खरीफ फसल उत्पादन तकनीक (Crop Production Technology-I, Kharif Crops) B.Sc. (Hons.) Agriculture के तीसरे सेमेस्टर का 2 क्रेडिट (1+1) का कोर्स है। इसमें खरीफ ऋतु की प्रमुख फसलों की उत्पत्ति, भौगोलिक वितरण, आर्थिक महत्व, मिट्टी-जलवायु की आवश्यकता, उन्नत किस्में, सस्य क्रियाएँ और उपज का अध्ययन किया जाता है। सिलेबस में 16 थ्योरी लेक्चर हैं। इस लेख में सभी फसलें क्रमवार, तालिकाओं के साथ समझाई गई हैं, ताकि परीक्षा, ICAR JRF, कृषि पर्यवेक्षक और राजस्थान की कृषि परीक्षाओं की तैयारी आसान हो।
1. सिलेबस में शामिल फसलें (एक नज़र में)
| वर्ग | फसलें |
|---|---|
| अनाज | बाजरा, मक्का, ज्वार, धान |
| तिलहन | मूँगफली, सोयाबीन; (पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज) तिल, अरंडी |
| दलहन | अरहर; (पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज) मूँग, उड़द, लोबिया, मोठ, ग्वार |
| रेशा | कपास; सनई, जूट |
| चारा | ज्वार (चारा), नेपियर; Panicum, Lasiurus, Cenchrus की जानकारी |
| लघु धान्य | रागी (फिंगर मिलेट) आदि |
सुझाव: नीचे दी गई बुवाई समय, बीज दर और उर्वरक मात्रा सामान्य अनुशंसाएँ हैं और क्षेत्र, किस्म व सिंचाई स्थिति के अनुसार बदल सकती हैं। परीक्षा में अपने विश्वविद्यालय की पुस्तक और अनुशंसा देखें।
2. बाजरा (Pearl Millet)
| बाजरा: Pennisetum glaucum | |
|---|---|
| उत्पत्ति | पश्चिमी अफ्रीका (साहेल क्षेत्र)। भारत में क्षेत्रफल और उत्पादन में राजस्थान प्रथम है। |
| महत्व | कम वर्षा वाले क्षेत्रों की मुख्य फसल; मनुष्य के लिए अनाज और पशुओं के लिए चारा-कड़बी। यह सूखा सहन करने वाली और पौष्टिक फसल है। |
| मिट्टी व जलवायु | हल्की बलुई दोमट मिट्टी, अच्छा जल निकास; 25–35 °C तापमान; लगभग 40–75 सेमी वर्षा वाले क्षेत्र। जलभराव सहन नहीं करता। |
| किस्में | HHB 67 Improved, RHB 121, RHB 173, RHB 177 (संकर); ICTP 8203 (संकुल) |
| बुवाई | मानसून की शुरुआत, जुलाई का पहला पखवाड़ा तक; बीज दर 4–5 किग्रा/हेक्टेयर; दूरी 45–50 × 10–15 सेमी |
| खाद | सिंचित में लगभग 80 किग्रा N + 40 किग्रा P₂O₅; असिंचित में कम (40–60 किग्रा N)। नाइट्रोजन आधी बुवाई पर, आधी टॉप ड्रेसिंग में |
| मुख्य समस्याएँ | मृदुरोमिल आसिता (Downy mildew), अरगट, स्मट। मेटालैक्सिल से बीज उपचार और अरगट के लिए नमक के घोल से बीज शोधन उपयोगी है। |
| उपज | असिंचित: 10–15 क्विंटल; सिंचित संकर: 25–35 क्विंटल/हेक्टेयर |
3. मक्का (Maize)
| मक्का: Zea mays | |
|---|---|
| उत्पत्ति | मध्य अमेरिका (मैक्सिको)। इसे "अनाजों की रानी" कहा जाता है। |
| महत्व | भोजन, पशु आहार, कुक्कुट आहार, स्टार्च और इथेनॉल उद्योग। |
