लाभदायक कीटों का प्रबंधन (Management of Beneficial Insects, ENTO) B.Sc. Ag. Notes Hindi & English (PDF,BOOK,PPT)

लाभदायक कीटों का प्रबंधन (Management of Beneficial Insects, ENTO) B.Sc. Ag. Notes Hindi & English (PDF,BOOK,PPT)

लाभदायक कीटों का प्रबंधन (Management of Beneficial Insects, ENTO-321) B.Sc. (Hons.) Agriculture के छठे सेमेस्टर का 2 क्रेडिट (1+1) का कोर्स है। सभी कीट हानिकारक नहीं होते; मधुमक्खी, रेशम कीट, लाख कीट, परागणकर्ता, परजीवी और परभक्षी किसानों की आय व फसल सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाते हैं। सिलेबस में भाग-I (मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन, लाख कीट पालन) और भाग-II (परजीवी/परभक्षी का सामूहिक गुणन, परागणकर्ता, खरपतवार नाशक व सफाईकर्मी कीट) शामिल हैं। थ्योरी के 16 और प्रैक्टिकल के 16 लेक्चर हैं। इस लेख में सभी टॉपिक क्रमवार, तालिकाओं, MCQ और FAQ के साथ समझाए गए हैं।

भाग-I: मधुमक्खी पालन (Beekeeping/Apiculture)

1. मधुमक्खी पालन का महत्व और मधुमक्खी की प्रजातियाँ

महत्व: शहद, मोम, प्रोपोलिस, रॉयल जेली, पराग और मधुमक्खी विष जैसे उत्पाद; फसलों में परपरागण से उपज में वृद्धि (सरसों, सूरजमुखी, कद्दूवर्गीय सब्जियाँ, फल, रिजका, प्याज बीज आदि); कम पूँजी में अतिरिक्त आय; भूमिहीन व महिलाओं के लिए रोजगार।

प्रजातिसामान्य नाम व विशेषताएँ
Apis dorsataभँवर/पहाड़ी (रॉक) मधुमक्खी; ऊँची खुली डाल/चट्टान पर एक विशाल छत्ता; अत्यंत उग्र; 30–50 किग्रा तक शहद; पालतू नहीं बनाई जा सकती
Apis cerana indicaभारतीय मधुमक्खी; बंद स्थान में कई समानांतर छत्ते; पालतू; सौम्य; 3–5 किग्रा शहद/वर्ष; थाई सैकब्रूड विषाणु से संवेदी
Apis floreaछोटी (डंगर) मधुमक्खी; झाड़ियों पर एक छोटा छत्ता; 0.5–1 किग्रा शहद; पालन संभव नहीं
Apis melliferaयूरोपीय/इटैलियन मधुमक्खी; कई छत्ते; सौम्य, कम पलायन; 25–40 किग्रा शहद/कॉलोनी/वर्ष; भारत में व्यावसायिक पालन के लिए सर्वश्रेष्ठ (1960 के दशक में पंजाब व हिमाचल में लाई गई)
Trigona / Tetragonulaडंकरहित (Stingless) मधुमक्खी; छोटे-छोटे छत्ते; कम शहद; औषधीय शहद; परागण

2. मधुमक्खी की जातियाँ और जीवविज्ञान

जाति (Caste)विशेषताविकास अवधि
रानी (Queen)उर्वर मादा; प्रति कॉलोनी एक; जीवनकाल 3–5 वर्ष; प्रतिदिन 1500–2000 अंडे तक; मधुमक्खी रानी पदार्थ (9-ODA) से कॉलोनी एकजुटलगभग 16 दिन
श्रमिक (Worker)अर्ध-विकसित मादा (बंध्य); सफाई, पोषण (नर्स), छत्ता निर्माण, भोजन खोज, रक्षा; जीवनकाल सक्रिय मौसम में लगभग 45 दिनलगभग 21 दिन
नर (Drone)अनिषेचित अंडे से (अगुणित); डंक नहीं; केवल रानी से संगम; भोजन की कमी में निकाल दिए जाते हैंलगभग 24 दिन
  • पूर्ण कायांतरण: अंडा (3 दिन) → लार्वा → प्यूपा → वयस्क। रानी के लिए रॉयल जेली का विशेष आहार।
  • संगम उड़ान: रानी हवा में कई नरों (लगभग 10–20) से संगम करती है और शुक्र संग्राहक में शुक्राणु संचित करती है।
  • झुंड निर्माण (Swarming): कॉलोनी विभाजन की प्राकृतिक क्रिया; पलायन (Absconding): भोजन की कमी, उत्पात या रोग के कारण पूरी कॉलोनी का स्थान छोड़ना।

