जैव कीटनाशी एवं जैव उर्वरक (Biopesticides & Biofertilizers, ENTO-221) B.Sc. (Hons.) Agriculture के चौथे सेमेस्टर का 3 क्रेडिट (2+1) का कोर्स है। इसमें प्रकृति से मिले जीवों व पदार्थों से कीट-रोग नियंत्रण (भाग-I) और पौधों को पोषण देने वाले सूक्ष्मजीवों (भाग-II) का अध्ययन होता है। जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि के बढ़ते चलन के कारण यह विषय बेहद उपयोगी है। सिलेबस में 32 थ्योरी और 16 प्रैक्टिकल लेक्चर हैं। इस लेख में सभी टॉपिक क्रमवार, तालिकाओं, सूत्रों, MCQ और FAQ के साथ समझाए गए हैं।
भाग-I: जैव कीटनाशी (Biopesticides)
1. जैव कीटनाशी का इतिहास और अवधारणा
| वर्ष / वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|
| प्राचीन काल | नीम, तंबाकू, पाइरेथ्रम (गुलदाउदी), डेरिस का कीट नियंत्रण में प्रयोग |
| आगोस्टिनो बासी (1835) | रेशम कीट की मस्कार्डिन बीमारी का कारण कवक (Beauveria bassiana); सूक्ष्मजीवों से रोग का पहला प्रमाण |
| लुई पाश्चर (1870) | रेशम कीट की पेब्रिन बीमारी (Nosema bombycis) |
| मेचनिकॉफ (1879) | Metarhizium anisopliae (हरा मस्कार्डिन) से भृंग का नियंत्रण |
| इशिवाटा (1901); बर्लिनर (1911) | Bacillus thuringiensis की खोज (जापान) और नामकरण (जर्मनी, थुरिंजिया) |
| 1938; 1958 | Bt का पहला व्यावसायिक उत्पाद (फ्रांस); अमेरिका में थ्यूरिसाइड |
| 1962 | पूसा (IARI) में टिड्डी के हमले में नीम के पेड़ बच जाने का अवलोकन (प्रधान, जोतवानी आदि); नीम पर अनुसंधान की शुरुआत। रेचल कार्सन की "Silent Spring" |
| 1968 | नीम से एज़ाडिरेक्टिन का पृथक्करण (बटरवर्थ व मॉर्गन) |
| 1975 | अमेरिका में पहले विषाणु कीटनाशी (Heliothis NPV) का पंजीकरण |
| 1977 | Bt var. israelensis (मच्छर लार्वा) की खोज |
| 1996; 2002 | Bt कपास की शुरुआत (अमेरिका); भारत में Bt कपास |
जैव कीटनाशी (Biopesticide) वे कीट-रोग-खरपतवार नियंत्रक पदार्थ हैं जो प्राकृतिक स्रोतों (पौधे, जीवाणु, कवक, विषाणु, खनिज) से प्राप्त होते हैं। भारत में इनका पंजीकरण केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) द्वारा कीटनाशी अधिनियम, 1968 के अंतर्गत होता है।
2. महत्व, क्षेत्र और संभावनाएँ; वर्गीकरण; वानस्पतिक कीटनाशी
महत्व और संभावनाएँ
- पर्यावरण-अनुकूल, कीट-विशिष्ट, अवशेष-मुक्त; लाभदायक कीट, परागणकर्ता और मनुष्य के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित।
- प्रतिरोधकता का खतरा कम; IPM और जैविक खेती का आवश्यक घटक; निर्यात हेतु अवशेष-मुक्त उत्पादन।
- भारत में रासायनिक कीटनाशियों की तुलना में बाजार हिस्सा अभी कम (लगभग 5–8%), इसलिए विस्तार की बहुत संभावना; जैविक खेती (NPOP), परंपरागत कृषि विकास योजना और राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र (गाजियाबाद) से प्रोत्साहन।
वर्गीकरण
| वर्ग | उदाहरण |
|---|---|
| सूक्ष्मजीवी (रोगजनक) | जीवाणु (Bt, Bacillus sphaericus, B. subtilis, Pseudomonas fluorescens), कवक (Beauveria, Metarhizium, Lecanicillium lecanii, Nomuraea rileyi, Trichoderma), विषाणु (NPV, GV), प्रोटोज़ोआ (Nosema locustae), सूत्रकृमि (Steinernema, Heterorhabditis) |
| वानस्पतिक कीटनाशी (Botanicals) | नीम, पाइरेथ्रम, रोटेनोन, निकोटीन, करंज, सीताफल बीज, लहसुन-मिर्च |
| जैव-तर्कसंगत (Biorationals) | फेरोमोन, किशोर हार्मोन अनुरूप, एंटीफीडेंट, विकर्षक, स्पिनोसैड, इमामेक्टिन, पादप रक्षा उत्प्रेरक, साबुन/खनिज तेल |
| पादप-समाविष्ट रक्षक (PIPs) | Bt कपास जैसी ट्रांसजेनिक फसलें |
वानस्पतिक कीटनाशी और उनके उपयोग