| मिट्टी व जलवायु | उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी; 21–27 °C तापमान। जलभराव के प्रति अत्यंत संवेदनशील, विशेषकर घुटने की ऊँचाई, झंडा और सिल्किंग अवस्था पर। |
| किस्में | संकर: Ganga 5, HQPM-1 (गुणवत्ता प्रोटीन मक्का); संकुल: Pratap Makka-3 |
| बुवाई | जून-जुलाई (मानसून आने पर); बीज दर 20–25 किग्रा/हेक्टेयर; दूरी 60 × 20 सेमी |
| खाद | संकर किस्मों में लगभग 120 : 60 : 40 (N : P₂O₅ : K₂O) किग्रा/हेक्टेयर; नाइट्रोजन 3 भागों में |
| क्रांतिक अवस्थाएँ | घुटने की ऊँचाई, नर मंजरी (Tasseling), रेशम निकलना (Silking) और दाना भरना |
| उपज | संकर किस्मों से 40–60 क्विंटल/हेक्टेयर |
4. ज्वार (Sorghum): दाना और चारा
| ज्वार: Sorghum bicolor | |
|---|---|
| उत्पत्ति | अफ्रीका (इथियोपिया-सूडान क्षेत्र) |
| महत्व | खाद्यान्न के साथ हरे और सूखे चारे की प्रमुख फसल। सूखे में भी टिकती है। |
| मिट्टी व जलवायु | दोमट से भारी मिट्टी; 26–30 °C तापमान; सूखा सहन करने की अच्छी क्षमता |
| किस्में | दाना: CSH 16, CSV 15; चारा: राजस्थान चरी-1, राजस्थान चरी-2, SSG 59-3 (बहुकटाई) |
| बुवाई | जून-जुलाई। दाना: 10–12 किग्रा/हेक्टेयर, दूरी 45 × 15 सेमी। चारा: 40–50 किग्रा/हेक्टेयर (सघन) |
| खाद | दाना: 60–80 किग्रा N + 40 किग्रा P₂O₅; चारा में नाइट्रोजन अधिक |
| उपज | दाना: 25–30 क्विंटल; हरा चारा: 300–400 क्विंटल/हेक्टेयर (किस्म व कटाई पर निर्भर) |
सावधानी (HCN विषाक्तता): ज्वार की छोटी अवस्था में पौधों में धूरिन (Dhurrin) के कारण हाइड्रोसायनिक अम्ल बनता है जो पशुओं के लिए हानिकारक है। इसलिए लगभग 45–50 दिन से पहले या कम ऊँचाई पर चारा न खिलाएँ। सूखे की स्थिति में भी इसका खतरा बढ़ता है।
5. धान (Rice)
| धान: Oryza sativa | |
|---|---|
| उत्पत्ति | भारत व दक्षिण-पूर्व एशिया (इंडो-बर्मा क्षेत्र)। विश्व की आधी से अधिक आबादी का मुख्य भोजन। |
| मिट्टी व जलवायु | चिकनी, भारी और जल रोकने वाली मिट्टी उपयुक्त; 21–37 °C तापमान; अधिक नमी और पर्याप्त पानी। मिट्टी का pH तटस्थ के पास अच्छा। |
| किस्में | IR-8 (पहली बौनी किस्म, हरित क्रांति), Jaya, PR 106; बासमती: Pusa Basmati 1, Pusa Basmati 1121 |
| नर्सरी | गीली या सूखी क्यारी; 21–25 दिन की पौध। रोपाई हेतु बीज दर लगभग 30–40 किग्रा/हेक्टेयर (नर्सरी क्षेत्र खेत का लगभग 1/10) |
| रोपाई | जून के अंत से जुलाई; दूरी 20 × 15 सेमी; प्रति स्थान 2–3 पौधे। कुड़े (Puddling) के बाद रोपाई |
| खाद | लगभग 100–120 किग्रा N, 50–60 किग्रा P₂O₅, 40 किग्रा K₂O; जिंक की कमी वाले क्षेत्रों में जिंक सल्फेट |
| जल प्रबंधन | रोपाई के बाद उथला जल; कल्ले निकलने से दाना भरने तक नमी बनाए रखें, पकने से पहले पानी निकाल दें |