3. पालन की व्यावसायिक विधियाँ, उपकरण और मौसमी प्रबंधन

छत्ते (Hives) और उपकरण

  • लैंगस्ट्रॉथ छत्ता (A. mellifera; चल फ्रेम; शिशु कक्ष + शहद कक्ष (Super)) और न्यूटन छत्ता (भारतीय मधुमक्खी हेतु; ISI मानक)।
  • भाग: निचला तख्ता, शिशु कक्ष, रानी बहिष्कारक (Queen excluder), शहद कक्ष, भीतरी व बाहरी ढक्कन, फ्रेम, मोम की आधार-चादर (Comb foundation)।
  • उपकरण: धूम्रक (Smoker), मधुमक्खी जाल/नकाब, छत्ता औज़ार (Hive tool), दस्ताने, ब्रश, ढक्कन हटाने का चाकू (Uncapping knife), शहद निष्कासक (अपकेंद्री मशीन), फीडर, झुंड पकड़ने का डिब्बा, नर प्रपंच।

मौसमी प्रबंधन (राजस्थान सहित उत्तर भारत)

मौसमप्रबंधन
बसंत (फरवरी-अप्रैल)कॉलोनी का विस्तार, शहद कक्ष जोड़ना, झुंड नियंत्रण, शहद निष्कासन (सरसों, बरसीम, सूरजमुखी)
ग्रीष्म (मई-जून)छाया, पानी, हवादार छत्ते; अभाव काल (Dearth) में चीनी की चाशनी (1:1); पर्वतीय क्षेत्र में प्रवास (Migration)
वर्षा (जुलाई-सितंबर)वर्षा से सुरक्षा, पलायन व लूट (Robbing) रोकना, भोजन की पूर्ति, मोमी कीट से बचाव
शरद (अक्टूबर-नवंबर)नई रानी बदलना, कॉलोनी का निर्माण (Build-up), कमजोर कॉलोनी का मिलान
शीत (दिसंबर-जनवरी)इन्सुलेशन (बोरी/घास), चाशनी से पोषण, ठंडी हवा से बचाव

प्रवासी मधुमक्खी पालन: फूलों के मौसम के अनुसार छत्तों को सरसों, सूरजमुखी, बरसीम और बेर के क्षेत्रों में ले जाना। राजस्थान (भरतपुर, कोटा) सरसों शहद के लिए प्रसिद्ध है।

4. मधुमक्खी के शत्रु और रोग

शत्रु/रोगविवरणप्रबंधन
मोमी कीट (Wax moth)
Galleria mellonella
इल्लियाँ छत्ते की मोम व शिशु खाकर जाले बनाती हैं; कमजोर कॉलोनियों में अधिककॉलोनी मजबूत रखना; पुराने छत्ते हटाना; भंडारित छत्तों पर सल्फर/पैराडाइक्लोरोबेंजीन (PDB) की धूमन; ठंडा भंडार
वरोआ माइट
Varroa destructor
पर्णपाती माइट; शिशु व वयस्क का रक्त चूसता है; A. mellifera में गंभीरफॉर्मिक अम्ल, थायमॉल, ऑक्सेलिक अम्ल; नर शिशु कक्ष हटाना
ततैया, हॉर्नेट (Vespa), मधुमक्खी भक्षी पक्षी (Merops), चींटी, छिपकली, मेंढक, चूहेमधुमक्खी को खाते हैं या छत्ते पर हमला करते हैंप्रवेश द्वार छोटा करना; चींटी रोधी स्टैंड (जल कटोरी); शत्रुओं को नष्ट
अमेरिकन फाउलब्रूड
Paenibacillus larvae
बीजाणु बनाने वाला जीवाणु; शिशु सड़ते हैं; रस्सी जैसा लसदार पदार्थ ("रोपिनेस परीक्षण")संक्रमित सामग्री जलाना; ऑक्सीटेट्रासाइक्लिन (सावधानी)
यूरोपियन फाउलब्रूड
Melissococcus plutonius
शिशु मर जाते हैं (खट्टी गंध)कॉलोनी को मजबूत करना, रानी बदलना
सैकब्रूड / थाई सैकब्रूड विषाणुलार्वा थैली जैसा; विशेषतः A. cerana मेंकमजोर कॉलोनी का मिलान; रानी बदलना; रोगी छत्ते हटाना
नोसेमा रोग
Nosema apis
वयस्क मक्खी की आँत में माइक्रोस्पोरिडिया; दस्तफ्यूमैजिलिन; स्वच्छता
चॉकब्रूड (Ascosphaera apis)शिशु चॉक जैसे सफेद-कठोरवेंटिलेशन व स्वच्छता

