रबी फसल सुधार (Crop Improvement-II, Rabi, GPB-321) B.Sc. (Hons.) Agriculture के छठे सेमेस्टर का 2 क्रेडिट (1+1) का कोर्स है। इसमें रबी की प्रमुख फसलों (गेहूँ, जई, जौ, चना, मसूर, मटर, राई-सरसों, सूरजमुखी, बरसीम, रिजका, गन्ना, बीज मसाले व आलू) की उत्पत्ति, पुष्प जैविकी, प्रजनन उद्देश्य, विधियाँ और संकर बीज उत्पादन का अध्ययन होता है। सिलेबस में 16 थ्योरी लेक्चर हैं। इस लेख में सभी फसलें क्रमवार तालिकाओं, MCQ और FAQ के साथ समझाई गई हैं।
1. गेहूँ (Wheat) का सुधार
| प्रजातियाँ व गुणसूत्र | Triticum aestivum (ब्रेड गेहूँ; 2n = 6x = 42, AABBDD), T. durum (मैकरोनी; 2n = 28, AABB), T. dicoccum (एमर), T. monococcum (आइंकॉर्न; 2n = 14, AA) |
| उत्पत्ति | दक्षिण-पश्चिम एशिया (उपजाऊ अर्धचंद्र क्षेत्र)। ब्रेड गेहूँ चतुर्गुणित एमर (AABB) और Aegilops tauschii (DD) के प्राकृतिक संकरण से बना। |
| जंगली संबंधी | Aegilops प्रजातियाँ, राई (Secale cereale), Agropyron, Haynaldia villosa; T. urartu (A जीनोम का दाता) |
| पुष्प जैविकी | बाली (Spike); प्रत्येक स्पाइकलेट में कई पुष्पक; पुष्पक में 3 परागकोश व 1 अंडप (पंखदार वर्तिकाग्र); स्वपरागित (पर-परागण 1% से कम); बाली निकलने के आसपास या पहले परागकोश फटना |
| विपुंसन/संकरण | बाली निकलने के 2–3 दिन बाद (परागकोश हरे रहते हुए) स्पाइकलेट के ऊपरी भाग की ग्लूम की कैंची से कटाई; प्रत्येक स्पाइकलेट में बीच के 2 पुष्पक रखकर बाकी हटाना; चिमटी से 3 परागकोश निकालना; थैली से ढकना; 2–3 दिन बाद वर्तिकाग्र ग्राह्य होने पर परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | अधिक उपज; बौनापन (Rht जीन; नोरिन-10 से); अंतिम अवस्था की गर्मी (Terminal heat) सहनशीलता व पछेती बुवाई के अनुकूल किस्में; रतुआ प्रतिरोध (पीला Yr, भूरा Lr, काला Sr; Ug99 रेस); करनाल बंट, ढीला कंड, चूर्णिल आसिता, माहू; गुणवत्ता (प्रोटीन, ग्लूटेन, चपाती गुण), जैव प्रबलीकरण (जिंक, आयरन); लवणता सहनशीलता |
| विधियाँ | परिचय (सोनोरा 64, लर्मा रोजो), शुद्ध वंशक्रम चयन (NP किस्में), संकरण (वंशावली/समूह), प्रतिसंकरण, उत्परिवर्तन (शरबती सोनोरा), बहुरेखीय किस्में, दूरस्थ संकरण (ट्रिटिकेल; Aegilops/राई से जीन), DH, MAS |
| किस्में | HD 2967, HD 3086, DBW 187, PBW 343, राज 4079, WH 1105; लवणता: खारचिया 65; ड्यूरम: HI 8498 (मालवश्री), PDW 233 |
2. जई (Oat) का सुधार
| प्रजातियाँ व गुणसूत्र | Avena sativa (2n = 6x = 42, AACCDD), A. byzantina (लाल जई), A. strigosa (2n = 14), A. fatua (जंगली जई; खरपतवार) |
| उत्पत्ति | यूरोप/निकट पूर्व; गेहूँ-जौ के खरपतवार के रूप में उत्पन्न होकर फसल बनी |
| पुष्प जैविकी | पुष्पगुच्छ (Panicle); स्पाइकलेट में 2–3 पुष्पक; स्वपरागित (पर-परागण 1% से कम) |
| विपुंसन | परागकोश फटने से पहले चिमटी से परागकोश निकालना; थैली से ढकना; बाद में परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | चारा: हरे चारे की अधिक उपज, तेजी से पुनर्वृद्धि (कई कटाई), अधिक प्रोटीन, कम लिग्निन, रतुआ व कंड प्रतिरोध। दाना: बीटा-ग्लूकन, कम भूसी, बौनापन |