| उपज | 40–60 क्विंटल/हेक्टेयर (उन्नत किस्मों से अधिक) |
अन्य विधियाँ: सीधी बुवाई (DSR), श्री (SRI) पद्धति जिसमें कम बीज और कम पानी में अधिक कल्ले लिए जाते हैं।
6. मूँगफली (Groundnut)
| मूँगफली: Arachis hypogaea | |
|---|---|
| उत्पत्ति | दक्षिण अमेरिका (ब्राजील-बोलीविया क्षेत्र) |
| महत्व | तेल (लगभग 45–50%) और प्रोटीन (लगभग 25%) का स्रोत; दलहनी होने से मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण |
| मिट्टी व जलवायु | हल्की, भुरभुरी, बलुई दोमट मिट्टी, जिसमें कैल्शियम पर्याप्त हो। फलियाँ भूमि में बनने के कारण भारी मिट्टी अनुपयुक्त |
| किस्में | गुच्छेदार: JL 24, TG 37A; फैलने वाली: HNG 10, Girnar 2, GG 20 (क्षेत्र अनुसार) |
| बुवाई | जून-जुलाई; गुच्छेदार में गिरी 80–100 किग्रा/हेक्टेयर; दूरी 30 × 10 सेमी। थीरम से बीज उपचार तथा राइजोबियम/PSB कल्चर |
| खाद | कम नाइट्रोजन (लगभग 20 किग्रा) + फॉस्फोरस; जिप्सम 250–500 किग्रा/हेक्टेयर फूल आने पर, जिससे फलियाँ अच्छी भरती हैं |
| विशेष | फूल आने के बाद जायांगधर (Gynophore/Peg) भूमि में धँसकर फली बनाता है; इस समय मिट्टी चढ़ाना लाभदायक |
| उपज | असिंचित: लगभग 12–15; सिंचित: 20–25 क्विंटल फली/हेक्टेयर |
7. सोयाबीन (Soybean)
| सोयाबीन: Glycine max | |
|---|---|
| उत्पत्ति | चीन (मंचूरिया)। मध्य प्रदेश भारत का प्रमुख उत्पादक राज्य है। |
| महत्व | लगभग 40% प्रोटीन और 20% तेल; "गोल्डन बीन" या "चमत्कारी फसल" |
| मिट्टी व जलवायु | अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी; 25–30 °C तापमान; 60–100 सेमी वर्षा |
| किस्में | JS 335, JS 93-05, JS 95-60, NRC 37 |
| बुवाई | जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई; बीज दर 70–80 किग्रा/हेक्टेयर; दूरी 45 × 5 सेमी। बीज की अंकुरण क्षमता जल्दी घटती है, इसलिए ताजा बीज उपयोग करें। |
| बीज उपचार | फफूँदनाशी + Bradyrhizobium japonicum कल्चर + PSB |
| खाद | लगभग 20–30 किग्रा N (शुरुआती), 60–80 किग्रा P₂O₅, 20–40 किग्रा K₂O |
| उपज | 20–25 क्विंटल/हेक्टेयर |
8. अरहर (Pigeonpea / Red gram)
| अरहर (तुअर): Cajanus cajan | |
|---|---|
| उत्पत्ति | भारत को प्राथमिक उत्पत्ति स्थान माना जाता है (अफ्रीका पर भी मत)। |
| महत्व | प्रोटीन का सस्ता स्रोत (दाल); जड़ों की गहराई और ग्रंथियों के कारण मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि |
| मिट्टी व जलवायु | अच्छे जल निकास वाली दोमट; 20–30 °C; जलभराव असहनीय; अधिकांश असिंचित क्षेत्रों में |
| किस्में | UPAS 120 (शीघ्र पकने वाली), Manak, ICPL 87, Pusa 992 |