5. मधुमक्खी चरागाह, भोजन खोज और संचार

चरागाह (Bee pasturage)

स्रोतउदाहरण
मकरंद (Nectar)सरसों, सूरजमुखी, बरसीम, यूकेलिप्टस, बेर, नीम, आम, लीची, Prosopis juliflora, नींबू वर्ग, अजवाइन-धनिया
पराग (Pollen)मक्का, बाजरा, ज्वार, अरंडी, नारियल, खजूर, कद्दूवर्गीय
दोनोंसरसों, सूरजमुखी, बेर, कपास (पुष्पेतर मकरंद), तिल

अभाव काल (Dearth): ग्रीष्म व वर्षा। इसके लिए चारागाह कैलेंडर, फलदार/पुष्पीय वृक्षों का रोपण और चाशनी/पराग प्रतिस्थापन का उपयोग।

परागण में महत्व

पर-परागित फसलों में मधुमक्खी के उपयोग से उपज में बड़ी वृद्धि (सामान्यतः 20–100% तक)। सामान्य सुझाव: सरसों, सूरजमुखी व बरसीम बीज के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 2–5 कॉलोनी; फूल आने पर छत्ते खेत के निकट रखना और उस अवधि में कीटनाशी का प्रयोग न करना (या शाम को सुरक्षित कीटनाशी)।

भोजन खोज और नृत्य संचार (वॉन फ्रिश, नोबेल 1973)

नृत्यअर्थ
गोलाकार नृत्य (Round dance)भोजन निकट (लगभग 50–100 मी के भीतर); दिशा नहीं बताता
अर्धचंद्राकार (Sickle) नृत्यमध्यम दूरी
हिलने वाला (Waggle) नृत्यभोजन दूर (> 100 मी); छत्ते की ऊर्ध्वाधर रेखा से कोण = सूर्य से भोजन की दिशा; हिलने की अवधि/तीव्रता = दूरी; नृत्य की जीवंतता = भोजन की गुणवत्ता
  • भोजन खोजने की दूरी सामान्यतः 2–3 किमी (अधिकतम 5 किमी तक); पराग पश्च पैर की टोकरी (Corbicula) में, मकरंद शहद-आमाशय में।
  • फेरोमोन: रानी पदार्थ (9-ODA), नासोनोव ग्रंथि (दिशा/घर की पहचान), चेतावनी (आइसोपेंटाइल एसीटेट)।
  • शहद निर्माण: श्रमिक के हाइपोफैरिंजियल ग्रंथि के एंजाइम (इन्वर्टेज़) से सुक्रोज → ग्लूकोज + फ्रुक्टोज; नमी घटाकर लगभग 17–20% करने के बाद मोम से ढक्कन। शहद में लगभग 80% शर्करा।

भाग-I (क): रेशम कीट पालन (Sericulture)

6. रेशम कीट पालन का महत्व और रेशम की प्रजातियाँ

रेशम उत्पादन में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है और एकमात्र ऐसा देश है जहाँ चारों व्यावसायिक रेशम (शहतूत, टसर, एरी, मूगा) बनते हैं। केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB; 1949; बेंगलुरु) इस क्षेत्र का नियामक है। कर्नाटक शहतूत रेशम का सबसे बड़ा उत्पादक है।

रेशमकीट व पोषक पौधाविशेषता
शहतूत (Mulberry)Bombyx mori; शहतूत (Morus alba)कुल उत्पादन का लगभग 70–90%; सर्वोत्तम गुणवत्ता
टसर (Tasar)Antheraea mylitta; अर्जुन, साल, आसनझारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा; तांबे जैसा रंग
एरी (Eri)Samia (Philosamia) ricini; अरंडीअसम व पूर्वोत्तर; "अहिंसा रेशम" (कोकून से पतंगे के निकलने के बाद)
मूगा (Muga)Antheraea assamensis; सोम, सोआलूकेवल असम; सुनहरा पीला रेशम

7. बहुसंततिता (Voltinism) और रेशम कीट का जीवविज्ञान

प्रकारविवरण
एकसंतति (Univoltine)वर्ष में एक पीढ़ी; यूरोपीय नस्लें; अंडों में सुषुप्ति
द्विसंतति (Bivoltine)वर्ष में दो पीढ़ी; जापानी/चीनी नस्लें; उच्च गुणवत्ता
बहुसंतति (Multivoltine)वर्ष में दो से अधिक पीढ़ियाँ; उष्णकटिबंधीय नस्लें (Pure Mysore, Nistari)
संकर (Cross breed)बहुसंतति × द्विसंतति; भारत में अधिकांश पालन

