्रेट रिडक्टेज़, नाइट्रोजिनेज़ | फूलगोभी का व्हिपटेल, दलहन में कम नोड्यूलन, नींबू का येलो स्पॉट |
| Cl | प्रकाश संश्लेषण, परासरण | मुरझाना (दुर्लभ)। विषाक्तता: तंबाकू, आलू में पत्ती झुलसना |
| Ni | यूरिएज़ एंजाइम | पेकन का "माउस इयर" |
याद रखें: गतिशील तत्व (N, P, K, Mg) की कमी पुरानी पत्तियों में; अगतिशील (Ca, S, Fe, Mn, B, Cu, Zn कुछ हद तक) की कमी नई पत्तियों में दिखती है।
18. जड़ों तक पोषक तत्वों के परिवहन की क्रियाविधि
| क्रियाविधि | विवरण | प्रमुख तत्व |
|---|---|---|
| जड़ अवरोधन (Root interception) | बढ़ती जड़ का मृदा कण/विलयन से सीधा संपर्क; सबसे कम (लगभग 1–3%) | Ca (कुछ हद तक) |
| द्रव्य प्रवाह (Mass flow) | वाष्पोत्सर्जन से खिंचते जल के साथ घुले तत्व | NO₃⁻, SO₄²⁻, Ca²⁺, Mg²⁺, Cl⁻ |
| विसरण (Diffusion) | सांद्रता प्रवणता से, जड़ के पास कमी होने पर; धीमा | P (लगभग अधिकांश), K |
जड़ के भीतर आयनों का अवशोषण निष्क्रिय (सांद्रता प्रवणता से) और सक्रिय (ऊर्जा व्यय, वाहक प्रोटीन व H⁺-ATPase से) दोनों प्रकार से होता है।
19. पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रभावित करने वाले कारक
- मृदा pH: pH 6–7 पर अधिकांश तत्व उपलब्ध; अम्लीय में Al/Mn विषाक्तता और P स्थिरीकरण; क्षारीय में Zn, Fe, Cu, Mn की कमी।
- कार्बनिक पदार्थ, CEC व मृत्तिका का प्रकार (K व NH₄⁺ का स्थिरीकरण)।
- नमी व वायु संचार: जलभराव में अपचयन (Fe, Mn की अधिकता; Zn की कमी), विनाइट्रीकरण।
- तापमान: खनिजीकरण और जड़ वृद्धि पर प्रभाव।
- पोषक तत्वों की अंतःक्रिया: विरोधिता (Mg–K, P–Zn, Fe–Mn, Ca–B) और सहक्रिया (N–P)।
- जड़ तंत्र, माइकोराइजा (VAM से P अवशोषण वृद्धि), सूक्ष्मजीव, संघनन और फसल की प्रजाति।
20. मृदा उर्वरता का मूल्यांकन
| विधि | विवरण |
|---|---|
| कमी के लक्षण (Visual) | सरल पर देर से; "छिपी भूख (Hidden hunger)" का पता नहीं |
| मृदा विश्लेषण (Soil testing) | उपलब्ध पोषक तत्वों का रासायनिक मापन |
| पादप विश्लेषण | कुल पोषक तत्व की जाँच या त्वरित ऊतक परीक्षण |
| जैविक परीक्षण | गमला प्रयोग (Pot culture), खेत में उर्वरक परीक्षण (सर्वश्रेष्ठ पर महँगा), सूक्ष्मजीव विधियाँ (Aspergillus niger परीक्षण), न्यूबॉयर पौध विधि |
| सूचक पौधे | कमी के लक्षण जल्दी दिखाने वाले पौधे |
21. मृदा परीक्षण और पोषक तत्वों के क्रांतिक स्तर
मृदा परीक्षण में नमूना लेना, तैयार करना, विश्लेषण, परिणाम की व्याख्या और उर्वरक अनुशंसा शामिल है। क्रांतिक स्तर (Cate & Nelson, 1965): वह पोषक तत्व सांद्रता जिसके नीचे उर्वरक डालने पर फसल प्रतिक्रिया देती है (अधिकतम उपज का लगभग 90–95% प्राप्त करने वाला स्तर)।
| पोषक तत्व | विधि | निम्न / मध्यम / उच्च (सन्निकट) या क्रांतिक स्तर |
|---|---|---|
