व्यावसायिक पादप प्रजनन (Commercial Plant Breeding, GPB-222) B.Sc. (Hons.) Agriculture के चौथे सेमेस्टर का 3 क्रेडिट (1+2) का कोर्स है। इसमें सीखा जाता है कि संकर किस्मों के पैतृक वंशक्रम कैसे विकसित और संरक्षित होते हैं, विभिन्न फसलों में संकर बीज कैसे बनता है, आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी का प्रजनन में क्या उपयोग है और किस्मों का पंजीकरण व विमोचन कैसे होता है। सिलेबस में 16 थ्योरी और 32 प्रैक्टिकल लेक्चर हैं। इस लेख में सभी थ्योरी टॉपिक क्रमवार, तालिकाओं, MCQ और FAQ के साथ आसान हिंदी में समझाए गए हैं।
1. फसलों के प्रकार और पौधों में जनन की विधियाँ
| वर्ग | उदाहरण | प्रजनन/बीज उत्पादन पर प्रभाव |
|---|---|---|
| स्वपरागित | गेहूँ, धान, चना, सोयाबीन, मूँगफली, टमाटर | किस्में शुद्ध वंशक्रम; संकर बनाने में विपुंसन कठिन, इसलिए नर बंध्यता का उपयोग |
| परपरागित | मक्का, बाजरा, सूरजमुखी, सरसों (कुछ), कद्दूवर्गीय | संकर बनाना आसान; अंतःप्रजात वंशक्रम बनाने पड़ते हैं |
| अक्सर परपरागित | कपास, ज्वार, अरहर | कीट या हवा से 5–30% या अधिक पर-परागण |
| वानस्पतिक प्रवर्धित | गन्ना, आलू, केला | क्लोन; संकर के बाद वानस्पतिक गुणन |
संकर किस्में बनाने की व्यवहार्यता किन बातों पर निर्भर है: पर्याप्त हेटेरोसिस, संकर बीज उत्पादन में आसानी (नर बंध्यता, एकलिंगता), प्रति पौधे अधिक बीज उत्पादन (बीज गुणन अनुपात) और किसान को मिलने वाला आर्थिक लाभ।
2. वंशक्रम विकास और रख-रखाव प्रजनन (A/B/R प्रणाली और द्वि-वंशक्रम प्रणाली)
(क) तीन-वंशक्रम प्रणाली (A / B / R)
| वंशक्रम | विशेषता | भूमिका |
|---|---|---|
| A (नर बंध्य) | बंध्य कोशिकाद्रव्य (S) + अप्रभावी केंद्रकीय जीन (rf rf) | बीज पैतृक (मादा) |
| B (रख-रखाव) | सामान्य कोशिकाद्रव्य (N) + rf rf; A का केंद्रकीय समरूप (Isogenic) | A के बीज गुणन के लिए |
| R (पुनर्स्थापक) | प्रभावी जीन Rf Rf; प्रायः अलग आनुवंशिक पृष्ठभूमि | पराग पैतृक (नर) |
A × B → A (बंध्य; A वंशक्रम का गुणन)
B × B → B (स्वपरागण से रख-रखाव)
A × R → F₁ संकर (उर्वर, व्यावसायिक बीज)
R × R → R (स्वपरागण से)
वंशक्रम विकास: A वंशक्रम बनाने के लिए नर बंध्य कोशिकाद्रव्य वाले स्रोत में B वंशक्रम से बार-बार प्रतिसंकरण (Backcrossing) करते हैं। R वंशक्रम पुनर्स्थापन क्षमता (Rf जीन) और संयोजन क्षमता के लिए चुने जाते हैं। यह प्रणाली बाजरा (A₁ पद्धति), ज्वार (मिलो कोशिकाद्रव्य), सूरजमुखी (PET-1), धान (WA) में उपयोग होती है।
(ख) द्वि-वंशक्रम प्रणाली (Two-line system)
पर्यावरण-संवेदी आनुवंशिक नर बंध्यता (TGMS: तापमान संवेदी; PGMS: प्रकाशकाल संवेदी) का उपयोग। बंध्यता वाले वातावरण में लाइन नर बंध्य रहती है और संकर बीज बनता है; भिन्न वातावरण में वही लाइन उर्वर होकर स्वयं का गुणन करती है।