| किस्में | Kent, OS 6, UPO 212, HFO 114 |
3. जौ (Barley) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Hordeum vulgare (2n = 14); द्वि-पंक्ति (Two-row) और षट्-पंक्ति (Six-row); भूसीयुक्त व नग्न (Hull-less) |
| उत्पत्ति | निकट पूर्व (उपजाऊ अर्धचंद्र); द्वितीयक केंद्र इथियोपिया व तिब्बत |
| जंगली संबंधी | H. spontaneum (जंगली पूर्वज), H. bulbosum (DH बनाने में उपयोगी) |
| पुष्प जैविकी | बाली में प्रत्येक पर्व पर तीन स्पाइकलेट; प्रत्येक में एक पुष्पक; स्वपरागित; Cleistogamy (बाली निकलने से पहले, बूट अवस्था में परागण) |
| विपुंसन | बूट अवस्था में परागकोश हरे रहते हुए आवन (Awn) काटकर तीन परागकोश चिमटी से निकालना; थैली से ढकना; 2–3 दिन बाद परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | माल्ट गुणवत्ता (प्रोटीन लगभग 9–11.5%, अधिक स्टार्च/माल्ट निष्कर्ष, दाने का एकसमान मोटा आकार); चारे/दाने के लिए अधिक प्रोटीन; पीला रतुआ, पत्ती झुलसा, माहू, कंड प्रतिरोध; लवणता, सूखा व पाला सहनशीलता; गिरने से रोकथाम |
| किस्में | RD 2035, RD 2552, RD 2786 (राजस्थान); BH 902; DWRUB 52 (माल्ट) |
4. चना (Chickpea) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Cicer arietinum (2n = 16); देसी (छोटा, रंगीन) और काबुली (बड़ा, सफेद) |
| उत्पत्ति | दक्षिण-पश्चिम एशिया (तुर्की-सीरिया क्षेत्र) |
| जंगली संबंधी | C. reticulatum (जंगली पूर्वज), C. echinospermum (द्वितीयक जीन पूल); तृतीयक: C. judaicum, C. pinnatifidum, C. bijugum |
| पुष्प जैविकी | तितलीनुमा फूल; Cleistogamy; स्वपरागित (पर-परागण 1% तक); परागकोश कली अवस्था में ही फट जाते हैं |
| विपुंसन | शाम (4–6 बजे) को अगले दिन खिलने वाली कली से बाह्यदल, ध्वज व पंख हटाकर परागकोश निकालना; थैली से ढकना; अगली सुबह परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | उपज; उकठा (Fusarium), एस्कोकाइटा झुलसा, शुष्क जड़ गलन, ग्रे मोल्ड; फली छेदक (Helicoverpa); सूखा व गर्मी सहनशीलता; शीघ्र पकना; काबुली में बोल्ड बीज; यंत्र कटाई के अनुकूल (लंबी, सीधी) |
| किस्में | देसी: पूसा 256, RSG 888, GNG 1581, JG 11, पूसा 362; काबुली: L 550, पूसा 1053 |
| विधियाँ | परिचय, शुद्ध वंशक्रम चयन, संकरण (वंशावली, समूह, SSD), उत्परिवर्तन, अंतर-प्रजातीय संकरण (C. reticulatum), MAS (सूखा QTL-hotspot) |
5. मसूर (Lentil) और मटर (Field Pea) का सुधार
| बिंदु | मसूर (Lens culinaris) | मटर (Pisum sativum) |
|---|---|---|
| गुणसूत्र | 2n = 14 | 2n = 14 |
| उत्पत्ति | निकट पूर्व/दक्षिण-पश्चिम एशिया | भूमध्यसागरीय क्षेत्र व इथियोपिया |
| प्रकार | छोटे दाने (Microsperma) व बड़े दाने (Macrosperma) | खेत मटर (दाल हेतु, var. arvense) और सब्जी मटर (var. hortense) |
| जंगली संबंधी | L. culinaris ssp. orientalis, L. nigricans, L. ervoides | P. sativum ssp. elatius, P. fulvum, P. abyssinicum |