| कार्बनिक कार्बन | वाल्कली-ब्लैक (नम ऑक्सीकरण, K₂Cr₂O₇ + H₂SO₄; फेरस अमोनियम सल्फेट से टाइट्रेशन; पुनःप्राप्ति कारक ≈ 1.33) | < 0.5% / 0.5–0.75% / > 0.75% |
| उपलब्ध N | क्षारीय परमैंगनेट (सुब्बैया व आसिजा) | < 280 / 280–560 / > 560 किग्रा/हे. |
| उपलब्ध P | ऑल्सन (0.5M NaHCO₃, pH 8.5; उदासीन-क्षारीय); ब्रे-1 (अम्लीय) | < 10 / 10–25 / > 25 किग्रा P/हे. (ऑल्सन) |
| उपलब्ध K | उदासीन 1N NH₄OAc, फ्लेम फोटोमीटर | < 108 / 108–280 / > 280 किग्रा K₂O/हे. |
| उपलब्ध S | 0.15% CaCl₂ निष्कर्ष; टर्बिडिमेट्री | क्रांतिक स्तर लगभग 10 मिग्रा/किग्रा |
| Zn, Fe, Mn, Cu | DTPA निष्कर्ष (लिंडसे व नॉर्वेल); AAS | क्रांतिक: Zn 0.6; Fe 4.5; Mn 2.0; Cu 0.2 मिग्रा/किग्रा |
| B, Mo | गर्म जल घुलनशील B; अम्लीय अमोनियम ऑक्सलेट Mo | क्रांतिक: B 0.5; Mo 0.2 मिग्रा/किग्रा |
22. सूचक पौधे और उर्वरक अनुशंसा की विधियाँ
सूचक पौधे (Indicator plants)
| कमी | सूचक पौधा / लक्षण |
|---|---|
| Zn | धान (खैरा रोग), मक्का (सफेद कली), नींबू (लिटिल लीफ) |
| Fe | ज्वार, गन्ना, मूँगफली (क्लोरोसिस) |
| Mn | जई (ग्रे स्पेक), मटर (मार्श स्पॉट), गन्ना (पहाला झुलसा) |
| Cu | जई (रिक्लेमेशन), नींबू (एक्जेन्थेमा) |
| B | चुकंदर (हार्ट रॉट), फूलगोभी (खोखला तना), रिजका |
| Mo | फूलगोभी (व्हिपटेल), दलहन |
| Mg, Ca, K, S | तंबाकू (Mg), टमाटर (Ca), आलू/कपास (K), चाय/सरसों (S) |
उर्वरक अनुशंसा की विधियाँ
| विधि | आधार |
|---|---|
| सामान्य अनुशंसा | क्षेत्र/फसल के लिए औसत मात्रा |
| मृदा परीक्षण आधारित (क्रांतिक स्तर / पोषक तत्व सूचकांक) | निम्न-मध्यम-उच्च श्रेणी के अनुसार मात्रा घटाना/बढ़ाना |
| STCR (मृदा परीक्षण फसल अनुक्रिया; लक्षित उपज समीकरण) | लक्षित उपज के अनुसार: उर्वरक = (प्रति क्विंटल पोषक आवश्यकता × लक्षित उपज − मृदा का योगदान) ÷ उर्वरक की क्षमता |
| पोषक तत्व संतुलन (Balance sheet) | आगत व निर्गत का अंतर |
| पादप ऊतक आधारित | DRIS (डायग्नोसिस एंड रेकमेंडेशन इंटीग्रेटेड सिस्टम), CND |
| उपज-अनुक्रिया वक्र | मित्शरलिख समीकरण; लीबिग का न्यूनतम का नियम |
NIV < 1.67 निम्न; 1.67–2.33 मध्यम; > 2.33 उच्च (L, M, H = निम्न, मध्यम, उच्च श्रेणी वाले नमूनों की संख्या)
23. पोषक तत्व उपयोग क्षमता (NUE)
| सूचकांक | सूत्र |
|---|---|
| कृषि क्षमता (AE) | (Yf − Y0) / F (किग्रा उपज प्रति किग्रा पोषक तत्व) |
| आभासी पुनःप्राप्ति क्षमता (ARE) | (Uf − U0) / F × 100 |
| शारीरिक क्षमता (PE) | (Yf − Y0) / (Uf − U0) |
| आंशिक कारक उत्पादकता (PFP) | Yf / F |
Yf, Y0 = उर्वरक सहित/रहित उपज; Uf, U0 = उर्वरक सहित/रहित पोषक तत्व अवशोषण; F = प्रयुक्त उर्वरक।
- भारत में अनुमानित NUE: N लगभग 30–35%, P लगभग 15–20%, K लगभग 60–70%, S 8–12%, Zn 2–5%।