| बिंदु | तीन-वंशक्रम | द्वि-वंशक्रम |
|---|---|---|
| रख-रखाव वंशक्रम | आवश्यक (B) | अनावश्यक |
| पुनर्स्थापक | R का चयन प्रतिबंधित | किसी भी उपयुक्त वंशक्रम से संकरण संभव |
| जोखिम | कोशिकाद्रव्य की एकरूपता (आनुवंशिक भेद्यता) | वातावरण में अनिश्चित बदलाव से बंध्यता का टूटना |
| उदाहरण | बाजरा, ज्वार, सूरजमुखी, धान | धान (चीन व भारत), सरसों |
3. वाणिज्यिक संकर की आनुवंशिक शुद्धता परीक्षण
संकर बीज में आनुवंशिक शुद्धता (Hybridity) की जाँच आवश्यक है, क्योंकि स्व-परागित (Selfed) या बाहरी बीज मिलने से उपज घटती है।
| परीक्षण | विवरण |
|---|---|
| ग्रो-आउट टेस्ट (GOT) | बीज को खेत में उगाकर पौधों के लक्षणों से संकर और अन्य पौधों की गणना; सबसे विश्वसनीय पर समय लेने वाला (एक मौसम) |
| रूपात्मक/बीजांकुर लक्षण | अंकुर का रंग, आकार (जैसे एन्थोसायनिन) |
| जैव-रासायनिक परीक्षण | इलेक्ट्रोफोरेसिस (प्रोटीन/आइसोजाइम), फिनॉल, KOH जैसे रासायनिक परीक्षण |
| आणविक परीक्षण | SSR/SNP मार्कर, DNA फिंगरप्रिंटिंग; शीघ्र (कुछ दिन) और अत्यंत सटीक |
सूत्र: संकर शुद्धता % = (संकर पौधों की संख्या / कुल पौधे) × 100
4. मक्का, धान, ज्वार और बाजरा में संकर बीज उत्पादन की प्रगति
| फसल | बीज उत्पादन की मुख्य बातें |
|---|---|
| मक्का | एकल, त्रि-मार्गी और द्वि-संकर। मादा पैतृक में पुष्प-गुच्छ (Tassel) की हटाई (Detasseling) पराग झड़ने से पहले। मादा:नर पंक्ति अनुपात सामान्यतः 4:2 या 2:1। दोनों पैतृकों में फूल का मिलान (Nicking) हेतु बुवाई का समय अलग। परागण के बाद नर पंक्तियाँ हटाना। मादा पंक्ति में झड़ने वाले (Shedder) पौधे अत्यल्प रखने होते हैं। |
| धान | A × R (CMS-WA) द्वारा। मादा-नर पंक्ति अनुपात लगभग 8–10 : 2। जिबरेलिक अम्ल (GA₃) का छिड़काव (लगभग 45–60 ग्राम/हे., बँटे हुए) से A वंशक्रम की बालियों का बाहर निकलना बेहतर। अतिरिक्त परागण (रस्सी या डंडे से पौधों को हिलाना)। झंडा पत्ती कटाई (Flag leaf clipping) से पराग का प्रसार आसान। समय का पृथक्करण या लगभग 100 मी स्थान पृथक्करण। |
| ज्वार | A × R प्रणाली; मादा-नर पंक्ति अनुपात 4:2 या 6:2। पृथक्करण दूरी सुनिश्चित करना; फूल आने के समय मिज (Sorghum midge) और पराग-झड़ने वाले पौधों की निकासी। मिलो कोशिकाद्रव्य वाली A लाइन। |
| बाजरा | A₁ कोशिकाद्रव्य; मादा (A) : नर (R) लगभग 4:2। बाजरा स्त्रीपूर्वी (Protogynous) है, इसलिए A लाइन में परागण समय पर होना आवश्यक। मृदुरोमिल आसिता (हरी बाली) और अरगट रोगग्रस्त पौधों का निकालना। |
5. अरंडी और सूरजमुखी में संकर बीज उत्पादन
| फसल | बीज उत्पादन की मुख्य बातें |