| पुष्प जैविकी | बहुत छोटे फूल; स्वपरागित, Cleistogamy | स्वपरागित; फूल खिलने से पहले कली में ही परागण (कली अवस्था में परागकोश फटते हैं) |
| विपुंसन | कली अवस्था में अत्यंत सावधानी से, आवर्धक लेंस की मदद से; सफलता कम | खिलने से लगभग एक दिन पहले कली से परागकोश निकालना; थैली; अगले दिन परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | उकठा, रतुआ, एस्कोकाइटा/स्टेम्फिलियम झुलसा; शीघ्र पकना; बोल्ड दाना; शाकनाशी सहनशीलता; जिंक-आयरन जैव प्रबलीकरण | चूर्णिल आसिता (er1 जीन), रतुआ, उकठा; गिरने से रोकथाम (अर्ध-पर्णरहित/Afila किस्में), फली न चटकना, बीज का रंग व प्रोटीन |
| किस्में | पंत L 406, K 75 (मालिका), L 4076, DPL 62, पूसा वैभव | रचना, अपर्णा, पंत P 25; सब्जी: अर्केल, बोनविल |
6. राई-सरसों (Rapeseed-Mustard) का सुधार
| प्रजातियाँ व गुणसूत्र | B. juncea (राई; AABB, 2n = 36), B. rapa (तोरिया, भूरी व पीली सरसों; AA, 2n = 20), B. nigra (BB, 16), B. oleracea (CC, 18), B. napus (गोभी सरसों/कैनोला; AACC, 38), B. carinata (BBCC, 34), Eruca sativa (तारामीरा, 22) |
| यू का त्रिकोण (1935) | तीन मूल प्रजातियों (B. rapa, B. nigra, B. oleracea) के संकर से तीन द्वि-गुणित (AABB, AACC, BBCC) प्रजातियाँ बनीं। |
| उत्पत्ति | भूमध्यसागरीय, मध्य एशियाई और भारतीय/चीनी क्षेत्र; B. carinata इथियोपिया |
| जंगली संबंधी | Sinapis alba, Diplotaxis, Erucastrum, Moricandia arvensis, Raphanus raphanistrum (CMS के स्रोत) |
| पुष्प जैविकी | रेसीम; चार पंखुड़ियाँ (क्रूसीफॉर्म); 6 पुंकेसर (4 लंबे + 2 छोटे); राई मुख्यतः स्वपरागित (पर-परागण 5–30%, मधुमक्खी से); तोरिया व भूरी सरसों स्वअसंगत (परपरागित); सुबह खिलना |
| विपुंसन | खिलने से एक दिन पहले कली से बाह्यदल, दल व पुंकेसर हटाना; थैली से ढकना; अगले दिन परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | उपज; निम्न यूरुसिक अम्ल (< 2%) व निम्न ग्लूकोसिनोलेट (द्वि-शून्य/कैनोला गुणवत्ता); तेल (> 40%); शीघ्र पकना (धान-सरसों चक्र); फली न चटकना; अल्टरनेरिया झुलसा, सफेद रतुआ, मृदुरोमिल/चूर्णिल आसिता, स्क्लेरोटिनिया सड़न; माहू सहनशीलता; गर्मी व पाला सहनशीलता; ओरोबैंकी |
| किस्में/संकर | पूसा बोल्ड, वरुणा, RH 749, RGN 73, NRCHB 101, NRCHB 506 (संकर); निम्न यूरुसिक: पूसा सरसों 21; द्वि-शून्य: पूसा डबल जीरो सरसों 31 |
| संकर बीज उत्पादन | CMS (Ogura, पोलीमा, Moricandia, Diplotaxis कोशिकाद्रव्य), स्वअसंगतता, GMS और बारनेज़-बारस्टार प्रणाली। मधुमक्खी परागण; मादा:नर पंक्तियाँ सामान्यतः 3–4 : 1; पृथक्करण लगभग 200 मी। GM आधारित संकरों के व्यावसायिक उपयोग हेतु नियामकीय स्वीकृति आवश्यक। |
| विधियाँ | परिचय, शुद्ध वंशक्रम चयन, संकरण (वंशावली), अंतर-प्रजातीय संकरण (कृत्रिम B. juncea/B. napus का संश्लेषण), उत्परिवर्तन, DH (सूक्ष्मबीजाणु संवर्धन), MAS, संकर किस्में |
7. सूरजमुखी (Sunflower) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Helianthus annuus (2n = 34) |
| उत्पत्ति | उत्तरी अमेरिका (दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका/मैक्सिको) |
