कीट विज्ञान के मूल सिद्धांत (Fundamentals of Entomology, ENTO-121) B.Sc. (Hons.) Agriculture के पहले वर्ष का 3 क्रेडिट (2+1) का आधारभूत कोर्स है। फसल की रक्षा, जैविक नियंत्रण, मधुमक्खी व रेशम कीट पालन और भंडारित अनाज की सुरक्षा, सब कुछ कीटों की संरचना, शरीर-क्रिया और वर्गीकरण की समझ पर टिका है। सिलेबस में 24 टॉपिक (32 थ्योरी लेक्चर) और 16 प्रैक्टिकल लेक्चर हैं। इस लेख में सभी टॉपिक क्रमवार, तालिकाओं, MCQ और FAQ के साथ आसान हिंदी में समझाए गए हैं।
1. भारत में कीट विज्ञान का इतिहास
| काल / व्यक्ति | योगदान |
|---|---|
| वैदिक व प्राचीन ग्रंथ | ऋग्वेद व अथर्ववेद में टिड्डी, मधुमक्खी, लाख कीट का उल्लेख; कौटिल्य का अर्थशास्त्र व सुरपाल का वृक्षायुर्वेद में कीट नियंत्रण के उपाय |
| 1905 | पूसा (बिहार) में इंपीरियल कृषि अनुसंधान संस्थान; कीट विज्ञान अनुभाग की स्थापना |
| एच. मैक्सवेल लेफ्रॉय, टी. बैनब्रिज फ्लेचर | इंपीरियल एंटोमोलॉजिस्ट; "Indian Insect Pests", "Indian Insect Life", "Some South Indian Insects" |
| टी.वी. रामकृष्ण अय्यर | Handbook of Economic Entomology for South India (1932) |
| हेम सिंह प्रुथी | कृषि कीट विज्ञान के पाठ्यपुस्तक लेखक व पादप संरक्षण के संस्थापक |
| 1914 | नाशक कीट एवं रोग अधिनियम (DIP Act): संगरोध |
| 1916; 1925; 1938 | भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI); भारतीय लाख अनुसंधान संस्थान (रांची); भारतीय कीट विज्ञान सोसायटी |
| 1939 | टिड्डी चेतावनी संगठन (LWO), जोधपुर (राजस्थान) |
| 1968 | कीटनाशी अधिनियम 1968; केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड व पंजीकरण समिति |
| 1977 के बाद | ICAR की जैविक नियंत्रण परियोजना (AICRP); अब राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो (NBAIR), बेंगलुरु |
| 1980 के दशक के मध्य से | समेकित कीट प्रबंधन (IPM) केंद्र |
2. कीटों की प्रमुखता (Dominance of Insecta)
अब तक वर्णित कुल प्राणी प्रजातियों में लगभग तीन-चौथाई कीट हैं (लगभग 10 लाख से अधिक प्रजातियाँ)। इसके प्रमुख कारण:
- छोटा आकार: कम भोजन व जगह में जीवन; शत्रुओं से बचाव आसान।
- बाह्यकंकाल (काइटिन युक्त क्यूटिकल): सुरक्षा, जल हानि से बचाव और माँसपेशी जुड़ाव।
- उड़ने की क्षमता: फैलाव, भोजन व साथी की खोज, शत्रुओं से पलायन (अकशेरुकी में केवल कीट उड़ते हैं)।
- उच्च प्रजनन क्षमता और छोटा जीवन चक्र; अनिषेचजनन (Parthenogenesis), बहुभ्रूणता।
- कायांतरण: लार्वा व वयस्क के भोजन-स्थान अलग होने से प्रतिस्पर्धा कम।
- विविध भोजन व आवास में अनुकूलन; विशिष्ट मुखांग; सुप्तावस्था (Diapause)।
- श्वसन: श्वास नलिका तंत्र (Tracheal system) अत्यंत कुशल।
- उन्नत संवेदी अंग, सामाजिक जीवन (दीमक, चींटी, मधुमक्खी), अनुकरण व सुरक्षात्मक रंग और कीटनाशी प्रतिरोधक क्षमता का विकास।
3. संघ आर्थ्रोपोडा का वर्गीकरण (वर्गों तक)
Arthropoda (Arthron = संधि; Podos = पैर): खंडित शरीर, संयुक्त (संधियुक्त) उपांग, काइटिन का बाह्यकंकाल, खुला परिसंचरण तंत्र, पृष्ठीय हृदय, अधर तंत्रिका रज्जु और निर्मोचन।
| वर्ग | मुख्य लक्षण | उदाहरण |
|---|---|---|
| Crustacea | दो जोड़ी शृंगिका, कई जोड़ी पैर; गलफड़े; अधिकतर जलीय | केकड़ा, झींगा, वुडलाउस |
| Arachnida | 8 पैर; शृंगिका नहीं; शीर्षवक्ष व उदर (दो भाग) | मकड़ी, घुन (Mites), किलनी, बिच्छू |
| Chilopoda | प्रति खंड एक जोड़ी पैर; शिकारी | कनखजूरा (Centipede) |
| Diplopoda | प्रति खंड दो जोड़ी पैर; शाकाहारी/अपघटक | गिंडार (Millipede) |
| Insecta (Hexapoda) | 3 भाग (सिर, वक्ष, उदर); 3 जोड़ी पैर; शृंगिका व प्रायः पंख | टिड्डा, तितली, भृंग, मधुमक्खी |
4. कीट क्यूटिकल और निर्मोचन (Molting)
| परत | विवरण |
|---|---|
| एपिक्यूटिकल (बाहरी) | काइटिन रहित; सीमेंट परत, मोम परत, क्यूटिकुलिन; जलरोधी |