|---|---|
| अरंडी (Castor) | अरंडी एकलिंगाश्रयी (Monoecious) है। संकर बीज के लिए पिस्टिलेट वंशक्रम (केवल मादा पुष्प; जैसे VP-1) को मादा पैतृक व साधारण वंशक्रम को नर पैतृक बनाया जाता है। पिस्टिलेट लाइन में कभी-कभी नर पुष्प आ जाते हैं (Sex reversion), जिन्हें हटाना आवश्यक। सामान्यतः कई मादा पंक्तियों पर एक नर पंक्ति। हवा और कीट परागण। उदाहरण संकर: GCH-4। |
| सूरजमुखी | CMS (PET-1 कोशिकाद्रव्य) द्वारा A × R। मधुमक्खी परागण अत्यावश्यक (प्रति हेक्टेयर कुछ मधुमक्खी बक्से) और सुबह के समय कपड़े से अतिरिक्त हाथ परागण। मादा:नर पंक्ति सामान्यतः 3:1 या 4:1। चिड़ियों से रक्षा आवश्यक। पृथक्करण दूरी अधिक। |
6. कपास, अरहर और ब्रैसिका में संकर बीज उत्पादन
| फसल | बीज उत्पादन की मुख्य बातें |
|---|---|
| कपास | भारत में अधिकांश संकर बीज हाथ से विपुंसन और परागण से बनते हैं। मादा पैतृक की जो कलियाँ अगले दिन खिलने वाली हैं, उन्हें शाम (लगभग 4–6 बजे) को विपुंसित कर थैली से ढका जाता है; अगली सुबह नर पैतृक के पराग से परागण करके टैग लगाया जाता है। श्रम-प्रधान प्रक्रिया है, इसलिए बीज महँगा है। संकर प्रकार: अंतः-hirsutum और hirsutum × barbadense। पृथक्करण लगभग 50 मी। |
| अरहर | पहला संकर ICPH 8 (आनुवंशिक नर बंध्यता, GMS) पर आधारित। बाद में CGMS (Cajanus cajanifolius से A₄ कोशिकाद्रव्य; संकर ICPH 2671) विकसित। कीटों (मधुमक्खी, Megachile) द्वारा परागण (प्राकृतिक परपरागण 20–70%)। पृथक्करण दूरी अधिक (लगभग 200 मी)। |
| ब्रैसिका (सरसों) | CMS (Ogura, Polima, Moricandia कोशिकाद्रव्य) और आनुवंशिक रूप से अभियांत्रिकी बारनेज़-बारस्टार प्रणाली। CMS संकर: जैसे NRCHB 506। मधुमक्खी परागण; मादा:नर पंक्ति लगभग 3:1 या 4:1; पृथक्करण लगभग 200 मी। |
बारनेज़-बारस्टार: बारनेज़ (Bacillus amyloliquefaciens का RNase) परागकोश की टेपेटम कोशिकाओं को नष्ट कर नर बंध्यता लाता है; बारस्टार उसका अवरोधक है और पुनर्स्थापन करता है। इसमें उपयोग हेतु जैव-सुरक्षा नियमन आवश्यक है।
7. सब्जी फसलों में खुले और संरक्षित वातावरण में गुणवत्ता बीज उत्पादन
| बिंदु | खुले खेत में | संरक्षित (पॉलीहाउस/नेट हाउस) |
|---|---|---|
| पृथक्करण | अधिक दूरी (परपरागित सब्जियों में सैकड़ों मीटर) | कीट-रोधी जाली व दीवारों से स्वतः पृथक्करण |
| नियंत्रण | मौसम पर निर्भर | तापमान, नमी, सिंचाई पर नियंत्रण |
| रोग-कीट | अधिक जोखिम | कम, स्वस्थ बीज |
| उपयोग | सामान्य किस्में, कम लागत | उच्च मूल्य संकर (टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा) |
| लागत | कम | अधिक |
- टमाटर, बैंगन, मिर्च: मादा पैतृक की कली का विपुंसन (खिलने से एक दिन पहले) और नर पराग से हाथ परागण।