- प्रभावित करने वाले कारक: फसल व किस्म, मृदा (बनावट, pH, कार्बनिक पदार्थ), जल, उर्वरक का स्रोत-मात्रा-समय-विधि, जलवायु, हानि (निक्षालन, वाष्पीकरण, विनाइट्रीकरण, बहाव, स्थिरीकरण), कीट-खरपतवार, असंतुलित पोषण।
- सुधार के उपाय: विभाजित मात्रा, गहरा/पट्टी में प्रयोग, नीम-लेपित व धीमी गति से घुलने वाले उर्वरक, नाइट्रीकरण अवरोधक, संतुलित N-P-K-S-Zn, INM, पत्ती रंग चार्ट (LCC) व SPAD मीटर, स्थल-विशिष्ट पोषक प्रबंधन (SSNM), ड्रिप फर्टिगेशन, नैनो उर्वरक।
24. समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM)
INM: मृदा उर्वरता और पौध पोषक आपूर्ति को वांछित उत्पादकता के लिए इष्टतम स्तर पर रखना, जिसमें जैविक, अकार्बनिक और जैविक (सूक्ष्मजीवी) सभी स्रोतों का एकीकृत उपयोग हो।
| घटक | उदाहरण |
|---|---|
| रासायनिक उर्वरक | N, P, K, S और सूक्ष्म तत्व (मृदा परीक्षण आधारित) |
| जैविक खाद | FYM, कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट, हरी खाद, फसल अवशेष |
| जैव उर्वरक | राइजोबियम (दलहन), एजोटोबैक्टर/एजोस्पिरिलम (अनाज), नील-हरित शैवाल व एजोला (धान), PSB (फॉस्फेट घुलनशील जीवाणु), VAM (Glomus), KMB (पोटाश घुलनशील) |
| फसल प्रणाली | दलहन का समावेश, फसल चक्र, अंतरफसल |
- सिद्धांत: संतुलित पोषण, जैविक स्रोतों से लगभग 25–50% पोषक आपूर्ति का प्रतिस्थापन, मृदा परीक्षण पर आधारित योजना।
- लाभ: उपज की स्थिरता, 20–30% तक रासायनिक उर्वरक की बचत, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, पर्यावरण सुरक्षा और अधिक लाभ-लागत अनुपात।
- उदाहरण: धान-गेहूँ में हरी खाद (ढैंचा) या FYM के साथ अनुशंसित NPK की कम मात्रा; दलहन में राइजोबियम + PSB कल्चर।
25. प्रैक्टिकल में क्या सीखेंगे
| यंत्र | सिद्धांत |
|---|---|
| pH मीटर, चालकता मापी | ग्लास इलेक्ट्रोड से H⁺ सांद्रता; विद्युत चालकता |
| कलरीमीटर/स्पेक्ट्रोफोटोमीटर | बीयर-लैम्बर्ट नियम: A = ε c l (अवशोषण सांद्रता के समानुपाती) |
| फ्लेम फोटोमीटर | ज्वाला में उत्तेजित परमाणुओं का उत्सर्जन (Na, K, Ca) |
| परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोफोटोमीटर (AAS) | मुक्त परमाणुओं द्वारा प्रकाश अवशोषण (Zn, Fe, Cu, Mn) |
| केल्डाल उपकरण | H₂SO₄ से पाचन (N → (NH₄)₂SO₄); NaOH से आसवन; बोरिक अम्ल में NH₃ संग्रह और अम्ल से टाइट्रेशन |
| टर्बिडीमीटर | BaSO₄ की धुँधलाहट से सल्फर मापन |
| प्रयोग | विधि |
|---|---|
| मृदा कार्बनिक कार्बन | वाल्कली-ब्लैक |
| उपलब्ध N | क्षारीय परमैंगनेट |
| उपलब्ध P | ऑल्सन (नीला रंग; स्पेक्ट्रोफोटोमीटर) |
| विनिमेय K, Ca, Mg | NH₄OAc निष्कर्ष; K फ्लेम फोटोमीटर, Ca-Mg EDTA टाइट्रेशन |
| उपलब्ध S | CaCl₂ निष्कर्ष, टर्बिडिमेट्री |