| प्रोक्यूटिकल | एक्सोक्यूटिकल (कठोर, रंगीन, स्क्लेरोटाइज़्ड) और एंडोक्यूटिकल (कोमल, लचीली); काइटिन + प्रोटीन |
| एपिडर्मिस (हाइपोडर्मिस) | एक कोशिका मोटी परत; क्यूटिकल का स्राव; ग्रंथि कोशिकाएँ |
| तलीय कला (Basement membrane) | आधार परत |
काइटिन: N-एसिटिलग्लूकोसामीन की β-1,4 बंधन वाली शृंखला (पॉलीसैकेराइड)। कार्य: सुरक्षा, माँसपेशी जुड़ाव, जलहानि से बचाव, संवेदी अंगों (रोम, सेंसिला) का आधार।
निर्मोचन (Ecdysis)
- अपोलाइसिस: एपिडर्मिस का पुराने क्यूटिकल से अलग होना।
- निर्मोचन द्रव का स्राव, जिसके एंजाइम (काइटिनेज़, प्रोटीएज़) पुराने एंडोक्यूटिकल को घोलते हैं; नया एपिक्यूटिकल बनता है।
- एक्डिसिस: पुराना क्यूटिकल (Exuvia) उतरना।
- नए क्यूटिकल का फैलना व कठोर होना (स्क्लेरोटाइज़ेशन/टैनिंग)।
हार्मोनल नियंत्रण: मस्तिष्क की तंत्रिका-स्रावी कोशिकाओं से PTTH → प्रोथोरेसिक ग्रंथि से एक्डाइसोन (निर्मोचन हार्मोन); कॉर्पोरा एलाटा से किशोर हार्मोन (JH) जो किशोर लक्षण बनाए रखता है। स्टैडियम: दो निर्मोचनों के बीच का समय; इंस्टार: दो निर्मोचनों के बीच की अवस्था।
5. शरीर खंडन: टिड्डे (Grasshopper) की आकारिकी
| भाग | संरचना |
|---|---|
| सिर | 6 खंडों के संयोजन से; शीर्ष (Vertex), ललाट (Frons), गाल (Gena), क्लाइपियस, लैब्रम; एक जोड़ी संयुक्त नेत्र, तीन सरल नेत्र (Ocelli), एक जोड़ी शृंगिका, मुखांग; आंतरिक कंकाल: टेंटोरियम। सिर का झुकाव: अधोमुखी (Hypognathous; टिड्डा), अग्रमुखी (Prognathous; भृंग लार्वा), पश्चमुखी (Opisthognathous; मत्कुण/बग)। |
| वक्ष | 3 खंड: अग्रवक्ष, मध्यवक्ष, पश्चवक्ष; प्रत्येक पर एक जोड़ी पैर; मध्य व पश्चवक्ष पर पंख; प्रत्येक खंड में पृष्ठ (Notum), अधर (Sternum) और पार्श्व (Pleuron) स्क्लेराइट; दो जोड़ी वक्षीय श्वास छिद्र |
| उदर | 11 खंड (टिड्डे में); 8 जोड़ी श्वास छिद्र; पश्च सिरे पर पुच्छ तंतु (Cerci) और जननांग |
6. शृंगिका (Antennae) की संरचना और रूपांतरण
संरचना: स्केप (मूल खंड), पेडिसेल (दूसरा खंड; इसमें जॉन्सटन अंग) और फ्लैजेलम (शेष भाग)। कार्य: गंध, स्पर्श, श्रवण (मच्छर में), आर्द्रता व तापमान का ज्ञान।
| प्रकार | आकृति | उदाहरण |
|---|---|---|
| तंतुरूपी (Filiform) | धागे जैसी | टिड्डा, तिलचट्टा |
| मणिकामय (Moniliform) | मोतियों की माला जैसी | दीमक |
| सेटेसियस | ब्रिसल जैसी | चिड़ामार (ड्रैगनफ्लाई), जैसिड |
| आरीनुमा (Serrate) | आरी जैसी | क्लिक भृंग |
| कंघीनुमा (Pectinate/Bipectinate) | कंघी जैसी | नर रेशम पतंगा, सॉफ्लाई (नर) |
| गदाकार (Clavate/Capitate) | सिरे पर गदा जैसी | तितली, लेडी बर्ड भृंग |
| पटलयुक्त (Lamellate) | सिरे पर प्लेटें | गोबरैला, सफेद सूँडी (Melolonthidae) |
| कोहनीनुमा (Geniculate) | कोहनी की तरह मुड़ी | मधुमक्खी, चींटी, घुन (वीविल) |
| एरिस्टेट (Aristate) | तीसरे खंड पर ब्रिसल | घरेलू मक्खी |
| पक्षाभ (Plumose) | पंखदार रोम | नर मच्छर |
7. मुखांग (Mouthparts) की संरचना और रूपांतरण
मूल घटक: लैब्रम (ऊपरी होंठ), एक जोड़ी मैंडिबल (जबड़े), एक जोड़ी मैक्सिला (कार्डो, स्टाइपीज़, गैलिया, लैसिनिया, मैक्सिलरी पैल्प), लेबियम (निचला होंठ; दोनों द्वितीय मैक्सिला के संयोजन से), हाइपोफैरिंक्स (जीभ)।
| प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| चर्वण (Biting-Chewing) | सभी घटक पूर्ण विकसित; पत्तियाँ, अनाज चबाना | टिड्डा, तिलचट्टा, भृंग, इल्लियाँ (Lepidoptera लार्वा), दीमक |
| भेदन-चूषण (Piercing-Sucking) | स्टाइलेट (रोस्ट्रम) पौधे/त्वचा में घुसाकर रस चूसना | माहू, जैसिड, मत्कुण, सफेद मक्खी, मादा मच्छर |
| रेतन-चूषण (Rasping-Sucking) | असममित; केवल बायाँ मैंडिबल; ऊतक खुरचकर रस चूसना | थ्रिप्स |
| साइफनीकारी (Siphoning) | लंबी सूँड़ (मैक्सिला की गैलिया से), कुंडलित | तितली, पतंगा (वयस्क) |