जीवन चक्र (Bombyx mori)

  • अंडा: रोगमुक्त अंडे (DFL); 25 °C पर लगभग 10–12 दिन में सेना (Incubation)।
  • लार्वा: 5 अवस्थाएँ (4 निर्मोचन), कुल लगभग 20–28 दिन; शहतूत की पत्तियाँ खाता है; रेशम ग्रंथियाँ (रूपांतरित लार ग्रंथियाँ)।
  • कोकून: लार्वा परिपक्व होकर खाना छोड़ देता है और एक सतत रेशमी धागे (लगभग 600–1500 मी) से कोकून बनाता है; धागा = फाइब्रोइन (लगभग 75%) + सेरिसिन (गोंद; 25%)।
  • प्यूपा कोकून के भीतर (लगभग 10–12 दिन); पतंगा: भोजन नहीं करता; संगम के बाद मादा लगभग 300–500 अंडे देती है।

8. शहतूत की खेती, किस्में, पत्तियों की तुड़ाई और संरक्षण

  • प्रजातियाँ व किस्में: Morus alba, M. indica; किस्में: V-1 (विक्ट्री-1), S-36, S-1635, K-2 (कनवा-2), MR-2, M-5, S-54।
  • रोपण: कलम से; दूरी लगभग 90 × 90 सेमी (या कतार जोड़ी विधि); छँटाई (Pruning) वर्ष में 1–2 बार।
  • उर्वरक: सिंचित में प्रायः लगभग 300 : 120 : 120 (N : P₂O₅ : K₂O) किग्रा/हे./वर्ष, कई बार में; FYM 20 टन/हे.; सिंचाई।
  • तुड़ाई: पत्ती तुड़ाई (Leaf picking) या पूरी शाखा काटना (Shoot harvest); सुबह या शाम को; पत्तियाँ परिपक्व (प्रोटीन लगभग 22–25%)।
  • संरक्षण: गीले टाट/कपड़े से ढककर ठंडे, छायादार, हवादार कक्ष में; ढेर बनाकर दबाना नहीं; कोमल पत्तियाँ पहले अवस्था के कीटों हेतु (चॉकी पालन)।

9. कोकून का पालन, चंद्रिका पर चढ़ाना, तुड़ाई; रेशम कीट के शत्रु व रोग

पालन विधि

  • पालन गृह की सफाई व निर्जमीकरण (2% फॉर्मेलिन, 5% विरंजक चूर्ण, चूना)।
  • चॉकी पालन: पहली-दूसरी अवस्था; तापमान 26–28 °C, आर्द्रता 80–90%; कोमल पत्ती।
  • बड़े कीटों का पालन: तीसरी से पाँचवीं अवस्था; तापमान 24–26 °C, आर्द्रता 65–70%; भरपूर पत्ती; बिस्तर की नियमित सफाई; निर्मोचन में न छेड़ना।
  • चंद्रिका (Mountage) पर चढ़ाना: पाँचवीं अवस्था के अंत में परिपक्व लार्वा (पारदर्शी, पीले, खाना बंद) को चंद्रिका (घूर्णी, प्लास्टिक संक्षेप चंद्रिका) में रखना।
  • कोकून की तुड़ाई: चढ़ाने के लगभग 5–6 दिन बाद; छँटाई; हीनन/स्टीफलिंग (धूप, भाप या गर्म हवा से प्यूपा को मारना) और रीलिंग (धागा निकालना)।
रोग / शत्रुकारण / विवरणप्रबंधन
पेब्रिनNosema bombycis (माइक्रोस्पोरिडियन); अंड के माध्यम से भी; पाश्चर (1870) की खोजमाँ पतंगे की सूक्ष्मदर्शी जाँच; रोगमुक्त अंडे (DFL)
फ्लैचरीजीवाणु व विषाणु (संक्रामक/असंक्रामक); दस्त, सुस्तीस्वच्छता, ताजी पत्ती; रोगी लार्वा हटाना
ग्रासरी (पीलिया)न्यूक्लियर पॉलीहेड्रोसिस विषाणु (BmNPV); शरीर फूलकर फटनानिर्जमीकरण; रोगी कीट नष्ट करना
मस्कार्डिनकवक: सफेद (Beauveria bassiana), हरा (Metarhizium), पीला (Aspergillus); कीट कठोर, चूर्ण-आवृतचूने का चूर्ण, आर्द्रता नियंत्रण, कमरे की सफाई
उज़ी मक्खीExorista bombycis (Diptera: Tachinidae); अंडे लार्वा पर, मैगट अंदर; कोकून में छेदजालीदार खिड़कियाँ; उज़ीसाइड (नोडालिन); उज़ी ट्रैप
अन्य शत्रुचींटी, छिपकली, चूहे, डर्मेस्टिड भृंग (कोकून भंडार में)स्वच्छता, पानी की नालियाँ, जाली