| बुवाई | जून-जुलाई; बीज दर 12–15 किग्रा/हेक्टेयर; दूरी 60–75 × 20 सेमी। अंतरफसल: बाजरा/ज्वार/मूँगफली के साथ |
| खाद | लगभग 20 : 50 : 20 (N : P₂O₅ : K₂O) किग्रा/हेक्टेयर; राइजोबियम कल्चर |
| विशेष | अधिक शाखाओं के लिए लगभग 30–40 दिन पर शीर्ष कलिका की कटाई (Nipping)। मुख्य रोग: उकठा (Wilt) और बाँझपन मोजैक; कीट: फली छेदक (Helicoverpa) |
| उपज | 15–20 क्विंटल/हेक्टेयर |
9. कपास (Cotton)
| कपास: Gossypium spp. | |
|---|---|
| उत्पत्ति | G. arboreum और G. herbaceum (देसी/पुरानी दुनिया) भारत-अफ्रीका क्षेत्र से; G. hirsutum और G. barbadense (अमेरिकी/नई दुनिया) से |
| महत्व | "सफेद सोना" व "रेशों का राजा"; वस्त्र उद्योग, बिनौला तेल और खली |
| मिट्टी व जलवायु | काली (रेगुर) मिट्टी सर्वोत्तम; उत्तर भारत में सिंचित बलुई दोमट भी उपयुक्त; 21–30 °C; पाला नुकसानदेह; 50–100 सेमी वर्षा या सिंचाई |
| प्रकार | देसी कपास, अमेरिकन (नरमा) कपास और Bt कपास (भारत में 2002 से) |
| बुवाई | उत्तर भारत में सिंचित क्षेत्र में अप्रैल-मई; बीज दर किस्म के अनुसार (संकर लगभग 2–3, अमेरिकन किस्म लगभग 15–20 किग्रा/हेक्टेयर); दूरी 67.5–90 × 30–60 सेमी (किस्म अनुसार) |
| बीज उपचार | लिंट हटाने के लिए अम्ल से डिलिंटिंग या फफूँदनाशी उपचार (प्रैक्टिकल का विषय) |
| कीट व रोग | अमेरिकन सूँडी, गुलाबी सूँडी, सफेद मक्खी, जैसिड; पत्ती मोड़क विषाणु |
| उपज | सामान्यतः 20–30 क्विंटल बीज कपास/हेक्टेयर (Bt संकर में अधिक) |
10. अन्य खरीफ फसलों के Package of Practices
| फसल | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| ग्वार (Clusterbean) | राजस्थान देश में अग्रणी। गोंद (Guar gum, गैलेक्टोमैनान) के लिए उद्योग में प्रयोग। बीज दर 15–20 किग्रा/हेक्टेयर, बुवाई जुलाई, दूरी 30–45 सेमी। किस्में: HG 365, HG 563, RGC 936। |
| मोठ (Mothbean) | मरुस्थलीय क्षेत्रों की सूखा सहनशील दलहन। बीज दर 12–15 किग्रा/हेक्टेयर; किस्में: RMO 40, RMO 225; कम समय में पकती है। |
| लोबिया (Cowpea) | दाना, चारा और हरी फली तीनों के लिए। दाने हेतु 20–25 किग्रा, चारे हेतु 30–40 किग्रा बीज/हेक्टेयर। मिट्टी ढकने वाली आवरण फसल के रूप में भी। |
| तिल (Sesame) | बहुत छोटा बीज; बीज दर 3–4 किग्रा/हेक्टेयर (रेत में मिलाकर बुवाई), दूरी 30 × 10 सेमी; जुलाई। किस्में: RT 46, RT 54, RT 125। उपज लगभग 5–8 क्विंटल। तेल को "तेलों की रानी" कहा जाता है। |
| अरंडी (Castor) | अफ्रीकी मूल; बीज में रिसिन (विषैला) होता है। बीज दर संकर में कम (5–8 किग्रा); दूरी लगभग 90 × 60 सेमी; किस्में: GCH 4, GCH 7, Aruna। उपज 15–25 क्विंटल। |
| उड़द (Urdbean) | भारत मूल की दलहन; बीज दर 15–20 किग्रा; किस्में: T 9, Pant U 19, Pant U 30; पीला चितेरी (Yellow Mosaic) रोग प्रमुख। |