| जंगली संबंधी | H. petiolaris (CMS PET-1 का स्रोत, लेक्लर्क 1969), H. argophyllus, H. tuberosus (यरूशलम आर्टिचोक), H. debilis |
| पुष्प जैविकी | मुंडक (Capitulum): परिधि पर बंध्य किरण पुष्पक (Ray) और भीतर उभयलिंगी बिंब पुष्पक (Disc); पुंपूर्वी; परिधि से केंद्र की ओर रिंग में खिलना (लगभग 7–10 दिन); मधुमक्खी द्वारा परपरागित; सुबह खिलना |
| विपुंसन/संकरण | मादा मुंडक को खिलने से पहले थैली से ढकना; दैनिक सुबह परागकोश हटाना या CMS का उपयोग; नर मुंडक को मादा पर रगड़कर (मखमल/कपड़े से) हाथ परागण और फिर पुनः थैली |
| प्रजनन उद्देश्य | उपज; तेल (40–45%); उच्च ओलिक अम्ल; शीघ्र पकना; प्रकाश-असंवेदी; स्व-उर्वरता; मृदुरोमिल आसिता, अल्टरनेरिया पर्ण दाग, रतुआ, चारकोल रॉट, सूरजमुखी नेक्रोसिस (थ्रिप्स), ओरोबैंकी; चिड़ियों से क्षति; सूखा सहनशीलता |
| किस्में/संकर | मॉर्डन (EC 68414), KBSH 1, KBSH 44, DRSH 1, LSFH 35 |
| संकर बीज | CMS (PET-1) A × R; मादा:नर लगभग 3:1 या 4:1; मधुमक्खी बक्से (कुछ प्रति हेक्टेयर) व अतिरिक्त हाथ परागण; उच्च पृथक्करण दूरी |
8. बरसीम और रिजका (चारा दलहन) का सुधार
| बिंदु | बरसीम (Trifolium alexandrinum) | रिजका/लूसर्न (Medicago sativa) |
|---|---|---|
| गुणसूत्र | 2n = 16 (द्विगुणित); पूसा जाइंट कोल्चिसिन से चतुर्गुणित (32) | 2n = 32 (स्वचतुर्गुणित); जंगली M. falcata (2n = 16) |
| उत्पत्ति | मिस्र/पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र | दक्षिण-पश्चिम एशिया (ईरान-ट्रांसकाकेशिया क्षेत्र) |
| जंगली संबंधी | T. resupinatum (फारसी क्लोवर), T. squarrosum | M. falcata (पीले फूल; ठंडा सहनशील), M. glutinosa |
| पुष्प जैविकी | मुंडक में 50–100 पुष्पक; मधुमक्खी द्वारा परपरागित; आंशिक स्वअसंगतता | रेसीम; "ट्रिपिंग" क्रिया आवश्यक (विस्फोटक पराग); मधुमक्खी, लीफकटर मधुमक्खी (Megachile) द्वारा परपरागित; अंतःप्रजनन से गंभीर क्षति |
| प्रजनन उद्देश्य | हरे चारे की उपज, बहु-कटाई क्षमता, ठंड सहनशीलता, उच्च प्रोटीन, तने की सड़न रोग प्रतिरोध, बीज उत्पादन की क्षमता, कासनी (Chicory) मुक्त बीज | चारा उपज, दीर्घकालिक स्थायित्व, सर्दी व सूखा सहनशीलता, उकठा (जीवाणु/फ्यूजेरियम) व एन्थ्रेक्नोज प्रतिरोध, माहू सहनशीलता, उच्च प्रोटीन, निम्न सैपोनिन |
| किस्में | मेस्कावी, वरदान, BL 1, BL 10, पूसा जाइंट | आनंद 2, सिरसा 9, T 9, RL 88, LL संकुल 5 |
| विधियाँ | परिचय, समूह चयन, संश्लेषित किस्में, बहुगुणिता, अंतर-प्रजातीय संकरण, ऊतक संवर्धन | परिचय, समूह चयन, आवर्ती चयन, संश्लेषित किस्में, अंतर-प्रजातीय संकरण (sativa × falcata), CMS आधारित संकर |
संकर/क्रॉस बीज उत्पादन की विशेष बात: दोनों फसलों के फूल अत्यंत छोटे होते हैं, इसलिए हाथ से विपुंसन अव्यावहारिक है। संकरण के लिए पृथक्कृत (Isolated) क्रॉसिंग ब्लॉक, मधुमक्खी और नर बंध्य रेखाओं का उपयोग किया जाता है। बीज उत्पादन हेतु कटाई बंद करके फसल को फूल व बीज बनने दिया जाता है।
9. गन्ना (Sugarcane) का सुधार
