खरीफ फसल सुधार (Crop Improvement-I, Kharif, GPB-311) B.Sc. (Hons.) Agriculture के पाँचवें सेमेस्टर का 2 क्रेडिट (1+1) का कोर्स है। इसमें खरीफ की प्रमुख फसलों (धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, मूँग, लोबिया, अरहर, मोठ, सोयाबीन, तिल, मूँगफली, कपास, अरंडी, मिर्च और टमाटर) की उत्पत्ति, पुष्प जैविकी, प्रजनन उद्देश्य, विधियाँ और संकर बीज उत्पादन का अध्ययन होता है। सिलेबस में 16 थ्योरी लेक्चर हैं। इस लेख में सभी फसलें क्रमवार तालिकाओं, MCQ और FAQ के साथ समझाई गई हैं।
1. उत्पत्ति केंद्र, प्रजातियों का वितरण और जंगली संबंधी
रूसी वैज्ञानिक एन.आई. वाविलोव ने फसलों की सर्वाधिक आनुवंशिक विविधता वाले क्षेत्रों को उत्पत्ति/विविधता केंद्र कहा। इन क्षेत्रों में फसल के जंगली संबंधी (Wild relatives) भी मिलते हैं, जो रोग-कीट प्रतिरोध और तनाव सहनशीलता के जीनों का स्रोत हैं। हार्लन व डी वेट (1971) ने जीन पूल को तीन भागों में बाँटा:
| जीन पूल | अर्थ |
|---|---|
| प्राथमिक (GP-1) | उसी प्रजाति की किस्में, भूमि प्रजातियाँ और जंगली रूप; आसान संकरण |
| द्वितीयक (GP-2) | निकट की प्रजातियाँ; संकरण संभव पर कठिनाई के साथ |
| तृतीयक (GP-3) | दूर की प्रजातियाँ; भ्रूण बचाव, जीवद्रव्यक संलयन या ट्रांसजेनिक विधि आवश्यक |
2. पादप आनुवंशिक संसाधन (PGR): उपयोग और संरक्षण
पादप आनुवंशिक संसाधन प्रजनन के कच्चे माल हैं: भूमि प्रजातियाँ, उन्नत किस्में, जंगली संबंधी, आनुवंशिक भंडार और उत्परिवर्ती।
- संग्रहण (Exploration), परिचय, लक्षण-वर्णन, मूल्यांकन, प्रलेखन।
- संरक्षण: In situ (प्राकृतिक आवास या किसान के खेत में; जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र) और Ex situ (जीन बैंक: बीज बैंक, क्षेत्र जीन बैंक, इन विट्रो/ऊतक संवर्धन, क्रायोप्रिजर्वेशन)।
- जीन बैंक के प्रकार: आधार (दीर्घकालिक, लगभग −18 °C), सक्रिय (मध्यम अवधि) और कार्यकारी संग्रह।
- संस्थाएँ: NBPGR (नई दिल्ली, 1976; राष्ट्रीय जीन बैंक), ICRISAT (हैदराबाद; ज्वार, बाजरा, चना, अरहर, मूँगफली), IRRI (फिलीपींस; धान), CIMMYT (मैक्सिको; मक्का, गेहूँ), स्वालबार्ड वैश्विक बीज तिजोरी (नॉर्वे, 2008)।
- उपयोग: पूर्व प्रजनन (Pre-breeding) द्वारा जंगली प्रजातियों से जीन स्थानांतरण।
3. गुणात्मक व मात्रात्मक लक्षण और प्रजनन की मूल अवधारणाएँ
| फसल का प्रकार | प्रमुख विधियाँ |
|---|---|
| स्वपरागित | परिचय, समूह/शुद्ध वंशक्रम चयन, संकरण (वंशावली, समूह, SSD, प्रतिसंकरण), उत्परिवर्तन, संकर (CMS/GMS) |
| परपरागित | समूह चयन, आवर्ती चयन, अंतःप्रजात वंशक्रम से संकर, संश्लेषित व संकुल किस्में |
| वानस्पतिक प्रवर्धित | क्लोनी चयन, संकरण, कायिक उत्परिवर्तन |
गुणात्मक लक्षण (जैसे रोग प्रतिरोध, बौनापन) कम जीनों से, मात्रात्मक लक्षण (उपज, तेल प्रतिशत) अनेक जीनों से नियंत्रित होते हैं और पर्यावरण से अधिक प्रभावित होते हैं।
4. धान (Rice) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Oryza sativa (2n = 24, AA जीनोम; उप-प्रजातियाँ इंडिका व जैपोनिका), O. glaberrima (पश्चिमी अफ्रीका की) |
| उत्पत्ति | भारत-बर्मा/दक्षिण-पूर्व एशिया |
| जंगली संबंधी | O. rufipogon (बहुवर्षीय पूर्वज), O. nivara (एकवर्षीय; ग्रासी स्टंट विषाणु प्रतिरोध), O. officinalis (भूरा फुदका/BPH प्रतिरोध), O. longistaminata (जीवाणु झुलसा Xa21) |