| स्पंजी (Sponging) | लेबेलम से तरल पदार्थ चूसना | घरेलू मक्खी |
| चर्वण-लेहन (Chewing-Lapping) | मैंडिबल से चबाना और लेबियम-मैक्सिला से रस चाटना | मधुमक्खी, भ्रमर, ततैया |
| कर्तन-स्पंजी | कटाव करके रक्त/रस चूसना | घोड़ा-मक्खी (Tabanidae) |
8. पैर (Legs) की संरचना और रूपांतरण
भाग: कॉक्सा, ट्रोकेंटर, फीमर, टिबिया, टार्सस (कई खंडों में) और प्री-टार्सस (नखर, पल्विलस/एरोलियम)।
| प्रकार | कार्य | उदाहरण |
|---|---|---|
| धावन (Cursorial) | दौड़ना | तिलचट्टा, ग्राउंड बीटल |
| कूदने वाले (Saltatorial) | कूदना; पिछले पैर मोटे | टिड्डा, झींगुर |
| शिकार हेतु (Raptorial) | शिकार पकड़ना; अग्रपैर काँटेदार | प्रेइंग मेंटिस |
| खुदाई वाले (Fossorial) | मिट्टी खोदना; अग्रपैर चौड़े | मोल क्रिकेट (Gryllotalpa) |
| तैराकी (Natatorial) | तैरना; पिछले पैर चप्पू जैसे | जलीय भृंग (Dytiscus) |
| चिपकने वाले (Clasping) | बालों से चिपके रहना | जूँ (Lice) |
| परागवाहक (Corbiculate) | पश्च पैर की टोकरी (Pollen basket) | मधुमक्खी |
9. पंख: शिरा-विन्यास, रूपांतरण और युग्मन उपकरण
शिरा-विन्यास (कॉम्स्टॉक-नीधम पद्धति): अनुदैर्घ्य शिराएँ: कॉस्टा (C), सबकॉस्टा (Sc), रेडियस (R), मीडिया (M), क्यूबिटस (Cu), एनल (A), जुगल (J); शिराओं के बीच की अनुप्रस्थ शिराएँ।
| पंख का प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| टेग्मिना | चर्मिल अग्रपंख | टिड्डा, तिलचट्टा |
| इलाइट्रा (Elytra) | कठोर अग्रपंख, उड़ने में अनुपयोगी | भृंग (Coleoptera) |
| हेमीलाइट्रा | आधा कठोर, आधा झिल्लीदार | मत्कुण (Heteroptera) |
| हॉल्टियर्स (Halteres) | पश्चपंख संतुलन अंग में परिवर्तित | मक्खी, मच्छर (Diptera) |
| शल्कयुक्त | शल्कों से ढके पंख | तितली, पतंगा |
| झालरदार (Fringed) | किनारों पर बालों की झालर | थ्रिप्स |
| झिल्लीदार | पतले पारदर्शी पंख | मधुमक्खी, ड्रैगनफ्लाई |
| युग्मन उपकरण | विवरण / उदाहरण |
|---|---|
| हेमुलेट (Hamulate) | पश्चपंख पर हुक (हेम्युलाई) अग्रपंख से जुड़ते हैं; मधुमक्खी, ततैया |
| फ्रेनेट (Frenate) | फ्रेनुलम व रेटिनाकुलम; अधिकांश पतंगे |
| एम्प्लेक्सीफॉर्म | पंखों का किनारे पर अतिव्यापन; तितली |
| जुगेट (Jugate) | जुगम लोब; आदिम पतंगे (Hepialidae) |
10. जननांग और संवेदी अंग
बाह्य जननांग
- मादा: अंडनिक्षेपक (Ovipositor) 8वें व 9वें खंड की वाल्वुलाइयों से बना (मधुमक्खी में डंक इसी का रूपांतर)।
- नर: 9वें खंड पर एडीएगस (शिश्न), क्लैस्पर्स और पैरामियर्स।
संवेदी अंग
| अंग | विवरण |
|---|---|
| सरल नेत्र | पृष्ठीय ओसेलाई (वयस्क में, सामान्यतः 3) और पार्श्व स्टेम्माटा (लार्वा में); प्रकाश की तीव्रता का ज्ञान |
| संयुक्त नेत्र | अनेक ओम्मेटिडिया (कॉर्निया लेंस, क्रिस्टलीय शंकु, वर्णक कोशिकाएँ, रेटिनुला कोशिकाएँ, रेब्डोम); मोज़ेक दृष्टि; गति का पता लगाना। संधान (Apposition; दिवाचर) व अध्यारोपण (Superposition; रात्रिचर) चित्र |
| रसायन ग्राही | स्वाद (संपर्क; मुखांग व टार्सी पर) और गंध (दूर से; शृंगिका पर सेंसिला) |
| यांत्रिक ग्राही | स्पर्श रोम, जॉन्सटन अंग (मच्छर में श्रवण), कॉर्डोटोनल अंग, टिम्पेनल अंग (टिड्डे में उदर पर; झींगुर में अग्रपाद की टिबिया पर) |
11. कायांतरण (Metamorphosis); लार्वा व प्यूपा के प्रकार
| प्रकार | अवस्थाएँ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अकायांतरी (Ametabola) | अंडा → शिशु (केवल आकार में अंतर) | सिल्वरफिश, स्प्रिंगटेल |
| अपूर्ण (Hemimetabola) | अंडा → निम्फ → वयस्क | टिड्डा, तिलचट्टा, मत्कुण, जैसिड; जलीय निम्फ (नायड्स): ड्रैगनफ्लाई |
| पूर्ण (Holometabola) | अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क | तितली, भृंग, मक्खी, मधुमक्खी |
लार्वा के प्रकार