भाग-I (ख): लाख कीट पालन (Lac Culture)

10. लाख का महत्व, लाख कीट की प्रजातियाँ, आकारिकी और जीवविज्ञान

  • कीट: Kerria lacca (पूर्व नाम Tachardia lacca), गण Hemiptera, कुल Kerriidae/Coccidae। भारत विश्व में लाख का प्रमुख उत्पादक है (झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र)। भारतीय लाख अनुसंधान संस्थान (ILRI; नमकुम, राँची; 1925) अब ICAR-IINRG।
  • आकारिकी: मादा थैलीनुमा, पैर-पंख रहित, लाख रेज़िन का आवरण; नर छोटा, पंखयुक्त/पंखहीन।
  • जीवन चक्र: अंडा मादा के शरीर में फूटता है → लाल क्रॉलर (प्रथम अवस्था निम्फ) बाहर निकलकर टहनी पर स्थिर होता है और लाख स्रावित करता है → निम्फ अवस्थाएँ (मादा 3, नर 4) → वयस्क; पीढ़ी लगभग 6 माह।
नस्ल / फसलविवरण
कुसमी (Kusmi)कुसुम (Schleichera oleosa) पर; श्रेष्ठ गुणवत्ता; फसलें: जेठवी व अघनी
रंगीनी (Rangeeni)पलाश, बेर आदि पर; फसलें: कतकी व बैसाखी

पोषक पौधे

पलाश (Butea monosperma), बेर (Ziziphus mauritiana), कुसुम, खेजड़ी (Prosopis cineraria), बबूल, Flemingia macrophylla (झाड़ी), अरहर, पीपल आदि।

लाख उत्पादन की प्रक्रिया

  1. ब्रूड लाख (गर्भित मादा वाली लाख की डंडियाँ) का चयन व पोषक पौधे की शाखाओं पर बाँधना (टीकाकरण, Inoculation)।
  2. क्रॉलर 2–3 सप्ताह में निकलकर फैलते हैं; पर्याप्त संख्या में बसने पर ब्रूड लाख हटाना।
  3. टहनियाँ लाख से ढककर तैयार होने पर स्टिक लाख के रूप में काटना (कटाई)।
  4. प्रसंस्करण: स्टिक लाख → पीसना, धोना, छानना → बीज लाख (दानेदार, अशुद्धि रहित) → पिघलाकर पतली परत बनाना (देशी, घोलक या मशीन विधि) → शेलैक (चपड़ा; पत्तियाँ/फ्लेक) या बटन लाख (पिघले लाख की बूँदों से गोल टिकिया)।

लाख और उसके उत्पाद

उत्पादउपयोग
शेलैकवार्निश, पॉलिश, सीलिंग मोम, विद्युत रोधी, पेंट, चूड़ियाँ, गहने, टैबलेट की कोटिंग, फल-मिठाई की चमक (Glaze)
बीज लाख, बटन लाखमध्यवर्ती उत्पाद; निर्यात
लाख रंजक (Lac dye)धुलाई के पानी से; प्राकृतिक लाल रंग (लैकैइक अम्ल)
लाख मोम, विरंजित लाखपॉलिश, सौंदर्य प्रसाधन, खाद्य

शत्रु: परभक्षी इल्लियाँ Eublemma amabilis व Pseudohypatopa pulverea; परजीवी ततैया (Tachardiaephagus tachardiae, Aprostocetus purpureus)।

भाग-II: परजीवी, परभक्षी और अन्य लाभदायक कीट

11. परजीवी व परभक्षी वाले कीट-गण

वर्गगण व कुलउदाहरण
परजीवी (Parasitoids)Hymenoptera: Trichogrammatidae, Braconidae, Ichneumonidae, Chalcididae, Eulophidae, Encyrtidae, Scelionidae, AphelinidaeTrichogramma, Bracon hebetor, Cotesia flavipes, Campoletis chlorideae, Brachymeria, Encarsia, Telenomus
Diptera: Tachinidae; StrepsipteraSturmiopsis inferens, Bessa remota
परभक्षी (Predators)Coleoptera: Coccinellidae, Carabidae, StaphylinidaeCoccinella septempunctata, Cheilomenes sexmaculata, Cryptolaemus montrouzieri
Neuroptera: ChrysopidaeChrysoperla zastrowi sillemi
Hemiptera: Reduviidae, Anthocoridae, Miridae, PentatomidaeRhynocoris fuscipes, Orius, Cyrtorhinus lividipennis, Eocanthecona furcellata
Diptera: Syrphidae, Asilidae; Odonata; Mantodea; Hymenoptera (चींटी Oecophylla)सिर्फिड, ड्रैगनफ्लाई, प्रेइंग मेंटिस, बुनकर चींटी (आम/नींबू वर्ग)