| प्रजातियाँ व गुणसूत्र | Saccharum officinarum (नोबल गन्ना; 2n = 80), S. barberi (उत्तर भारत; 2n = 111–120), S. sinense (चीन), S. spontaneum (जंगली; 2n = 40–128), S. robustum (जंगली; न्यू गिनी), S. edule |
| उत्पत्ति | S. officinarum: न्यू गिनी; S. barberi व S. spontaneum: भारत |
| जंगली संबंधी | S. spontaneum, S. robustum; संबद्ध वंश: Erianthus, Sorghum, Miscanthus ("Saccharum complex") |
| पुष्प जैविकी | पुष्पक्रम "एरो" (पैनिकल); लघु दिवस (लगभग 12 घंटे प्रकाश) व उपयुक्त तापमान में पुष्पन; स्पाइकलेट जोड़े में, प्रत्येक में 3 परागकोश व पंखदार वर्तिकाग्र; पुष्प बहुत छोटे और असंख्य |
| संकरण | हाथ से विपुंसन अव्यावहारिक; एरो को बैग/लालटेन (Lantern) विधि में पानी या तनु अम्ल घोल में रखकर पर-परागण से सुरक्षित रखना; नर बंध्य मादा पैतृक का उपयोग; संकरण केंद्र: गन्ना प्रजनन संस्थान (SBI), कोयंबटूर |
| प्रजनन उद्देश्य | गन्ना उपज; रस में सुक्रोज (लगभग 17–18% या अधिक) व CCS; शीघ्र/मध्यम परिपक्वता; रेटून क्षमता; लाल सड़न (Colletotrichum falcatum), कंड, उकठा, घासीय प्ररोह; तना/चोटी बेधक, पायरिला; सूखा, जलभराव व पाला सहनशीलता; गिरने से रोकथाम |
| नोबिलाइज़ेशन | जेसविट (जावा, 1920 के दशक): S. officinarum × S. spontaneum के बाद S. officinarum से पुनः प्रतिसंकरण करके उच्च शर्करा के साथ ओज व रोग प्रतिरोध पाना। |
| प्रक्रिया | जनक चयन → संकरण (सितंबर-दिसंबर) → "फ्लफ" (वास्तविक बीज) की बुवाई → पौध नर्सरी → रोपण → क्लोनी चरण (बीजोद्भव, एकल स्टूल, प्रारंभिक परीक्षण, उन्नत परीक्षण) → AICRP परीक्षण → विमोचन (कुल लगभग 10–12 वर्ष) |
| किस्में | Co 86032, Co 0238 (करन 4), CoJ 64, Co 0118 |
| बीज उत्पादन | वानस्पतिक प्रवर्धन (तीन आँख के टुकड़े); रोगमुक्त बीज गन्ना हेतु गर्म हवा/गर्म जल उपचार व विभज्योतक (Meristem) संवर्धन; तीन-चरण बीज योजना (प्रजनक → आधार → प्रमाणित) |
10. बीज मसाले व औषधीय फसलें: जीरा, धनिया, मेथी, सौंफ, इसबगोल
| फसल | मुख्य बिंदु | किस्में |
|---|---|---|
| जीरा (Cuminum cyminum, 2n = 14) | उत्पत्ति: पूर्वी भूमध्यसागरीय/मिस्र क्षेत्र। छत्रक (Umbel) पुष्पक्रम; पुंपूर्वी। उद्देश्य: उकठा (Fusarium), झुलसा (Alternaria) व छाछया रोग प्रतिरोध; शीघ्र पकना; तेल (क्यूमिनएल्डिहाइड) व उपज। | RZ 19, RZ 209, GC 4 |
| धनिया (Coriandrum sativum, 2n = 22) | उत्पत्ति: भूमध्यसागरीय क्षेत्र। परपरागित (कीटों से); पुंपूर्वी। उद्देश्य: दाना व हरी पत्ती उपज, तेल, तना गलन व पाउडरी मिल्ड्यू प्रतिरोध। | RCr 41, RCr 436, पंत हरितमा, GC 2 |
| मेथी (Trigonella foenum-graecum, 2n = 16) | उत्पत्ति: भूमध्यसागरीय/पश्चिमी एशिया। तितलीनुमा फूल; स्वपरागित। उद्देश्य: दाना व पत्ती उपज, चूर्णिल आसिता व जड़ गलन प्रतिरोध; कसूरी मेथी। | RMt 1, RMt 305, हिसार सोनाली, पूसा अर्ली बंचिंग |
| सौंफ (Foeniculum vulgare, 2n = 22) | उत्पत्ति: भूमध्यसागरीय क्षेत्र। परपरागित; पुंपूर्वी। उद्देश्य: उपज, तेल (एनेथोल), रामुलेरिया झुलसा व जड़ गलन प्रतिरोध। | RF 101, RF 125, GF 2 |