- प्रोटोपोड: अपरिपक्व, कम विकसित (परजीवी ततैयों में)।
- ऑलिगोपोड: तीन जोड़ी वक्षीय पैर, उदरीय पैर नहीं: कैम्पोडिफॉर्म (सक्रिय; लेडी बर्ड), स्कैराबीफॉर्म (C-आकार; सफेद सूँडी)।
- पॉलीपोड (इरुसिफॉर्म): वक्षीय पैर + उदरीय पैर (Prolegs); तितली/पतंगे की इल्लियाँ, सॉफ्लाई लार्वा।
- एपोडस: पैर रहित: मैगट (मक्खी), ग्रब (घुन), रिगलर (मच्छर)।
प्यूपा के प्रकार
| प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| ऑब्टेक्ट (Obtect) | उपांग शरीर से चिपके; संहत | तितली, पतंगा |
| एक्ज़ारेट (Exarate) | उपांग शरीर से स्वतंत्र | भृंग, मधुमक्खी, ततैया |
| कोएक्टेट (Coarctate) | अंतिम लार्वा की त्वचा (प्यूपेरियम) में बंद | मक्खी |
कोकून: रेशमी सुरक्षा आवरण (रेशम कीट, पतंगे)।
12. पाचन तंत्र (Digestive System)
| भाग | उत्पत्ति / अंग | कार्य |
|---|---|---|
| अग्रांत्र (Foregut/Stomodaeum) | एक्टोडर्म; क्यूटिकल से आस्तरित; मुख, ग्रसनी, ग्रसिका, क्रॉप, प्रोवेंट्रिकुलस (दाँतदार पेषणी) | भोजन का ग्रहण, संग्रह, पीसना |
| मध्यांत्र (Midgut/Mesenteron) | एंडोडर्म; क्यूटिकल नहीं; पेरिट्रॉफिक झिल्ली, जठर अंधनाल (Gastric caeca) | पाचन (एंजाइम) व अवशोषण |
| पश्चांत्र (Hindgut/Proctodaeum) | एक्टोडर्म; इलियम, कोलन, मलाशय (रेक्टल पैड) | जल व लवण का पुनः अवशोषण; मल त्याग |
लार ग्रंथियाँ एमाइलेज़ आदि एंजाइम बनाती हैं। मध्यांत्र व पश्चांत्र के जोड़ पर मैल्पिघी नलिकाएँ जुड़ती हैं। रस चूसने वाले कीटों (माहू, जैसिड) में फिल्टर चैंबर अतिरिक्त जल को निकाल देता है।
13. परिसंचरण और उत्सर्जन तंत्र
परिसंचरण तंत्र
- खुला प्रकार: रुधिर (हीमोलिम्फ) हीमोसील में बहता है।
- पृष्ठीय वाहिका: पीछे का भाग हृदय (ओस्टिया वाले कक्ष), आगे महाधमनी; पक्षी पेशियाँ (Alary muscles) हृदय को सहारा देती हैं।
- हीमोलिम्फ: प्लाज्मा + हीमोसाइट्स (प्रोहीमोसाइट, प्लाज्मेटोसाइट, ग्रैन्युलोसाइट आदि)। सामान्यतः श्वसन वर्णक नहीं, इसलिए ऑक्सीजन परिवहन कार्य नहीं।
- कार्य: पोषक तत्व, हार्मोन व अपशिष्ट का परिवहन; भक्षण (Phagocytosis), घाव भरना, रक्त का थक्का, ऊष्मा वितरण।
उत्सर्जन तंत्र
- मैल्पिघी नलिकाएँ: मध्यांत्र-पश्चांत्र संधि से निकलती अंधी नलिकाएँ; हीमोलिम्फ से नाइट्रोजनी अपशिष्ट (यूरिक अम्ल) व K⁺ लवण छानकर पश्चांत्र में डालती हैं; मलाशय में जल वापस सोख लिया जाता है।
- कीट मुख्यतः यूरिक अम्ल उत्सर्जक (Uricotelic) हैं, जिससे जल की बचत होती है।
- अन्य उत्सर्जी अंग: वसा काय (Fat body), नेफ्रोसाइट्स, पेरिकार्डियल कोशिकाएँ, क्यूटिकल।
14. श्वसन तंत्र (Respiratory System)
- श्वास छिद्र (Spiracles): बाह्य छिद्र; सामान्यतः 10 जोड़ी (2 वक्षीय + 8 उदरीय); वाल्व व छन्नी वाले।
- श्वास नलिकाएँ (Tracheae): क्यूटिकल से आस्तरित नलिकाएँ; टेनिडिया (सर्पिल मोटाई) से खुली रहती हैं।
- श्वास सूक्ष्मनलिकाएँ (Tracheoles): अंतिम सूक्ष्म शाखाएँ (लगभग 1 µm) जो ऊतकों तक O₂ पहुँचाती हैं।
- वायु कोष (Air sacs): उड़ने वाले कीटों (मधुमक्खी, टिड्डा) में।
- गैस विनिमय: विसरण और उदर-पंपन (वेंटिलेशन)।
| श्वास छिद्र का प्रकार | विवरण / उदाहरण |
|---|---|
| होलोन्यूस्टिक (Holopneustic) | 10 जोड़ी सक्रिय; टिड्डा |
| पेरिन्यूस्टिक (Peripneustic) | 9 जोड़ी; पतंगे की इल्लियाँ |
| एम्फिन्यूस्टिक (Amphipneustic) | अग्र व पश्च एक-एक जोड़ी; मक्खी के लार्वा |
| मेटान्यूस्टिक (Metapneustic) | केवल पश्च जोड़ी; मच्छर का लार्वा (साइफन) |
| एपन्यूस्टिक (Apneustic) | बंद; जलीय निम्फ में श्वास-गलफड़े (मेफ्लाई), मलाशयी गलफड़े (ड्रैगनफ्लाई) |
15. तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
- मस्तिष्क (अधिग्रसिका गुच्छिका): प्रोटोसेरिब्रम (नेत्र, ऑप्टिक लोब), ड्यूटोसेरिब्रम (शृंगिका) और ट्राइटोसेरिब्रम (लैब्रम, आँत)।
- अधोग्रसिका गुच्छिका: मुखांग व लार ग्रंथियों का नियंत्रण।