| सनई (Sunhemp) | रेशा और हरी खाद दोनों। हरी खाद हेतु 40–50 किग्रा बीज/हेक्टेयर और 40–45 दिन पर (फूल आने से पहले) मिट्टी में दबाना। रेशा हेतु 25–30 किग्रा बीज। |
| नेपियर (Napier) | बाजरा × हाथी घास संकर, बहुवर्षीय चारा; जड़ों के टुकड़ों (Root slips) या तने की कलमों से प्रवर्धन; दूरी लगभग 90 × 60 सेमी; वर्ष में कई कटाइयाँ; बहुत अधिक हरा चारा। किस्में: NB 21, CO-3, CO-4। |
| लघु धान्य (रागी आदि) | रागी (Eleusine coracana) कैल्शियम में समृद्ध; कोदो, कुटकी, सांवा आदि कम उर्वर और कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त; पौष्टिक और मिलेट मिशन के कारण महत्वपूर्ण। |
11. चारा घासों और जूट की जानकारी (Acquaintance)
- Panicum (पेनिकम): गिनी घास (P. maximum) और नीली पैनिक घास (P. antidotale); बहुवर्षीय चारा घासें।
- Lasiurus (लैसियुरस): Lasiurus sindicus यानी सेवण घास, थार मरुस्थल की प्रमुख चारागाह घास। बहुत कम वर्षा में पनपती है।
- Cenchrus (सेंक्रस): C. ciliaris (अंजन घास) और C. setigerus (धामन घास); शुष्क क्षेत्रों के चरागाह विकास में उपयोगी।
- जूट (Jute): "सुनहरा रेशा"; दो प्रमुख प्रजातियाँ Corchorus capsularis (सफेद जूट) और C. olitorius (तोसा जूट)। गर्म, नम जलवायु; पश्चिम बंगाल प्रमुख उत्पादक; कटाई के बाद रेटिंग (Retting) द्वारा रेशा निकाला जाता है।
12. प्रैक्टिकल में क्या सीखेंगे (16 अभ्यास)
खरीफ फसलों के बीज और आदानों की पहचान, बुवाई की विधियाँ, धान की नर्सरी और रोपाई, बीज दर तथा अंकुरण संबंधी गणनाएँ, बीज उपचार, घासों के लिए रोपण सामग्री तैयार करना, खाद देना (टॉप ड्रेसिंग और पर्णीय छिड़काव), खरपतवार की पहचान, फसलों का आकारिकी वर्णन, सिंचाई, शारीरिक परिपक्वता पहचानना, कपास बीज उपचार, बीज आकार का अंकुरण पर प्रभाव, उपज घटक और सैद्धांतिक उपज एवं कटाई सूचकांक (Harvest Index) की गणना, कृषि प्रयोगों का अध्ययन और अनुसंधान केंद्रों का भ्रमण।
बीज दर (किग्रा/हेक्टेयर) = (वांछित पौध संख्या प्रति हेक्टेयर × 1000 दानों का भार ग्राम में) / (अंकुरण % × शुद्धता % × 100)।
उदाहरण: 1,00,000 पौधे/हेक्टेयर, 1000 दानों का भार 30 ग्राम, अंकुरण 90%, शुद्धता 100% हो तो बीज दर = (1,00,000 × 30) / (90 × 100 × 100) ≈ 3.3 किग्रा/हेक्टेयर।
कटाई सूचकांक (HI) = (आर्थिक उपज / जैविक उपज) × 100
13. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)
- बाजरा उत्पादन में राजस्थान प्रथम; उत्पत्ति पश्चिमी अफ्रीका।
- मक्का की उत्पत्ति मैक्सिको; घुटना, झंडा और सिल्किंग क्रांतिक अवस्थाएँ।
- ज्वार चारे में HCN (धूरिन) की समस्या; शुरुआती अवस्था में न खिलाएँ।