| इसबगोल (Plantago ovata, 2n = 8) | उत्पत्ति: भूमध्यसागरीय से ईरान क्षेत्र। स्त्रीपूर्वी; हवा द्वारा परागित। उद्देश्य: भूसी (Husk) अधिक व अधिक फुलाव, मृदुरोमिल आसिता प्रतिरोध, फली न झड़ना। राजस्थान व गुजरात प्रमुख। | GI 2, RI 89, निहारिका |
11. आलू (Potato) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Solanum tuberosum (2n = 4x = 48; चतुर्गुणित) |
| उत्पत्ति | एंडीज़ (पेरू-बोलीविया, टिटिकाका झील क्षेत्र) |
| जंगली संबंधी | S. demissum (पछेती झुलसा प्रतिरोध), S. stoloniferum (विषाणु प्रतिरोध), S. acaule, S. chacoense, S. phureja (द्विगुणित) |
| पुष्प जैविकी | उभयलिंगी फूल; परागकोश में छिद्र से पराग झड़ना; स्वपरागित; कई किस्मों में फूल नहीं आते या नर बंध्य; फल (बेरी) में वास्तविक आलू बीज (TPS) |
| विपुंसन/संकरण | कली अवस्था में शाम को परागकोश हटाना; अगले दिन सुबह परागण; बेरी पकने पर TPS निकालना |
| प्रजनन उद्देश्य | कंद उपज; शीघ्र तैयार होना (60–90 दिन); पछेती झुलसा (Phytophthora infestans) व विषाणु (PVX, PVY, PLRV) प्रतिरोध; शुष्क पदार्थ (> 20%), कम घटाने वाली शर्करा (चिप्स/फ्रेंच फ्राइज़); गर्मी व पाला सहनशीलता; निमेटोड प्रतिरोध; सुषुप्ति अवधि |
| किस्में (कुफरी) | कुफरी ज्योति, चंद्रमुखी, पुखराज, बहार; प्रसंस्करण: कुफरी चिपसोना-1, कुफरी फ्रायसोना |
| विधियाँ | परिचय, क्लोनी चयन, संकरण व क्लोनी चयन (केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला), कायिक संकरण, ट्रांसजेनिक, TPS प्रौद्योगिकी |
| बीज उत्पादन | कंदों से; रोगमुक्त सामग्री हेतु ऊतक संवर्धन व सूक्ष्म कंद; बीज प्लॉट तकनीक (माहू नियंत्रण) |
12. हेटेरोसिस और संकर किस्मों के विकास की नवीन तकनीकें (रबी फसलों में)
- गेहूँ: संकर गेहूँ में रासायनिक संकरण कारक (CHA) और CMS; सीमित व्यावसायिक उपयोग। प्रभावी रणनीति: DH, MAS, जीनोमिक चयन, गति प्रजनन।
- सरसों: CMS (Ogura, पोलीमा), द्वि-शून्य संकर, DH; जैव प्रौद्योगिकी आधारित बारनेज़-बारस्टार।
- सूरजमुखी: CMS (PET-1) से व्यापक संकर किस्में।
- चना: MAS (सूखा QTL-hotspot; उकठा प्रतिरोधी जीन); अंतर-प्रजातीय संकरण।
- सामान्य: जीनोम संपादन (CRISPR), उच्च-थ्रूपुट फीनोटाइपिंग, QTL मानचित्रण और जीनोमिक चयन।
13. बीज उत्पादन तकनीक: स्वपरागित, परपरागित और वानस्पतिक प्रवर्धित फसलें
| फसल समूह | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| स्वपरागित (गेहूँ, जौ, जई, चना, मसूर, मटर) | कम पृथक्करण दूरी (लगभग 3–10 मी); अवांछित पौधे, कंड व रोगग्रस्त पौधे हटाना; समय पर कटाई-गहाई |
| परपरागित (सूरजमुखी, बरसीम, रिजका, धनिया, सौंफ) | अधिक पृथक्करण दूरी; मधुमक्खी परागण; पुष्पन मिलान और नर-मादा पंक्ति अनुपात; बरसीम व रिजका में बीज हेतु कटाई समय पर बंद |
| वानस्पतिक प्रवर्धित (गन्ना, आलू) | रोगमुक्त रोपण सामग्री; ऊतक संवर्धन; क्लोनों की शुद्धता; तीन-चरण बीज योजना (गन्ना) |
14. आदर्श पौध प्रारूप (Ideotype)
| फसल | आदर्श प्रारूप के गुण |