परजीवी के प्रकार: अंड (Trichogramma, Telenomus), लार्वा (Bracon, Campoletis), प्यूपा (Brachymeria, Xanthopimpla); आंतरिक (Endoparasitoid) / बाह्य (Ectoparasitoid); एकल (Solitary) / सामूहिक (Gregarious); प्राथमिक / अति-परजीवी (Hyperparasitoid)।

12. परजीवी व परभक्षी का सामूहिक गुणन

(क) Trichogramma chilonis (अंड परजीवी)

  1. मेजबान गुणन: चावल के पतंगे (Corcyra cephalonica) को ज्वार के दरदरे दाने (जैसे 2.5 किग्रा) + मूँगफली (लगभग 100 ग्राम) + खमीर (लगभग 5 ग्राम) के निर्जमित माध्यम पर ट्रे में पालना (लगभग 35–40 दिन में पतंगे निकलते हैं)।
  2. पतंगों को जालीदार पिंजरे में रखकर अंडे एकत्र करना (छलनी से)।
  3. UV उपचार: अंडों को पराबैंगनी प्रकाश (लगभग 30 मिनट) में रखकर भ्रूण को निष्क्रिय करना, ताकि अंडे न फूटें और परजीवी के विकास में काम आएँ।
  4. अंडों को गोंद से कार्ड (लगभग 15 × 10 सेमी) पर चिपकाना; Trichogramma वयस्कों से 24 घंटे संपर्क। परजीवित अंडे 3–4 दिन में काले हो जाते हैं।
  5. ट्राइकोकार्ड (लगभग 20,000 परजीवित अंडे/कार्ड) पत्तियों की निचली सतह पर बाँधना; प्रायः 1–1.5 लाख/हे. प्रति बार, 7–10 दिन के अंतर पर 4–6 बार। कार्ड ठंडे स्थान (लगभग 10 °C) पर थोड़े दिन सुरक्षित।

उपयोग: गन्ना (अगेता तना छेदक), कपास (बॉलवर्म), धान (तना छेदक, पत्ती लपेटक), सब्जियाँ (बैंगन छेदक), चना।

(ख) Campoletis chlorideae (लार्वा परजीवी; चना फली छेदक पर)

  1. मेजबान गुणन: Helicoverpa armigera को चने के आटे आधारित अर्ध-कृत्रिम आहार (चने का आटा, खमीर, एस्कॉर्बिक व सॉर्बिक अम्ल, अगर, विटामिन) पर 25 ± 2 °C व 65–70% RH में पालना; इल्लियों को अलग-अलग रखना (परस्पर भक्षण से बचाव); पतंगों को 10% शहद/चीनी के घोल पर रखकर अंडे लेना।
  2. परजीवी का गुणन: दूसरी-तीसरी अवस्था की इल्लियों को वयस्क परजीवी युग्मों के साथ जार/पिंजरे में लगभग 24 घंटे रखना; फिर परजीवित इल्लियों को आहार पर पालना।
  3. लगभग 8–10 दिन बाद इल्ली से परजीवी का लार्वा निकलकर कोकून बनाता है (सफेद-क्रीम रेशमी कोकून); 4–5 दिन में वयस्क निकलते हैं; वयस्कों को 10% शहद का भोजन; पूरा चक्र लगभग 15–20 दिन।
  4. वयस्कों को चने की फसल में फूल/फली अवस्था में छोड़ना (मात्रा विश्वविद्यालय की अनुशंसा के अनुसार)।

(ग) लेडी बर्ड भृंग (परभक्षी)