| पुष्प जैविकी | पुष्पगुच्छ (Panicle) में स्पाइकलेट; 6 पुंकेसर, 1 अंडप; सुबह लगभग 10–12 बजे खिलना (anthesis); स्वपरागित (पर-परागण 1–4%) |
| विपुंसन | शाम को (संभावित अगले दिन खिलने वाले) स्पाइकलेट का ऊपरी भाग काटकर चिमटी या सक्शन से पुंकेसर निकालना, या गर्म जल उपचार (लगभग 42–44 °C, कुछ मिनट); थैली से ढकना; अगले दिन सुबह परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | अर्ध-बौनी, अधिक उपज देने वाली किस्में (sd1 जीन); शीघ्र पकना; रोग प्रतिरोध (झोंका/Blast, जीवाणु झुलसा, शीथ ब्लाइट), कीट (BPH, तना छेदक, गॉल मिज); सहनशीलता (सूखा, लवणता, जलमग्नता Sub1A); गुणवत्ता (दाना आकार, एमाइलोज, सुगंध 2-AP, बासमती के गुण); संकर धान (CMS-WA प्रणाली) |
| विधियाँ | परिचय, शुद्ध वंशक्रम चयन, संकरण (वंशावली/समूह), उत्परिवर्तन, प्रतिसंकरण, MAS, DH, संकर किस्में |
| किस्में | IR-8, जया, रत्ना, PR 106, सांबा महसूरी; बासमती: पूसा बासमती 1, 1121, 1509, 1718, 1728 |
| संकर बीज | A × R (CMS-WA) या द्वि-वंशक्रम (TGMS/PGMS); GA₃ छिड़काव, अतिरिक्त परागण और झंडा पत्ती कटाई; पंक्ति अनुपात लगभग 8–10 मादा : 2 नर |
5. मक्का (Maize) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Zea mays (2n = 20) |
| उत्पत्ति | मैक्सिको / मध्य अमेरिका (टियोसिंटे से पालतू बनी) |
| जंगली संबंधी | टियोसिंटे (Zea mexicana, Z. diploperennis, Z. perennis), Tripsacum |
| पुष्प जैविकी | एकलिंगाश्रयी (Monoecious); नर पुष्पगुच्छ (Tassel) ऊपर और मादा भुट्टा (Ear) पार्श्व में; पुंपूर्वी (Protandrous); परपरागित (>95%) |
| विपुंसन/संकरण | पराग झड़ने से पहले टैसल हटाना (Detasseling); भुट्टे को रेशम (Silk) निकलने से पहले थैली से ढकना; नर टैसल से पराग एकत्रित करके रेशम पर लगाना |
| प्रजनन उद्देश्य | अधिक उपज, शीघ्र पकना, डंठल व जड़ गिरना रोकना, पत्ती झुलसा (Turcicum, Maydis), मृदुरोमिल आसिता, तना छेदक (Chilo partellus); सूखा/जलभराव सहनशीलता; गुणवत्ता प्रोटीन मक्का (QPM; opaque-2 जीन), स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न, पॉपकॉर्न, वैक्सी मक्का |
| विधियाँ | समूह चयन, भुट्टा-से-पंक्ति, आवर्ती चयन, अंतःप्रजात वंशक्रम से एकल/त्रि-मार्गी/द्वि-संकर, संकुल किस्में |
| किस्में/संकर | गंगा 5, HQPM-1 (QPM संकर), शक्तिमान-1 (QPM), प्रताप मक्का-3 (राजस्थान) |
| संकर बीज | मादा:नर पंक्ति 4:2 या 2:1; मादा में टैसल हटाना; पुष्पन मिलान (Nicking); परागण के बाद नर पंक्तियाँ हटाना |
6. ज्वार (Sorghum) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Sorghum bicolor (2n = 20); नस्लें: Bicolor, Guinea, Caudatum, Kafir, Durra |
| उत्पत्ति | अफ्रीका (इथियोपिया-सूडान क्षेत्र) |
| जंगली संबंधी | S. halepense (जॉनसन घास), S. propinquum, S. arundinaceum, S. verticilliflorum |
| पुष्प जैविकी | पैनिकल (बाली); जोड़े में स्पाइकलेट: अकेला (उभयलिंगी) और डंठल वाला (नर/बंध्य); पुष्पन ऊपर से नीचे लगभग 4–5 दिन; खिलना मुख्यतः मध्यरात्रि से सुबह; अक्सर स्वपरागित (कुछ पर-परागण) |
| विपुंसन | गर्म जल (लगभग 42–48 °C, 10 मिनट) या सक्शन/हाथ से; अधिकतर CMS वंशक्रम (A लाइन) से संकर |