| वानस्पतिक | सक्रिय तत्व / उपयोग |
|---|---|
| नीम (Azadirachta indica) | एज़ाडिरेक्टिन, निम्बिन, सैलेनिन: एंटीफीडेंट, विकर्षक, वृद्धि नियामक, बंध्यता। नीम बीज गिरी अर्क (NSKE) 5%: 50 ग्राम पिसी गिरी प्रति लीटर रात भर भिगोकर छानना और साबुन मिलाना; नीम तेल 1–3%; नीम खली मृदा में (दीमक, सूत्रकृमि, नाइट्रीकरण अवरोधक); नीम-लेपित यूरिया; भंडार में नीम की पत्ती। |
| पाइरेथ्रम (Chrysanthemum cinerariifolium) | पाइरेथ्रिन: तेज़ संपर्क विष (नॉकडाउन), प्रकाश में शीघ्र विघटन; घरेलू व भंडार कीट; मच्छर कॉइल |
| रोटेनोन (डेरिस, लोंकोकार्पस) | श्वसन विष (माइटोकॉन्ड्रिया); मछली विष; सब्जी कीट |
| निकोटीन (तंबाकू) | तंत्रिका विष; माहू; मनुष्य के लिए अत्यधिक विषैला, इसलिए सीमित उपयोग |
| करंज (Pongamia pinnata) | करंजिन; तेल 1–3%; बीज अर्क; मृदा कीट, कीट विकर्षक |
| सीताफल (Annona squamosa) | बीज अर्क 5%; एनोनेसियस एसिटोजेनिन; एंटीफीडेंट |
| लहसुन-मिर्च, आक, धतूरा, तुलसी, वच (Acorus calamus) | रस चूसक कीट, इल्लियाँ, भंडार कीट; वच के प्रकंद का भंडार कीटों में उपयोग |
परंपरागत तैयारियाँ: नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्न्यास्त्र, दशपर्णी अर्क; पंचगव्य (वृद्धि प्रवर्धक)। वानस्पतिक उत्पादों में सक्रिय तत्व की मात्रा मौसम व स्रोत के अनुसार बदलती है, इसलिए मानकीकृत उत्पाद बेहतर हैं।
3. जैव कीटनाशी की सामूहिक उत्पादन तकनीक
| जैव कीटनाशी | उत्पादन तकनीक (संक्षेप में) |
|---|---|
| Bt (Bacillus thuringiensis) | स्टेनलेस स्टील के किण्वकों (Fermenters) में तरल माध्यम (सोयाबीन आटा, कॉर्न स्टीप लिकर, ग्लूकोज) में 30 °C, pH लगभग 7, वायुसंचार के साथ 24–72 घंटे; बीजाणु बनने तक; अपकेंद्रण/स्प्रे-शुष्कन; WP, तरल या दानेदार संरूपण। शक्ति (Potency) अंतर्राष्ट्रीय इकाई (IU/मिग्रा) में, मानक HD-1 से तुलना कर। |
| NPV | जीवित मेजबान इल्लियों (Helicoverpa armigera, Spodoptera litura) में (इन विवो) उत्पादन, क्योंकि विषाणु केवल जीवित कोशिकाओं में गुणित होते हैं। अर्ध-कृत्रिम आहार पर पली 4-5 अवस्था की इल्लियों को NPV-युक्त आहार; 4–7 दिन में संक्रमित इल्लियाँ एकत्र; कुचलकर छानना, अपकेंद्रण; POB/मिली की गणना। 1 लार्वा समतुल्य (LE) ≈ 6 × 10⁹ POB। |
| कवक (Beauveria, Metarhizium, Lecanicillium) | ठोस-अवस्था किण्वन: उबले चावल/ज्वार/टूटे चावल को पॉलीप्रोपाइलीन थैलों में ऑटोक्लेव, मातृ संवर्धन से संक्रमण, 25–28 °C पर 10–15 दिन; बीजाणु निकालकर टैल्क में मिलाना (लगभग 10⁸ cfu/ग्राम)। या तरल (शीरा-यीस्ट) किण्वन। |
| Trichoderma | PDA पर शुद्ध संवर्धन → ज्वार/गेहूँ के भूसे/चोकर या तरल माध्यम में गुणन → टैल्क में मिलाना (वाहक 2:1; चिपकाने हेतु CMC); लगभग 10⁸ cfu/ग्राम। |
| Pseudomonas fluorescens | किंग्स B माध्यम पर शुद्ध संवर्धन; तरल किण्वन; टैल्क या तरल संरूपण। |
| सूत्रकृमि (EPN) | इन विवो: ग्रेटर वैक्स मॉथ (Galleria mellonella) की अंतिम अवस्था की इल्लियों पर; संक्रमणकारी किशोर (IJs) को व्हाइट ट्रैप से एकत्र; स्पंज/जेल/WDG संरूपण; या औद्योगिक बायोरिएक्टर में। |
4. कीट-रोगजनकों और सूत्रकृमियों की विषाणुता, रोगजनकता और लक्षण
रोगजनकता (Pathogenicity): रोग उत्पन्न करने की क्षमता। विषाणुता (Virulence): रोगजनकता की मात्रा; LC₅₀/LT₅₀ (घातक सांद्रता/समय) से मापी जाती है। पहचान हेतु कोख के अभिधारणाएँ: रोगजनक को पृथक करना → शुद्ध संवर्धन → स्वस्थ कीट में संक्रमण → रोग प्रकट → पुनः पृथक करना।
| रोगजनक | संक्रमण का तरीका | लक्षण |
|---|---|---|