- कद्दूवर्गीय सब्जियाँ: मादा-प्रमुख (Gynoecious) वंशक्रम का उपयोग; नर और मादा पुष्पों को एक दिन पहले थैली से ढक कर हाथ से परागण।
- गोभी वर्गीय: स्वअसंगतता (SI) वाली वंशक्रमें; कली अवस्था में परागण से SI वंशक्रम का रख-रखाव।
- द्विवर्षीय सब्जियाँ (प्याज, गाजर, गोभी): बीज से बीज (Seed-to-seed) या कंद/ग्रंथि से बीज (Root/Bulb-to-seed) विधि; ठंडे क्षेत्रों में बीज उत्पादन।
8. वंशक्रम और किस्म विकास की वैकल्पिक रणनीतियाँ: हैप्लॉइड प्रेरक (Haploid Inducer)
एकगुणित (Haploid) पौधे में गुणसूत्र का केवल एक सेट (n) होता है। इसे कोल्चिसिन से द्विगुणित कर द्विगुणित एकगुणित (Doubled Haploid, DH) बनाने पर एक ही पीढ़ी में पूर्णतः समयुग्मजी वंशक्रम मिल जाता है, जबकि सामान्य अंतःप्रजनन में 6–7 पीढ़ियाँ लगती हैं।
| विधि | विवरण |
|---|---|
| इन-विवो प्रेरण (मक्का) | Stock 6 और उससे विकसित प्रेरक वंशक्रम (जैसे RWS, UH400) पराग के रूप में उपयोग; मादा पर एकगुणित बीज प्रेरित। पहचान हेतु R1-nj (एन्थोसायनिन रंग) मार्कर। |
| गुणसूत्र विलोपन विधि | जौ में Hordeum bulbosum से संकरण; गेहूँ × मक्का संकरण |
| परागकोश/सूक्ष्मबीजाणु संवर्धन (Androgenesis) | धान, गेहूँ, सरसों, तंबाकू |
| अंडाशय संवर्धन (Gynogenesis) | प्याज, चुकंदर |
लाभ: समय की बचत, पूर्ण समयुग्मजता, अप्रभावी जीनों की शीघ्र पहचान और संकर बीज के लिए वंशक्रमों का तेज विकास।
9. ऊतक संवर्धन तकनीकें (Tissue Culture)
पूर्ण क्षमता (Totipotency): प्रत्येक जीवित कोशिका से पूरा पौधा बनाने की क्षमता (हेबरलैंट, 1902)। मुरासिगे और स्कूग (MS) माध्यम (1962) सर्वाधिक प्रचलित है। हार्मोन अनुपात (स्कूग व मिलर, 1957): ऑक्सिन अधिक → जड़; साइटोकाइनिन अधिक → प्ररोह।
| तकनीक | उपयोग |
|---|---|
| कैलस संवर्धन | कोशिकाओं का अव्यवस्थित समूह; पौध पुनर्जनन का आधार |
| विभज्योतक (Meristem) संवर्धन | विषाणु-मुक्त पौधे (आलू, गन्ना, केला) |
| सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropagation) | तेजी से गुणन; चार चरण: स्थापन, गुणन, जड़ें निकालना, कठोरीकरण (Hardening) |
| भ्रूण संवर्धन/बचाव | दूरस्थ संकर के भ्रूण को बचाना |
| परागकोश संवर्धन | एकगुणित पौधे व DH वंशक्रम |
| जीवद्रव्यक (Protoplast) संलयन | कायिक संकर (जैसे पोमेटो: आलू + टमाटर) |
| कायिक भ्रूणोद्भव | कृत्रिम बीज (Synthetic seeds) |
| कायिक विभिन्नता (Somaclonal variation) | ऊतक संवर्धन से उत्पन्न आनुवंशिक भिन्नता; उपयोगी उत्परिवर्ती चयन |
| क्रायोप्रिजर्वेशन | अति शीत (−196 °C) पर जर्मप्लाज्म संरक्षण |
व्यावसायिक प्रजनन में इसका उपयोग नर बंध्य और पैतृक वंशक्रमों के शीघ्र गुणन, रोग-मुक्त रोपण सामग्री और जर्मप्लाज्म संरक्षण में होता है।