| प्रजनन उद्देश्य | उपज; दाने व चारे के लिए द्वि-उद्देशीय; शूट फ्लाई (Atherigona soccata), तना छेदक, मिज; ग्रेन मोल्ड, एन्थ्रेक्नोज, चारकोल रॉट; सूखा सहनशीलता (स्टे-ग्रीन गुण); पोषण; मीठी ज्वार; चारे में कम HCN |
| किस्में/संकर | CSH-1 (पहला संकर, 1964), CSH 5, CSH 9, CSH 14, CSH 16; CSV 15; चारा: राजस्थान चरी, SSG 59-3 |
| संकर बीज | A × R प्रणाली (मिलो कोशिकाद्रव्य); मादा:नर 4:2 या 6:2; पृथक्करण; नर पौधों का निष्कासन |
7. बाजरा (Pearl Millet) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Pennisetum glaucum (2n = 14) |
| उत्पत्ति | पश्चिमी अफ्रीका (साहेल क्षेत्र) |
| जंगली संबंधी | P. violaceum (monodii), P. purpureum (नेपियर घास), P. orientale, P. squamulatum |
| पुष्प जैविकी | सिट्टा/स्पाइक; स्त्रीपूर्वी (Protogynous): वर्तिकाग्र पहले निकलती है और परागकोश बाद में; सुबह जल्दी पुष्पन; परपरागित (लगभग 85% से अधिक) |
| संकरण | स्पाइक को वर्तिकाग्र निकलने से पहले थैली से ढकना; परागण वर्तिकाग्र की ग्राह्य अवस्था में; A वंशक्रम में विपुंसन अनावश्यक |
| प्रजनन उद्देश्य | उपज; मृदुरोमिल आसिता (हरित बाली), अरगट, कंड, रतुआ; सूखा, गर्मी व कम उर्वरता में स्थिरता; शीघ्र पकना; जैव प्रबलीकरण (आयरन, जिंक) |
| किस्में/संकर | HB-1 (1965; Tift 23A × Bil 3B; पहला संकर), HHB 67 Improved, RHB 121, RHB 173, RHB 177; ICTP 8203 (संकुल); धनशक्ति (जैव प्रबलित, आयरन युक्त) |
| संकर बीज | A₁ कोशिकाद्रव्य (Tift 23A); A:R लगभग 4:2; रोग-निरोधक उपाय; पृथक्करण |
8. उड़द, मूँग और लोबिया का सुधार
| बिंदु | उड़द (Vigna mungo) | मूँग (Vigna radiata) | लोबिया (Vigna unguiculata) |
|---|---|---|---|
| गुणसूत्र | 2n = 22 | 2n = 22 | 2n = 22 |
| उत्पत्ति | भारत | भारत | अफ्रीका (पश्चिमी) |
| जंगली संबंधी | V. mungo var. silvestris, V. umbellata | V. radiata var. sublobata, V. trilobata | V. unguiculata var. spontanea |
| पुष्प जैविकी | तितलीनुमा (Papilionaceous); कली अवस्था में परागकोश का फटना (Cleistogamy); स्वपरागित; सुबह खिलना | समान | समान; सुबह जल्दी खिलना |
| विपुंसन | शाम (4–6 बजे) को कली से कील (Keel) और परागकोश चिमटी से निकालना; थैली से ढकना; अगली सुबह (7–10 बजे) परागण | ||
| किस्में | T 9, पंत U 30, IPU 2-43 | SML 668, IPM 02-3, पूसा विशाल | पूसा कोमल, RC 101 |
प्रजनन उद्देश्य (सामूहिक): पीला चितकबरा रोग (YMV; वाहक सफेद मक्खी) प्रतिरोध प्रमुख, पाउडरी मिल्ड्यू व सर्कोस्पोरा पर्ण दाग, शीघ्र व समान पकना (Synchronous maturity), फली न चटकना, बोल्ड दाना, प्रकाश-ताप असंवेदनशीलता। विधियाँ: शुद्ध वंशक्रम चयन, संकरण (वंशावली), उत्परिवर्तन, अंतर-प्रजातीय संकरण (YMV प्रतिरोध हेतु)।
9. अरहर (Pigeonpea) और मोठ का सुधार
| अरहर: प्रजाति | Cajanus cajan (2n = 22); उत्पत्ति: भारत (द्वितीयक केंद्र अफ्रीका) |
| जंगली संबंधी | C. cajanifolius (पूर्वज), C. scarabaeoides, C. sericeus, C. platycarpus |
| पुष्प जैविकी | पीला तितलीनुमा फूल; अक्सर परपरागित (प्राकृतिक पर-परागण 20–70%, कीटों से); सुबह लगभग 10 बजे खिलना |
| विपुंसन | शाम को कली खोलकर परागकोश हटाना; थैली से ढकना; सुबह परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | उकठा (Fusarium udum), बाँझपन मोजैक (SMD, वाहक माइट), फाइटोफ्थोरा झुलसा; फली छेदक (Helicoverpa); शीघ्र पकने वाली, प्रकाश-असंवेदी किस्में; निश्चित वृद्धि (Determinate) |