| Bt (जीवाणु) | बीजाणु-क्रिस्टल का भक्षण; क्षारीय मध्यांत्र (pH 9–11) में क्रिस्टल घुलकर विषैले Cry प्रोटीन बनते हैं, मध्यांत्र की झिल्ली में छिद्र, कोशिका नष्ट, आँत लकवाग्रस्त, फिर सेप्टीसीमिया | खाना बंद, सुस्ती, उल्टी/दस्त, शरीर काला व शिथिल, 2–5 दिन में मृत्यु; Cry1: पतंगे/तितली; Cry3: भृंग; Cry4 (Bti): मच्छर |
| कवक (Beauveria, Metarhizium) | बीजाणु क्यूटिकल पर अंकुरित होकर एंजाइम (काइटिनेज़, प्रोटीएज़, लाइपेज़) से भेदन; हीमोसील में हाइफी/ब्लास्टोस्पोर, विष (बेवेरिसिन, डेस्ट्रक्सिन) | कीट सुस्त, भूरे धब्बे; मृत्यु के बाद शव कठोर (ममीकृत) और उच्च आर्द्रता में सफेद (Beauveria: सफेद मस्कार्डिन) या हरे (Metarhizium: हरा मस्कार्डिन) चूर्ण से ढका |
| विषाणु (NPV) | पॉलीहेड्रा का भक्षण; क्षारीय आँत में घुलकर विरियॉन कोशिकाओं के केंद्रक में गुणित | इल्ली सुस्त, पीली-सफेद, त्वचा कमजोर; पौधे की ऊपरी शाखा पर उल्टी लटकी (उल्टे 'V' आकार); शरीर फटकर तरल निकलना (हजारों पॉलीहेड्रा); 4–7 दिन में मृत्यु |
| सूत्रकृमि (Steinernema, Heterorhabditis) | IJs प्राकृतिक छिद्रों (मुख, गुदा, श्वास छिद्र) से प्रवेश; हीमोसील में सहजीवी जीवाणु (Xenorhabdus, Photorhabdus) छोड़ते हैं; 24–48 घंटे में मृत्यु | Steinernema: शव भूरा/क्रीम रंग; Heterorhabditis: ईंट-लाल (प्रकाश-दीप्ति); शव मुलायम, बिना दुर्गंध |
| प्रोटोज़ोआ (Nosema) | बीजाणु का भक्षण | दीर्घकालिक संक्रमण, कमजोरी, कम प्रजनन |
5. जैव कीटनाशी के प्रयोग की विधियाँ
| विधि | उदाहरण / सावधानी |
|---|---|
| पर्णीय छिड़काव | Bt, NPV, कवक (5 ग्राम/लीटर), नीम; शाम को (UV से निष्क्रियता से बचाव); 1-2 अवस्था की इल्लियों पर; पत्तियों पर पूरा कवरेज; चिपकाने वाले पदार्थ (जैसे NPV के साथ गुड़ 0.5%) |
| बीज उपचार | Trichoderma, Pseudomonas (लगभग 4–10 ग्राम/किग्रा बीज) |
| पौध जड़ डुबोना | धान, सब्जी की पौध (Trichoderma/Pseudomonas के घोल में) |
| कंद/गन्ने के टुकड़ों का उपचार | घोल में डुबोना |
| मृदा प्रयोग | Trichoderma व Pseudomonas (लगभग 2.5 किग्रा/हे.) को 50–100 किग्रा सड़ी FYM में मिलाकर, नमी में लगभग 15 दिन छाया में रखकर; नीम खली |
| ड्रेंचिंग | EPN, Metarhizium (सफेद सूँडी, दीमक); नम मृदा आवश्यक |
| चारा/प्रपंच, तना इंजेक्शन (EPN; ताड़ में), ULV | विशिष्ट परिस्थितियों में |
सावधानियाँ: रासायनिक फफूँदनाशियों के साथ न मिलाएँ (कम से कम कुछ दिन का अंतर); साफ पानी; तेज धूप में नहीं; समाप्ति तिथि देखें; ठंडी जगह पर भंडारण।
6. गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीक; सीमाएँ
| मानक | विवरण |
|---|---|
| पहचान व शुद्धता | सही प्रजाति/स्ट्रेन; संदूषकों की अनुपस्थिति (विशेषकर Salmonella, Shigella, E. coli आदि मानव रोगजनक व माइकोटॉक्सिन) |
| जीवित संख्या | cfu/ग्राम (जीवाणु, कवक); POB/मिली (NPV); IJs/मिली (EPN); Bt में IU/मिग्रा |
| जैव प्रभावकारिता | जैव-परख (Bioassay) द्वारा LC₅₀/LT₅₀ मानक से तुलना |
| संरूपण गुण | नमी, कण आकार, निलंबनशीलता, pH, गीला होने की क्षमता |
| शेल्फ लाइफ व भंडारण | NPV, EPN 4 °C पर; सामान्यतः 1–2 वर्ष तक |
| लेबल, पंजीकरण | CIB&RC के अंतर्गत; बैच संख्या, उत्पादन-समाप्ति तिथि |
उत्पादन व उपयोग में बाधाएँ और सीमाएँ
- धीमी क्रिया; किसान तुरंत नॉकडाउन चाहते हैं।
- संकीर्ण कीट-विस्तार (विशिष्टता)।
- UV, तापमान, आर्द्रता से संवेदनशीलता; कम शेल्फ लाइफ; भंडारण/शीत श्रृंखला की चुनौतियाँ।
- उत्पादन में गुणवत्ता का मानकीकरण, संदूषण, बड़े पैमाने की लागत; वानस्पतिक कच्चे माल (नीम बीज) की मौसमी उपलब्धता।