| DTPA-Zn | DTPA निष्कर्ष, AAS |
| पादप में N, P, K, S | N: केल्डाल; P: वैनाडोमॉलिब्डेट पीला रंग (420 nm) या मॉलिब्डेनम नीला; K: फ्लेम फोटोमीटर; S: टर्बिडिमेट्री (डाय-एसिड पाचन के बाद) |
| त्वरित ऊतक परीक्षण (N, P, K) | N: डाइफेनिलएमीन (नीला रंग); P: अमोनियम मॉलिब्डेट + स्टैनस क्लोराइड (नीला); K: सोडियम कोबाल्टिनाइट्राइट (पीली धुँधलाहट) |
OM % = OC % × 1.724
कार्बनिक कार्बन % = (B − S) × N × 0.003 × 100 / W × 1.33 (वाल्कली-ब्लैक; B, S = ब्लैंक व नमूना टाइट्रेशन, N = FAS की नॉर्मलिटी, W = मृदा का वजन)
फसल को आवश्यक उर्वरक (किग्रा/हे.) = (पोषक तत्व की मात्रा ÷ उर्वरक में पोषक %) × 100
उदाहरण: 120 किग्रा N के लिए यूरिया = 120 ÷ 46 × 100 ≈ 261 किग्रा/हे.
यूरिया की मात्रा DAP से N घटाकर: 60 किग्रा P₂O₅ हेतु DAP = 60 ÷ 46 × 100 ≈ 130 किग्रा (इससे 130 × 0.18 ≈ 23 किग्रा N भी मिलता है)
26. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)
- FYM: 0.5 : 0.2 : 0.5; पूर्ण पकने में 3–4 माह; इंदौर, बैंगलोर, नाडेप कम्पोस्ट विधियाँ।
- OM = OC × 1.724; C:N > 30 पर N स्थिरीकरण।
- यूरिया 46% N; अमोनियम सल्फेट 20.6% N + 24% S; CAN 25–27% N।
- SSP 16% P₂O₅ (S 12%); TSP 46%; DAP 18-46-0; MOP 60% K₂O; SOP 48–52% K₂O।
- आर्नन व स्टाउट (1939): आवश्यक तत्व की कसौटी; कुल 17 आवश्यक तत्व।
- पोषक परिवहन: जड़ अवरोधन, द्रव्य प्रवाह (NO₃⁻), विसरण (P, K)।
- उपलब्ध N: क्षारीय परमैंगनेट; P: ऑल्सन; K: NH₄OAc; Zn: DTPA (क्रांतिक 0.6 मिग्रा/किग्रा); OC: वाल्कली-ब्लैक।
- NUE (N) लगभग 30–35%; FCO 1985 आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत।
27. महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा है: (अ) 20.6% (ब) 33% (स) 46% (द) 82%। उत्तर: स
Q2. DAP का ग्रेड है: (अ) 18-46-0 (ब) 46-0-0 (स) 0-46-0 (द) 12-32-16। उत्तर: अ
Q3. आवश्यक तत्व की कसौटी किसने दी? (अ) लीबिग (ब) आर्नन व स्टाउट (स) मित्शरलिख (द) जेथ्रो टुल। उत्तर: ब
Q4. मृदा के उपलब्ध N का निर्धारण किस विधि से होता है? (अ) ऑल्सन (ब) वाल्कली-ब्लैक (स) क्षारीय परमैंगनेट (द) DTPA। उत्तर: स
Q5. जड़ तक P किस क्रियाविधि से पहुँचता है? (अ) द्रव्य प्रवाह (ब) विसरण (स) अवरोधन (द) वाष्पोत्सर्जन। उत्तर: ब
Q6. धान का खैरा रोग किस तत्व की कमी से होता है? (अ) Fe (ब) Mn (स) Zn (द) B। उत्तर: स
Q7. फुल्विक अम्ल की घुलनशीलता है: (अ) केवल क्षार में (ब) अम्ल और क्षार दोनों में (स) दोनों में अघुलनशील (द) केवल जल में। उत्तर: ब
Q8. NADEP कम्पोस्ट विधि किसने विकसित की? (अ) हावर्ड (ब) आचार्य (स) पंढरीपांडे (द) लीबिग। उत्तर: स
28. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: SSAC-311 के कितने क्रेडिट और लेक्चर हैं?