| किस्में/संकर | UPAS 120, मानक, पूसा 992, आशा (ICPL 87119); संकर: ICPH 8 (GMS, 1991), ICPH 2671 (CGMS) |
| संकर बीज | GMS या CGMS (C. cajanifolius का A₄ कोशिकाद्रव्य) द्वारा; कीट परागण; पृथक्करण |
| मोठ (Vigna aconitifolia) | मरुस्थलीय क्षेत्रों की सूखा सहनशील दलहन; उद्देश्य: पीला चितकबरा रोग प्रतिरोध, शीघ्र पकना, उपज; किस्में: RMO 40, RMO 225; जंगली संबंधी: V. trilobata |
10. सोयाबीन (Soybean) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Glycine max (2n = 40) |
| उत्पत्ति | चीन (उत्तर-पूर्वी चीन/मंचूरिया) |
| जंगली संबंधी | Glycine soja (जंगली पूर्वज), G. tomentella आदि |
| पुष्प जैविकी | छोटे बैंगनी/सफेद फूल; Cleistogamy; स्वपरागित; सुबह जल्दी खिलना |
| विपुंसन | बहुत छोटे फूल, इसलिए कठिन; सुबह या पिछली शाम को चिमटी से बाह्यदल, दल व पुंकेसर हटाना; परागण के बाद थैली; सफलता कम |
| प्रजनन उद्देश्य | उपज; प्रकाश-असंवेदी; फली न चटकना; पीला मोजैक, रतुआ (Asian soybean rust), जीवाणु पस्चुल; तना मक्खी, गर्डल बीटल; बीज की अंकुरण क्षमता लंबी; कुनित्ज़ ट्रिप्सिन अवरोधक/लिपोक्सीजीनेज़-मुक्त (बीन्स गंध कम); अधिक तेल और प्रोटीन |
| किस्में | JS 335 (सर्वाधिक लोकप्रिय), JS 93-05, JS 9560, NRC 37 (अहिल्या 4), MAUS 71 |
| विधियाँ | परिचय, शुद्ध वंशक्रम चयन, संकरण (वंशावली/समूह), उत्परिवर्तन, MAS |
11. तिल (Sesame) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Sesamum indicum (2n = 26) |
| उत्पत्ति | भारत या अफ्रीका (इथियोपिया); भारत प्राथमिक केंद्र माना जाता है |
| जंगली संबंधी | S. mulayanum (भारतीय जंगली पूर्वज), S. malabaricum, S. radiatum, S. alatum |
| पुष्प जैविकी | नलिकाकार घंटीनुमा फूल; सुबह जल्दी खिलना; मुख्यतः स्वपरागित पर 5–40% तक पर-परागण (मधुमक्खी) |
| विपुंसन | शाम को (4–5 बजे) कली खोलकर परागकोश हटाना; सुबह (6–8 बजे) परागण; थैली से ढकना |
| प्रजनन उद्देश्य | अधिक फली व बीज वाली किस्में, फली न चटकना (Indehiscent), निश्चित वृद्धि; फिलोडी (फाइटोप्लाज्मा, वाहक फुदका), अल्टरनेरिया झुलसा, चारकोल रॉट; तेल (50% से अधिक), सफेद बीज |
| किस्में | RT 46, RT 54, RT 125, RT 127 (राजस्थान) |
12. मूँगफली (Groundnut) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Arachis hypogaea (2n = 4x = 40, AABB) |
| उत्पत्ति | दक्षिण अमेरिका (बोलीविया-पराग्वे-अर्जेंटीना क्षेत्र) |
| जंगली संबंधी | A. duranensis (A जीनोम) और A. ipaensis (B जीनोम); A. cardenasii, A. villosa, A. stenosperma (रोग प्रतिरोध) |
| उप-प्रजातियाँ | hypogaea (फैलने वाली/वर्जीनिया; अनुक्रमिक नहीं, लंबी अवधि, बीज सुषुप्ति) और fastigiata (गुच्छेदार/स्पैनिश व वैलेंसिया; मुख्य तने पर फूल, कम अवधि) |
| पुष्प जैविकी | स्वपरागित, Cleistogamy; सुबह लगभग 6–7 बजे खिलना; जायांगधर (Gynophore/Peg) भूमि में जाकर फली बनाता है |
| विपुंसन | शाम (5–7 बजे) को अगले दिन खिलने वाली कली में से बैनर पंखुड़ी हटाकर परागकोश निकालना; सुबह परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | फली व दाना उपज; तेल (लगभग 48–50%); उच्च ओलिक अम्ल (उच्च O/L अनुपात); एफ्लाटॉक्सिन (Aspergillus flavus) प्रतिरोध; पर्ण दाग (टिक्का), रतुआ; कली गलन (PBNV); सूखा सहनशीलता; बीज सुषुप्ति (खेत में अंकुरण रोकने हेतु) |