- अधर तंत्रिका रज्जु: दोहरी रज्जु, खंडशः गुच्छिकाएँ (3 वक्षीय व कुछ उदरीय); उन्नत कीटों में संयोजित।
- सहानुभूति (आंत्रीय) तंत्र: आहार नाल व हृदय का नियंत्रण।
- तंत्रिका कोशिकाएँ: संवेदी, प्रेरक और साहचर्य।
16. स्रावी (अंतःस्रावी) तंत्र
| ग्रंथि | हार्मोन व कार्य |
|---|---|
| मस्तिष्क की तंत्रिका-स्रावी कोशिकाएँ | PTTH (प्रोथोरेसिकोट्रोपिक हार्मोन); प्रोथोरेसिक ग्रंथि को प्रेरित करता है |
| कॉर्पोरा कार्डियाका | मस्तिष्क के हार्मोन का भंडारण व मुक्ति; एडिपोकाइनेटिक हार्मोन (ऊर्जा संग्रह का गतिशीलन) |
| कॉर्पोरा एलाटा | किशोर हार्मोन (JH): किशोर लक्षण बनाए रखता है; प्रजनन को नियंत्रित करता है |
| प्रोथोरेसिक ग्रंथि | एक्डाइसोन (निर्मोचन हार्मोन); वयस्क में अपक्षयित |
फेरोमोन: बहिःस्रावी रसायन (लिंग, चेतावनी, मार्ग/ट्रेल, संघ फेरोमोन), जैसे रानी मधुमक्खी का रानी पदार्थ। कीट प्रबंधन में JH अनुरूप (मेथोप्रीन), एक्डाइसोन अनुरूप और काइटिन संश्लेषण अवरोधक (डाइफ्लूबेन्ज़ूरॉन) का उपयोग।
17. प्रजनन तंत्र और जनन के प्रकार
| अंग | संरचना |
|---|---|
| मादा | एक जोड़ी अंडाशय (प्रत्येक में अंडनलिकाएँ/ओवेरिओल्स), पार्श्व अंडवाहिनी → सामान्य अंडवाहिनी → योनि; शुक्र संग्राहक (Spermatheca); सहायक (कोलेटेरियल) ग्रंथियाँ जो अंड-कोष (Ootheca) बनाती हैं |
| नर | एक जोड़ी वृषण (पुटिकाएँ), शुक्रवाहिका → शुक्राशय → स्खलन नलिका → एडीएगस; सहायक ग्रंथियाँ (शुक्राणुधानी, Spermatophore) |
अंडनलिकाओं के प्रकार: पैनोइस्टिक (पोषक कोशिकाएँ नहीं: टिड्डा, तिलचट्टा, ड्रैगनफ्लाई) और मेरोइस्टिक (पोषक कोशिकाएँ: पॉलीट्रॉफिक; टेलोट्रॉफिक)।
| जनन का प्रकार | अर्थ / उदाहरण |
|---|---|
| अंडजनन (Oviparity) | अंडे देना; अधिकांश कीट |
| जरायुजता (Viviparity) | शिशु को जन्म देना; माहू, सीसी मक्खी |
| अंडजरायुजता (Ovoviviparity) | अंडे मादा के शरीर के भीतर फूटते हैं |
| अनिषेकजनन (Parthenogenesis) | अनिषेचित अंडे से विकास: Arrhenotoky (नर; मधुमक्खी ड्रोन), Thelytoky (मादा; माहू), Amphitoky |
| बहुभ्रूणता (Polyembryony) | एक अंडे से कई भ्रूण; परजीवी ततैया (Copidosoma) |
| पीडोजेनेसिस (Paedogenesis) | लार्वा अवस्था में जनन; गॉल मिज (Miastor) |
18. वर्गीकरण विज्ञान (Taxonomy)
- महत्व: प्रजातियों की पहचान, वर्गीकरण, नामकरण, संचार और कीट प्रबंधन (सही पहचान से सही उपाय)।
- इतिहास: अरस्तू (प्रथम वर्गीकरण), जॉन रे (प्रजाति की अवधारणा), लीनियस (1758, Systema Naturae का 10वाँ संस्करण; द्विनाम पद्धति; प्राणी नामकरण का प्रारंभ), फैब्रिशियस (कीट वर्गीकरण के जनक; मुखांग आधारित), लैट्रेई, डार्विन (1859)।
- द्विनाम पद्धति (Binomial nomenclature): वंश (Genus; पहला अक्षर बड़ा) + जाति (Species; छोटे अक्षरों में); इटैलिक/रेखांकित; जैसे Helicoverpa armigera (Hübner)। नाम के बाद लेखक का नाम; यदि प्रजाति दूसरे वंश में स्थानांतरित हो तो लेखक का नाम कोष्ठक में। नियम: ICZN, प्राथमिकता का नियम (Law of priority)।
- पदानुक्रम: जगत → संघ → वर्ग → गण (Order) → कुल (Family; प्रत्यय -idae) → उपकुल (-inae) → वंश → जाति → उप-जाति।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जाति (Species) | परस्पर प्रजनन कर सकने वाला, अन्य से प्रजननात्मक रूप से पृथक जीवों का समूह |
| उप-जाति (Sub-species) | किसी जाति की भौगोलिक नस्ल (त्रिनाम पद्धति) |
| बायोटाइप (Biotype) | जाति के भीतर जैविक रूप से भिन्न समूह, जैसे भूरा फुदका (BPH) के बायोटाइप, सफेद मक्खी Bemisia tabaci का बायोटाइप B |
| वंश, कुल, गण | समान लक्षणों वाली जातियों, वंशों और कुलों के क्रमशः समूह |
कीट वर्ग के उपवर्ग: एप्टेरिगोटा (पंखहीन: सिल्वरफिश, स्प्रिंगटेल) और टेरिगोटा (पंखयुक्त: एक्सोप्टेरिगोटा व एंडोप्टेरिगोटा)।