10. जैव-प्रौद्योगिकी के उपकरण
- मार्कर सहायक चयन (MAS) और जीनोमिक चयन: DNA मार्कर से वांछित जीन का चयन।
- आनुवंशिक रूपांतरण: Agrobacterium tumefaciens (Ti प्लास्मिड) और जीन गन (Biolistics, सैनफोर्ड 1987) द्वारा जीन स्थानांतरण।
- ट्रांसजेनिक फसलें: Bt कपास (कीट प्रतिरोधी), शाकनाशी सहनशील फसलें, प्रो-विटामिन A युक्त गोल्डन राइस।
- जीनोम संपादन: CRISPR-Cas9 (डूडना व शार्पेंटियर, नोबेल 2020), ZFN, TALEN। भारत में हाल के वर्षों में जीनोम-संपादित धान की किस्में जारी हुईं।
- RNA हस्तक्षेप (RNAi), आणविक चिह्नक आधारित शुद्धता परीक्षण, गति प्रजनन (Speed breeding)।
- ट्रांसजेनिक नर बंध्यता: बारनेज़-बारस्टार।
नियमन: भारत में GM फसलों के लिए पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत GEAC की स्वीकृति आवश्यक है।
11. व्यावसायिक पादप प्रजनन में बौद्धिक संपदा (IPR) के मुद्दे
| माध्यम | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| पेटेंट | भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3(j) के अनुसार पौधे, बीज, किस्में व जैविक प्रक्रियाएँ पेटेंट योग्य नहीं; सूक्ष्मजीव और जैव प्रौद्योगिकीय प्रक्रियाएँ संभव |
| पादप प्रजनक अधिकार | PPV&FR Act, 2001 (विशिष्ट प्रणाली; Sui generis) |
| व्यापार रहस्य (Trade secret) | संकर किस्मों के पैतृक वंशक्रमों की गोपनीयता का मुख्य साधन |
| ट्रेडमार्क / ब्रांड | बीज कंपनी की पहचान और बाज़ार संरक्षण |
| भौगोलिक संकेतक (GI) | बासमती, दार्जिलिंग चाय जैसे उत्पादों के लिए |
| सामग्री हस्तांतरण समझौता (MTA) व लाइसेंस | जर्मप्लाज्म के आदान-प्रदान की शर्तें |
| जैव विविधता अधिनियम, 2002 | राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण; पहुँच और लाभ-साझेदारी |
मुख्य मुद्दे: जैव-चोरी (Biopiracy) (नीम, हल्दी, बासमती के मामले), सारतः व्युत्पन्न किस्में (EDV) का संरक्षण, किसानों के अधिकार बनाम प्रजनक अधिकार, पैतृक वंशक्रम की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ (TRIPS, UPOV, ITPGRFA)।
12. DUS परीक्षण और PPV&FR Act के अंतर्गत किस्मों का पंजीकरण
पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FR Authority) नई दिल्ली में स्थित है और किस्म पंजीकरण का कार्य करता है।
| पंजीकरण योग्य श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| नई किस्म | NDUS: नवीनता (Novelty), विशिष्टता (Distinctness), एकरूपता (Uniformity), स्थिरता (Stability) |
| विद्यमान किस्म (Extant) | बीज अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत अधिसूचित या सार्वजनिक क्षेत्र में; DUS के आधार पर |
| कृषक किस्म | किसान द्वारा विकसित या संरक्षित; शुल्क से छूट |