| किस्में | JL 24, TG 37A (उत्परिवर्तन), GG 20, HNG 10, RG 425, गिरनार 2 |
| विधियाँ | परिचय, शुद्ध वंशक्रम चयन, संकरण (वंशावली), उत्परिवर्तन (TG किस्में), अंतर-प्रजातीय संकरण |
13. कपास (Cotton) का सुधार
| प्रजातियाँ | G. arboreum व G. herbaceum (2n = 26; पुरानी दुनिया, देसी कपास) और G. hirsutum (अमेरिकन/अपलैंड; 2n = 52, AADD) तथा G. barbadense (मिस्री/सी-आइलैंड; अतिदीर्घ स्टेपल) |
| उत्पत्ति | arboreum: भारत/अफ्रीका; herbaceum: अफ्रीका/अरब; hirsutum: मैक्सिको-मध्य अमेरिका; barbadense: दक्षिण अमेरिका (पेरू-इक्वाडोर) |
| जंगली संबंधी | G. raimondii (D जीनोम का दाता), G. thurberi, G. anomalum, G. stocksii। चतुर्गुणित कपास A-जीनोम (पुरानी दुनिया) और D-जीनोम (नई दुनिया) के प्राकृतिक संकर से बनी। |
| पुष्प जैविकी | उभयलिंगी बड़ा फूल; तीन उपबाह्यदल (Epicalyx); पुंकेसर एक स्तंभ में; सुबह लगभग 8–10 बजे खिलना; अक्सर पर-परागित (5–25%) |
| विपुंसन | शाम (4–6 बजे) को अगले दिन खिलने वाली कली से दल व परागकोश हाथ से निकालना; वर्तिकाग्र पर पुआल/थैली; सुबह (8–11 बजे) परागण; टैग लगाना |
| प्रजनन उद्देश्य | बीज कपास उपज; ओटाई अनुपात (GOT); रेशा गुणवत्ता: स्टेपल लंबाई, माइक्रोनेयर, शक्ति, एकरूपता; बॉलवर्म, सफेद मक्खी, जैसिड; कपास पत्ती मरोड़ विषाणु (CLCuV); Bt (Cry1Ac, Cry2Ab); कम अवधि व सघन बुवाई के अनुकूल पौधे |
| किस्में/संकर | H-4 (1970 के आसपास, पहला व्यावसायिक कपास संकर), वरलक्ष्मी (hirsutum × barbadense); Bt कपास (2002 से); बीकानेरी नरमा, RS 810, RS 875, RS 2013 (उत्तर भारत) |
| विधियाँ | परिचय, शुद्ध वंशक्रम चयन, संकरण (वंशावली), प्रतिसंकरण, संकर किस्में (अंतः-hirsutum, अंतर-प्रजातीय), उत्परिवर्तन, ट्रांसजेनिक |
14. अरंडी (Castor) का सुधार
| प्रजाति / गुणसूत्र | Ricinus communis (2n = 20; एकप्रजातीय वंश) |
| उत्पत्ति | अफ्रीका (इथियोपिया/उत्तर-पूर्वी अफ्रीका); भारत द्वितीयक केंद्र |
| पुष्प जैविकी | एकलिंगाश्रयी पुष्पक्रम; स्पाइक में मादा पुष्प ऊपर और नर पुष्प नीचे; सुबह खिलना; हवा और कीट परागण; परपरागित; पिस्टिलेट (केवल मादा) वंशक्रम उपलब्ध |
| विपुंसन | पिस्टिलेट लाइन में अनावश्यक; सामान्य वंशक्रम में नर कलियाँ (पुष्प) खिलने से पहले हटाना; मादा पुष्पों को थैली से ढकना |
| प्रजनन उद्देश्य | तेल (45–55%; रिसिनोलिक अम्ल लगभग 90%); शीघ्र पकना; बौनी व कॉम्पैक्ट किस्में; बिना काँटे वाली न चटकने वाली फली; उकठा (Fusarium), अल्टरनेरिया झुलसा, ग्रे मोल्ड; सेमीलूपर व कैप्सूल बोरर; रिसिन की कमी |
| किस्में/संकर | GCH 4, GCH 7, DCH 177; अरुणा (वरायटी) |
| संकर बीज | पिस्टिलेट वंशक्रम (जैसे VP-1) मादा पैतृक; सामान्य वंशक्रम नर पैतृक; पिस्टिलेट पंक्ति में नर पुष्प हटाना (Sex reversion) |
15. मिर्च (Chilli) और टमाटर (Tomato) का सुधार
| बिंदु | मिर्च | टमाटर |
|---|---|---|
| प्रजाति / गुणसूत्र | Capsicum annuum (2n = 24); अन्य: C. frutescens, C. chinense (भूत जोलोकिया), C. baccatum | Solanum lycopersicum (2n = 24) |
| उत्पत्ति | मध्य व दक्षिण अमेरिका (मैक्सिको-बोलीविया) | पेरू-इक्वाडोर (एंडीज़), पालतूकरण मैक्सिको में |
| जंगली संबंधी | C. chacoense आदि | S. pimpinellifolium (पूर्वज), S. peruvianum (निमेटोड Mi जीन), S. chilense (विषाणु Ty), S. pennellii, S. habrochaites |