- IR-8 पहली बौनी धान किस्म; धान की नर्सरी 21–25 दिन।
- मूँगफली में जिप्सम फूल आने पर; सोयाबीन में Bradyrhizobium कल्चर।
- अरहर में नाइपिंग; कपास "सफेद सोना"; जूट "सुनहरा रेशा"; सेवण घास थार की।
14. महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. भारत में बाजरा के क्षेत्रफल में प्रथम राज्य कौन सा है? (अ) राजस्थान (ब) गुजरात (स) हरियाणा (द) UP। उत्तर: अ
Q2. मक्का का उत्पत्ति स्थान है: (अ) चीन (ब) मध्य अमेरिका (स) भारत (द) अफ्रीका। उत्तर: ब
Q3. मूँगफली की फली अच्छी भरने के लिए आवश्यक है: (अ) जिंक (ब) जिप्सम (स) बोरॉन (द) लोहा। उत्तर: ब
Q4. सोयाबीन का राइजोबियम कल्चर है: (अ) Rhizobium leguminosarum (ब) Azotobacter (स) Bradyrhizobium japonicum (द) Azospirillum। उत्तर: स
Q5. जूट को कहा जाता है: (अ) सफेद सोना (ब) सुनहरा रेशा (स) हरा सोना (द) रेशों का राजा। उत्तर: ब
15. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: AGRON-211 में कितने क्रेडिट और लेक्चर हैं?
उत्तर: 2 क्रेडिट (1+1); थ्योरी के 16 और प्रैक्टिकल के 16 लेक्चर।
प्रश्न: खरीफ और रबी फसलों में क्या अंतर है?
उत्तर: खरीफ मानसून में बोई जाती है (जून-जुलाई) और रबी शीत ऋतु में (अक्टूबर-नवंबर)।
प्रश्न: बाजरा में अरगट रोग का उपचार क्या है?
उत्तर: बीज को नमक के घोल में डुबोकर संक्रमित दाने अलग करें और स्वस्थ बीज का उपयोग करें।
प्रश्न: ज्वार चारे में किस रसायन से पशु बीमार हो सकते हैं?
उत्तर: हाइड्रोसायनिक अम्ल (HCN), जो धूरिन से बनता है।
प्रश्न: सनई को हरी खाद के रूप में कब दबाना चाहिए?
उत्तर: लगभग 40–45 दिन पर, फूल आने से पहले।
प्रश्न: नेपियर घास का प्रवर्धन कैसे होता है?
उत्तर: जड़ के टुकड़ों (Root slips) या तने की कलमों से।
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संदर्भ पुस्तकें (Reference Books)
छिद्दा सिंह, प्रेम सिंह एवं राजबीर सिंह, Modern Techniques of Raising Field Crops; एस.सी. पांडा, Modern Concepts and Advance Principles in Crop Production; एस.एस. सिंह एवं राजेश सिंह, Principles and Practices of Agronomy; पी.एस. राठौर, Techniques and Management of Field Crop Production; राजेंद्र प्रसाद, Text Book of Field Crops Production; ICAR, Handbook of Agriculture।
नोट: यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से मौलिक रूप में तैयार किया गया है। उर्वरक मात्रा, किस्में और बुवाई समय क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं; अंतिम अनुशंसा के लिए अपने कृषि विश्वविद्यालय/KVK की सलाह देखें। पाठ्यक्रम का स्रोत: Swami Keshwanand Rajasthan Agricultural University, Bikaner की Vth Deans' Committee Report।