19. गण Orthoptera, Dictyoptera, Odonata, Isoptera, Thysanoptera
| गण / कुल | मुख्य लक्षण | कृषि महत्व / उदाहरण |
|---|---|---|
| Orthoptera: Acrididae | छोटी शृंगिका, टिम्पेनम उदर पर; पिछले पैर कूदने वाले; अपूर्ण कायांतरण | टिड्डी (Schistocerca gregaria), धान-गन्ने का टिड्डा (Hieroglyphus nigrorepletus), आक टिड्डा (Poekilocerus pictus) |
| Orthoptera: Gryllidae | लंबी शृंगिका, टिम्पेनम अग्र टिबिया पर; रात्रिचर | झींगुर; (मोल क्रिकेट: Gryllotalpidae) |
| Dictyoptera: Mantidae | शिकारी, अग्रपाद रैप्टोरियल | प्रेइंग मेंटिस (लाभदायक) |
| Dictyoptera: Blattidae | चपटा शरीर, रात्रिचर, सर्वभक्षी | तिलचट्टा (Periplaneta americana) |
| Odonata | लंबा पतला शरीर; विशाल नेत्र; जलीय निम्फ में लेबियल मास्क | ड्रैगनफ्लाई, डैमसेलफ्लाई (मच्छर भक्षी; लाभदायक) |
| Isoptera: Termitidae | सामाजिक; जातियाँ (राजा, रानी, श्रमिक, सैनिक); मणिकामय शृंगिका | दीमक (Odontotermes obesus, Microtermes obesi) |
| Thysanoptera: Thripidae | झालरदार पंख, रेतन-चूषण मुखांग | प्याज का थ्रिप्स (Thrips tabaci), मिर्च का थ्रिप्स (Scirtothrips dorsalis) |
20. गण Hemiptera के कुल
Hemiptera: भेदन-चूषण मुखांग (रोस्ट्रम)। उप-गण Heteroptera (हेमीलाइट्रा; रोस्ट्रम सिर के अग्र भाग से) और Homoptera (समान झिल्लीदार पंख; रोस्ट्रम सिर के पीछे से)।
| कुल | सामान्य नाम | उदाहरण |
|---|---|---|
| Pentatomidae | शील्ड/स्टिंक बग | सरसों का चित्रित कीट (Bagrada hilaris), Nezara viridula |
| Coreidae | पत्ता-पैर मत्कुण | धान का गंधी कीट (Leptocorisa acuta) |
| Pyrrhocoridae | लाल कपास मत्कुण | Dysdercus cingulatus |
| Lygaeidae | बीज मत्कुण | धूसर कपास मत्कुण (Oxycarenus) |
| Cicadellidae | जैसिड/हरा फुदका | कपास का जैसिड (Amrasca biguttula biguttula), Nephotettix virescens (धान टंग्रो वाहक) |
| Delphacidae | प्लांट हॉपर | भूरा फुदका (Nilaparvata lugens), सफेद पीठ वाला फुदका |
| Aphididae | माहू (कॉर्निकल युक्त) | सरसों का माहू (Lipaphis erysimi), Aphis gossypii |
| Coccidae | कोमल शल्क कीट | Coccus hesperidum |
| Lophophidae (Lophopidae) | पायरिला | गन्ने का पायरिला (Pyrilla perpusilla) |
| Aleurodidae | सफेद मक्खी | Bemisia tabaci (कपास पत्ती मरोड़ व टमाटर पत्ती मरोड़ विषाणु की वाहक) |
| Pseudococcidae | चूर्णी मत्कुण (Mealybugs) | कपास का Phenacoccus solenopsis, अंगूर का Maconellicoccus hirsutus |
21. गण Neuroptera और Lepidoptera के कुल
Neuroptera: Chrysopidae (हरे जालपंख; Lacewings): लार्वा "एफिड लायन" माहू, सफेद मक्खी आदि के शिकारी; Chrysoperla zastrowi sillemi; अंडे डंठल पर।
Lepidoptera (शल्कपंखी): साइफनी मुखांग (वयस्क), चर्वण मुखांग (इल्ली), शल्कयुक्त पंख, पूर्ण कायांतरण।
| कुल | उदाहरण |
|---|---|
| Pieridae | सफेद तितली; गोभी की तितली (Pieris brassicae) |
| Papilionidae | नींबू की तितली (Papilio demoleus) |
| Noctuidae | चना फली छेदक (Helicoverpa armigera), तंबाकू की इल्ली (Spodoptera litura), कटवर्म (Agrotis ipsilon) |
| Sphingidae | हॉक मॉथ; Acherontia styx (शहद चोर), Agrius convolvuli |
| Pyralidae | धान का पीला तना छेदक (Scirpophaga incertulas), मक्का का तना छेदक (Chilo partellus), बैंगन का तना व फल छेदक (Leucinodes orbonalis) |
| Gelechiidae | कपास की गुलाबी सूँडी (Pectinophora gossypiella), आलू कंद का पतंगा (Phthorimaea operculella) |
| Arctiidae | लाल बालदार इल्ली (Amsacta moorei; राजस्थान में बाजरा, मूँग-मोठ में), बिहार बालदार इल्ली (Spilosoma obliqua) |
| Bombycidae | रेशम कीट (Bombyx mori); पालतू |
22. गण Coleoptera के कुल
Coleoptera (कठोर अग्रपंख: इलाइट्रा); चर्वण मुखांग; पूर्ण कायांतरण; सबसे बड़ा गण।