| पुष्प जैविकी | उभयलिंगी; सुबह 6–9 बजे खिलना; अक्सर पर-परागित (कीटों से 30% तक अधिक) | उभयलिंगी; परागकोश शंकु (Anther cone) के भीतर वर्तिकाग्र; स्वपरागित (पर-परागण लगभग 5%) |
| विपुंसन | शाम (4–6 बजे) को अगले दिन खिलने वाली कली से परागकोश हटाना; थैली; सुबह परागण | खिलने से एक दिन पहले कली से परागकोश शंकु हटाना; थैली; 1–2 दिन बाद ताजे पराग से परागण |
| प्रजनन उद्देश्य | अधिक सूखी मिर्च उपज; तीखापन (कैप्साइसिन) व रंग (ASTA मान); पत्ती मरोड़ विषाणु, एन्थ्रेक्नोज/फल सड़न, पाउडरी मिल्ड्यू, जीवाणु म्लानि, थ्रिप्स व माइट; नर बंध्यता (GMS/CGMS) से संकर | निश्चित (Determinate) व अनिश्चित वृद्धि; उच्च उपज; गर्मी में फल लगना; टमाटर पत्ती मरोड़ विषाणु (ToLCV), अगेती व पछेती झुलसा, जीवाणु म्लानि, निमेटोड; TSS (Brix), लाइकोपीन, दृढ़ता व भंडारण क्षमता (rin, nor); प्रसंस्करण किस्में |
| किस्में/संकर | पूसा ज्वाला, पूसा सदाबहार, काशी अनमोल, पंत C-1, G 4 | पूसा रूबी, पूसा अर्ली ड्वार्फ, अर्का विकास, अर्का रक्षक (संकर), पूसा हाइब्रिड-2 |
16. संकर किस्मों और किस्मों के विकास की नवीन तकनीकें
| तकनीक | उपयोग |
|---|---|
| QTL मानचित्रण और जीनोम-व्यापी संबद्धता (GWAS) | उपज, तनाव सहनशीलता आदि से जुड़े जीन क्षेत्रों की पहचान |
| मार्कर सहायक चयन व प्रतिसंकरण (MAS, MABC) | जीन पिरामिडिंग (जैसे बासमती में बैक्टीरियल ब्लाइट प्रतिरोध) |
| जीनोमिक चयन | जीनोम के मार्कर से प्रजनन मान का पूर्वानुमान |
| द्विगुणित एकगुणित (DH) | एक पीढ़ी में समयुग्मजी वंशक्रम (मक्का में हैप्लॉइड प्रेरक) |
| गति प्रजनन (Speed breeding) | नियंत्रित प्रकाश व तापमान से वर्ष में कई पीढ़ियाँ |
| ट्रांसजेनिक और जीनोम संपादन (CRISPR) | Bt कपास; सुगंध, पोषण, रोग प्रतिरोध के लिए लक्षित संपादन |
| उच्च-थ्रूपुट फीनोटाइपिंग | सेंसर/ड्रोन से बड़े पैमाने पर लक्षण मापन |
| उत्परिवर्तन प्रजनन | विकिरण/रसायन से नई विविधता |
17. स्वपरागित, परपरागित और वानस्पतिक प्रवर्धित फसलों में बीज उत्पादन तकनीक
- स्वपरागित (धान, उड़द, मूँग, सोयाबीन, मूँगफली, तिल, टमाटर): कम पृथक्करण दूरी (लगभग 3–10 मी), अवांछित पौधों की निकासी और कीट-रोग नियंत्रण।
- परपरागित (मक्का, बाजरा, अरंडी) और अक्सर परपरागित (अरहर, कपास, ज्वार): अधिक पृथक्करण दूरी, पुष्पन मिलान और नर-मादा पंक्ति अनुपात, परागण वाहक का प्रबंध।
- वानस्पतिक प्रवर्धित फसलें: रोगमुक्त रोपण सामग्री (ऊतक संवर्धन), क्लोनों की शुद्धता और प्रमाणीकरण।
- संकर बीज उत्पादन: मक्का (डिटैसलिंग), धान (A × R, GA₃), ज्वार व बाजरा (A × R, मादा:नर 4:2), अरहर (GMS/CGMS, कीट परागण), कपास (हाथ से विपुंसन-परागण), अरंडी (पिस्टिलेट वंशक्रम)।
18. आदर्श पौध प्रारूप (Ideotype) की अवधारणा
डोनाल्ड (1968) ने Ideotype की अवधारणा दी: वह आदर्श पौध प्रारूप जिसमें उपज बढ़ाने वाले सभी शारीरिक और आकारिकी गुण सही मात्रा में मौजूद हों। इस पर आधारित प्रजनन को Ideotype breeding कहते हैं।
| फसल | आदर्श प्रारूप के गुण |
|---|---|
| धान (नया पौध प्रकार, NPT, IRRI) | कम कल्ले (लगभग 3–4 उत्पादक कल्ले), बड़ी बालियाँ (200–250 दाने), मोटे मजबूत तने, गहरे हरे सीधे पत्ते, गहरी जड़ें, कम अवधि |