| सारतः व्युत्पन्न किस्म (EDV) | मूल किस्म से मुख्यतः व्युत्पन्न; मूल प्रजनक की स्वीकृति आवश्यक |
पंजीकरण की प्रक्रिया
- आवेदन, किस्म का नाम (Denomination) और जर्मप्लाज्म स्रोत का विवरण।
- प्रारंभिक जाँच और बीज नमूना जमा करना।
- DUS परीक्षण: निर्धारित क्रॉप-विशिष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार कम से कम दो फसल मौसम में, मानक किस्मों से तुलना।
- पादप किस्म पत्रिका (Plant Variety Journal of India) में प्रकाशन और आपत्तियाँ (लगभग 3 माह)।
- पंजीकरण प्रमाणपत्र।
संरक्षण अवधि: सामान्य फसलों के लिए 15 वर्ष, वृक्षों व लताओं के लिए 18 वर्ष (विद्यमान किस्मों के लिए अधिसूचना की तिथि से 15 वर्ष)।
13. किस्म परीक्षण, विमोचन और अधिसूचना प्रणाली (भारत)
| चरण | विवरण |
|---|---|
| 1. प्रजनक द्वारा प्रारंभिक मूल्यांकन | स्थानीय परीक्षण और चयन |
| 2. समन्वित परीक्षण (AICRP) | प्रारंभिक किस्म परीक्षण (IVT) → उन्नत किस्म परीक्षण AVT-I → AVT-II (कम से कम 2–3 वर्ष, बहु-स्थानों पर, मानक किस्मों के विरुद्ध) |
| 3. पहचान | वार्षिक कार्यशाला में किस्म की पहचान और अनुशंसा |
| 4. विमोचन प्रस्ताव | राज्य किस्म विमोचन समिति (SVRC) या केंद्रीय किस्म विमोचन समिति (CVRC: फसल मानक, अधिसूचना और किस्म विमोचन की केंद्रीय उप-समिति) |
| 5. अधिसूचना | बीज अधिनियम, 1966 की धारा 5 के अंतर्गत राजपत्र में अधिसूचना; अधिसूचित किस्म के बीज को प्रमाणित किया जा सकता है |
| 6. बीज शृंखला | प्रजनक बीज की माँग (इंडेंट) → आधार बीज → प्रमाणित बीज |
संकर किस्मों में: माता-पिता वंशक्रम का पंजीकरण/पहचान अनिवार्य और परीक्षण में संकर की श्रेष्ठता सर्वोत्तम मानक किस्म से अधिक होनी चाहिए।
14. बीज उत्पादन के सिद्धांत और तकनीकें
सिद्धांत
- आनुवंशिक सिद्धांत: आनुवंशिक शुद्धता का रखरखाव (पृथक्करण, अवांछित पौधों की निकासी, नियमित नवीनीकरण)।
- कृषि विज्ञान संबंधी सिद्धांत: सही भूमि, समय पर बुवाई, पोषण, सिंचाई, खरपतवार और रोग-कीट नियंत्रण, समय पर कटाई।
- बीज प्रौद्योगिकी सिद्धांत: सही सुखाई, प्रसंस्करण, परीक्षण, भंडारण।
तकनीकें
- स्वपरागित फसलों में: सामान्य दूरी पर बुवाई, पृथक्करण, 2–3 क्षेत्र निरीक्षण, अवांछित निष्कासन।
- परपरागित फसलों में: अधिक पृथक्करण दूरी, नर-मादा पंक्ति अनुपात, फूलों की अवस्था का मिलान (Nicking), परागण वाहक (हवा/मधुमक्खी) का प्रबंध, नर पौधों/बंध्य पौधों की सतत निकासी।
- संकर बीज: पैतृक वंशक्रमों की शुद्धता, A/B/R का गुणन, पराग की उपलब्धता और परागण की सही अवधि।
15. बीज के प्रकार
| वर्ग | विवरण |
|---|---|
| केंद्रक व प्रजनक बीज | प्रजनक की देखरेख में; सुनहरा पीला टैग (प्रजनक) |