| कुल | उदाहरण |
|---|---|
| Coccinellidae (लेडी बर्ड) | शिकारी: Coccinella septempunctata, Cryptolaemus montrouzieri (मीलीबग भक्षी); शाकाहारी: Henosepilachna vigintioctopunctata (बैंगन में) |
| Galerucidae (Chrysomelidae) | लाल कद्दू भृंग (Aulacophora foveicollis) |
| Cerambycidae | लंबी मूँछ वाले भृंग; आम का तना छेदक (Batocera rufomaculata) |
| Curculionidae | घुन (वीविल): चावल का घुन (Sitophilus oryzae), शकरकंद घुन (Cylas formicarius), लाल ताड़ घुन |
| Bruchidae | दलहनी भृंग (Callosobruchus chinensis) |
| Melolonthidae | सफेद सूँडी (Holotrichia consanguinea); वयस्क को गुबरैला/चेफर |
23. गण Hymenoptera के कुल
Hymenoptera (झिल्लीदार पंख): चर्वण या चर्वण-लेहन मुखांग; हेमुलेट युग्मन; पूर्ण कायांतरण; अनेक सामाजिक व परजीवी।
| कुल | उदाहरण / महत्व |
|---|---|
| Tenthredinidae | सॉफ्लाई; सरसों की सॉफ्लाई (Athalia lugens proxima) |
| Apidae | मधुमक्खी: Apis mellifera, A. cerana, A. dorsata (भँवर/पहाड़ी मधुमक्खी), A. florea (छोटी मधुमक्खी); परागण व शहद |
| Trichogrammatidae | अंड परजीवी: Trichogramma chilonis |
| Ichneumonidae | लार्वा/प्यूपा परजीवी: Campoletis chlorideae (चना फली छेदक पर) |
| Braconidae | Cotesia flavipes (गन्ना तना छेदक पर), Bracon hebetor |
| Chalcididae | मोटी पश्च जंघा वाले परजीवी ततैया (Brachymeria) |
24. गण Diptera के कुल
Diptera (दो पंख; पश्चपंख हॉल्टियर्स में रूपांतरित); स्पंजी/भेदन-चूषण मुखांग; एपोडस (अपाद) लार्वा, कोएक्टेट प्यूपा।
| कुल | उदाहरण / महत्व |
|---|---|
| Cecidomyiidae (गॉल मिज) | धान का सिल्वर शूट कीट (Orseolia oryzae), ज्वार की मिज (Contarinia sorghicola) |
| Tachinidae | परजीवी मक्खियाँ (लाभदायक): Sturmiopsis inferens (गन्ना तना छेदक पर) |
| Agromyzidae | पर्ण सुरंगक (Leaf miner): Liriomyza trifolii, मटर का पर्ण सुरंगक |
| Culicidae | मच्छर: Anopheles (मलेरिया), Aedes (डेंगू), Culex |
| Muscidae | घरेलू मक्खी (Musca domestica) |
| Tephritidae | फल मक्खी: Bactrocera dorsalis, खरबूजे की मक्खी (B. cucurbitae), B. zonata |
25. प्रैक्टिकल में क्या सीखेंगे
कीटों का संग्रह
- उपकरण: कीट जाल (हवाई/स्वीप नेट), जलीय जाल, बीटिंग ट्रे, पिटफॉल ट्रैप, प्रकाश प्रपंच, पीला पान/चिपचिपा प्रपंच, एस्पिरेटर (पूटर), बर्लेस फनल, चिमटी, मारक बोतल (इथाइल एसीटेट)।
- संरक्षण: शुष्क (पिनिंग): कीट पिन से, सामान्यतः वक्ष के पृष्ठ भाग में (भृंग में दाहिने इलाइट्रॉन से; मत्कुण में स्कुटेलम से); तितली/पतंगों के पंख स्प्रेडिंग बोर्ड पर फैलाना; लेबल (स्थान, तिथि, संग्राहक, पोषक पौधा); कीट बॉक्स में नैफ्थलीन से संग्रहालय कीटों से बचाव।
- गीला संरक्षण: कोमल शरीर वाले (इल्ली, माहू, थ्रिप्स) को 70% अल्कोहल में; सूक्ष्म कीटों के स्थायी स्लाइड (KOH से सफाई, अल्कोहल श्रृंखला, कैनेडा बालसम)।
- अपरिपक्व अवस्थाएँ: लार्वा को गर्म जल में मारकर 80% अल्कोहल में; अंडे/प्यूपा को अलग शीशी में।
अन्य प्रयोग
- टिड्डे/तिलचट्टे की बाह्य संरचना; शृंगिका, मुखांग, पैरों के प्रकार; पंखों की शिरा-विन्यास व युग्मन उपकरण; लार्वा व प्यूपा के प्रकार।
- टिड्डे में पाचन तंत्र (क्रॉप, पेषणी, जठर अंधनाल, मैल्पिघी नलिकाएँ) और नर व मादा प्रजनन तंत्र का विच्छेदन।
- गणों (Orthoptera, Dictyoptera, Odonata, Isoptera, Thysanoptera, Hemiptera, Lepidoptera, Neuroptera, Coleoptera, Hymenoptera, Diptera) और कृषि महत्व के कुलों के लक्षणों का अध्ययन।
26. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)
- कीट: 3 भाग, 3 जोड़ी पैर, 1 जोड़ी शृंगिका; सिर में 6 खंड, वक्ष में 3, उदर में प्रायः 11।
- काइटिन: N-एसिटिलग्लूकोसामीन का पॉलीमर; एपिक्यूटिकल में काइटिन नहीं।