उत्तर: 3 क्रेडिट (2+1); थ्योरी के 32 और प्रैक्टिकल के 16 लेक्चर।
प्रश्न: जैविक खाद और रासायनिक उर्वरक में क्या अंतर है?
उत्तर: जैविक खाद में पोषक तत्व कम पर कार्बनिक पदार्थ अधिक होता है, जबकि रासायनिक उर्वरक में पोषक तत्व अधिक और शीघ्र उपलब्ध होते हैं पर कार्बनिक पदार्थ नहीं।
प्रश्न: यूरिया में नीम का लेप क्यों करते हैं?
उत्तर: नीम का लेप नाइट्रीकरण की गति धीमी कर N की हानि घटाता है और उपयोग क्षमता बढ़ाता है।
प्रश्न: अम्लीय मृदा में कौन-सा N उर्वरक उपयुक्त है?
उत्तर: CAN या सोडियम नाइट्रेट जैसे उदासीन/क्षारीय प्रभाव वाले; अमोनियम सल्फेट जैसे अम्ल-उत्पन्नकारी उपयुक्त नहीं।
प्रश्न: STCR क्या है?
उत्तर: मृदा परीक्षण फसल अनुक्रिया विधि, जिसमें लक्षित उपज के अनुसार उर्वरक की मात्रा तय की जाती है।
प्रश्न: INM से क्या लाभ हैं?
उत्तर: उपज स्थिर रहती है, उर्वरक की बचत होती है, मृदा स्वास्थ्य सुधरता है और पर्यावरण पर कम बोझ पड़ता है।
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संदर्भ पुस्तकें (Reference Books)
टी.डी. विश्वास एवं एस.के. मुखर्जी, Textbook of Soil Science, टाटा मैकग्रा-हिल (2006); डी.के. दास, Introductory Soil Science, कल्याणी (2002); एम.एम. राय, Principles of Soil Science, मैकमिलन इंडिया (2002); आर.के. मेहरा, Textbook of Soil Science, ICAR (2004); ISSS, Fundamentals of Soil Science, IARI; एम.एल. जैक्सन, Soil Chemical Analysis (1973); सी.एस. पाइपर, Soil and Plant Analysis (1950); ध्यान सिंह, छोंकर एवं द्विवेदी, Manual on Soil, Plant and Water Analysis (2005); टिसडेल, नेल्सन, बीटन व हैविन, Soil Fertility and Fertilizers (5th ed.); विनय सिंह, मृदा विज्ञान, उर्वरक एवं खाद (हिंदी), वी.के. प्रकाशन; यावलकर एवं अग्रवाल, Manures and Fertilizers (1992); एच.एल.एस. टंडन, Soil, Water and Fertilizers Analysis; FAI, Fertilizer (Control) Order, 1985 (1999); कंवर, Soil Fertility: Theory and Practice, ICAR (1976)।
नोट: यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से मौलिक रूप में तैयार किया गया है। पोषक तत्वों की मात्रा, क्रांतिक स्तर और आँकड़े स्रोत व क्षेत्र के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं; परीक्षा/प्रयोग से पहले अपनी पाठ्यपुस्तक व राज्य की अनुशंसा से मिलान करें। पाठ्यक्रम का स्रोत: Swami Keshwanand Rajasthan Agricultural University, Bikaner की Vth Deans' Committee Report।