- खेत में प्रदर्शन की भिन्नता; जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी।
- पंजीकरण की जटिलता/समय; अवैध/निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों की बाजार में उपस्थिति।
- बाजार हिस्सेदारी कम; मूल्य और विपणन तंत्र की कमी।
भाग-II: जैव उर्वरक (Biofertilizers)
7. जैव उर्वरक: परिचय, स्थिति, क्षेत्र और प्रमुख प्रकार
जैव उर्वरक वे उत्पाद हैं जिनमें दक्ष सूक्ष्मजीवों (नाइट्रोजन स्थिरीकारक, फॉस्फेट घुलनशील या गतिशील करने वाले) की जीवित या सुप्त कोशिकाएँ होती हैं और जिन्हें बीज, मृदा या कम्पोस्ट में प्रयोग करने पर पौधों को पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है।
- भारत में राष्ट्रीय जैव उर्वरक विकास परियोजना (1983-84; गाजियाबाद) और क्षेत्रीय केंद्र (बेंगलुरु, भुवनेश्वर, हिसार, इम्फाल, जबलपुर, नागपुर); अब राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र।
- स्थिति व संभावना: सस्ते, पर्यावरण-अनुकूल, उर्वरक की लागत व आयात में कमी; INM व जैविक खेती का आधार।
| वर्ग | जीव | उपयोग |
|---|---|---|
| सहजीवी N-स्थिरीकारक | Rhizobium, Bradyrhizobium, Frankia, Azolla–Anabaena | दलहन; वृक्ष; धान |
| सहचारी N-स्थिरीकारक | Azospirillum, Gluconacetobacter (Acetobacter) diazotrophicus | धान, मक्का, बाजरा, गन्ना |
| मुक्तजीवी N-स्थिरीकारक | Azotobacter, Clostridium, नील-हरित शैवाल (BGA) | सभी फसलें; BGA धान में |
| P-घुलनशील (PSB) | Bacillus megaterium, Pseudomonas striata, Aspergillus, Penicillium | सभी फसलें |
| P-गतिशील | AM कवक (Glomus आदि) | अधिकांश फसलें, वृक्ष |
| K-घुलनशील/गतिशील (KMB) | Frateuria aurantia, Bacillus mucilaginosus | सभी फसलें |
| अन्य | Zn घुलनशील, S-ऑक्सीकारक (Thiobacillus), PGPR, सेल्यूलोज अपघटक | पोषक तत्व व कम्पोस्टिंग |
8. जैव उर्वरकों की संरचना और विशिष्ट गुण
| जीव | संरचना व विशेषताएँ |
|---|---|
| Azospirillum | ग्राम-ऋणात्मक, सर्पिलाकार/मुड़ी छड़, गतिशील; सूक्ष्म-वायुजीवी (Microaerophilic) सहचारी; जड़ों के भीतर व बाहर बसता है; IAA, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन बनाता है; लगभग 20–40 किग्रा N/हे.; अर्ध-ठोस NFb माध्यम में पेलिकल बनता है। प्रजातियाँ: A. brasilense, A. lipoferum। |
| Azotobacter | ग्राम-ऋणात्मक, बड़ी अंडाकार/छड़ कोशिका; वायुजीवी, मुक्तजीवी; पुटी (Cyst) बनाता है; पॉलीसैकेराइड कैप्सूल व भूरा-काला वर्णक (A. chroococcum); लगभग 10–20 किग्रा N/हे.; मैनिटॉल युक्त जेन्सन/ऐश्बी माध्यम; अम्लीय मृदा (pH < 6) में कम सक्रिय। नाइट्रोजिनेज़ की सुरक्षा हेतु तीव्र श्वसन। |
| Bacillus | ग्राम-धनात्मक, छड़, अंतर्बीजाणु (Endospore) बनाने वाला, गर्मी सहनशील; B. megaterium (P-घुलनशील), B. mucilaginosus (K-घुलनशील), B. subtilis (जैव नियंत्रण)। |
| Pseudomonas | ग्राम-ऋणात्मक छड़, ध्रुवीय कशाभिका, वायुजीवी; प्रतिदीप्त वर्णक (पायोवर्डिन; साइडरोफोर); P-घुलनशील; PGPR व रोग नियंत्रक (फेनाज़ीन, HCN आदि एंटीबायोटिक)। |
| Rhizobium | ग्राम-ऋणात्मक, बीजाणु-रहित गतिशील छड़; दलहन की जड़ों में गाँठें (Nodules); भीतर बैक्टेरॉइड व लेगहीमोग्लोबिन (गुलाबी: सक्रिय; ऑक्सीजन नियंत्रक)। प्रतिक्रिया: YEMA + कांगो रेड पर श्वेत श्लेष्मीय कॉलोनी। दक्षता लगभग 50–300 किग्रा N/हे. (फसल अनुसार)। तीव्र वृद्धि (Rhizobium; अम्ल) और मंद वृद्धि (Bradyrhizobium; क्षार)। |