| आधार बीज | सफेद टैग; प्रजनक बीज से |
| प्रमाणित बीज | नीला टैग; आधार बीज से; किसानों को बेचा जाता है |
| सत्य-लेबल बीज | हरा टैग; उत्पादक की घोषणा |
| संकर बीज (F₁) | दो पैतृकों के संकरण से; हर साल नया बीज खरीदना होता है |
| खुला परागित किस्म (OPV) बीज | बीज बचाकर 2–3 वर्ष तक उपयोग संभव (मक्का, बाजरा) |
| संश्लेषित/संकुल किस्म | चयनित वंशक्रमों/किस्मों के मिश्रण से |
16. स्वपरागित और परपरागित फसलों में बीज गुणवत्ता परीक्षण
| परीक्षण | स्वपरागित | परपरागित/संकर |
|---|---|---|
| भौतिक शुद्धता | शुद्ध बीज लगभग 98% या अधिक | समान |
| अंकुरण | फसल के अनुसार 70–90% | समान, मक्का आदि में उच्च |
| आनुवंशिक शुद्धता | अवांछित पौधे सीमा के भीतर (क्षेत्र निरीक्षण) | GOT या मार्कर से संकर शुद्धता |
| नमी | सामान्य 12% (अनाज), 9% (दलहन/तिलहन) | समान |
| बीज स्वास्थ्य | बीज जनित रोगों की जाँच | अरगट, मृदुरोमिल आसिता आदि की जाँच |
| ओज | विद्युत चालकता, त्वरित एजिंग | समान |
17. प्रैक्टिकल में क्या सीखेंगे
- स्वपरागित और परपरागित प्रजातियों की पुष्प संरचना, स्वपरागण और संकरण की तकनीकें।
- A/B/R और द्वि-वंशक्रम प्रणाली से बीज उत्पादन; नर बंध्यता के उपयोग से संकर बीज की विधियाँ।
- संकर बीज उत्पादन की कठिनाइयाँ (फूल का मिलान, कम बीज उपज) और अनुकूलन के उपाय; परागणकर्ता (मधुमक्खी) की भूमिका।
- सोरघम, बाजरा, मक्का, धान, सरसों, सूरजमुखी, अरंडी, अरहर, कपास और सब्जियों में संकर बीज उत्पादन तकनीकें।
- वंशक्रम का गुणन और शुद्धिकरण; अवांछित पौधों की पहचान (Roguing)।
- शुद्धता परीक्षण के नमूने और नकली (Spurious) बीज की पहचान।
- बीज सुखाना, भंडारण संरचनाएँ (पारंपरिक कोठी, भकारी, आधुनिक गोदाम, साइलो, शीत भंडार), श्रेणीकरण और पैकिंग।
- सार्वजनिक व निजी बीज उत्पादन इकाइयों और प्रसंस्करण संयंत्रों का भ्रमण।
18. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)
- A × B → A; A × R → F₁ संकर; B और R स्वपरागण से बनाए जाते हैं।
- द्वि-वंशक्रम: TGMS/PGMS; रख-रखाव वंशक्रम नहीं चाहिए।
- धान में GA₃ व अतिरिक्त परागण; मक्का में डिटैसलिंग; कपास में हाथ से विपुंसन।
- अरंडी में पिस्टिलेट वंशक्रम; सूरजमुखी में CMS PET-1 व मधुमक्खी।
- DH: एक पीढ़ी में समयुग्मजता; मक्का में Stock 6 प्रेरक।
- पेटेंट अधिनियम 1970 की धारा 3(j): पौधे/बीज पेटेंट योग्य नहीं।
- PPV&FR: NDUS परीक्षण; अवधि 15 वर्ष (वृक्ष/लता: 18 वर्ष)।
- किस्म विमोचन: AVT → CVRC/SVRC → धारा 5 अधिसूचना।
19. महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. CMS प्रणाली में संकर बीज किस संकरण से बनता है? (अ) A × B (ब) A × R (स) B × R (द) R × R। उत्तर: ब