|---|---|
| गेहूँ | बौना कद (लगभग 90–100 सेमी), मजबूत तना, सीधी छोटी पत्तियाँ, कम बंध्य कल्ले, बड़ी बाली, आवन, अधिक जड़ विकास |
| सरसों | मध्यम ऊँचाई, कम पार्श्व शाखाएँ व अधिक फलियाँ, शीघ्र पकना, फली न चटकना |
| चना | सीधी, ऊँची किस्में, अधिक फली, गहरी जड़ व सूखा सहनशील, यंत्र कटाई के अनुकूल |
| गन्ना | मोटा व ऊँचा तना, अधिक सुक्रोज, कम फूल आना, उच्च रेटून क्षमता |
15. भविष्य के लिए जलवायु-अनुकूल किस्में
- गर्मी सहनशीलता: गेहूँ की पछेती बुवाई वाली किस्में (राज 4079, DBW 187), चना की JG 11 (गर्मी व उकठा सहनशील)।
- सूखा व कम सिंचाई: जौ, चना, सरसों व तारामीरा की सूखा सहनशील किस्में; गहरी जड़।
- लवणता: खारचिया 65, KRL किस्में (CSSRI)।
- पाला सहनशीलता: सरसों, चना व आलू में आनुवंशिक सुधार।
- पोषण (जैव प्रबलित): जिंक-आयरन युक्त गेहूँ व मसूर (जैसे पूसा अगेती मसूर)।
- ICAR के NICRA जैसे कार्यक्रम और हाल के वर्षों में जारी जलवायु-अनुकूल किस्में।
16. प्रैक्टिकल में क्या सीखेंगे
- गेहूँ, जई, जौ, चना, मसूर, मटर, सरसों, सूरजमुखी, आलू, बरसीम व गन्ने में विपुंसन और संकरण।
- रबी फसलों का रख-रखाव प्रजनन; जर्मप्लाज्म और विभाजित समष्टियों का प्रबंधन (वंशावली, समूह, SSD)।
- बीज व संकर बीज उत्पादन की क्षेत्रीय तकनीकें।
- हेटेरोसिस, अंतःप्रजनन अवसाद, आनुवंशिकता की गणना; प्रयोग लेआउट; गुणवत्ता लक्षण।
- विभिन्न गुणों के दाता जनक का अध्ययन; बीज उत्पादन प्लॉट व AICRP प्लॉट का भ्रमण।
सापेक्ष हेटेरोसिस (%) = (F₁ − MP) / MP × 100
हेटरोबेल्टियोसिस (%) = (F₁ − BP) / BP × 100
अंतःप्रजनन अवसाद (%) = (F₁ − F₂) / F₁ × 100
आनुवंशिकता (व्यापक) = VG / VP × 100
प्रमुख दाता जनक
| फसल / गुण | दाता |
|---|---|
| गेहूँ: बौनापन | नोरिन-10 (Rht जीन) |
| गेहूँ: पर्ण रतुआ Lr9 / Lr19 | Aegilops umbellulata / Agropyron elongatum |
| गेहूँ: Sr31 + Lr26 + Yr9 | राई से 1B/1R स्थानांतरण |
| चना: उकठा / सूखा | WR 315 / ICC 4958 (QTL-hotspot) |
| सरसों: निम्न यूरुसिक अम्ल | Zem-1, Zem-2 (कनाडाई वंशक्रम) |
| सूरजमुखी: CMS | H. petiolaris (PET-1) |
| आलू: पछेती झुलसा | S. demissum |
| गन्ना: ओज व रोग प्रतिरोध | S. spontaneum |
17. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)
- गेहूँ 2n = 42 (AABBDD); ड्यूरम 28; जौ 14; जई 42; चना 16; मसूर 14; मटर 14; राई 36; सूरजमुखी 34; रिजका 32; आलू 48; जीरा 14; धनिया 22।
- सरसों के लिए यू का त्रिकोण (1935): AABB, AACC, BBCC।
- जौ में बूट अवस्था में Cleistogamy; विपुंसन उसी अवस्था में।
- CMS PET-1: H. petiolaris से, सूरजमुखी संकर का आधार।
- गन्ने में नोबिलाइज़ेशन: S. officinarum × S. spontaneum और पुनः प्रतिसंकरण।
- आलू में पछेती झुलसा प्रतिरोध S. demissum से; कुफरी किस्में CPRI शिमला से।
- बरसीम: "चारे का राजा"; रिजका: "चारे की रानी"; दोनों परपरागित और मधुमक्खी आश्रित।
18. महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. ब्रेड गेहूँ का जीनोम है: (अ) AABB (ब) AABBDD (स) AA (द) BBDD। उत्तर: ब