| Frankia | तंतुमय एक्टिनोमाइसीट (शाखित हाइफी), ग्राम-धनात्मक; गैर-दलहनी काष्ठीय पौधों (Casuarina, Alnus, Hippophae) में गाँठें; वेसिकल में N-स्थिरीकरण; वन व बंजर भूमि में उपयोगी। |
| सायनोबैक्टीरिया: Anabaena, Nostoc, Hapalosiphon | प्रकाश-संश्लेषी, तंतुमय; हेटेरोसिस्ट (N-स्थिरीकरण का स्थान); Hapalosiphon में सच्ची शाखाएँ; धान में लगभग 20–30 किग्रा N/हे.; मृदा संरचना में सुधार; क्षारीय मृदा सुधार। Azolla में Anabaena azollae सहजीवी। |
| AM कवक (एंडोमाइकोराइजा) | अपटीय हाइफी जड़ की कोशिकाओं के भीतर प्रवेश करती हैं; आर्बस्क्यूल (विनिमय स्थान), वेसिकल (संग्रह), मृदा में बाह्य हाइफी व बीजाणु। अबाध्य सहजीवी; P, Zn, Cu व जल अवशोषण बढ़ाते हैं; सरसों, पालक जैसी कुछ फसलों में नहीं। |
| एक्टोमाइकोराइजा (ECM) | जड़ के बाहर कवक आवरण (Mantle) और कोशिकाओं के बीच हार्टिग जाल; कोशिका के भीतर प्रवेश नहीं; वृक्षों (चीड़, यूकेलिप्टस, ओक) में; बेसिडियोमाइसीट (Pisolithus, Laccaria)। |
9. जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण: मुक्तजीवी और सहजीवी; P व K की घुलनशीलता
एंजाइम: नाइट्रोजिनेज़ (Fe-प्रोटीन + MoFe-प्रोटीन); ऑक्सीजन से अवरुद्ध, इसलिए सूक्ष्म-वायु या अवायवीय वातावरण; nif जीन।
| प्रकार | उदाहरण व विशेषता |
|---|---|
| मुक्तजीवी | Azotobacter (वायुजीवी), Clostridium (अवायवीय), BGA (हेटेरोसिस्ट) |
| सहचारी | Azospirillum (अनाज की जड़ों के पास) |
| सहजीवी | Rhizobium–दलहन (हेलरीगेल व विल्फार्थ, 1888); Frankia–Casuarina; Anabaena–Azolla |
दलहन में गाँठ निर्माण (नोडुलेशन)
- जड़ से निकले फ्लेवोनॉइड रोग-जनक नहीं, Rhizobium को आकर्षित करते हैं।
- जीवाणु Nod कारक (लिपो-काइटो-ऑलिगोसैकेराइड) छोड़ता है; जड़ रोम मुड़ता है।
- संक्रमण धागा (Infection thread) बनता है; कोशिकाओं में जीवाणु प्रवेश।
- गाँठ आद्यक, बैक्टेरॉइड और लेगहीमोग्लोबिन; N-स्थिरीकरण शुरू।
क्रॉस-इनोक्यूलेशन समूह: मटर-मसूर (R. leguminosarum), बरसीम (R. trifolii), रिजका (R. meliloti), चना (Mesorhizobium ciceri), सोयाबीन (Bradyrhizobium japonicum), "काउपी समूह" (लोबिया, मूँग, उड़द, अरहर, मूँगफली, ग्वार: Bradyrhizobium sp.)।
फॉस्फेट घुलनशीलता और गतिशीलता
- कार्बनिक अम्लों का स्राव (ग्लूकोनिक, 2-कीटोग्लूकोनिक, सिट्रिक, ऑक्सेलिक): pH घटाकर व Ca, Fe, Al को कीलेट कर अघुलनशील फॉस्फेट को मुक्त करते हैं।
- अकार्बनिक अम्ल (नाइट्रिक, सल्फ्यूरिक: Thiobacillus), प्रोटॉन निष्कासन।
- एंजाइम: फॉस्फेटेज़, फाइटेज़ से कार्बनिक P का खनिजीकरण।
- जीव: Pseudomonas, Bacillus, Aspergillus, Penicillium।
- गतिशीलता: AM कवक की हाइफी जड़ से कई सेमी दूर तक फैलकर P लाती है (फॉस्फेट ट्रांसपोर्टर से अवशोषण)।
पोटाश घुलनशीलता
KSB (Frateuria aurantia, Bacillus mucilaginosus) कार्बनिक अम्ल (सिट्रिक, ऑक्सेलिक, टार्टरिक), पॉलीसैकेराइड और कीलेशन से अभ्रक व फेल्डस्पार जैसे खनिजों से K⁺ मुक्त करते हैं।
10. उत्पादन तकनीक: वाहक-आधारित और तरल जैव उर्वरक
चरण
- स्ट्रेन चयन: दक्ष, प्रतिस्पर्धी, स्थिर, पर्यावरणीय तनाव सहनशील।
- पृथक्करण व शुद्धिकरण: चयनित माध्यम पर: Rhizobium (YEMA + कांगो रेड), Azotobacter (जेन्सन/ऐश्बी), Azospirillum (NFb), PSB (पिकोव्स्काया अगर; चारों ओर साफ घेरा), KSB (एलेक्सांड्रोव अगर), BGA (BG-11)।
- मातृ संवर्धन: स्लोप पर; स्टार्टर संवर्धन: फ्लास्क में शेकर (28–30 °C, 120–150 rpm, 2–5 दिन)।
- सामूहिक गुणन: किण्वक में निर्जमीकृत (121 °C, 15 psi, 20–30 मिनट) माध्यम; वायुसंचार; प्रायः 10⁹ cfu/मिली।