Q2. धान में अतिरिक्त परागण हेतु कौन-सा हार्मोन छिड़का जाता है? (अ) GA₃ (ब) 2,4-D (स) NAA (द) एथ्रेल। उत्तर: अ
Q3. मक्का में संकर बीज उत्पादन में मादा पौधों का कौन-सा भाग हटाया जाता है? (अ) पत्ती (ब) पुष्प-गुच्छ (Tassel) (स) भुट्टा (द) जड़। उत्तर: ब
Q4. भारत में पहला अरहर संकर किस पर आधारित था? (अ) CMS (ब) GMS (स) बारनेज़ (द) DH। उत्तर: ब
Q5. मक्का में एकगुणित प्रेरक वंशक्रम का मूल स्रोत है: (अ) Stock 6 (ब) Mo17 (स) B73 (द) Tift 23A। उत्तर: अ
Q6. पादप किस्म पंजीकरण में DUS का पूर्ण रूप क्या है? (अ) Distinctness, Uniformity, Stability (ब) Density, Uniformity, Survival (स) Distinctness, Utility, Stability (द) Diversity, Uniformity, Stability। उत्तर: अ
Q7. अधिसूचना बीज अधिनियम की किस धारा के अंतर्गत होती है? (अ) धारा 3 (ब) धारा 5 (स) धारा 8 (द) धारा 13। उत्तर: ब
Q8. विषाणु-मुक्त पौधे बनाने में कौन-सी तकनीक प्रयुक्त होती है? (अ) विभज्योतक संवर्धन (ब) परागकोश संवर्धन (स) भ्रूण बचाव (द) कैलस उत्परिवर्तन। उत्तर: अ
20. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: GPB-222 के कितने क्रेडिट और लेक्चर हैं?
उत्तर: 3 क्रेडिट (1+2); थ्योरी के 16 और प्रैक्टिकल के 32 लेक्चर।
प्रश्न: संकर बीज हर साल क्यों खरीदना पड़ता है?
उत्तर: F₂ पीढ़ी में संकर ओज घट जाता है और पौधे अलग-अलग तरह के हो जाते हैं।
प्रश्न: रख-रखाव वंशक्रम (B) का क्या कार्य है?
उत्तर: यह A वंशक्रम से संकरण कर उसके बंध्य बीज का गुणन करता है और स्वयं का भी गुणन होता है।
प्रश्न: Nicking क्या है?
उत्तर: नर और मादा पैतृकों के फूल एक ही समय आना, ताकि परागण सफल हो।
प्रश्न: संकर बीज का मूल्य अधिक क्यों होता है?
उत्तर: पैतृक वंशक्रमों के रख-रखाव, अधिक श्रम और कम बीज उपज के कारण।
प्रश्न: क्या पौधों की किस्म पर पेटेंट मिल सकता है?
उत्तर: भारत में नहीं; किस्मों का संरक्षण PPV&FR Act, 2001 के अंतर्गत होता है।
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संदर्भ पुस्तकें (Reference Books)
वी.एल. चोपड़ा (सं.), Breeding of Field Crops, ऑक्सफोर्ड एवं IBH, नई दिल्ली; ए.के. मंडल, पी.के. गांगुली एवं एस.पी. बनर्जी, Advances in Plant Breeding, Vol. I; आर.एल. अग्रवाल, Seed Technology, ऑक्सफोर्ड एवं IBH।
नोट: यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से मौलिक रूप में तैयार किया गया है। अनुपात, पृथक्करण दूरी और मात्राएँ सामान्य अनुशंसाएँ हैं और फसल, किस्म व क्षेत्र के अनुसार बदलती हैं; अंतिम पुष्टि हेतु अपने विश्वविद्यालय/बीज प्रमाणीकरण संस्था के मानक देखें। पाठ्यक्रम का स्रोत: Swami Keshwanand Rajasthan Agricultural University, Bikaner की Vth Deans' Committee Report।