| गेहूँ | बौना कद, सीधे पत्ते, मजबूत तना, कम बंध्य कल्ले, बड़ी बाली |
| मक्का | भुट्टे के ऊपर सीधे पत्ते, एक भुट्टा, छोटा टैसल, मजबूत जड़ |
| कपास | सघन पौध, छोटी शाखाएँ, कम अवधि, एक साथ परिपक्वता |
19. भविष्य के लिए जलवायु-अनुकूल (Climate Resilient) फसल किस्में
बढ़ते तापमान, सूखे, बाढ़ और लवणता के कारण ऐसी किस्में चाहिए जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उपज दें।
| तनाव | रणनीति / उदाहरण |
|---|---|
| सूखा | जल उपयोग क्षमता, गहरी जड़ें, स्टे-ग्रीन, शीघ्र पकने वाली; बाजरा, ज्वार, मोठ; धान की सूखा सहनशील किस्में (सहभागी धान) |
| गर्मी | ऊष्मा-सहनशील किस्में; सुबह पुष्पन; पराग की गर्मी में जीवनक्षमता |
| बाढ़/जलमग्नता | स्वर्णा-सब1 (Sub1A जीन), सांबा महसूरी-सब1 |
| लवणता/क्षारीयता | CSR किस्में (CSSRI, करनाल), खारचिया 65 (गेहूँ) |
| CO₂ वृद्धि पर प्रतिक्रिया | अधिक CO₂ में अधिक उपज देने वाले जीनोटाइप; C₄ धान परियोजना |
| पोषण (जैव प्रबलित) | धनशक्ति (बाजरा), QPM मक्का |
ICAR के NICRA कार्यक्रम के अंतर्गत जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकी विकसित की जा रही है। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में जलवायु-अनुकूल और जैव-प्रबलित किस्में जारी की गई हैं।
20. प्रैक्टिकल में क्या सीखेंगे
- धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, उड़द, मूँग, सोयाबीन, मूँगफली, तिल, अरंडी, कपास, लोबिया में विपुंसन और संकरण।
- खरीफ फसलों का रख-रखाव प्रजनन (Maintenance breeding)।
- वंशावली, समूह और SSD विधियों से जर्मप्लाज्म व विभाजित समष्टियों का प्रबंधन।
- बीज उत्पादन और संकर बीज उत्पादन की क्षेत्रीय तकनीकें।
- हेटेरोसिस, अंतःप्रजनन अवसाद और आनुवंशिकता का अनुमान।
- प्रयोगों का लेआउट; गुणवत्ता लक्षण; विभिन्न गुणों के दाता जनक; बीज उत्पादन प्लॉट व AICRP प्लॉट का भ्रमण।
सापेक्ष हेटेरोसिस (%) = (F₁ − MP) / MP × 100
हेटरोबेल्टियोसिस (%) = (F₁ − BP) / BP × 100
अंतःप्रजनन अवसाद (%) = (F₁ − F₂) / F₁ × 100
व्यापक अर्थ में आनुवंशिकता = VG / VP × 100
कुछ प्रमुख दाता जनक (Donor parents)
| फसल / गुण | दाता |
|---|---|
| धान: बौनापन | Dee-geo-woo-gen (DGWG), ताइचुंग नेटिव-1 |
| धान: झोंका रोग | टेटेप (Tetep) |
| धान: भूरा फुदका (BPH) | मुडगो (Mudgo), PTB 33 |
| धान: लवणता | पोक्काली, Nona Bokra |
| धान: जलमग्नता सहनशीलता | FR13A (Sub1A जीन) |
| धान: जीवाणु झुलसा | O. longistaminata (Xa21), IRBB 21 |
| ज्वार: शूट फ्लाई | IS 18551 |
| ज्वार: स्टे-ग्रीन (सूखा) | B 35 |
| टमाटर: निमेटोड / विषाणु | S. peruvianum (Mi) / S. chilense (Ty) |
| मिर्च: तीखापन | C. chinense (भूत जोलोकिया) |
| मूँगफली: रोग प्रतिरोध | A. cardenasii से अंतर्वेशित वंशक्रम |
21. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)
- धान 2n = 24; मक्का 20; ज्वार 20; बाजरा 14; उड़द/मूँग/लोबिया/अरहर 22; सोयाबीन 40; मूँगफली 40; कपास (अमेरिकन) 52; टमाटर/मिर्च 24; तिल 26; अरंडी 20।
- बाजरा स्त्रीपूर्वी; मक्का पुंपूर्वी; अरहर में 20–70% पर-परागण।
- पहले संकर: मक्का (1961), ज्वार CSH-1 (1964), बाजरा HB-1 (1965), कपास H-4 (1970)।
- मूँग/उड़द: YMV मुख्य समस्या; सोयाबीन: लिपोक्सीजीनेज़/कुनित्ज़-मुक्त किस्में।
- अरंडी: पिस्टिलेट वंशक्रम से संकर; रिसिनोलिक अम्ल लगभग 90%।