- वाहक: पीट, लिग्नाइट, चारकोल, वर्मीकुलाइट; बारीक पाउडर (लगभग 150–212 µm), तटस्थ pH (CaCO₃ से), अधिक जल धारण, विषरहित; निर्जमीकरण (गामा किरण या ऑटोक्लेव)।
- मिश्रण व पैकिंग: जीवाणु-तरल को वाहक में (आर्द्रता लगभग 35–40%) मिलाकर 200 ग्राम के पॉलीथीन पैकेट; क्योरिंग।
| बिंदु | वाहक-आधारित | तरल जैव उर्वरक |
|---|---|---|
| जीवित संख्या | लगभग 10⁷–10⁸ cfu/ग्राम | लगभग 10⁸–10⁹ cfu/मिली |
| शेल्फ लाइफ | लगभग 6 माह | लगभग 1–2 वर्ष (संरक्षक: ग्लिसरॉल, ट्रेहालोज़, PVP, CMC) |
| तापमान सहनशीलता | कम | अधिक (लगभग 55 °C तक) |
| संदूषण का खतरा | अधिक | कम |
| प्रयोग | बीज/पौध/मृदा | बीज, पौध, मृदा, फर्टिगेशन, पर्णीय |
11. FCO के अंतर्गत जैव उर्वरक के मानक और गुणवत्ता नियंत्रण
उर्वरक (नियंत्रण) आदेश (FCO), 1985 में 2006 के संशोधन से जैव उर्वरकों (राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम, PSB, फॉस्फेट गतिशील, पोटाश गतिशील, जिंक घुलनशील आदि) की अनुसूची जोड़ी गई।
| मानक (सामान्य रूप में) | विवरण |
|---|---|
| जीवित संख्या | वाहक-आधारित: कम से कम लगभग 5 × 10⁷ cfu/ग्राम (निर्माण के समय); तरल: लगभग 10⁸–10⁹ cfu/मिली; समाप्ति तक निर्धारित न्यूनतम स्तर |
| संदूषण | 10⁻⁵ तनुकरण पर शून्य संदूषण |
| वाहक के गुण | कण आकार लगभग 150–212 µm, pH 6.5–7.5, नमी लगभग 30–40% |
| प्रभावशीलता | नोडुलेशन/N-स्थिरीकरण परीक्षण; विशिष्ट मानक (जैसे AM के लिए संक्रामक कणों की संख्या) |
| लेबल | उत्पाद का नाम, फसल, निर्माण व समाप्ति तिथि, संख्या, उपयोग विधि, भंडारण, निर्माता का नाम व लाइसेंस |
नोट: सटीक संख्याएँ FCO की नवीनतम अनुसूची से देखें।
गुणवत्ता नियंत्रण के स्तर
उत्पादन इकाई स्तर, राज्य सरकार/उर्वरक निरीक्षक (नमूने व जाँच) और उपयोगकर्ता स्तर। परीक्षण: विशिष्ट माध्यम पर तनुकरण-प्लेट गणना, संदूषण की जाँच, pH व नमी, पौधा-संक्रमण (MPN) और नोडुलेशन परीक्षण।
12. प्रयोग तकनीक: बीज, पौध, कंद, सेट आदि
| विधि | मात्रा व प्रक्रिया (सामान्य) |
|---|---|
| बीज उपचार | 200 ग्राम पैकेट प्रति 10 किग्रा बीज; 300–400 मिली गुड़ का घोल (10%) या चावल की माँड़ से चिपकाकर बीज पर मलना, छाया में 20–30 मिनट सुखाकर उसी दिन बुवाई। फफूँदनाशी से उपचार पहले करें और सूखने दें। |
| पौध जड़ डुबोना | धान/सब्जी: लगभग 1 किग्रा जैव उर्वरक 40 लीटर पानी में; पौध की जड़ें 5–10 मिनट डुबोकर रोपण। |
| कंद/सेट उपचार | आलू, गन्ने के टुकड़े घोल में डुबोना |
| मृदा प्रयोग | लगभग 2–4 किग्रा (10 पैकेट) जैव उर्वरक को 100–200 किग्रा FYM/कम्पोस्ट में मिलाकर खेत में बिखेरना |
| BGA / एजोला | BGA लगभग 10 किग्रा/हे., रोपाई के 7–10 दिन बाद खड़े पानी (3–5 सेमी) में; एजोला लगभग 1 टन (ताजा)/हे. दोहरी फसल या हरी खाद के रूप में |
| AM कवक | पौधशाला क्यारी या रोपण गड्ढे में (लगभग 100 ग्राम/वर्ग मीटर या 10–25 ग्राम/पौधा) |
| तरल | बीज, पौध, फर्टिगेशन (ड्रिप), पर्णीय |
13. भंडारण, शेल्फ लाइफ, गुणवत्ता और विपणन
- भंडारण: ठंडी (लगभग 4–25 °C), सूखी, छायादार जगह; धूप व गर्मी से दूर; पैकेट फटा न हो।
- शेल्फ लाइफ: वाहक-आधारित लगभग 6 माह; तरल 1–2 वर्ष। खरीदते समय समाप्ति तिथि अवश्य देखें।
- गुणवत्ता नियंत्रण: जीवित संख्या, संदूषण, pH, नमी की जाँच; FCO के अनुसार लाइसेंस व मानक।
- विपणन: कृषि इनपुट विक्रेता, सहकारी समितियाँ, राज्य कृषि विभाग (अनुदान), KVK और कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से; प्रदर्शन (Demonstration) व जागरूकता आवश्यक। चुनौतियाँ: शीत श्रृंखला का अभाव, खराब गुणवत्ता व नकली उत्पाद, मौसमी माँग।