Q2. जौ में परागण किस अवस्था में हो जाता है? (अ) बूट अवस्था (ब) दूधिया अवस्था (स) पकने पर (द) अंकुरण पर। उत्तर: अ
Q3. चना की उत्पत्ति का केंद्र है: (अ) दक्षिण-पश्चिम एशिया (ब) दक्षिण अमेरिका (स) चीन (द) अफ्रीका। उत्तर: अ
Q4. यू का त्रिकोण किसके लिए प्रसिद्ध है? (अ) गेहूँ (ब) ब्रैसिका (स) कपास (द) धान। उत्तर: ब
Q5. सूरजमुखी में CMS PET-1 किस जंगली प्रजाति से मिला? (अ) H. annuus (ब) H. petiolaris (स) H. tuberosus (द) H. debilis। उत्तर: ब
Q6. आलू की पछेती झुलसा प्रतिरोधी जंगली प्रजाति है: (अ) S. demissum (ब) S. phureja (स) S. acaule (द) S. chacoense। उत्तर: अ
Q7. गन्ने में "नोबिलाइज़ेशन" किसने किया? (अ) जेसविट (ब) वाविलोव (स) बोरलॉग (द) डोनाल्ड। उत्तर: अ
Q8. पूसा जाइंट (बरसीम) है: (अ) द्विगुणित (ब) त्रिगुणित (स) चतुर्गुणित (द) एकगुणित। उत्तर: स
19. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: GPB-321 में कितने क्रेडिट और लेक्चर हैं?
उत्तर: 2 क्रेडिट (1+1); थ्योरी के 16 और प्रैक्टिकल के 16 लेक्चर।
प्रश्न: गेहूँ में विपुंसन कब किया जाता है?
उत्तर: जब परागकोश हरे हों (परागकोश फटने से पहले), आमतौर पर बाली निकलने के 2–3 दिन बाद।
प्रश्न: गन्ने में बीज (Fluff) से किस्म क्यों बनती है?
उत्तर: गन्ना विषमयुग्मजी बहुगुणित है, इसलिए संकरण से मिले बीजों में भारी विविधता आती है और अच्छे पौधे का चयन कर क्लोन के रूप में गुणन किया जाता है।
प्रश्न: बरसीम का बीज कम क्यों बनता है?
उत्तर: परपरागित फसल में मधुमक्खी की कमी, बार-बार कटाई और ठंडे मौसम के कारण बीज उत्पादन सीमित रहता है।
प्रश्न: द्वि-शून्य सरसों क्या है?
उत्तर: ऐसी सरसों जिसमें यूरुसिक अम्ल और ग्लूकोसिनोलेट दोनों कम हों (कैनोला गुणवत्ता)।
प्रश्न: आलू में TPS क्या है?
उत्तर: वास्तविक आलू बीज, जो फल (बेरी) से मिलता है और कंद की अपेक्षा सस्ता व रोगमुक्त रोपण सामग्री है।
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संदर्भ पुस्तकें (Reference Books)
वी.एल. चोपड़ा (सं.), Breeding of Field Crops, ऑक्सफोर्ड एवं IBH; मंडल, गांगुली एवं बनर्जी, Advances in Plant Breeding Vol. I व II, CBS; जे.एम. पोहलमैन, Breeding of Field Crops, AVI पब्लिशिंग; एच.एच. राम एवं एच.जी. सिंह, Crop Breeding and Genetics, कल्याणी; मंजीत एस. कांग (सं.), Crop Improvement: Challenges in the Twenty-First Century; ए.के. शर्मा (सं.), Breeding Technology of Crop Plants, यश पब्लिशिंग हाउस, बीकानेर; एस.एस. शेखावत (सं.), Advances and Current Issues in Agriculture Vol. III, शिक्षा प्रकाशन, जयपुर।
नोट: यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से मौलिक रूप में तैयार किया गया है। किस्मों के नाम और अनुपात सामान्य जानकारी पर आधारित हैं और क्षेत्र व वर्ष के अनुसार बदल सकते हैं; अंतिम पुष्टि हेतु अपने विश्वविद्यालय/AICRP की नवीनतम अनुशंसा देखें। पाठ्यक्रम का स्रोत: Swami Keshwanand Rajasthan Agricultural University, Bikaner की Vth Deans' Committee Report।