- टमाटर में rin/nor उत्परिवर्ती से लंबी भंडारण क्षमता।
- Ideotype: डोनाल्ड (1968)।
22. महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. बाजरा में पुष्पन की मुख्य विशेषता है: (अ) पुंपूर्वता (ब) स्त्रीपूर्वता (स) क्लीस्टोगैमी (द) एपोमिक्सिस। उत्तर: ब
Q2. मक्का की उत्पत्ति का केंद्र है: (अ) चीन (ब) भारत (स) मैक्सिको/मध्य अमेरिका (द) अफ्रीका। उत्तर: स
Q3. मूँगफली के पूर्वज जंगली प्रजातियाँ हैं: (अ) A. duranensis × A. ipaensis (ब) A. villosa (स) A. glabrata (द) A. pintoi। उत्तर: अ
Q4. पहला भारतीय व्यावसायिक कपास संकर कौन-सा है? (अ) H-4 (ब) वरलक्ष्मी (स) Bt कपास (द) LRA 5166। उत्तर: अ
Q5. अरंडी के तेल में मुख्य वसा अम्ल है: (अ) ओलिक (ब) रिसिनोलिक (स) लिनोलिक (द) पामिटिक। उत्तर: ब
Q6. उड़द-मूँग में पीले चितकबरे रोग का वाहक है: (अ) माहू (ब) सफेद मक्खी (स) थ्रिप्स (द) जैसिड। उत्तर: ब
Q7. धान में बौनेपन का जीन किससे आया? (अ) DGWG/ताइचुंग नेटिव-1 (ब) टेटेप (स) पोक्काली (द) FR13A। उत्तर: अ
Q8. "Ideotype" की अवधारणा किसने दी? (अ) डोनाल्ड (ब) मेंडल (स) वाविलोव (द) शल। उत्तर: अ
23. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: GPB-311 में कितने क्रेडिट और लेक्चर हैं?
उत्तर: 2 क्रेडिट (1+1); थ्योरी के 16 और प्रैक्टिकल के 16 लेक्चर।
प्रश्न: सोयाबीन में विपुंसन क्यों कठिन है?
उत्तर: फूल बहुत छोटे होते हैं और Cleistogamy के कारण परागकोश कली में ही फट जाते हैं।
प्रश्न: पिस्टिलेट वंशक्रम क्या है?
उत्तर: अरंडी की वह लाइन जिसमें केवल मादा पुष्प होते हैं; इसमें विपुंसन आवश्यक नहीं और संकर बीज बनाना आसान।
प्रश्न: जंगली संबंधी प्रजातियाँ क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: ये रोग-कीट प्रतिरोध और तनाव सहनशीलता के जीनों का स्रोत हैं।
प्रश्न: बाजरा में अरगट रोग से कैसे बचें?
उत्तर: स्वस्थ बीज, नमक के घोल से बीज शोधन और प्रतिरोधी संकर का उपयोग।
प्रश्न: Ideotype breeding का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: उपज बढ़ाने वाले गुणों वाले आदर्श पौधे का विकास।
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संदर्भ पुस्तकें (Reference Books)
वी.एल. चोपड़ा (सं.), Breeding of Field Crops, ऑक्सफोर्ड एवं IBH; मंडल, गांगुली एवं बनर्जी, Advances in Plant Breeding Vol. I व II, CBS; जे.एम. पोहलमैन, Breeding of Field Crops, AVI पब्लिशिंग; एच.एच. राम एवं एच.जी. सिंह, Crop Breeding and Genetics, कल्याणी; मंजीत एस. कांग (सं.), Crop Improvement: Challenges in the Twenty-First Century; ए.के. शर्मा (सं.), Breeding Technology of Crop Plants, यश पब्लिशिंग हाउस, बीकानेर; एच.एच. राम, Vegetable Breeding: Principles and Practices, कल्याणी; एस.एस. शेखावत (सं.), Advances and Current Issues in Agriculture Vol. III, शिक्षा प्रकाशन, जयपुर।
नोट: यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से मौलिक रूप में तैयार किया गया है। किस्मों के नाम, खिलने के समय और अनुपात सामान्य जानकारी पर आधारित हैं और क्षेत्र व वर्ष के अनुसार बदल सकते हैं; अंतिम पुष्टि हेतु अपने विश्वविद्यालय/AICRP की नवीनतम अनुशंसा देखें। पाठ्यक्रम का स्रोत: Swami Keshwanand Rajasthan Agricultural University, Bikaner की Vth Deans' Committee Report।