  • प्रजातियाँ: Coccinella septempunctata व Cheilomenes sexmaculata (माहू भक्षी); Cryptolaemus montrouzieri (मीलीबग भक्षी)।
  • शिकार का गुणन: माहू: सरसों/सेम के पौधों पर; मीलीबग: सफेद कद्दू/पेठा (Cucurbita) के फलों पर ट्रे में।
  • भृंगों को शिकार वाले पिंजरे में 25–28 °C पर रखना; अंडे कागज/कपड़े की पट्टी पर; इल्लियों को अलग (नरभक्षण से बचाव); भृंगों को 10% शहद/खमीर का पूरक; शिकार नियमित देना।
  • उपयोग: माहू, मीलीबग, शल्क कीट, सफेद मक्खी वाले आम, नींबू, कपास, सब्जियों में, बार-बार छोड़कर।
सावधानी: जैविक नियंत्रक छोड़ने के दौरान और उससे कुछ दिन पहले व बाद व्यापक स्पेक्ट्रम कीटनाशी न छिड़कें; छोड़ना शाम को/सुबह, कार्ड छाया में लगाना।

13. परागणकर्ता, खरपतवार नाशक और सफाईकर्मी कीट

वर्गप्रमुख प्रजातियाँमहत्व
परागणकर्तामधुमक्खी (Apis), भ्रमर (Bombus; टमाटर में बज़ परागण), एकल मधुमक्खियाँ (Megachile लीफकटर, Xylocopa बढ़ई मक्खी, Nomia; रिजका), सिर्फिड मक्खियाँ, तितलियाँ, पतंगे (हॉक मॉथ), भृंग, थ्रिप्स, अंजीर ततैया (Blastophaga psenes)खाद्य फसलों का लगभग तीन-चौथाई परागण पर निर्भर; उपज व गुणवत्ता में वृद्धि; जैव विविधता
खरपतवार नाशकZygogramma bicolorata (मैक्सिकन भृंग; गाजर घास/Parthenium; भारत में 1983 से), Cactoblastis cactorum व Dactylopius (नागफनी/Opuntia), Neochetina eichhorniae/N. bruchi (जलकुंभी), Cyrtobagous salviniae (Salvinia), Teleonemia scrupulosa, Ophiomyia lantanae (Lantana)रासायनिक शाकनाशी की जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्प
सफाईकर्मी (Scavengers)गोबर भृंग (Onthophagus, Catharsius; गोबर दबाना), मृतोपजीवी भृंग (Silphidae), ब्लोफ्लाई (Chrysomya, Lucilia), मांस मक्खी (Sarcophagidae), दीमक, चींटी, डर्मेस्टिड भृंगसड़े पदार्थों का अपघटन, पोषक पुनर्चक्रण, मृदा उर्वरता, स्वच्छता; फॉरेंसिक कीट विज्ञान

अन्य उपयोगी कीट: कोचिनील (Dactylopius coccus; कारमाइन रंग), शहद व मोम, औषधीय मैगट (Lucilia sericata), कीट खाद्य के रूप में।

14. प्रैक्टिकल में क्या सीखेंगे

  • मधुमक्खी की प्रजातियाँ, जातियाँ, उपकरण, मौसमी प्रबंधन, शत्रु व रोग, चरागाह पहचान, नृत्य संचार का अवलोकन।
  • रेशम कीट की प्रजातियाँ, बहुसंतति, जीवविज्ञान; शहतूत की खेती व किस्में, पत्ती तुड़ाई व संरक्षण; लाख कीट की प्रजातियाँ व पोषक पौधे की पहचान।
  • परजीवी, परभक्षी, परागणकर्ता, खरपतवार नाशक और सफाईकर्मी कीटों का संग्रह व पहचान।
  • सामूहिक गुणन: Trichogramma chilonis, Campoletis chlorideae, लेडी बर्ड भृंग (4 लेक्चर)।
  • मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन, लाख पालन और प्राकृतिक शत्रुओं के अनुसंधान/प्रशिक्षण संस्थानों का भ्रमण।

15. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)

  • Apis mellifera: यूरोपीय/इटैलियन; A. dorsata: रॉक; A. cerana: भारतीय; A. florea: छोटी।
  • रानी (16 दिन), श्रमिक (21 दिन), नर (24 दिन); नर अगुणित।
  • वॉन फ्रिश: नृत्य संचार (नोबेल 1973); वॉगल नृत्य = दूर का भोजन।
  • वरोआ (Varroa destructor); मोमी कीट (Galleria mellonella); थाई सैकब्रूड (A. cerana)।
  • रेशम: शहतूत, टसर, एरी, मूगा; भारत में चारों; Bombyx mori के 5 इंस्टार।
  • पेब्रिन: Nosema bombycis; ग्रासरी: NPV; मस्कार्डिन: कवक; उज़ी मक्खी: Exorista bombycis।
  • लाख: Kerria lacca; कुसमी (श्रेष्ठ); रंगीनी; स्टिक लाख → बीज लाख → शेलैक।
  • ट्राइकोकार्ड: Corcyra के अंडे, UV उपचारित; Campoletis: चना फली छेदक का लार्वा परजीवी।
  • गाजर घास: Zygogramma bicolorata; जलकुंभी: Neochetina।

16. महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)

Q1. भारत में व्यावसायिक मधुमक्खी पालन के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रजाति है: (अ) A. dorsata (ब) A. florea (स) A. mellifera (द) Trigona। उत्तर: स

Q2. मधुमक्खी के नर (ड्रोन) बनते हैं: (अ) निषेचित अंडे से (ब) अनिषेचित अंडे से (स) रॉयल जेली से (द) श्रमिक से। उत्तर: ब

Q3. मधुमक्खी के नृत्य संचार पर नोबेल पुरस्कार किसे मिला? (अ) वॉन फ्रिश (ब) पाश्चर (स) बासी (द) मॉर्गन। उत्तर: अ

Q4. रेशम कीट की पेब्रिन बीमारी का कारण है: (अ) विषाणु (ब) Nosema bombycis (स) Beauveria (द) जीवाणु। उत्तर: ब

Q5. केवल असम में पाया जाने वाला रेशम है: (अ) शहतूत (ब) टसर (स) एरी (द) मूगा। उत्तर: द

Q6. लाख कीट का वैज्ञानिक नाम है: (अ) Bombyx mori (ब) Kerria lacca (स) Apis cerana (द) Antheraea mylitta। उत्तर: ब

Q7. Trichogramma के गुणन में मेजबान है: (अ) Helicoverpa (ब) Corcyra cephalonica (स) Galleria (द) Spodoptera। उत्तर: ब

Q8. गाजर घास का जैविक नियंत्रक है: (अ) Cactoblastis (ब) Neochetina (स) Zygogramma bicolorata (द) Dactylopius। उत्तर: स

17. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: ENTO-321 के कितने क्रेडिट और लेक्चर हैं?
उत्तर: 2 क्रेडिट (1+1); थ्योरी के 16 और प्रैक्टिकल के 16 लेक्चर।

प्रश्न: मधुमक्खी कॉलोनी में एक ही रानी क्यों होती है?
उत्तर: रानी पदार्थ (9-ODA) कॉलोनी को एकजुट रखता है और श्रमिकों में रानी बनने की प्रक्रिया रोकता है; दूसरी रानी को सामान्यतः मार दिया जाता है।

प्रश्न: फसलों पर कीटनाशी छिड़काव से मधुमक्खी को कैसे बचाएँ?
उत्तर: फूल आने के समय छिड़काव न करें, शाम को छिड़काव करें और कम विषैले (जैव) विकल्प चुनें।

प्रश्न: अहिंसा रेशम किसे कहते हैं?
उत्तर: एरी रेशम, जिसमें पतंगे के निकलने के बाद कोकून से धागा निकाला जाता है।

प्रश्न: शेलैक क्या है?
उत्तर: लाख कीट के रेज़िन से बना शुद्ध उत्पाद, जो वार्निश, पॉलिश, दवा की कोटिंग और खाद्य चमक में काम आता है।

प्रश्न: ट्राइकोकार्ड कब लगाएँ?
उत्तर: कीट के अंड-अवस्था पर (पतंगे/अंड दिखने पर), सुबह या शाम को, पत्ती की निचली सतह पर, 7–10 दिन के अंतर पर 4–6 बार।

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संदर्भ पुस्तकें (Reference Books)

डीबैक पी. (1974), Biological Control by Natural Enemies, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस। सहायक अध्ययन: सरदार सिंह (1962), Beekeeping in India, ICAR; मिश्रा आर.सी. (1995), Honeybees and their Management in India, ICAR; गंगा जी. एवं चेट्टी जे.एस., An Introduction to Sericulture, ऑक्सफोर्ड एवं IBH; केंद्रीय रेशम बोर्ड व ICAR-IINRG (राँची) के प्रकाशन। (अधिकृत संदर्भ सूची हेतु अपने विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम देखें।)

नोट: यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से मौलिक रूप में तैयार किया गया है। तापमान, मात्राएँ व अनुपात सामान्य जानकारी पर आधारित हैं और क्षेत्र, प्रजाति और किस्म के अनुसार बदल सकते हैं; प्रयोग से पहले अपने विश्वविद्यालय/KVK/केंद्रीय रेशम बोर्ड की अनुशंसा देखें। पाठ्यक्रम का स्रोत: Swami Keshwanand Rajasthan Agricultural University, Bikaner की Vth Deans' Committee Report।

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