14. जैव उर्वरक की क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक
| वर्ग | कारक |
|---|---|
| सूक्ष्मजीव | स्ट्रेन की दक्षता, प्रतिस्पर्धा क्षमता, जीवित संख्या, विशिष्टता (मेजबान), मृदा में स्थानीय सूक्ष्मजीवों से प्रतिस्पर्धा |
| मृदा | pH (अम्लीय में Rhizobium व Azotobacter कम), तापमान (40 °C से अधिक हानिकारक), नमी, लवणता, कार्बनिक पदार्थ, उपलब्ध नाइट्रोजन (अधिक होने पर नोडुलेशन घटता है), P, Mo, Co की कमी |
| पौधा | प्रजाति/किस्म, वृद्धि अवस्था, जड़ तंत्र |
| कृषि क्रियाएँ | रासायनिक उर्वरक व कीटनाशी (विशेषकर फफूँदनाशी) का प्रयोग, सिंचाई, जुताई, प्रयोग का समय व विधि, धूप |
| उत्पाद गुणवत्ता | वाहक, भंडारण की दशाएँ, शेल्फ लाइफ |
सर्वोत्तम परिणाम के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) में उर्वरक की मात्रा लगभग 25–30% घटाकर जैव उर्वरक का प्रयोग किया जाता है।
15. प्रैक्टिकल में क्या सीखेंगे
| प्रयोग | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| Trichoderma का पृथक्करण व शुद्धिकरण | मृदा के तनुकरण से PDA पर हरी कॉलोनियाँ; शंकुधर, फिएलाइड, शंकुबीजाणुओं की सूक्ष्मदर्शी से पहचान; ज्वार पर गुणन |
| Pseudomonas | किंग्स B माध्यम; UV प्रकाश में प्रतिदीप्ति |
| Bacillus | नमूने को 80 °C पर 10 मिनट गरम कर शेष बीजाणुओं का पोषक अगर पर पृथक्करण |
| Metarhizium | मृत कीटों/मृदा से; गैलेरिया चारा विधि; SDA माध्यम |
| वानस्पतिक कीटनाशी की पहचान | नीम, करंज, सीताफल, आक, तुलसी, वच आदि |
| जैव कीटनाशी प्रयोगशाला का भ्रमण; संक्रमित शवों (Cadavers) का खेत में संग्रह | NPV/कवक से मृत इल्लियों की पहचान |
| रोगजनकों की पहचान व गुणवत्ता नियंत्रण | जीवित संख्या, संदूषण, जैव-परख |
| Azospirillum, Azotobacter, Rhizobium, PSB, सायनोबैक्टीरिया का पृथक्करण | Rhizobium: ताज़ी गुलाबी गाँठ को सतह-निर्जमित कर कुचलना, YEMA + कांगो रेड पर धारी; ग्राम अभिरंजन। PSB: पिकोव्स्काया अगर; घुलनशीलता सूचकांक। Azospirillum: NFb अर्ध-ठोस माध्यम में पेलिकल। BGA: BG-11 माध्यम। |
| जैव उर्वरक का सामूहिक गुणन व निवेश (Inoculum) | तरल माध्यम व वाहक में |
| AM कवक का पृथक्करण | गीली छलनी (Wet sieving) व अपरोहण (Decanting) विधि; सुक्रोज घनत्व प्रवणता विधि (लगभग 20–60% सुक्रोज; अपकेंद्रण) |
| AM निवेश का सामूहिक उत्पादन | मक्का/ज्वार/सुडान घास पर बंध्य रेत-मृदा मिश्रण में पॉट संवर्धन (2–3 माह); जड़ें व मृदा निवेश के रूप में |
cfu/मिली = (कॉलोनियाँ × तनुकरण गुणांक) ÷ प्लेट की मात्रा
घुलनशीलता सूचकांक (PSB) = (कॉलोनी का व्यास + साफ घेरे का व्यास) ÷ कॉलोनी का व्यास
AM कॉलोनाइजेशन % = (संक्रमित जड़ खंड ÷ कुल जड़ खंड) × 100 (ट्रिपैन ब्लू अभिरंजन के बाद)
LC₅₀ व LT₅₀ से जैव कीटनाशी की विषाणुता की तुलना
16. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)
- Bt की खोज: इशिवाटा (1901), बर्लिनर (1911); Bti: गोल्डबर्ग व मार्गलिट (1977)।
- बासी ने रेशम कीट में Beauveria से रोग सिद्ध किया; पाश्चर ने Nosema।
- NPV उत्पादन इन विवो; 1 LE ≈ 6 × 10⁹ POB; शाम को छिड़काव।
- शव का रंग: Beauveria सफेद; Metarhizium हरा; Heterorhabditis ईंट-लाल।
- एज़ाडिरेक्टिन: नीम; NSKE 5%।
- Rhizobium की गाँठ: लेगहीमोग्लोबिन (गुलाबी); Frankia: Casuarina।
- नाइट्रोजिनेज़: Fe-प्रोटीन + MoFe-प्रोटीन।
- PSB: कार्बनिक अम्लों से P घुलनशील; AM: P गतिशीलता; KMB: Frateuria aurantia।
- वाहक-आधारित शेल्फ लाइफ लगभग 6 माह; तरल लगभग 1-2 वर्ष।
- जैव उर्वरक FCO के अंतर्गत; जैव कीटनाशी कीटनाशी अधिनियम 1968 के अंतर्गत।
17. महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
Q1. Bt की सर्वप्रथम खोज किसने की? (अ) बर्लिनर (ब) इशिवाटा (स) पाश्चर (द) बासी। उत्तर: ब
Q2. NPV का उत्पादन कहाँ किया जाता है? (अ) कृत्रिम माध्यम पर (ब) जीवित मेजबान कीट में (स) केवल प्रयोगशाला की तश्तरी में (द) किण्वक में। उत्तर: ब
Q3. Heterorhabditis से संक्रमित शव का रंग कैसा होता है? (अ) सफेद (ब) हरा (स) ईंट-लाल (द) काला। उत्तर: स
Q4. सहजीवी N-स्थिरीकारक Frankia किसके साथ गाँठ बनाता है? (अ) चना (ब) Casuarina (स) धान (द) गेहूँ। उत्तर: ब
Q5. नाइट्रोजिनेज़ एंजाइम में किस धातु का प्रोटीन होता है? (अ) Cu (ब) Zn (स) Mo-Fe (द) Mg। उत्तर: स
Q6. PSB जिस विधि से फॉस्फेट घुलनशील बनाते हैं, वह है: (अ) कार्बनिक अम्लों का स्राव (ब) नाइट्रीकरण (स) विनाइट्रीकरण (द) प्रकाश संश्लेषण। उत्तर: अ
Q7. AM कवक के कौन-से भाग संग्रह का कार्य करते हैं? (अ) आर्बस्क्यूल (ब) वेसिकल (स) मैंटल (द) हार्टिग जाल। उत्तर: ब
Q8. 200 ग्राम जैव उर्वरक पैकेट सामान्यतः कितने बीज के उपचार हेतु होता है? (अ) 1 किग्रा (ब) 5 किग्रा (स) 10 किग्रा (द) 50 किग्रा। उत्तर: स
18. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: ENTO-221 के कितने क्रेडिट और लेक्चर हैं?
उत्तर: 3 क्रेडिट (2+1); थ्योरी के 32 और प्रैक्टिकल के 16 लेक्चर।
प्रश्न: जैव कीटनाशी रासायनिक कीटनाशी से कैसे भिन्न हैं?
उत्तर: ये सुरक्षित, कीट-विशिष्ट और अवशेष-मुक्त हैं, पर धीमा असर देते हैं और पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील होते हैं।
प्रश्न: Trichoderma और रासायनिक फफूँदनाशी साथ क्यों नहीं डालते?
उत्तर: फफूँदनाशी जीवित Trichoderma को मार सकता है; इसलिए पहले एक का प्रयोग कर कुछ दिन का अंतर रखें या दोनों का अलग-अलग तरीके से उपयोग करें।
प्रश्न: Rhizobium का जैव उर्वरक सभी फसलों में काम करता है?
उत्तर: नहीं, यह केवल दलहनी फसलों में और फसल के अनुसार विशिष्ट प्रजाति का होना चाहिए।
प्रश्न: जैव उर्वरक कब काम नहीं करते?
उत्तर: अधिक तापमान, अम्लीय या लवणीय मृदा, अधिक रासायनिक N, कमजोर गुणवत्ता, समाप्त तिथि के बाद और फफूँदनाशी के साथ मिलाने पर।
प्रश्न: AM कवक किन फसलों में उपयोगी नहीं?
उत्तर: सरसों, पालक आदि (ब्रैसिकेसी, चीनोपोडिएसी) जैसी फसलें, जो माइकोराइजा नहीं बनातीं।
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संदर्भ पुस्तकें (Reference Books)
एच.सी. लक्ष्मण (2014), Bio-fertilizers and Bio-pesticides, पॉइंटर पब्लिशर्स; डी.एन. सिल्विया (2005), Principles and Application of Soil Microbiology, पियर्सन; पादप संरक्षण निदेशालय/जैविक नियंत्रण परियोजना निदेशालय (1994), Technology for Mass Production of Natural Enemies, Technical Bulletin-4; रबींद्र आर.जे., कैनेडी जे.एस., सथैया एन., राजेशकरन बी. एवं श्रीनिवासन एम.आर. (2001), Microbial Control of Crop Pests, TNAU; धालीवाल जी.एस. एवं कोल ओ. (2007), Biopesticides and Pest Management, कल्याणी पब्लिशर्स, नई दिल्ली।
नोट: यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से मौलिक रूप में तैयार किया गया है। मात्राएँ, गणनाएँ और FCO के मानक सामान्य जानकारी पर आधारित हैं और समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं; प्रयोग से पहले उत्पाद का लेबल, कृषि विश्वविद्यालय/KVK की अनुशंसा और FCO की नवीनतम अनुसूची देखें। पाठ्यक्रम का स्रोत: Swami Keshwanand Rajasthan Agricultural University, Bikaner की Vth Deans' Committee Report।