- निर्मोचन हार्मोन: एक्डाइसोन (प्रोथोरेसिक ग्रंथि); किशोर हार्मोन: कॉर्पोरा एलाटा।
- मैल्पिघी नलिकाएँ: उत्सर्जन; मुख्य अपशिष्ट यूरिक अम्ल।
- श्वास छिद्र: 10 जोड़ी (2 वक्षीय + 8 उदरीय)।
- टिड्डे में टिम्पेनम उदर पर; झींगुर में अग्र टिबिया पर।
- मधुमक्खी: कोहनीनुमा शृंगिका, चर्वण-लेहन मुखांग, हेमुलेट युग्मन, परागवाहक पैर।
- तितली: साइफनी मुखांग, गदाकार शृंगिका, ऑब्टेक्ट प्यूपा (क्राइसेलिस), एम्प्लेक्सीफॉर्म युग्मन।
- द्विनाम पद्धति: लीनियस (1758)।
27. महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. कीटों के शरीर में कितने भाग होते हैं? (अ) 2 (ब) 3 (स) 4 (द) 5। उत्तर: ब
Q2. निर्मोचन हार्मोन कौन-सी ग्रंथि बनाती है? (अ) कॉर्पोरा एलाटा (ब) कॉर्पोरा कार्डियाका (स) प्रोथोरेसिक ग्रंथि (द) लार ग्रंथि। उत्तर: स
Q3. मधुमक्खी की शृंगिका का प्रकार है: (अ) तंतुरूपी (ब) कोहनीनुमा (स) पक्षाभ (द) गदाकार। उत्तर: ब
Q4. मक्खी में पश्चपंख रूपांतरित होकर बनते हैं: (अ) इलाइट्रा (ब) टेग्मिना (स) हॉल्टियर्स (द) हेमीलाइट्रा। उत्तर: स
Q5. कीटों में उत्सर्जन का मुख्य अंग है: (अ) वृक्क (ब) मैल्पिघी नलिका (स) हृदय (द) लार ग्रंथि। उत्तर: ब
Q6. भृंगों के कठोर अग्रपंख कहलाते हैं: (अ) इलाइट्रा (ब) हॉल्टियर्स (स) टेग्मिना (द) हेमीलाइट्रा। उत्तर: अ
Q7. कौन-सा कीट "पूर्ण कायांतरण" दिखाता है? (अ) टिड्डा (ब) तिलचट्टा (स) तितली (द) माहू। उत्तर: स
Q8. गन्ने का पायरिला किस कुल से है? (अ) Aphididae (ब) Lophopidae (स) Cicadellidae (द) Coccidae। उत्तर: ब
28. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: ENTO-121 के कितने क्रेडिट और लेक्चर हैं?
उत्तर: 3 क्रेडिट (2+1); थ्योरी के 32 और प्रैक्टिकल के 16 लेक्चर।
प्रश्न: कीट इतने सफल क्यों हैं?
उत्तर: छोटा आकार, बाह्यकंकाल, उड़ने की क्षमता, अधिक प्रजनन, कायांतरण और विविध अनुकूलन के कारण।
प्रश्न: कीटों का रक्त ऑक्सीजन क्यों नहीं ले जाता?
उत्तर: ऑक्सीजन श्वास नलिकाओं से सीधे ऊतकों तक पहुँचती है, इसलिए हीमोलिम्फ को ऑक्सीजन परिवहन की आवश्यकता नहीं।
प्रश्न: इल्ली (Caterpillar) किस प्रकार का लार्वा है?
उत्तर: पॉलीपोड (इरुसिफॉर्म), जिसमें वक्षीय पैर और उदरीय पैर दोनों होते हैं।
प्रश्न: बायोटाइप का कीट प्रबंधन में क्या महत्व है?
उत्तर: एक ही जाति के बायोटाइप प्रतिरोधी किस्मों या कीटनाशी पर भिन्न प्रतिक्रिया दिखाते हैं, इसलिए प्रबंधन उसी के अनुसार बदलता है।
प्रश्न: लाभदायक कीट कौन-से हैं?
उत्तर: मधुमक्खी, रेशम कीट, लेडी बर्ड, क्राइसोपा, ट्राइकोग्रामा, परजीवी ततैया, टैकिनिड मक्खी, प्रेइंग मेंटिस आदि।
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सहायक संदर्भ पुस्तकें (Suggested Reading)
आर.एफ. चैपमैन, The Insects: Structure and Function; एम.एस. मणि, General Entomology; के.के. नैयर व अन्य, General and Applied Entomology, टाटा मैकग्रा-हिल; एच.एस. प्रुथी, Textbook of Agricultural Entomology; गुलन व क्रेंस्टन, The Insects: An Outline of Entomology; ए.एस. अत्वाल व जी.एस. धालीवाल, Agricultural Pests of South Asia and their Management; वी.बी. अवस्थी, Introduction to General and Applied Entomology; टी.वी. रामकृष्ण अय्यर, Handbook of Economic Entomology for South India। (अधिकृत संदर्भ सूची के लिए अपने विश्वविद्यालय का नवीनतम पाठ्यक्रम देखें।)
नोट: यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से मौलिक रूप में तैयार किया गया है। कीटों के वैज्ञानिक नाम, कुल-वर्गीकरण व आँकड़े पाठ्यपुस्तक के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं; परीक्षा से पहले अपनी पाठ्यपुस्तक से मिलान करें। पाठ्यक्रम का स्रोत: Swami Keshwanand Rajasthan Agricultural University, Bikaner की Vth Deans' Committee Report।
